राजनीति
मनमोहन का मंत्री माओवादियों का मुखौटा
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह चाहे जितने भी अराजनीतिक हांे पर वे यह तो समझते ही होंगे कि ममता बनर्जी को मंत्रिमंडल में नहीं रखा जाना चाहिए। ममता बनर्जी को चुनावी राजनीति से कोई रोक नहीं सकता। लेकिन प्रधानमंत्री को इतना साहस तो करना ही चाहिए कि उनका एक मंत्री माओवादियों का मुखौटा न बन जाए।
चेहरा बदलने आये थे, मोहरा बनकर रह गये
संघ की शाखाओं में स्वयंसेवकों को नेतृत्व क्षमता के बारे में सिखाया जाता है, "नेतृत्व वही, जिसके पास निर्णय क्षमता हो." लेकिन फिलहाल तो स्वयंसेवक गडकरी में इसका अभाव दिखता है. गडकरी की बड़े नेताओं के बीच संतुलन साधने और पार्टी के सभी गुटों को खुश रखने की रणनीति संगठन पर भारी पड़ रही है. कड़े फैसले लेकर पार्टी को सही दिशा देने की बजाए गडकरी नेताओं के महत्वाकांक्षाओं के खेल में मोहरा बन रहे हैं.
गुजरात के गौरव में कांग्रेस का कबाड़ा
गुजरात सरकार और नरेंद्र मोदी को घेरने की कोशिश में कांग्रेस का कबाड़ा हो रहा है। सोहराबुद्दीन जैसे अपराधी की मौत को फर्जी मुठभेड़ साबित करने की कोशिश में जुटी कांग्रेस को पता नहीं यह आइडिया किसने दिया। लेकिन अब यह जरूर पता चल रहा है कि इस पूरे मामले में भावनात्मक स्तर पर कांग्रेस को नुकसान तय है। ...राजनीतिक मौन में राजमाता
ब्रिटिश प्राइम मिनिस्टर डेविड कैमरन अपने पहले भारतीय दौरे पर आये हुए थे. उनके कार्यक्रमों की सूची में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और महासचिव राहुल गाधी से मुलाकात का कार्यक्रम भी दर्ज था. मगर अफसोस भारतीय सत्ता के इन दोनों संविधानेतर महाशक्तियों ने अंतिम समय में कैमरन से मिलने से शिष्टतापूर्वक इनकार कर दिया. सोनिया ने जहां अपनी नासाज तबीयत का बहाना बनाया, वहीं राहुल एक दिन पहले अचानक कैमरन के ही मुल्क ब्रिटेन की यात्रा पर निकल गये. आखिर ऐसा क्यों हुआ ?...उद्धव का उद्भव, अजीत की जीत
27 जुलाई को उद्धव ठाकरे पचास साल के पूरे हो गये. मंगलवार को उनकी जीवन यात्रा के इस पड़ाव पर पूरे महाराष्ट्र में शिवसैनिकों ने कोई सात से आठ हजार स्थानों पर छोटे बड़े कार्यक्रम किये और उनके शतायु होने की कामना की. शिवसेना के मुखपत्र ने भी उद्धव ठाकरे का जन्मदिन जमकर मनाया और 12 पेज के अखबार के साथ 96 पेज का परिशिष्ट वितरित किया. मराठी में जन्मदिन को वाढ़दिवस कहते हैं. और किसी के लिए बाढ़ आयी हो या न आयी हो सामना अखबार के लिए शुभेच्छा देनेवाले विज्ञापनों की बाढ़ जरूर आ गयी. ...मुलायम को माफ नहीं करेगा मुसलमान
मुलायम सिंह यादव ने अपनी 'सल्तनत' बचाने के लिए मुसलमानों से माफी मांगी है। लेकिन अब इतनी देर हो गयी है कि मुसलमानों से माफी मांगने से काम नहीं चलने वाला है। हालांकि माफी के बाद मुलायम सिंह यादव के बंगले पर कुछ उलेमाओं ने 'हाजिरी' देकर मुलायम सिंह यादव की माफी की कद्र की और उनकी शान में 'कसीदे' जरूर पढ़े हैं। पता नहीं इस देश के सियासतदां यह कब समझेंगे कि मुसलमान सियासत में उलेमाओं की हर बात नहीं मानता।
ई गडकरिया तो पार्टी को ही डुबा देगा!
भारतीय जनता पार्टी के नेताओं पर संघ और आडवाणी द्वारा चढ़ाया गया गडकरी खुमार उतरने लगा है। अब भाजपा नेता यह कहने लगे है, ई गडकरिया तो को ही डुबा देगा। जी हां इस तरह की भाषा का इस्तेमाल दो दिन पहले नई दिल्ली के कंस्टिटयूशनल क्लब में आयोजित भाजपा की बैठक में कई नेताओं ने की। मंच पर बैठे अध्यक्ष महोदय के भाषण के दौरान ही पीछे बैठे यूपी भाजपा के नेता गडकरी के भाषण का मजाक उड़ाते रहे, और खूब मजा लिया।
एक बार फिर वही बिहार
बिहार में फिर से यह सब होने लगा, अभी तो बड़ी मुश्किल से यह बदनाम राज्य ट्रैक पर आया था. एक बार फिर यह लोकतांत्रिक व्यवस्था की खिल्ली उड़ाने में जुट गया. मगर इस राज्य के निवासी यह सब देखकर जरा भी विचलित नहीं हैं. इसलिए नहीं कि पोलिटीशियनों के पोलाइट होने के विचार में आस्था नहीं है, बल्कि इसलिए कि वे अपने माननीयों के रग-रग से वाकिफ हैं. उन्हें मालूम है कि बिहार का विपक्ष एक हारी हुई लड़ाई लड़ रहा है, लिहाजा उसे अपने हिसाब से लड़ लेने दिया जाय. यह बात राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को भी मालूम है, इसलिए विपक्ष के मौजूदा तेवर से सबसे अधिक खुश भी वही हैं.
हर दल में भितरघात का दलदल
देश में राजनीतिक दल कोई भी हो उसके नेता अपने राजनीतिक विरोधियों से लड़ने की बजाय अपने दल के अंदर भितरघात करने में सबसे अधिक सक्रिय रहते हैं. उत्तर से लेकर दक्षिण तक और पूरब से लेकर पश्चिम तक हर राज्य में राजनीतिक दलों के भीतर सिरफुटौवल चरम पर है. प्रेम शुक्ल मानते हैं कि अगर राजनीतिक दल सिर्फ सत्ता की राजनीति में संलग्न रहेंगे तो उसका खामियाजा दल के आंतरिक लोकतंत्र के खात्मे के रूप में सामने आयेगा ही.
ऐसी क्या मजबूरी है कि उमा भारती जरूरी है?
साध्वी के चोले में रहने वाली लोधी जाति की भूतपूर्व भाजपा नेत्री उमाश्री भारती के भाजपा में पुनर्प्रवेश की सम्भावनाओं पर पार्टी में आपस में तलवारें खिंच गयीं हैं। भाजपा में पद का सुख भोग रहा कोई नेता उमा को वपिस नहीं चाहता, वहीं पद से वंचित या अपने पद से असंतुष्ट नेता उमा के वापिसी का समर्थन करके अपने नेतृत्व को ब्लेकमेल करना चाह रहे हैं। सवाल यह है कि आखिर अब उमा भारती की वापिसी क्यों जरूरी मानी जा रही है और क्या उमा भारती भी भाजपा नेतृत्व को ब्लेकमेल कर रही हैं? यदि ऐसा है तो वह कौन सी कमजोरी है जिस के आधार पर वे संघ परिवार पर दबाव बनाने में सफल हुयी हैं?
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सुदर्शन का (कु) दर्शन
जबसे आरएसएस के लोगों की आतंकवादी घटनाओं में संलिप्तता सामने आयी है, तब से आरएसएस के नेता बौखला गए हैं। इस बौखलाहट में ही शायद संघ के इतिहास में पहली बार हुआ है कि इसके स्वयंसेवक विरोध प्रदर्शन करने के लिए सड़कों पर उतरे। इसी बौखलाहट में आरएसएस के एक्स चीफ केएस सुदर्शन का मानसिक संतुलन बिगड़ गया और सोनिया गांधी के बारे में ऐसे शब्द बोल दिए, जिन्हें एक विकृत मानसिकता का आदमी ही बोल सकता है।...
सीआईए नहीं केजीबी एजंट कहिए जनाब
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व सरसंघचालक ने 10 नवंबर को सोनिया गांधी पर सीआईए एजंट होने का आरोप लगाकर सनसनी पैदा कर दिया है. पूरी की पूरी कांग्रेस उत्तेजित है और संघ भी बैकफुट पर चला गया है. सुदर्शन के आस पास के लोगों का कहना है कि सुदर्शन जी भुलक्कड़ हो गये हैं और उन्हें कुछ ठीक से याद नहीं रहता. शायद इसीलिए उन्होंने इतनी बड़ी चूक कर दी. ...
सोनिया का सच जान बेकाबू क्यों होते हो?
एक बार फिर लोकतंत्र पर आपातकाल मंडरा पड़ा है. राजमाता सोनिया गांधी के सिपहसालारों ने कांग्रेसी गुण्डों, माफियाओं और लोकतंत्र के हत्यारों का आह्वान किया है कि वह देशभर में संघ कार्यालयों पर धावा बोल दे. इसका तत्काल प्रभाव हुआ और कांग्रेसी गुण्डों ने संघ के दिल्ली मुख्यालय पर धावा भी बोल दिया. ठीक वैसे ही जैसे इंदिरा गांधी की मौत के बाद सिखों को निशाना बनाया गया था. हिंसक और अलोकतातंत्रिक मानसिकता से ग्रस्त कांग्रेसी सोनिया का सच जानकर आखिर इस तरह बेकाबू क्यों हो रहे हैं?...
नये निजाम के दामन पर है ज्यादा बड़ा दाग
मुंबई। महाराष्ट्र के नए निजाम भी कोई दूध के धुले नहीं हैं। कांग्रेस आलाकमान ने अशोक चव्हाण को फर्जीवाड़े से फ्लैट पाने के आरोप में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री की गद्दी से हटा दिया। लेकिन नए मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण भी उसी तरह के फर्जीवाड़े में गले तक डूबे हुए हैं। उन्होंने जितने बड़े बड़े झूठ बोलकर सरकार से फ्लैट हथियाए हैं वे कांग्रेस के लिए ज्यादा दागदार हैं।...
अजमेर चार्जशीट और संघी उछल-कूद
बढ़ते पैमाने पर इसके साक्ष्य सामने आ रहे हैं कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आर एस एस) से जुड़े लोगों का आतंकवादी हमलों में हाथ रहा है। इन हालात में आर एस एस इस पुराने सूत्र पर चल रहा लगता है कि हमला ही सबसे अच्छा बचाव है। उसने 10 नवंबर को देशव्यापी विरोध कार्रवाइयों का आह्वान किया है। इन कार्रवाइयों में संघ के शीर्ष नेताओं के शामिल होने की बात कही जा रही है। बहरहाल, इसकी चर्चा हम जरा बाद में करेंगे।...
अपने होने पर ही हैरान
‘चुप्पी-चुप्पी नहीं नहीं, बोलेंगे अब सभी-सभी’ इन्हीं नारों से दाहोद (गुजरात) का सीनियर रेलवे संस्थान परिसर 31 अक्टूबर को पूरे दिन गूंजता रहा। यहां गुजरात के बड़ोदरा, पंचमहल, सुरत, भड़ूच, डांग, बालसाड और साबरकांठा जिले से लगभग तीन हजार के आस पास विमुक्त एवं घुमंतू समाज से ताल्लुक रखने वाले लोग इकट्ठे हुए थे। मौका था, अधिकार अभियान की घोषणा का। उस समाज के लिए जो इस लोकतांत्रिक देश में अधिकार का अर्थ अभी तक समझ नहीं पाएं हैं। ...
गोली लगने के बाद क्या गांधी ने कहा था- हे राम ?
यह एक ऐसा सवाल है जिस पर अब विवाद होने लगा है. 30 जनवरी 1948 को क्या जब महात्मा गांधी को नाथूराम गोडसे ने गोली मारी तो महात्मा गांधी ने अपने मुंह से हे! राम का संबोधन किया था? उस वक्त घटनास्थल पर मौजूद रहे एक प्रत्यक्षदर्शी के डी मदान का कहना है कि "मैंने नहीं सुना था कि उन्होंने हे राम कहा था या नहीं."...
भद्दा और बेदम रहा संघ का विरोध प्रदर्शन
स्कूल जाते बच्चों के भी हाथ में भगवा थमाकर भले ही संघ ने शक्ति प्रदर्शन की भरपूर कोशिश की हो लेकिन 10 नवम्बर का दिन उसके इतिहास में कोई बडी घटना के रूप में याद नहीं किया जायेगा। हॉ हम बात कर रहे है राजस्थान के भरतपुर जिला मुख्यालय की जहॉ देश भर की ही तरह हिन्दुवादी संघटनों ने अपने उपर लग रहे ‘भगवा आतंकवाद’ के आरोपों के विरोध में शक्ति प्रदर्शन किया था। भरतपुर जहॉ संघ प्रचारक क रूप में भाजपा के पीएमइन वेंटिग लालकृष्ण आडवानी ने अपनी सेवाऐं दी है संघ का ये विरोध प्रदर्शन एक दम भददा और हल्का रहा।...
एनसीपी के 'दादा' का दांव
महाराष्ट्र में कांग्रेस में परिवर्तन हुआ तो राष्ट्रवादी कांग्रेस ने भी अपने पत्ते खोल दिये. राज्य में लंबे समय से राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के भीतर चल रही सत्ता के दावेदारी पर एनसीपी ने आखिरकार प्रदेश की प्रशासनिक कमान अपनी ओर से शरद पवार के भतीजे अजीत पवार को सौंप दी है. अब गुरुवार को शाम साढ़े चार बजे पृथ्वीराज चव्हाण के साथ अजीत "दादा" पवार उपमुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे....
पीएमओ वाले पृथ्वीराज
महाराष्ट्र के नये मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण यूपीए सरकार पार्ट वन और पार्ट टू में बतौर पीएमओ मिनिस्टर जाने जाते हैं. प्रधानमंत्री कार्यालय में रहते हुए भी उन्होंने कभी ताकतवर होने का दंभ नहीं पाला और चुपचाप काम करते रहे. बिट्स पिलानी से बीई और बर्कले विश्वविद्यालय से एमएस की डिग्री हासिल करनेवाले पृथ्वीराज की राजनीतिक कमेस्ट्री ने उनके सार्वजनिक जीवन में पहली बार इतना गाढ़ा रंग उड़ेला है....
सुलग रहा है मेरठ 'हिन्दुस्तान'
एक ओर हिन्दुस्तान अखबार अपनी अलग कंपनी बनाकर अखबार को चमकाने और अखबार का विस्तार करने में लगा है वहीं दूसरी ओर हिन्दुस्तान के विभिन्न संस्करणों में हालात ठीक नहीं है. हिन्दुस्तान के मेरठ संस्करण में इन दिनों इस्तीफे दिये जा रहे हैं लेकिन प्रचारित किया जा रहा है कि जो आफिस नहीं आ रहे हैं वे छुट्टी पर चले गये हैं....
आलोक तोमर के बगल में बसे किशोर मालवीय
सीएनईबी में पहले से एक सलाहकार संपादक थे- आलोक तोमर. अब दूसरे सलाहकार संपादक भी वहां नियुक्त हो गये हैं किशोर मालवीय. उन्होंने सीएनईबी चैनल के साथ बतौर कंसल्टिंग एडिटर अपनी नई पारी की शुरुआत की है। सीएनईबी से पहले वे ‘वायस ऑफ इंडिया’ न्यूज चैनल के साथ जुड़े हुए थे। उन्होंने करीब दो दशक के कॅरियर में देश के नामी-गिरामी मीडिया संस्थानों में कई जिम्मेदारियां निभाईं हैं।...
सुरक्षा परिषद की छांव में खेती पर दांव
अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने संसद में दिये गये अपने भाषण में भारत से मिले प्यार की भूरि भूरि प्रशंसा जरूर की लेकिन अपनी व्यावसायिक मजबूरियों को छिपा नहीं सके. बराक ओबामा ने संसद के संयुक्त अधिवेशन को संबोधित करते हुए जहां एक ओर भारत को महाशक्ति करार देकर उसके लिए संयुक्त राष्ट्र में स्थायी सदस्यता को अपना समर्थन दिया वहीं भारत और अमेरिका द्वारा मिलकर खेती के क्षेत्र में एक और हरित क्रांति के आगाज की घोषणा की....
आतंक नहीं कश्मीर केन्द्रित हुई ओबामा यात्रा
रविवार की देर शाम भारतीय प्रधानमंत्री द्वारा आयोजित भोज में ओमर अब्दुल्ला के शामिल होने से जो आशंका पैदा हुई थी वह सोमवार को हैदराबाद हाउस में और प्रबल रूप में सामने आ गयी जब प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अमेरिकी राष्ट्रपति की उपस्थिति में स्वीकार किया कि वे पाकिस्तान से बात करते वक्त "के" शब्द पर बात करने से नहीं कतराते हैं....
भारत से धंधा, पाक को चंदा
अमेरिका के राष्ट्रपति बराक हुसैन ओबामा ने अपना तीन दिवसीय दौरा पूरा कर लिया. मुंबई उतरकर दिल्ली दरबार तक उनकी दस्तक भारत पर अमेरिका के मजबूत पकड़ की मिसाल बन गया. निश्चित रूप से उनका दौरा भारत के लिए उतना महत्वपूर्ण नहीं जितना खुद अमेरिका के लिए है. मंदी के दौर से जूझ रहे अमेरिका को "कारपोरेट" जगत का धंधा दिलाने के लिए उन्होंने न केवल भारत को महाशक्ति करार दे दिया बल्कि सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता का समर्थन भी कर दिया....
- आलोक तोमर की आपबीती
- वह गुजरात जिसे आप नहीं जानते
- हिन्दू आतंकवाद का अतिवाद
- सिमी से भी खतरनाक है संघ का स्वरूप
- बाबा रामदेव का दांव
बहुत अच्छा व सच्चाईयो पर आधारित लेख है। सेकुलर भारत के निर्माँण मे ऐसे लेख का अहम योगदान होगा. संपादक- आपकी आवाज़.कांम
बहुत अच्छा व सच्चाईयो पर आधारित लेख है। सेकुलर भारत के निर्माँण मे ऐसे लेख का अहम योगदान होगा. संपादक- आपकी आवाज़.कांम
सिक्के के दुसरे पहलू की तरफ इशारा कर अनिल ज्जी ने सदा की तरह सार्थक हस्तक्षेप किया है. बहुत सशक्त लेखन. निश्चय ही लेख में ...
सिक्के के दुसरे पहलू की तरफ इशारा कर अनिल ज्जी ने सदा की तरह सार्थक हस्तक्षेप किया है. बहुत सशक्त लेखन. निश्चय ही लेख में ...
सिक्के के दुसरे पहलू की तरफ इशारा कर अनिल ज्जी ने सदा की तरह सार्थक हस्तक्षेप किया है. बहुत सशक्त लेखन. निश्चय ही लेख में ...



