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राजनीति

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रसातल की ओर जाती एक राष्ट्रीय पार्टी

एक राष्ट्रीय पार्टी के नेताओं का मानसिक संतुलन बिगड़ता नजर आ रहा है। यह राष्ट्रीय पार्टी अपने नेताओं की गलतियों से बहुत ही जल्द रीजनल पार्टी बनने के कागार पर पहुंचने वाली है। जी हां भाजपा की बात हो रही है। एक ब्लाक स्तर के नेता को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने के बाद पार्टी की हालत पिछले कुछ महीनें में और खराब हुई है। जिस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष को बोलने की तमीज नहीं हो, उससे क्या उम्मीद कर सकते है। जिस पार्टी के नेताओं में आत्मसम्मान न हो उससे क्या उम्मीद कर सकते है। जिस पार्टी के नेता सहयोगियों से लात खाने के बाद भी सहयोगी के शरणागत हो जाए उनसे क्या उम्मीद कर सकते है?
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शिवसेना को सबल बनाने की चूहामार चिंता

पिछले एक अरसे से शिवसेना को मजबूत करने के लिए अभियान चलाने का एक नया फैशन चल निकला है. वर्ली के एक तथाकथित वरिष्ठ शिवसैनिक ने उद्धव और राज ठाकरे को एकीकृत करने का संकल्प लिया हुआ है. राज ठाकरे लगभग ५ साल पहले जब शिवसेना से अलग हुए तब ये वरिष्ठ शिवसैनिक कहाँ थे? प्रेम शुक्ल मानते हैं कि शिवसेना को मजबूत करनेवाले लोगों को इस बात की चिंता करनी चाहिए कि उन्होंने शिवसेना नहीं बनायी बल्कि शिवसेना ने उन्हें बनाया है. अगर उन्हें सचमुच शिवसेना की चिंता है तो वे सेना की नीतियों और सिद्धांतों के संपूर्णता में स्वीकार करते हुए पहले खुद शिवसेना को स्वीकार करें.
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बिहार की भट्टी पर राजनीति की रोटियां

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नीतीश कुमार और नरेंद्र मोदी के वोट अभियान में ताज़ा एपिसोड भी जुड़ गया है. बिहार पुलिस के कुछ पुलिस वाले गुजरात गए थे जहां वे कथित रूप से यह जांच करने वाले थे कि नरेंद्र मोदी के साथ नीतीश कुमार की फोटो जारी करने वाली एजेंसी ने किसके हुक्म से यह काम किया था लेकिन अभियुक्तों या सम्बंधित पुलिस अधिकारियों के पास तो खबर बाद में पंहुची, मीडिया को पहले पता चल गया....
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नकचढ़े नीतीश की नकारात्मक राजनीति

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राजनैतिक विश्लेषकों के मुताबिक बिहार में एनडीए या भाजपा-जदयू गठबंधन टूट के कगार पर है। यह महज आशंका नहीं, बल्कि घटनाओं और नेताओं के रवैये के आधार पर किया जा रहा विश्लेषण हैं। एनडीए संयोजक शरद यादव भले ही बीच-बचाव कर रहे हों, वे गठबंधन बनाए रखना चाहते हों, लेकिन बिहार में नीतीश का दखल शरद से ज्यादा और सबसे ज्यादा हैं। घटनाक्रम बता रहे हैं कि नीतीश उड़ीसा के नवीन पटनायक के रास्ते पर हैं। लेकिन न तो बिहार उड़ीसा है और न ही नीतीश, नवीन पटनायक। लेकिन यह भी सच है कि नीतीश की जिद्द के आगे शरद यादव की वैसे ही कुछ नहीं चलेगी, जैसे जार्ज फर्नांडीस की नहीं चली।...
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उत्तर प्रदेश में उभरता नया राजनीतिक समीकरण

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डुमरियागंज विधान सभा चुनाव में इस बात पर बहस नहीं थी कि कौन जीतेगा. सब को मालूम था कि सत्ताधारी पार्टी की उम्मीदवार ही जीतेगी लेकिन दूसरी जगह पर कौन आएगा ,इस पर चर्चा थी क्योंकि उस को ही सबसे लोकप्रिय पार्टी माना जाएगा. दूसरी जगह पर बीजेपी आ गयी जबकि राहुल गाँधी और जगदम्बिका पाल की कोशिश के बावजूद कांग्रेस बहुत पीछे छूट गयी....
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इस अलगाव की कीमत जानते हैं नीतीश !

अब जबकि यह लगभग तय हो गया है कि बिहार में भाजपा और जदयू का 12 साल पुराना गठबंधन टूट जाएगा, मगर गठबंधन की बाध्यताओं से मुक्त होकर अकेले अपने दम पर बिहार में सरकार बनाने का सपना देख रहे नीतीश ने क्या ठंडे दिमाग से आकलन किया है कि इस अलगाव की उन्हें कितनी कीमत चुकानी पड़ेगी.
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सत्ता के चोर-दरवाजे से अनैतिक घुसपैठ

मौजूदा दौर में अपने देश में राज्य सभा की क्या प्रासंगिकता है, यह ठीक-ठाक बताने में मैं अक्षम हूं, मगर जब यह सोचा गया होगा कि इस देश में आम वोटरों द्वारा सीधे चुने गये प्रतिनिधियों के अलावा कुछ और प्रतिनिधियों की भी जरूरत है जो शासन के संचालन में अपनी राय दे सकें तो संभवत इसलिए कि आजादी के वक्त इस अल्प शिक्षित देश की जनता की बुद्धि पर हमारे नीति नियंताओं को भरोसा नहीं रहा होगा.
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जहरीली राजनीति का योगी

पिछले कुछ सालों से पूर्वी उत्तर प्रदेश के गोरखपुर और उसके आस-पास के जिलों में हिन्दू सांप्रदायिक राजनीति एक नए प्रकार के प्रयोग के दौर से गुजर रही है. जाति, धर्म, अपराध और साम्प्रदायिकता के मिश्रण की इस राजनीति के नेता हैं गोरखपुर स्थित गोरखनाथ मठ के उत्तराधिकारी तथाकथित 'बाबा' योगी आदित्यनाथ. यों तो आदित्यनाथ भाजपा के टिकट पर गोरखपुर से निर्वाचित सांसद हैं लेकिन इस क्षेत्र में वे भाजपा के एजेंडे पर नहीं बल्कि अपने एजेंडे पर चलते हैं.
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क्या वीपी सिंह बनना चाहते हैं दिग्विजय?

राजा मांडा के बाद अब राजा राघोगढ़। क्या दिग्विजय सिंह अब वीपी सिंह बनने के चक्कर में है। लगातार लोकतांत्रिक अंदाज में पार्टी पर अप्रत्यक्ष हमलों ने कांग्रेसियों को चौकन्ना कर दिया है। वीरवार को तो हद ही हो गई। दिग्विजय सिंह ने अप्रत्यक्ष रुप से राजीव गांधी पर हमला बोल दिया। मामला था भोपाल गैस त्रासदी को लेकर। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यूनियन कारबाइड के पूर्व चेयरमैन वारेन एंडरसन को अमेरिका के दबाव में छोड़ा गया था।
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गोलमाल है, भाई सब गोलमाल है

आखिर शरद पवार भी घेरे में आ गए। वैसे अब तक रक्षा सौदों को कोयला खदान माना गया। जहां कितना भी बेदाग छवि का चेहरा क्यों न बिठा दो, कालिख लग ही जाती। पर अब क्रिकेट में भी कोयले जैसी कहानी। आईपीएल का विवाद जबसे शुरू हुआ, तबसे अब तक काली कमाई के काले खेल का लगातार खुलासा हो रहा। अब शरद पवार भी आईपीएल टीम की बोली के मामले में फंस गए।
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सुदर्शन का (कु) दर्शन
जबसे आरएसएस के लोगों की आतंकवादी घटनाओं में संलिप्तता सामने आयी है, तब से आरएसएस के नेता बौखला गए हैं। इस बौखलाहट में ही शायद संघ के इतिहास में पहली बार हुआ है कि इसके स्वयंसेवक विरोध प्रदर्शन करने के लिए सड़कों पर उतरे। इसी बौखलाहट में आरएसएस के एक्स चीफ केएस सुदर्शन का मानसिक संतुलन बिगड़ गया और सोनिया गांधी के बारे में ऐसे शब्द बोल दिए, जिन्हें एक विकृत मानसिकता का आदमी ही बोल सकता है।...
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सीआईए नहीं केजीबी एजंट कहिए जनाब
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व सरसंघचालक ने 10 नवंबर को सोनिया गांधी पर सीआईए एजंट होने का आरोप लगाकर सनसनी पैदा कर दिया है. पूरी की पूरी कांग्रेस उत्तेजित है और संघ भी बैकफुट पर चला गया है. सुदर्शन के आस पास के लोगों का कहना है कि सुदर्शन जी भुलक्कड़ हो गये हैं और उन्हें कुछ ठीक से याद नहीं रहता. शायद इसीलिए उन्होंने इतनी बड़ी चूक कर दी. ...
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सोनिया का सच जान बेकाबू क्यों होते हो?
एक बार फिर लोकतंत्र पर आपातकाल मंडरा पड़ा है. राजमाता सोनिया गांधी के सिपहसालारों ने कांग्रेसी गुण्डों, माफियाओं और लोकतंत्र के हत्यारों का आह्वान किया है कि वह देशभर में संघ कार्यालयों पर धावा बोल दे. इसका तत्काल प्रभाव हुआ और कांग्रेसी गुण्डों ने संघ के दिल्ली मुख्यालय पर धावा भी बोल दिया. ठीक वैसे ही जैसे इंदिरा गांधी की मौत के बाद सिखों को निशाना बनाया गया था. हिंसक और अलोकतातंत्रिक मानसिकता से ग्रस्त कांग्रेसी सोनिया का सच जानकर आखिर इस तरह बेकाबू क्यों हो रहे हैं?...
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नये निजाम के दामन पर है ज्यादा बड़ा दाग
मुंबई। महाराष्ट्र के नए निजाम भी कोई दूध के धुले नहीं हैं। कांग्रेस आलाकमान ने अशोक चव्हाण को फर्जीवाड़े से फ्लैट पाने के आरोप में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री की गद्दी से हटा दिया। लेकिन नए मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण भी उसी तरह के फर्जीवाड़े में गले तक डूबे हुए हैं। उन्होंने जितने बड़े बड़े झूठ बोलकर सरकार से फ्लैट हथियाए हैं वे कांग्रेस के लिए ज्यादा दागदार हैं।...
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अजमेर चार्जशीट और संघी उछल-कूद
बढ़ते पैमाने पर इसके साक्ष्य सामने आ रहे हैं कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आर एस एस) से जुड़े लोगों का आतंकवादी हमलों में हाथ रहा है। इन हालात में आर एस एस इस पुराने सूत्र पर चल रहा लगता है कि हमला ही सबसे अच्छा बचाव है। उसने 10 नवंबर को देशव्यापी विरोध कार्रवाइयों का आह्वान किया है। इन कार्रवाइयों में संघ के शीर्ष नेताओं के शामिल होने की बात कही जा रही है। बहरहाल, इसकी चर्चा हम जरा बाद में करेंगे।...
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अपने होने पर ही हैरान
‘चुप्पी-चुप्पी नहीं नहीं, बोलेंगे अब सभी-सभी’ इन्हीं नारों से दाहोद (गुजरात) का सीनियर रेलवे संस्थान परिसर 31 अक्टूबर को पूरे दिन गूंजता रहा। यहां गुजरात के बड़ोदरा, पंचमहल, सुरत, भड़ूच, डांग, बालसाड और साबरकांठा जिले से लगभग तीन हजार के आस पास विमुक्त एवं घुमंतू समाज से ताल्लुक रखने वाले लोग इकट्ठे हुए थे। मौका था, अधिकार अभियान की घोषणा का। उस समाज के लिए जो इस लोकतांत्रिक देश में अधिकार का अर्थ अभी तक समझ नहीं पाएं हैं। ...
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गोली लगने के बाद क्या गांधी ने कहा था- हे राम ?
यह एक ऐसा सवाल है जिस पर अब विवाद होने लगा है. 30 जनवरी 1948 को क्या जब महात्मा गांधी को नाथूराम गोडसे ने गोली मारी तो महात्मा गांधी ने अपने मुंह से हे! राम का संबोधन किया था? उस वक्त घटनास्थल पर मौजूद रहे एक प्रत्यक्षदर्शी के डी मदान का कहना है कि "मैंने नहीं सुना था कि उन्होंने हे राम कहा था या नहीं."...
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भद्दा और बेदम रहा संघ का विरोध प्रदर्शन
स्कूल जाते बच्चों के भी हाथ में भगवा थमाकर भले ही संघ ने शक्ति प्रदर्शन की भरपूर कोशिश की हो लेकिन 10 नवम्बर का दिन उसके इतिहास में कोई बडी घटना के रूप में याद नहीं किया जायेगा। हॉ हम बात कर रहे है राजस्थान के भरतपुर जिला मुख्यालय की जहॉ देश भर की ही तरह हिन्दुवादी संघटनों ने अपने उपर लग रहे ‘भगवा आतंकवाद’ के आरोपों के विरोध में शक्ति प्रदर्शन किया था। भरतपुर जहॉ संघ प्रचारक क रूप में भाजपा के पीएमइन वेंटिग लालकृष्ण आडवानी ने अपनी सेवाऐं दी है संघ का ये विरोध प्रदर्शन एक दम भददा और हल्का रहा।...
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एनसीपी के 'दादा' का दांव
महाराष्ट्र में कांग्रेस में परिवर्तन हुआ तो राष्ट्रवादी कांग्रेस ने भी अपने पत्ते खोल दिये. राज्य में लंबे समय से राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के भीतर चल रही सत्ता के दावेदारी पर एनसीपी ने आखिरकार प्रदेश की प्रशासनिक कमान अपनी ओर से शरद पवार के भतीजे अजीत पवार को सौंप दी है. अब गुरुवार को शाम साढ़े चार बजे पृथ्वीराज चव्हाण के साथ अजीत "दादा" पवार उपमुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे....
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पीएमओ वाले पृथ्वीराज
महाराष्ट्र के नये मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण यूपीए सरकार पार्ट वन और पार्ट टू में बतौर पीएमओ मिनिस्टर जाने जाते हैं. प्रधानमंत्री कार्यालय में रहते हुए भी उन्होंने कभी ताकतवर होने का दंभ नहीं पाला और चुपचाप काम करते रहे. बिट्स पिलानी से बीई और बर्कले विश्वविद्यालय से एमएस की डिग्री हासिल करनेवाले पृथ्वीराज की राजनीतिक कमेस्ट्री ने उनके सार्वजनिक जीवन में पहली बार इतना गाढ़ा रंग उड़ेला है....
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सुलग रहा है मेरठ 'हिन्दुस्तान'
एक ओर हिन्दुस्तान अखबार अपनी अलग कंपनी बनाकर अखबार को चमकाने और अखबार का विस्तार करने में लगा है वहीं दूसरी ओर हिन्दुस्तान के विभिन्न संस्करणों में हालात ठीक नहीं है. हिन्दुस्तान के मेरठ संस्करण में इन दिनों इस्तीफे दिये जा रहे हैं लेकिन प्रचारित किया जा रहा है कि जो आफिस नहीं आ रहे हैं वे छुट्टी पर चले गये हैं....
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आलोक तोमर के बगल में बसे किशोर मालवीय
सीएनईबी में पहले से एक सलाहकार संपादक थे- आलोक तोमर. अब दूसरे सलाहकार संपादक भी वहां नियुक्त हो गये हैं किशोर मालवीय. उन्होंने सीएनईबी चैनल के साथ बतौर कंसल्टिंग एडिटर अपनी नई पारी की शुरुआत की है। सीएनईबी से पहले वे ‘वायस ऑफ इंडिया’ न्यूज चैनल के साथ जुड़े हुए थे। उन्होंने करीब दो दशक के कॅरियर में देश के नामी-गिरामी मीडिया संस्थानों में कई जिम्मेदारियां निभाईं हैं।...
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सुरक्षा परिषद की छांव में खेती पर दांव
अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने संसद में दिये गये अपने भाषण में भारत से मिले प्यार की भूरि भूरि प्रशंसा जरूर की लेकिन अपनी व्यावसायिक मजबूरियों को छिपा नहीं सके. बराक ओबामा ने संसद के संयुक्त अधिवेशन को संबोधित करते हुए जहां एक ओर भारत को महाशक्ति करार देकर उसके लिए संयुक्त राष्ट्र में स्थायी सदस्यता को अपना समर्थन दिया वहीं भारत और अमेरिका द्वारा मिलकर खेती के क्षेत्र में एक और हरित क्रांति के आगाज की घोषणा की....
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आतंक नहीं कश्मीर केन्द्रित हुई ओबामा यात्रा
रविवार की देर शाम भारतीय प्रधानमंत्री द्वारा आयोजित भोज में ओमर अब्दुल्ला के शामिल होने से जो आशंका पैदा हुई थी वह सोमवार को हैदराबाद हाउस में और प्रबल रूप में सामने आ गयी जब प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अमेरिकी राष्ट्रपति की उपस्थिति में स्वीकार किया कि वे पाकिस्तान से बात करते वक्त "के" शब्द पर बात करने से नहीं कतराते हैं....
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भारत से धंधा, पाक को चंदा
अमेरिका के राष्ट्रपति बराक हुसैन ओबामा ने अपना तीन दिवसीय दौरा पूरा कर लिया. मुंबई उतरकर दिल्ली दरबार तक उनकी दस्तक भारत पर अमेरिका के मजबूत पकड़ की मिसाल बन गया. निश्चित रूप से उनका दौरा भारत के लिए उतना महत्वपूर्ण नहीं जितना खुद अमेरिका के लिए है. मंदी के दौर से जूझ रहे अमेरिका को "कारपोरेट" जगत का धंधा दिलाने के लिए उन्होंने न केवल भारत को महाशक्ति करार दे दिया बल्कि सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता का समर्थन भी कर दिया....
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