राजनीति
फोन टेपिंग पर टांय-टांय
पिछले दस दिनों से आईपीएल पर मचे हंगामें के बाद अब राजनेताओं के फोन टैपिंग का मामला उठ खड़ा हुआ है. मोदी की विदाई के साथ ही अब संभवत: आईपीएल पर संसद में गतिरोध नहीं होगा. ऐसे में इस हफ्ते निश्चित रूप से फोन टेपिंग का मामला गरम रहेगा. मीडिया भी सुनंदा शशि मोदी और आईपीएल पर इतने कोणों से स्टोरी चला चुकी है कि अब उसे भी शायद ही इस विवाद में कोई रुचि रहे.
मंहगाई की महारैली से गडकरी स्थापित
भारतीय जनता पार्टी ने बुधवार को दिल्ली में हुई इस रैली ने साबित कर दिया कि घर बैठे कांग्रेस सरकार के राज में महंगाई की गर्मी की तपिश दिल्ली आकर 41 डिग्री के तापमान में झुलसने से कहीं ज्यादा भारी है। साबित ये भी हुआ कि नितिन गडकरी कैसे अध्यक्ष होंगे, उनका बीजेपी के इतिहास में नाम कैसे लिखाएगा ये तो वक्त बताएगा लेकिन संघ के इस लाडले अध्यक्ष की ताकत पूरे देश ने देख ली।
सतह पर उभरा सत्ता संघर्ष
कांग्रेस के शिखर पर सत्ता संघर्ष चरम पर है. कांग्रेस के महासचिव दिग्विजय सिंह ने माओवाद के खिलाफ छेड़े गये संघर्ष पर अपनी ही पार्टी के वरिष्ठ नेता और गृहमंत्री पी चिदम्बरम के खिलाफ बयानबाजी करके उस सत्ता संघर्ष को सतह पर ला दिया है. दिग्विजय सिंह ने चिदम्बरम के खिलाफ आदिवासी सरोकारों के बरख्स ही बयान दिया हो ऐसा नहीं है. उनके बयान के पीछे कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी की मंशा साफ दिखाई दे रही है. ...कौन बतायेगा गोविन्दाचार्य को भाजपा का रोडमैप!
कोडिपाक्कम् नीलमेघाचार्य गोविन्दाचार्य दिल्ली से भोपाल आते हैं तो लोग आपस में बाते करते हैं- आजकल गोविन्दजी भोपाल में अधिक समय दे रहे हैं, क्या बात है! लेकिन गोविन्दाचार्य 3 अप्रैल की सुबह दिल्ली क्या गए एक चर्चा तेजी से भोपाल से लेकर दिल्ली तक चली - गोविंदजी भाजपा में जाने वाले हैं! ...भरी जवानी में बूढ़ी हो गयी भाजपा
कालक्रम में किसी व्यक्ति के जीवन में तीस साल कैरियर शुरू करने की उम्र होती है. यानी नये सिरे से जिन्दगी में आगे बढ़ने की उम्र. लेकिन अगर यही उम्र का असर किसी राजनीतिक दल पर लागू करें तो क्या कहेंगे? भारतीय जनता पार्टी ने 6 अप्रेल को तीस साल पूरा कर लिया. उसके तीस साल पूरा होने के मौके पर अगर हम इस राजनीतिक दल की यात्रा का आंकलन करें तो पायेंगे कि भाजपा तीस साल की उम्र में ही बूढ़ी हो चली है. ...अशोक गहलोत: दल के दबंगों का दबाव
जिस तरह से केन्द्र में भाजपा कांग्रेस के सामने कमजोर विपक्ष बनी हुई है उसी तरह राजस्थान में भाजपा विपक्ष की भूमिका में सरकार की खिंचाई करने की बजाय आपस की टांग खिचाई में उलझी हुई है. विखरा, टूटा सा विपक्ष भले ही कुछ नहीं कर रहा हो लेकिन राज्य में कांग्रेस के ही कुछ दबंग मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के लिए विपक्ष की भूमिका में आ गये हैं. इससे बचने के लिए मुख्यमंत्री गहलोत ने पार्टी के भीतर ही संवादहीनता की स्थिति बना दी है.
अमिताभ तो बहाना हैं, अमर सिंह निशाना हैं
मीडिया में चर्चा सिर्फ इस बात की हो रही है कि अमिताभ बच्चन का अपमान कांग्रेस क्यों कर रही है। लेकिन, इस बात की तरफ शायद जानबूझकर लोग ध्यान नहीं दे रहे हैं कि अचानक अमिताभ बच्चन को कांग्रेस-एनसीपी की सरकार में एक ऐसे सीलिंक के उद्घाटन में बुलाने की वजह क्या हो सकती है जिसका शुरुआती उद्घाटन खुद कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने किया हो? कहीं ऐसा तो नहीं कि अमिताभ बच्चन छोटे भैया अमर सिंह के लिए एनसीपी में राजनीतिक लिंक खोलने तो नहीं जा रहे हैं?
जा तुझको माफ कर दिया, तू मुझको माफ कर!
पंजाब विधानसभा के उपाध्यक्ष सतपाल गोसाई द्वारा विधानसभा अध्यक्ष निर्मल सिंह काहलो को लिखे पत्र के संदर्भ में जब पंजाब विधानसभा में चर्चा चली तो कांग्रेस विधायक मक्खन सिंह ने कहा कि राज्य की राजनीति में राजनीतिक रंजिश के कारण कड़वाहट पैदा हो गई है। इस कड़वाहट को समाप्त करने के लिए उपाध्यक्ष गौसाई द्वारा लिखे पत्र में प्रकट विचारों पर विचार कर राजनीति में आई कड़वाहट को समाप्त करना चाहिए।
भ्रष्टाचार को शिष्टाचार बनाना चाहती है भाजपा
पहले राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित होकर भ्रष्टाचार का मामला दर्ज करो। विजिलेंस की जांच करवाओ। कोर्ट में चालान पेश हो जाए। और इसके बाद एक प्रस्ताव आए, अभी तक राजनीतिक विरोध और बदले की भावना से दर्ज मामले वापस लिए जाए। वो भी राज्य के विधानसभा में। भाजपा विधायक और पंजाब विधानसभा के डिप्टी स्पीकर सतपाल गोसाई ने कुछ इस तरह का ही प्रस्ताव पंजाब विधानसभा में रखा है।
गडकरी की टीम गरीब और दलित विरोधी
आखिर, जो सोचा था वही हुआ। न तो सोच बदली है न दृष्टि। सोचने की शक्ति भी वहीं की वहीं है। देखने की क्षमता में भी कोई सुधार नहीं हुआ है। नितिन गडकरी ने अपनी टीम की घोषणा कर दी है। टीम देखकर लगता है कि पूरा कोटे का इस्तेमाल हुआ है। वही लोग, वही टीम, वही सोच। जो लोग जमीन पर फेल हो गए, आधारहीन रहे, वही एक बार फिर गडकरी की टीम में आ गए हैं।
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सुदर्शन का (कु) दर्शन
जबसे आरएसएस के लोगों की आतंकवादी घटनाओं में संलिप्तता सामने आयी है, तब से आरएसएस के नेता बौखला गए हैं। इस बौखलाहट में ही शायद संघ के इतिहास में पहली बार हुआ है कि इसके स्वयंसेवक विरोध प्रदर्शन करने के लिए सड़कों पर उतरे। इसी बौखलाहट में आरएसएस के एक्स चीफ केएस सुदर्शन का मानसिक संतुलन बिगड़ गया और सोनिया गांधी के बारे में ऐसे शब्द बोल दिए, जिन्हें एक विकृत मानसिकता का आदमी ही बोल सकता है।...
सीआईए नहीं केजीबी एजंट कहिए जनाब
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व सरसंघचालक ने 10 नवंबर को सोनिया गांधी पर सीआईए एजंट होने का आरोप लगाकर सनसनी पैदा कर दिया है. पूरी की पूरी कांग्रेस उत्तेजित है और संघ भी बैकफुट पर चला गया है. सुदर्शन के आस पास के लोगों का कहना है कि सुदर्शन जी भुलक्कड़ हो गये हैं और उन्हें कुछ ठीक से याद नहीं रहता. शायद इसीलिए उन्होंने इतनी बड़ी चूक कर दी. ...
सोनिया का सच जान बेकाबू क्यों होते हो?
एक बार फिर लोकतंत्र पर आपातकाल मंडरा पड़ा है. राजमाता सोनिया गांधी के सिपहसालारों ने कांग्रेसी गुण्डों, माफियाओं और लोकतंत्र के हत्यारों का आह्वान किया है कि वह देशभर में संघ कार्यालयों पर धावा बोल दे. इसका तत्काल प्रभाव हुआ और कांग्रेसी गुण्डों ने संघ के दिल्ली मुख्यालय पर धावा भी बोल दिया. ठीक वैसे ही जैसे इंदिरा गांधी की मौत के बाद सिखों को निशाना बनाया गया था. हिंसक और अलोकतातंत्रिक मानसिकता से ग्रस्त कांग्रेसी सोनिया का सच जानकर आखिर इस तरह बेकाबू क्यों हो रहे हैं?...
नये निजाम के दामन पर है ज्यादा बड़ा दाग
मुंबई। महाराष्ट्र के नए निजाम भी कोई दूध के धुले नहीं हैं। कांग्रेस आलाकमान ने अशोक चव्हाण को फर्जीवाड़े से फ्लैट पाने के आरोप में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री की गद्दी से हटा दिया। लेकिन नए मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण भी उसी तरह के फर्जीवाड़े में गले तक डूबे हुए हैं। उन्होंने जितने बड़े बड़े झूठ बोलकर सरकार से फ्लैट हथियाए हैं वे कांग्रेस के लिए ज्यादा दागदार हैं।...
अजमेर चार्जशीट और संघी उछल-कूद
बढ़ते पैमाने पर इसके साक्ष्य सामने आ रहे हैं कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आर एस एस) से जुड़े लोगों का आतंकवादी हमलों में हाथ रहा है। इन हालात में आर एस एस इस पुराने सूत्र पर चल रहा लगता है कि हमला ही सबसे अच्छा बचाव है। उसने 10 नवंबर को देशव्यापी विरोध कार्रवाइयों का आह्वान किया है। इन कार्रवाइयों में संघ के शीर्ष नेताओं के शामिल होने की बात कही जा रही है। बहरहाल, इसकी चर्चा हम जरा बाद में करेंगे।...
अपने होने पर ही हैरान
‘चुप्पी-चुप्पी नहीं नहीं, बोलेंगे अब सभी-सभी’ इन्हीं नारों से दाहोद (गुजरात) का सीनियर रेलवे संस्थान परिसर 31 अक्टूबर को पूरे दिन गूंजता रहा। यहां गुजरात के बड़ोदरा, पंचमहल, सुरत, भड़ूच, डांग, बालसाड और साबरकांठा जिले से लगभग तीन हजार के आस पास विमुक्त एवं घुमंतू समाज से ताल्लुक रखने वाले लोग इकट्ठे हुए थे। मौका था, अधिकार अभियान की घोषणा का। उस समाज के लिए जो इस लोकतांत्रिक देश में अधिकार का अर्थ अभी तक समझ नहीं पाएं हैं। ...
गोली लगने के बाद क्या गांधी ने कहा था- हे राम ?
यह एक ऐसा सवाल है जिस पर अब विवाद होने लगा है. 30 जनवरी 1948 को क्या जब महात्मा गांधी को नाथूराम गोडसे ने गोली मारी तो महात्मा गांधी ने अपने मुंह से हे! राम का संबोधन किया था? उस वक्त घटनास्थल पर मौजूद रहे एक प्रत्यक्षदर्शी के डी मदान का कहना है कि "मैंने नहीं सुना था कि उन्होंने हे राम कहा था या नहीं."...
भद्दा और बेदम रहा संघ का विरोध प्रदर्शन
स्कूल जाते बच्चों के भी हाथ में भगवा थमाकर भले ही संघ ने शक्ति प्रदर्शन की भरपूर कोशिश की हो लेकिन 10 नवम्बर का दिन उसके इतिहास में कोई बडी घटना के रूप में याद नहीं किया जायेगा। हॉ हम बात कर रहे है राजस्थान के भरतपुर जिला मुख्यालय की जहॉ देश भर की ही तरह हिन्दुवादी संघटनों ने अपने उपर लग रहे ‘भगवा आतंकवाद’ के आरोपों के विरोध में शक्ति प्रदर्शन किया था। भरतपुर जहॉ संघ प्रचारक क रूप में भाजपा के पीएमइन वेंटिग लालकृष्ण आडवानी ने अपनी सेवाऐं दी है संघ का ये विरोध प्रदर्शन एक दम भददा और हल्का रहा।...
एनसीपी के 'दादा' का दांव
महाराष्ट्र में कांग्रेस में परिवर्तन हुआ तो राष्ट्रवादी कांग्रेस ने भी अपने पत्ते खोल दिये. राज्य में लंबे समय से राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के भीतर चल रही सत्ता के दावेदारी पर एनसीपी ने आखिरकार प्रदेश की प्रशासनिक कमान अपनी ओर से शरद पवार के भतीजे अजीत पवार को सौंप दी है. अब गुरुवार को शाम साढ़े चार बजे पृथ्वीराज चव्हाण के साथ अजीत "दादा" पवार उपमुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे....
पीएमओ वाले पृथ्वीराज
महाराष्ट्र के नये मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण यूपीए सरकार पार्ट वन और पार्ट टू में बतौर पीएमओ मिनिस्टर जाने जाते हैं. प्रधानमंत्री कार्यालय में रहते हुए भी उन्होंने कभी ताकतवर होने का दंभ नहीं पाला और चुपचाप काम करते रहे. बिट्स पिलानी से बीई और बर्कले विश्वविद्यालय से एमएस की डिग्री हासिल करनेवाले पृथ्वीराज की राजनीतिक कमेस्ट्री ने उनके सार्वजनिक जीवन में पहली बार इतना गाढ़ा रंग उड़ेला है....
सुलग रहा है मेरठ 'हिन्दुस्तान'
एक ओर हिन्दुस्तान अखबार अपनी अलग कंपनी बनाकर अखबार को चमकाने और अखबार का विस्तार करने में लगा है वहीं दूसरी ओर हिन्दुस्तान के विभिन्न संस्करणों में हालात ठीक नहीं है. हिन्दुस्तान के मेरठ संस्करण में इन दिनों इस्तीफे दिये जा रहे हैं लेकिन प्रचारित किया जा रहा है कि जो आफिस नहीं आ रहे हैं वे छुट्टी पर चले गये हैं....
आलोक तोमर के बगल में बसे किशोर मालवीय
सीएनईबी में पहले से एक सलाहकार संपादक थे- आलोक तोमर. अब दूसरे सलाहकार संपादक भी वहां नियुक्त हो गये हैं किशोर मालवीय. उन्होंने सीएनईबी चैनल के साथ बतौर कंसल्टिंग एडिटर अपनी नई पारी की शुरुआत की है। सीएनईबी से पहले वे ‘वायस ऑफ इंडिया’ न्यूज चैनल के साथ जुड़े हुए थे। उन्होंने करीब दो दशक के कॅरियर में देश के नामी-गिरामी मीडिया संस्थानों में कई जिम्मेदारियां निभाईं हैं।...
सुरक्षा परिषद की छांव में खेती पर दांव
अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने संसद में दिये गये अपने भाषण में भारत से मिले प्यार की भूरि भूरि प्रशंसा जरूर की लेकिन अपनी व्यावसायिक मजबूरियों को छिपा नहीं सके. बराक ओबामा ने संसद के संयुक्त अधिवेशन को संबोधित करते हुए जहां एक ओर भारत को महाशक्ति करार देकर उसके लिए संयुक्त राष्ट्र में स्थायी सदस्यता को अपना समर्थन दिया वहीं भारत और अमेरिका द्वारा मिलकर खेती के क्षेत्र में एक और हरित क्रांति के आगाज की घोषणा की....
आतंक नहीं कश्मीर केन्द्रित हुई ओबामा यात्रा
रविवार की देर शाम भारतीय प्रधानमंत्री द्वारा आयोजित भोज में ओमर अब्दुल्ला के शामिल होने से जो आशंका पैदा हुई थी वह सोमवार को हैदराबाद हाउस में और प्रबल रूप में सामने आ गयी जब प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अमेरिकी राष्ट्रपति की उपस्थिति में स्वीकार किया कि वे पाकिस्तान से बात करते वक्त "के" शब्द पर बात करने से नहीं कतराते हैं....
भारत से धंधा, पाक को चंदा
अमेरिका के राष्ट्रपति बराक हुसैन ओबामा ने अपना तीन दिवसीय दौरा पूरा कर लिया. मुंबई उतरकर दिल्ली दरबार तक उनकी दस्तक भारत पर अमेरिका के मजबूत पकड़ की मिसाल बन गया. निश्चित रूप से उनका दौरा भारत के लिए उतना महत्वपूर्ण नहीं जितना खुद अमेरिका के लिए है. मंदी के दौर से जूझ रहे अमेरिका को "कारपोरेट" जगत का धंधा दिलाने के लिए उन्होंने न केवल भारत को महाशक्ति करार दे दिया बल्कि सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता का समर्थन भी कर दिया....
- आलोक तोमर की आपबीती
- वह गुजरात जिसे आप नहीं जानते
- हिन्दू आतंकवाद का अतिवाद
- सिमी से भी खतरनाक है संघ का स्वरूप
- बाबा रामदेव का दांव
बहुत अच्छा व सच्चाईयो पर आधारित लेख है। सेकुलर भारत के निर्माँण मे ऐसे लेख का अहम योगदान होगा. संपादक- आपकी आवाज़.कांम
बहुत अच्छा व सच्चाईयो पर आधारित लेख है। सेकुलर भारत के निर्माँण मे ऐसे लेख का अहम योगदान होगा. संपादक- आपकी आवाज़.कांम
सिक्के के दुसरे पहलू की तरफ इशारा कर अनिल ज्जी ने सदा की तरह सार्थक हस्तक्षेप किया है. बहुत सशक्त लेखन. निश्चय ही लेख में ...
सिक्के के दुसरे पहलू की तरफ इशारा कर अनिल ज्जी ने सदा की तरह सार्थक हस्तक्षेप किया है. बहुत सशक्त लेखन. निश्चय ही लेख में ...
सिक्के के दुसरे पहलू की तरफ इशारा कर अनिल ज्जी ने सदा की तरह सार्थक हस्तक्षेप किया है. बहुत सशक्त लेखन. निश्चय ही लेख में ...



