हिंसा फैलाओ खबर बनेगी
मीडिया के दृष्टिकोण से आज दिल्ली में दो बड़ी घटनाएं हुई. पहली किसानों को बजट में दिये गये राहत के मुद्दे पर कांग्रेस की रैली और दूसरी हिन्दू महासभा द्वारा सीपीएम आफिस पर पथराव.
कांग्रेस की इस रैली को कवर करने के लिए मीडिया दफ्तरों में एक दिन पहले से ही प्लानिंग हो रही थी. वैसे भी चैनल इस बारे में बदनाम हैं कि वे भूचू खबरों के आगे राजनीतिक खबरों को कम महत्व देने लगे हैं. हो सकता है कि टीवी पत्रकार सोनिया मनमोहन की रैली को कवर करके कुछ राजनीतिक गंभीर होने का संकेत देना चाहते हों लेकिन आखिरकार जब भगवान ही नहीं चाहता कि मीडियावालों के सिर अच्छे कामों का सेहरा बंधे तो टीवी पत्रकार करें भी तो क्या?
सुबह-सुबह दिल्ली के सीपीएम आफिस पर कुछ लोगों ने पथराव कर दिया. वे कुछ लोग संघ से जुड़े थे. वे इस बात का विरोध करने सीपीएम दफ्तर गये थे कि कुन्नूर में आरएसएस कार्यकर्ताओं की जिस तरह से निर्मम हत्या की जा रही है वह तुरंत बंद होनी चाहिए. दिल्ली में सीपीएम सेन्ट्रल कमेटी की दो दिन की बैठक चल रही है. जाहिर है यह वरोध दर्ज करने का अच्छा मौका था. कल दिनभर हिन्दू महासभा के लोगों ने मीडियावालों को जाकर बताया भी था कि हम कल वहां प्रदर्शन करेंगे.
प्रदर्शन हुआ और नारेबाजी भी. इतने में सीपीएम दफ्तर से कुछ चिढ़ानेवाली बातें भी कही गयीं. यह किसी जिम्मेदार आदमी का काम नहीं रहा होगा. जवाब में हिन्दू महासभा और संघ के कार्यकर्ताओं ने भी "हमला" बोल दिया. थोड़ी देर तक वहां पथराव हुआ. कुछ गाड़ियों के शीशे टूटे और दोनों ओर से कुछ को मामूली चोटें भी आईं. वहां जो कुछ हुआ उससे आज की पहली खबर सोनिया की रैली न होकर सीपीएम दफ्तर पर हमला हो गया. कल की सारी तैयारी धरी रह गयी. बजट में किसानों के नाम पर की गयी घोषणाओं पर किये जानेवाले दावे भी.
ऐसा क्या हुआ था जिससे मीडिया ने उसे पहली खबर बना दी? क्या पहली खबर बनने के लिए हिंसक होना जरूरी है? अगर मीडिया हिंसा को ही पहली खबर बनाएगा तो जनता हिंसक क्यों नहीं होगी?
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