सहज उकेरी पीर घनेरी
क्षमा कुलश्रेष्ठ जब अठारह साल की थी तो उन्होंने एक कविता लिखी थी. ‘बन के तारा झिलमिलाऊं, चंाद मेरे पास हो, ऐसा कुछ मैं कर दिखाऊं, सबको मुझपर नाज हो, मानती हूं मेरा जीवन, गहरी काली रात है, दिन में तारों का नजारा, एक असंभव बात है।’ आज क्षमा की उम्र होगी यही कोई तीस साल के आसपास, लेकिन जब आप उनसे मिलेंगे, आपको कोई जब तक उनकी उम्र का हिसाब ना बताए, आप उनकी उम्र का अंदाजा नहीं लगा सकते।
इस बात को आज दस से अधिक साल हो गए, जब घर की छत से गिरकर क्षमा ने अपने चलने की क्षमता गंवा दी। उस वक्त 12 जगहों से उसकी हड्डियां टूटी थीं, जिसके लिए उसके अब तक 60 से अधिक ऑपरेशन हो चुके हैं। शरीर इतना संवेदनशील हो चुका है, जरा सी चोट से रक्त में जमाव आ जाता है और ऑपरेशन मजबूरी बन जाती है।
आज क्षमा बैसाखियों के सहारे बहूत मुश्किल से चल पाती है। वह आठों पहर दर्द की जद में होती है। दर्द भी इतना भयानक की इंसान होश खो दे। उसके बावजूद जब भी आप उसे मिलोगे, वह हंसती हुई आपसे मिलेगी। उसके लिए वक्त मानों दस साल पहले ही ठहर गया। आज जब पीड़ा असहनीय हो जाती है तो पापा कुसूमेन्द्र कुलश्रेष्ठ आकर इंजेक्शन लगा देते हैं। इंजेक्शन की अब उसे आदत सी पड़ गई है। इस दौरान ‘आर्ट थेरेपी’ ने इस दर्द से बाहर निकलने में क्षमा की बड़ी मदद की। आर्ट थेरेपी क्षमा की एक किताब का नाम भी है। जो शीघ्र ही प्रकाशित होने वाली है। जिसमें क्षमा ने इस बात का उल्लेख किया है कि दर्द को कला के माध्यम से कैसे गलत किया जा सकता है। क्षमा बताती है कि जब वह पेटिंग बना रही होती है, उसे कुछ भी याद नहीं रहता। जैसे उसकी तस्वीर पूरी होती है, वह वेदना से भर उठती है। आर्ट थेरेपी की मदद से क्षमा ने एक ना बोल पाने वाली बच्ची का ईलाज भी किया। जो ईलाज के बाद बोलने लगी।
मां उर्मिला कुलश्रेष्ठ आठों पहर बेटी के आस पास छाया की तरह मौजूद होती हैं। उर्मिला कहती हैं- मैं क्षमा को कभी अपनी बेटी की तरह नहीं देखती। यह मेरा बेटा है। उर्मिलाजी के इस बेटे ने अपनी कला के बदौलत पूरे देश में अपनी पहचान बनाई, उसने पांच बाई तीन फीट के कैनवाश पर 4248 गणेशजी के चित्र तैयार किए। इसमें हर चित्र दूसरे से भिन्न है। इसे तैयार करने में पूरे एक साल का समय लगा। इसमें कुल 4215 रंगों के शेड का उपयोग हुआ है। क्षमा के एक कला प्रेमी मित्र ने बताया कि अपने अन्य चित्रों की कीमत औसत से भी कम रखने वाली क्षमा ने गणेशजी वाली कृति की कीमत बहुत अधिक रखी है। शायद इसलिए क्योंकि वह इसे बेचना ही नही चाहती।’ गणेशजी में श्रद्धा ही है, जिसकी वजह से वह हर रोज एक गणेश की मूर्ति बनाती है। जिसे बनाने में क्षमा को 20 से 25 मिनट का समय लगता है। चित्रकारी की वजह से क्षमा का नाम लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड में लिखा गया ।
क्षमा की मां उर्मिला कुलश्रेष्ठ बताती हैं, किस तरह कई धार्मिक संस्थाओं से जुड़े लोगों ने आकर उनसे धर्म परिवर्तन करने पर मदद करने की बात की। उन्होनें क्षमा की इलाज का विश्वास दिलाया। उर्मिलाजी कहती हैं, हमारे लिए अपनी बच्ची से बड़ा कुछ नहीं है। हमने उनसे जब कहा कि वे मेरी बच्ची को पूरी तरह से स्वस्थ कर दे ंतो हम उनके धर्म को स्वीकार कर लेंगे। उसके बाद वे लोग नहीं आए। धार्मिक समुदाय से जुड़े लोगों के आने का वाक्या कई बार हुआ।
क्षमा द्वारा बनाई एक तस्वीर है कल्पवृक्ष। कल्पवृक्ष की अब तक एक दर्जन से अधिक प्रतियां वह बनाकर बेच चुकी हैं। कल्पवृक्ष की लोकप्रियता का राज क्षमा खुद बताती है, हुआ यूं कि कल्पवृक्ष सबसे पहले एक आंटी खरीद कर ले गई। उनकी कोई इच्छा इसे खरीद कर ले जाने के कुछ दिनों के बाद ही पूरी हो गई। उन्हें लगा यह इस कल्पवृक्ष की वजह से हुआ हैं। उन्होनंे अपने एक मित्र को बताया, वे जब मेरे पास से कल्पवृक्ष लेकर गए संयोगवश उनकी भी कोई दुआ पूरी हो गई। इस तरह यह पेंटिंग इतनी लोकप्रिय हो गई कि बनते ही बीक जाती है।
क्षमा की तस्वीरों के संबंध में बताने के लिए बिल्कुल यह जरुरी नहीं था कि उसके जीवन के दुर्घटना के संबंध में बताया जाए लेकिन जबतक उसके जीवन के इस दुख को नहीं समझा जाता, उसकी तस्वीरों को समझना बेहद मुश्किल है। उसकी एक तस्वीर है, ‘डेथ ऑफ डिजायर’ (इच्छाओं की मृत्यु) जिसमें उसने एक तीतली के सीने में तीर चुभोया है। आप उस तस्वीर को देखिए, तीतली, उसकी चंचलता, तीर और क्षमा। खैर, क्षमा अब तक 2000 से अधिक पेंटिंग बना चुकी है। सैकड़ों कविताएं लिखी हैं। इसके साथ साथ क्षमा मूर्तियां भी बनाती हैं, जिससे हुई आमदनी का बीस फीसद हिस्सा वह अनाथ बच्चों को दान करती हैं। वाकई क्षमा उन युवाओं के लिए रोड़ मॉडल हो सकती है, जो जीवन में जरा सी परेशानी देखकर घबरा जाते हैं।
Title :
Body
- सुदर्शन का (कु) दर्शन
- सीआईए नहीं केजीबी एजंट कहिए जनाब
- सोनिया का सच जान बेकाबू क्यों होते हो?
- नये निजाम के दामन पर है ज्यादा बड़ा दाग
- अजमेर चार्जशीट और संघी उछल-कूद
- अपने होने पर ही हैरान
- भद्दा और बेदम रहा संघ का विरोध प्रदर्शन
- एनसीपी के 'दादा' का दांव
- पीएमओ वाले पृथ्वीराज
- गोली लगने के बाद क्या गांधी ने कहा था- हे राम ?



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शत शत नमन है ... तुम्हे ........
क्षमा तुम्हे शत शत नमन है......
तुमने क्षमा किया विधाता को....
अपने जीवन में तालुका से रंग भर कर
क्षमा की जीवन यात्रा हर पथिक का मार्गदर्शन करने में सक्षम है..
मैंने उनकी कृति नहीं देखी है मगर दावे से कह सकता हूँ कि वह अनुपम.. अद्वितीय ... अतुलनीय होगी...
आंसू के पानी में.. दर्द के रंगों को... जीवटता कि कूची से... कल्पना के कैनवास पर. फैलाकर.. जो तस्वीर बनती है..
वह निश्चय ही हर दुआ को कबूल कराने की क्षमता रखती है...
लिहाजा क्षमा का उकेरा कल्पवृक्ष अगर लोगों की मनोकामना पूरी कर रहा है...
तो कोई आश्चर्य की बात नहीं है...
इस भाग को पढ़कर ही अंदाजा लग जाता है की कौनसी संस्था वाले आये होंगे ..
मै उसके दृड़ निश्चय की प्रसंसा करता हु... की वो मुसीबत और बड़े लालच मै आये bina ऐसे खतरनाक स्लो मिसन के द्वारा धर्म परिवर्तन करने वाली एनजीओ से अपने आपको बचने मै कामयाब हुई..इनके तरीको से मई भी काफी अछे से वाकिफ हु क्योंकि मेरा भी बचपन मै ही इनसे सबसे पहले पला पडा था.. और इसके विपरीत उन्होंने अछम्ताओ को दरकिनार करते हुए अपने आपको काबिल बनाके एक मिसाल कायम की ....
उनको और आपको भी साधुवाद बहुत अछि जानकारी उपलब्द कराई है आपने..
सतत तपस्या से बने, जीवन ललित ललाम.
जीवन ललित ललाम, अपंग है शरीर केवल.
सार्थकता जीवन पाए, देह साधन केवल.
कहा साधक 'आशीष' दे रहे लोग हजारों.
क्षमा का हो विस्तार, चाहते लोग हजारों
sahiasha.com
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