पीएमओ वाले पृथ्वीराज
महाराष्ट्र के नये मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण यूपीए सरकार पार्ट वन और पार्ट टू में बतौर पीएमओ मिनिस्टर जाने जाते हैं. प्रधानमंत्री कार्यालय में रहते हुए भी उन्होंने कभी ताकतवर होने का दंभ नहीं पाला और चुपचाप काम करते रहे. बिट्स पिलानी से बीई और बर्कले विश्वविद्यालय से एमएस की डिग्री हासिल करनेवाले पृथ्वीराज की राजनीतिक कमेस्ट्री ने उनके सार्वजनिक जीवन में पहली बार इतना गाढ़ा रंग उड़ेला है.
प्रधानमंत्री कार्यालय में रहकर पर्दे के पीछे काम करने वाले 64 वर्षीय पृथ्वीराज चव्हाण को 10 जनपथ के प्रति उनकी गहरी निष्ठा और पेशेवर कुशलता की वजह से उनको महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री के रूप में मनचाही कुर्सी मिल गई। चव्हाण को कांग्रेस के मजबूत गढ़ माने जाने वाले महाराष्ट्र का मुख्यमंत्री बनाया गया है। उनकी सबसे बड़ी जिम्मेदारी आदर्श हाउसिंग सोसाइटी घोटाले के बाद पार्टी की छवि को अपने पेशेवर कुशलता और सुशासन के जरिए फिर से बनाना है।
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह दोनों के ही विश्वास पात्र चव्हाण एक तकनीकी विशेषज्ञ थे और राजीव गांधी का अनुसरण करते हुए राजनीति के मैदान में आ गए थे। पेशे से इंजीनियर चव्हाण ने बिट्स पिलानी से स्नातक किया था और कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल की थी। चव्हाण ने भारतीय भाषाओं को कंप्यूटर से जोड़ने के लिए शोध किया था।
पश्चिमी महाराष्ट्र के कराड जिले के निवासी चव्हाण राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माने जाने वाले मराठा समुदाय से ताल्लुक रखते हैं। माना जा रहा है कि मराठा समुदाय से 11 वें मुख्यमंत्री बने चव्हाण को कांग्रेस ने इसलिए मुख्यमंत्री बनाया है ताकि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी में मराठा वोटों को जाने से रोका जा सके। चव्हाण का एनसीपी प्रमुख और केंद्रीय मंत्री शरद पवार के साथ रिश्ता बहुत अच्छा नहीं है।
पृथ्वीराज के पिता प्रख्यात कांग्रेसी डी आर उर्फ आंदेराव चौव्हाण इंदौर रियासत में 'दीवान' थे और कानूनी मामलों के जाने माने विशेषज्ञ थे। वह जवाहर लाल नेहरू, लाल बहादुर शाष्त्री और इंदिरा गांधी की सरकार में कैबिनेट मंत्री थे। आंदेराव ने कराड लोकसभा सीट से 1957 से 1971 तक सांसद रहे। उनके निधन के बाद उनकी पत्नी प्रेमलता ताई ने 1977, 1984 और 1989 में यह सीट जीती। वर्ष 1980 में उन्हें टिकट नहीं दिया गया और राज्य कांग्रेस का अध्यक्ष बना दिया गया।
पृथ्वीराज ने कराड से वर्ष 1991 में चुनाव लड़ा और वर्ष 1996 तथा 1998 में चुनाव जीता। वर्ष 1999 के चुनाव में एनसीपी के श्रीनिवास पाटिल से वह चुनाव हार गए। वह वर्ष 2002 और 2008 में राज्यसभा के लिए चुने गए। चव्हाण काग्रेस कार्यालय 10 जनपथ और सात रेसकोर्स रोड के बीच की कड़ी थे। उन्हें वर्ष 2004 प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्यमंत्री बनाए गए। वह प्रधानमंत्री के एक प्रमुख चिंता निवारक के रूप में जाने जाते हैं। चव्हाण की साफ सुथरी छवि जहां उनके फायदे के लिए है वहीं उन्हें महाराष्ट्र की राजनीति का बहुत कम अनुभव है जिसके कारण पृथ्वीराज को ताज सौंपकर भी कांग्रेस आलाकमान शायद ही निश्चिंत हो सके. हालांकि जब पृथ्वीराज को महाराष्ट्र का राज देने की घोषणा की गयी तो कराड़ में दीवाली मनायी गयी लेकिन अपने उनके राज में राज्य में दीवाली मनेगी या नहीं यह तो आनेवाला वक्त ही बताएगा.
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