Home | आदमीनामा | राजनयिक से राजनीति के शिखर पर मीरा कुमार

राजनयिक से राजनीति के शिखर पर मीरा कुमार

image

पटना में पैदा हुई और दिल्ली में पली-बढ़ी मीरा कुमार पंद्रहवीं लोकसभा अध्यक्ष होंगी. जनता पार्टी के शासन के दौरान देश के उप प्रधानमंत्री रहे जगजीवन राम की पुत्री मीरा कुमार स्वभाव और वाणी दोनों से बहुत मृदुल स्वभाव की हैं. मीरा कुमार का जन्म 31 मार्च 1945 को पटना में हुआ था. लेकिन पिता की राजनीतिक सक्रियता के कारण उनका लालन-पालन दिल्ली में हुआ. दिल्ली के ही इंद्रप्रस्थ कालेज और मिराण्डा हाउस से उन्होंने एमए, एलएलबी और स्पैनिश में डिप्लोमा की डिग्री हासिल की.

1973 में आईएफएस सेवा में शामिल होनेवाली मीरा कुमार स्पेन, इंग्लैण्ड और मारीशस के भारतीय दूतावावासों में कार्यरत रहीं. 1977-79 में वे इंग्लैण्ड के हाईकमीशन में कार्यरत रहीं इसके बाद भारत लौट आयीं और भारतीय विदेश विभाग में 1980-85 तक काम किया.

लेकिन जैसा होता है राजनीतिक परिवार में पैदा हुआ व्यक्ति राजनीतिक गतिविधियों में हिस्सा लेने से बच नहीं पाता है. मीरा कुमार के पिता जगजीवन राम (बाबू जी) सम्मानित दलित नेता थे और देश के उपप्रधानमंत्री भी रह चुके थे. 6 जुलाई 1986 को बाबू जगजीवन राम की मौत के के एक साल पहले ही मीरा कुमार राजनीति में आ चुकी थीं. 1985 में पहली बार आठवीं लोकसभा के लिए उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर बिजनौर से चुनाव लड़ा और सांसद बनीं. इसके बाद दिल्ली के करोलबाग लोकसभा सीट से ग्यारहवीं और बारहवीं लोकसभा के लिए चुनी गयीं. चौदहवीं और पंद्रहवीं लोकसभा के लिए वे बिहार के सासाराम लोकसभा सीट से कांग्रेस के टिकट पर चुनकर लगातार संसद पहुंची. चौदहवीं लोकसभा के दौरान वे कांग्रेस गठबंधन की सरकार में सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री के रूप में काम कर रही थीं. मीरा कुमार ने केवल केवल चुनाव ही नहीं लड़ा बल्कि कांग्रेस पार्टी के लिए भी काम किया. वे दो बार कांग्रेस वर्किंग कमेटी की सदस्य रह चुकी हैं और दो बार कांग्रेस की महासचिव. पहली बार 1990 से 92 और दूसरी और 1996 से 1998.  इसके अलावा वे समय-समय पर विभिन्न कमेटियों की सदस्य भी रहीं हैं.

तेजतर्रार निशानेबाज रह चुकी मीरा कुमार को शूटिंग में मेडल भी मिल चुका है. राजनीति के अलावा मीरा कुमार की प्रमुख रूचि सामाजिक उत्थान के कार्यों और गैर राजनीतिक आंदोलनों में भी है. 1990 में उन्होंने खुद से पहल करके उन्होंने आल इंडिया समता आंदोलन की स्थापना की. 1967 में जब भयानक अकाल पड़ा था तो मीरा कुमार ने राष्ट्रीय अकाल राहत कमेटी के अध्यक्ष के बतौर उन्होंने काम किया था. अकाल राहत के दौरान परिवार अपनाओ स्कीम बहुत कामयाब रही थी और सीधे अकाल पीड़ित परिवारों को मदद पहुंचाने की मीरा कुमार की योजना कारगर साबित हुई थी.

मीरा कुमार चुपचाप काम करने में विश्वास करती है. उनकी इसी कार्यशैली का परिणाम है कि जब बिहार में कांग्रेस रसातल में है तब भी वे बिहार के सासाराम से लागातर सांसद के तौर पर चुनी जाती रही हैं. मीरा कुमार मानव अधिकारों को लेकर बहुत संवेदनशील हैं और राजनीति में रहते हुए महिला अधिकारों और वंचितों के अधिकारों के लिए लगातार काम करती रहती हैं. एक बेटे और दो बेटियों की मां मीरा कुमार राजनीति में पूरी सक्रियता के बावजूद अपने परिवार के लिए भी पूरा समय निकालती हैं.

पंद्रहवीं लोकसभा अध्यक्ष के रूप में मीरा कुमार देश के लोकतांत्रिक इतिहास में नया अध्याय जोड़ रही हैं. यह पहला मौका होगा जब देश की इस सबसे बड़ी पंचायत का मुखिया न केवल दलित परिवार से होगा बल्कि महिला होगी. कांग्रेस की रणनीति भले ही मीरा कुमार को लोकसभा अध्यक्ष बनाकर बिहार में जनाधार बढ़ाने की हो लेकिन मीरा कुमार के रूप में पंद्रहवीं लोकसभा को एक बेहतरीन अध्यक्ष भी मिला है, जिसकी कार्यशैली सबको साथ लेकर चलने की है. पिता से विरासत में मिली राजनीतिक कार्यकुशकला और राजनयिक के तौर पर हासिल की गयी प्रशासनिक कार्यकुशलता मीरा कुमार को एक बेहतर प्रशासक बनाता है, जिसका फायदा पंद्रहवीं लोकसभा को मिलना तय है.

Subscribe to comments feed Comments (2 posted):

anilreja on 30 June, 2009 11:53;35
avatar
RESPECTED MEERA KUMAR , I SALUTE YOUR ACHIEVEMENT AS A FIRST INDIAN HISTORY OF SPEAKER IN LOK SABHA NOW PEOPLE OF INDIA CAN EXPECT DECENCY IN PARLIAMENT AND PEOPLE OF INDIA WILL BE VERY HAPPY NOT TO HEAR UNPARLIYAMENTARY LANGUAGE BY THE FEW POLITICIANS IN PARLIAMENT IN FUTURE UNDER SPEAKERSHIP OF MEERA KUMAR JEE. ALL THE BEST AND PRAY TO GOD HER SUCCESS AND SMOOTH FUNCTION OF PARLIAMENT THE BIGGEST DEMOCRACY OF WORLD (INDIA)

yrs sincerely
ANIL REJA
ANDHERI-E, MUMBAI
Thumbs Up Thumbs Down
0
ANILREJA on 08 July, 2009 11:52;37
avatar
I STARTED CREATIVE WORK FOR WELFARE OF PEOPLE SINCE I LOST MY MOTHER IN 1994 THEN I STARTED FEEL PAIN OF PEOPLE. I WRITTEN MANY SCRIPT ON SENSITIVE ISSUES LIKE POLLUTION, BHURNA HATYA, TERRORISM AND DEPECTED BY STREET PLAYS IN GUJRAT WHEN I WAS POSTED IN AHMEDABAD ASSET ONGC. NOW WE HAVE ARRIVED IN MUMBAI IN 2005 ANS THEN I STARTED WRITTING ON SEVERAL BURNING ISSUES AND PREPARED SOME POSTERS ON BHURNA HATYA. BASICALLY I AM A PROCESS ENGINEER IN WORLD LEADING CO. ONGC POSTED IN BANDRA OFFICE ROOM NO-710 VASUDHARA BHAWAN AND SEARCHING ANY PLATFORM TO GIVE MESSAGE OR AWARENESS AMONG THE MASSES TO ABOLISH THE EVIL IN OUR SOCIETY AND COUNTRY. MYSELF AND SRI ASHISH AGRAWAL FROM DELHI AND NEWLY BORN AND POOR NGO (FRIENDS) IS WORKING SINCE LAST FEW YEARS. “BHURNA HATYA” IS BURNING ISSUE AS NOT ONLY POOR PEOPLE OR PEOPLE FROM VILLAGE AND URBAN AREAS BUT EDUCATED AND ELITE CLASS PEOPLE PREFER TO GO FOR ABORTION AFTER FIND OUT ILLEGAL PRACTICE OF SONOGRAPHY AFTER CONFIRMING FEMALE GOING TO BORN INSIDE THE MOTHERS SO NEED OF HOUR IS TO TAKE THIS ISSUE SERIUOSLY AND GENERAL AWARENESS AMONG THE MASS THAT FEMALE AND MALE ARE BEATIFULL GIFT OF GOD AND GODDESS AND WE HUMAN BEING ARE DOING SIN BY OPTING MALE CHILD DUE TO FEAR OF DOWRY , SECURITY AND OTHER ASPECT BY WHICH OUR PEOPLE ARE INDULGING IN THIS EVIL . NOW TIME HAS COME TO TAKE SEROUS THOUGHT AFTER KNOWING THAT RATIO OF MALE AND FEMALE ARE IMBALANCING. MALE NUMBERS ARE INCRESING WHEREAS FEMALE POPULATION IS COMING DOWN HEAVYLY DUE TO ABORTIONS AND NEGATIVE MENTALALITY OF THE PEOPLE. I FEEL IF SUCH TREND WILL CONTINUE THEN SUCH SITUATION MAY ARRIVE WHEN MALE FERTINITY WILL BE IN TROUBLE AND COMPELLED TO CHOOSE A FEMALE FOR MARRIGE OR TO SEARCH A FEMALE LIFE PARTER WHO IS GREAT SENSE OF RESPONSIBILTY AND KEY FACTOR TO CONTINUE TO GIVE BIRTH FOR GENERATION TO GENERATION? SO BEING A SENSTIVE CITIZEN OF INDIA WE HANE TO ARRIVE TO SEACH OUT THE SOLUTION TO GIVE BIRTH SPECIALLY FEMALE AND FEEL PROUD BEING A FEMALE AS WE HAVE SEEN CONTIBUTION OF MOTHER TERESSA A SOCIAL WORKER, SMT PRATIBHA PATIL HON PRESIDENT OF INDIA ,LATE INDIRA GANDHI, EX PRIME MINISTER OF INDIA,MEERA KUMAR HON SPEAKER, KALPA CHWALA AND SUNITA VILLIAM AND KIRAN BEDI IAS OFFICER WHO HAS SET AN EXAMPLE TO BECOME FIRST IPS LADY WHO HAS BECOME IG –PRISON AND SET AN EXAPLE TO FEEL PROUD BEING A LADY OR FEMALE FOR PARENTS, FAMILY AND SOCIETY OFCOURSE. MANY MORE LADY OR FEMALE WHO HAS REACHED AT TOP IN SPORTS FOR EXAPLE SANIA MIRZA AND P.T. USHA AND SINGING LEGEND LATA MANGESHKAR AND THOUSAND OF FEMALE WHO HAS REACHED AT TOP AND PROUD FIGURE FOR COUNTRY IN DIFFERENT FIELD LIKE SPORTS , CREATIVE , SPACE SCIETIST AND PROFESSIONAL AND ADMINISTRATIVE SERVICES.SO ONE SLOGAN I WANT TO CHANT JAY HO “ NARI-SHAKTI”
THANKS-REGARDS.

ANIL KUMAR REJA
OA-2/602 ONGC COLONY, PONAM NAGAR,
ANDHERI-E, MUMBAI-93
Thumbs Up Thumbs Down
0
total: 2 | displaying: 1 - 2

Post your comment comment

Type in Hindi (हिन्दी में कमेन्ट करने के लिए यहां रोमन में लिखिए यह अपने आप हिन्दी में बदल देगा.)

Title :
Body
Powered by Vivvo CMS v4.1.2
Share |
  • email Email to a friend
  • print Print version

ईमेल से विस्फोटः अपना ईमेल यहां भरें और सब्सक्राइब करें:

Delivered by FeedBurner

Author info
visfot news network विस्फोट.कॉम इंटरनेट पर नये दौर की पत्रकारिता में परंपरागत मूल्यों को स्थापित करने की दिशा में लगातार काम कर रहा है, जो कि पूरी तरह से जनकेन्द्रित, वास्तविक और निहित स्वार्थी तत्वों के प्रभाव से मुक्त है. हमारा संपर्क है visfot@visfot.com
Rate this article
5.00
More from आदमीनामा
Previous
image
पीएमओ वाले पृथ्वीराज
महाराष्ट्र के नये मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण यूपीए सरकार पार्ट वन और पार्ट टू में बतौर पीएमओ मिनिस्टर जाने जाते हैं. प्रधानमंत्री कार्यालय में रहते हुए भी उन्होंने कभी ताकतवर होने का दंभ नहीं पाला और चुपचाप काम करते रहे. बिट्स पिलानी से बीई और बर्कले विश्वविद्यालय से एमएस की डिग्री हासिल करनेवाले पृथ्वीराज की राजनीतिक कमेस्ट्री ने उनके सार्वजनिक जीवन में पहली बार इतना गाढ़ा रंग उड़ेला है....
image
चंबल की वादियों से बिग बॉस के घर तक सीमा परिहार
चंबल की खूंखार वादियो मे अपने आंतक का डंका मचाने के बाद अपनी हकीकत की कहानी मे खुद को उतारने वाली सीमा परिहार अब टेलीविजन पर नजर आयेगी। यह पहला मौका होगा जब बिग बॉस जैसे कार्यक्रम के जरिये किसी खूखांर महिला अपराधी को छोटे पर्दे पर दर्शक देखेगे। वुंडेड नामक फिल्म के जरिये सीमा परिहार की कहानी देशवासी पहले ही देख चुके है जिसमे खुद सीमा परिहार ने किरदार अदा किया है।...
image
सहज उकेरी पीर घनेरी
क्षमा कुलश्रेष्ठ जब अठारह साल की थी तो उन्होंने एक कविता लिखी थी. ‘बन के तारा झिलमिलाऊं, चंाद मेरे पास हो, ऐसा कुछ मैं कर दिखाऊं, सबको मुझपर नाज हो, मानती हूं मेरा जीवन, गहरी काली रात है, दिन में तारों का नजारा, एक असंभव बात है।’ आज क्षमा की उम्र होगी यही कोई तीस साल के आसपास, लेकिन जब आप उनसे मिलेंगे, आपको कोई जब तक उनकी उम्र का हिसाब ना बताए, आप उनकी उम्र का अंदाजा नहीं लगा सकते।...
image
आधी आबादी के इन्साफ की लड़ाई और शबाना आजमी
आज़ादी के 63 साल बाद भी देश में आज़ादी पूरी तरह से नहीं आई है. शायद इसीलिये आज़ादी का जो सपना हमारे महानायकों ने देखा था वह पूरा नहीं हो रहा है. सबसे मुश्किल बात यह है कि राज-काज के फैसलों से देश की आधी आबादी को बाहर रखा जा रहा है. अपने देश में आज भी महिलायें मुख्य धारा से बाहर हैं. असंवेदनशीलता की हद तो यह है कि जनगणना में गृहिणी को अनुत्पादक काम में शामिल माना गया है और उन्हें भिखारियों की श्रेणी में रखने की कोशिश की गयी. लेकिन हल्ला गुल्ला होने के बाद शायद यह मसला तो दब गया लेकिन महिलाओं को सत्ता से बाहर रखने में अभी तक मर्दवादी राजनीति के पैरोकार सफल हैं और उन्हें संसद और विधानमंडलों में बराबर का हक नहीं दे रहे हैं....
image
राजनीति के बांका बहादुर को अंतिम सलाम
दिग्विजय सिंह का राजनीतिक जीवन न तो इतना लंबा है कि उसकी विधिवत समीक्षा की जाए और न ही उनकी राजनीतिक उपलब्धियां इतनी बड़ी थीं कि उनके निधन पर राष्ट्रीय राजनीतिक शोक का आयोजन किया जाए. मीडिया के लिए भी दिग्विजय सिंह के जाने से बड़ी खबर जसवंत सिंह के भाजपा में वापस आने की बनी. फिर भी दिग्विजय सिंह का भारतीय राजनीतिक परिदृश्य़ से जाना उतनी ही बड़ी क्षति है जितनी बड़ी क्षति माधवराव सिंधिया, राजेश पायलट या प्रमोद महाजन के जाने से हुई थी. ...
image
निश्छल राजनीतिज्ञ राजीव गांधी
राजीव गांधी नाम के जिस व्यक्तित्व पर कलम चलानी है, वह सहज संभव नहीं है । सौम्य छवि, अविचल मुस्कान से सदा परिपूर्ण रहने वाला चेहरा । यदि यह कहा जाये कि आज जिस संचार क्रांति के दम पर भारत विश्व के शीर्षस्थ देशों में से एक है, उस क्रांति को भारत भूमि पर व्याप्त करने वाला युगदृष्टा, तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी। उनकी पुण्यतिथि 21 मई के मौके पर राजीव गांधी के बारे में और विस्तार से बता रहे हैं पंकज चतुर्वेदी....
image
शिक्षा में 'सिद्ध' प्रयोग की साधना
कलकत्ते में पैदा हुए, दिल्ली आई,आई टी से सिविल इंजिनियरिंग मे पढ़ाई की और कुछ दिन तक उत्तर बिहार में रसायन का उद्योग चलाया। लेकिन मन उखड़ा और कुछ अलग करने की धुन लगी तो चले आये मसूरी। पिछले बीस साल से सिद्ध संस्था के माध्यम से मसूरी के आस पास के इलाके में शिक्षा का प्रयोग कर रहे है। इनका नाम है पवन कुमार गुप्ता। आप पूछ सकते हैं कि ये पवन गुप्ता आखिर हैं कौन? ...
image
बेदाग व्यक्तित्व थे भैरो सिंह शेखावत
भारत के पूर्व उपराष्ट्रपति और देश के एक कद्दावर राजनेता भैरो सिंह शेखावत नहीं रहे. शनिवार की सुबह जयपुर के एक अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली. 87 साल के भैरोसिंह शेखावत ने लगभग छह दशक तक भारतीय राजनीति में अपना सशक्त हस्ताक्षर बनाये रखा. ...
image
चला गया 'नदिया के पार' का सूत्रधार
नदिया के पार के सूत्रधार गोविंद दा चले गये. गोविंद दा माने उस फिल्म के निर्देशक, पटकथा लेखक गोविंद मूनिस. पूरा नाम था गोविंद नारायण दुबे. गुरुवार की सुबह अचानक उनके सेलनंबर से कॉल आया. मैंने उनका फोन कट किया. एक मैसेज भेजा- ""दादा, मैं ठीक हूं. आप कैसे हैं. आज आपको एक मेल करूंगा. एक पत्र भी भेजा हूं. जवाब दीजिएगा.''...
image
उदयन शर्मा: जन पत्रकारिता का जोरदार पहरुआ
उदयन शर्मा की पुण्य तिथि 23 अप्रैल पर उनको याद करना 1977 में शुरु हुई उस हिन्दी पत्रकारिता को भी याद करना है, जब उदयन शर्मा, एमजे अकबर और एसपी सिंह ने 'रविवार' के माध्यम से हिन्दी पत्रकारिता को नए तेवर प्रदान किए थे। 11 जुलाई 1949 को जन्मे उदयन शर्मा प्रख्यात पत्रकार ही नहीं बल्कि विचारों से पक्के समाजवादी और धर्मनिरपेक्ष शख्स थे।...
image
जानिए जनाब ललित मोदी को
पूरे देश को आईपीएल की खूंटी पर टांग देनेवाले ललित मोदी आखिर हैं कौन? हब्सियों की तरह अनवरत अंग्रेजी बोलने में सिद्धहस्त ललित मोदी के जीवन की कहानी कम दिलचस्प नहीं है. क्रिकेट को पूंजी का खेल बना देनेवाले ललित मोदी बड़े शिकार करने में विश्वास करते हैं भले ही इसके लिए कोई कीमत चुकानी पड़ जाए. अपने मां की सहेली से शादी रचाने वाले ललित मोदी ने शशि थरूर से एक छोटी सी खुन्नस पर ऐसा खेल किया कि शशि थरूर को अपने मंत्रीपद से इस्तीफा देना पड़ गया. ...
image
नक्सल विरोधी अभियान के नकली नेपोलियन
चिदंबरम के इस्तीफे की धमकी के नाट्य के समानांतर ही रवि शंकर प्रसाद का बयान आया है कि सरकार को उन सबके खिलाफ भी कार्रवाई करनी चाहिए जो नक्सलियों के प्रति सहानुभूति रखते हैं. यदि चिदंबरम नेपोलियन बनने के ख्वाब संजोते हैं तो रविशंकर प्रसाद उन्हें हिटलर, मुसोलिनी या स्टालिन जो कुछ भी उन्हें पसंद हो बनने के लिए ललकार रहे हैं. सवाल पैदा होता है कि क्या चिदंबरम और रविशंकर प्रसाद जैसे कारपोरेट कंपनियों के वकील जो तर्क पेश कर रहे हैं उससे नक्सलवाद का सफाया हो जाएगा?...
image
नंगे पांव देश नापने का नशा
लातूर के भीषण भूकंप ने उनसे उनका परिवार छीन लिया. गर्भवती स्त्री, बच्चे, माता-पिता, भाई कोई नहीं बचा. अगर कोई बचा तो वे खुद मोहनराव पाटिल. अब चालीस के हो चले पाटिल ने अपने परिवार के असमय काल के गाल में समा जाने के बाद पूरे देश को ही अपना परिवार बना लिया. कंधे पर राष्ट्रीय ध्वज और गले में लटकी संदेश की तख्ती के माध्यम से वे राष्ट्रप्रेम की अलख जगा रहे हैं. लोग भले ही उन्हें कुछ भी कहें, कुछ भी समझें, उनकी अनथक, अविरल देशप्रेम की पदयात्रा जारी है. संजय स्वदेश की रिपोर्ट-...
image
संघ विचारधारा के विनोबा भावे थे नाना जी
नाना जी नहीं रहे. उनका जाना राजनीति में एक युग का अवसान है. एक ऐसे युग का अवसान जिसे खुद नानाजी देशमुख ने बानाया था. वे राजनीति में उस नैतिक साहस के प्रतीक थे जो बिनोबा भावे के बाद किसी और राजनीतिज्ञ में दिखाई नहीं देता. आज भले ही नानाजी हमारे बीच नहीं है लेकिन उनका काम काज और कीर्ति सदा अमर रहेगी....
image
पंडवानी की पुरखिन दाई: श्रीमती लक्ष्मी बाई
महज चौथी कक्षा तक स्कूली पढ़ाई करने के बाद श्रीमती लक्ष्मी बाई ने महाभारत का पारायण शुरू कर दिया. उनके पिता दयाराम बंजारे मशाल नाच के प्रख्यात कलाकार थे लेकिन बंजारे ने बेटी को पंडवानी सिखाई. पिता की सिखाई पंडवानी को वे पिछले 45 वर्षों से गा रही हैं और पूरी पंडवानी सुनाने के लिए उन्हें 18 दिन का अनवरत समय चाहिए. डॉ परदेशी राम वर्मा की रिपोर्ट-...
image
माई नेम इज बाल ठाकरे
साल भर पहले की बात है. 26 फरवरी की देर शाम मुंबई के लीलावती अस्पताल में एक बीमार व्यक्ति को रुटीन चेक-अप के नाम पर अस्पताल लाया गया. डाक्टरों ने परीक्षण किया तो उस बीमार व्यक्ति को अस्पताल में दाखिल कर लिया क्योंकि उन्हें फेफड़े में संक्रमण था. संक्रमण सामान्य नहीं था. डाक्टरों ने लंबे समय तक आराम करने की सलाह दे दी. ...
image
कामगार मुले पाहिजे
नागपुर के विभिन्न चौक-चौराहों पर गुजरते वक्त दीवारों पर कामगार मुले पाहिजे और उसके नीचे दो मोबइल नंबर लिखा नजर आता है। इस विज्ञापन को गौर से पढऩे वाले शायद सोचते हो कि बच्चे सस्ते मजदूर होते हैं, इसलिए उनके ही रोजगार के लिए यह विज्ञापन होगा। पर इस विज्ञापन को को पढ़कर इसके पीछे के सामाजिक उद्देश्य के बारे में कोई नहीं जानता है।...
Next
Tags
No tags for this article
सर्वाधिकार (अ)सुरक्षित

विस्फोट.कॉम में प्रकाशित सामग्री पर हमारी ओर से कोई कापीराइट नहीं है.

Powered by Vivvo CMS v4.1.2