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आबू की पहाड़ियों में मीडिया पर मंथन

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ब्रह्माकुमारीज संस्था के मीडिया प्रभाग द्वारा आयोजित नेशनल मीडिया कॉन्फ्रेंस में मीडिया के सामाजिक दायित्वों पर मंथन जारी है। देश भर से आए सैकड़ों पत्रकार इस मसले पर खुले मन से बात कर रहे हैं। कॉन्फेंस का उद्घाटन करते हुए राजस्थान के सूचना व जनसंपर्क राज्यमंत्री अशोक बैरवा ने कहा कि नकारात्मकता का दंश झेल रही मानवता को राहत प्रदान करने के लिए मीडियाकर्मियों को आध्यात्मिकता के परिवेश से जुड़कर सामाजिक बदलाव का नया अध्याय लिखने का संकल्प लेना चाहिए।

उन्होने कहा कि अपराध समाचारों को जरूरत से ज्यादा महत्व देना सकारात्मक सोच को दुष्प्रभावित करता है। बुरे कार्य करने वालों को अनावश्यक रूप से प्रतिबिम्बित करने के बजाए समाज को नयी दिशा देने में प्रयासरत संस्थाओं व व्यक्तियों को समाचारपत्रों में अधिक स्थान दिया जाना चाहिए। उपग्रह टीवी चैनलों द्वारा व्यवसायिकता की अंधी होड़ के कारण फैलायी जा रही अपसंस्कृति के प्रति संचेत करते हुए श्री बैरवा ने चेतावनी दी कि जिस देश की संस्कृति विकृत हो जाती है, उसके लिए अपना अस्तित्व बचाना मुश्किल हो जायेगा। पत्रकारों को अपने सामाजिक दायित्वों का निर्वहन करते हुए देश के नव निर्माण और भारतीय संस्कृति के उत्थान हेतु ब्रह्माकुमारीज द्वारा शुरू किये गये अभियान से जुड़कर अहम भूमिका निभानी चाहिए। टीवी चैनलों को रियलिटी शो जैसे कार्यक्रमों को देश की संस्कृति के लिए अभिशाप बताते हुए उन्होंने कहा कि ईश्वरीय सत्ता को सर्वोच्च मानते हुए हमें प्रेम व शांति के प्रसार में सहयोगी बनना चाहिए।

मीडियाकर्मियों को संबोधित करते हुए गुजरात के शहरी विकास एवं आवास मंत्री नितीन भाई पटेल ने कहा कि मीडिया की भूमिका दिनप्रतिदिन महत्वपूर्ण होती जा रही है। लेकिन हमारा दुर्भाग्य यह भी है कि कई टीवी चैनल विकारों को प्रोत्साहित करने वाले कार्यक्रम अधिक प्रसारित कर रहे हैं। ऐसे कार्यक्रम का बहिष्कार करके दर्शकों को मानसिक प्रबुद्धता का परिचय देना चाहिए। मीडिया सरकार व समाज का मार्ग दर्शक बन सकता है। बशर्ते कि वह आध्यात्मिकता से जुड़े और स्वयं आचार संहिता निर्धारित करके उसका अक्षरश: पालन करें। संस्था के महासचिव निर्वेर ने कहा कि आध्यात्मिकता रहित जीवन नीरस है। जीवन को संतुलित बनाने के लिए सकारात्मक सोच विकसित की जानी चाहिए नकारात्मकता को अपने जीवन एवं समाज से समाप्त करके पत्रकार देश को उन्हें सोने की चिड़ीया बनाने का सपना साकार कर सकते हैं। मीडिया प्रभाग के अध्यक्ष ओम प्रकाश ने कहा वैज्ञानिक प्रगति ने सुविधायें एवं साधन दिये जिनसे देश का विकास तो हुआ लेकिन सर्वागिण विकास नहीं हो पाया आज के वातावरण में आध्यात्मिक विकास का महत्व सर्वोपरि है और इस पावन लक्ष्य को प्राप्त करने में मीडियाकर्मी सहभागी बन सकते हैं।

मीडिया प्रभाग के उपाध्यक्ष करूणा ने कहा कि दादी प्रकाशमणि की प्रेरणा से शांति प्रेम सदभाव और आध्यात्म की अनुभूति कराने के लिए प्रतिवर्ष मीडियाकर्मियों को शांतिवन में आमंत्रित करने के लिए जो पौधा रोपित किया गया वह अब वटवृक्ष का रूप धारण कर रहा है। भुवनेश्वर के विधायक अशोक पण्डा ने कहा कि मीडियाकर्मी नकारात्मक सोच को त्यागकर जनसमस्याओं के समाधान पर यदि ज्यादा ध्यान केन्द्रित करें तो शांतिवन में महासम्मेलन आयोजित करने का अभिप्राय सार्थक हो जायेगा। आंध्र प्रदेश के पूर्व सूचना एवं जनसम्पर्क निदेशक डॉ. सी वी नरसिम्हा रेड्डी ने कहा कि बापू गांधी ने शांति व अहिंसा के बलबूते पर देश को आजाद करा लिया उनकी शिक्षायें आज भी भारत को नयी दिशा प्रदान करने में सक्षम है।

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BK Komal on 13 September, 2009 11:28;57
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Dr brother really your work is very useful and inspirative thanks a lot
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image Avadhesh Akodia युवा पत्रकार अवधेश आकोदिया समसामयिक विषयों पर धारदार तरीके से लिखते हैं। राजनीति के अलावा अंतरराष्ट्रीय विषयों पर इनकी अच्छी पकड़ है। नामचीन मीडिया समूहों में काम करने के बाद पिछले दो वर्ष से समसामयिक विषयों की पत्रिका प्रतियोगिता दृष्टिं का संपादन कर रहे हैं, साथ ही स्वतंत्र लेखन भी करते हैं।
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