हर जगह होली सिर्फ होली है
होली का अर्थ होता है ज्वलित और इतहास बड़ा ही रोचक और बदलता हुआ रहा है , पुरातन काल में होली को होलिका के नाम से जाना जाता था और इसे सभी आर्यों द्वारा मनाया जाता था पर पूर्वी भारत में होली का महत्व अधिक था. एक कहानी यह भी है की होली का त्यौहार विवाहित स्त्रियां अपने घर की सुख समृद्धि के लिए मनाती थीं और पूर्णमासी के चाँद की पूजा करती थी. इसका वर्णन आपको जामिनी की अपूर्व मीमांसा सूत्र में मिल जायेगा. आज भी होलिका दहन पूर्णमासी की रात को ही किया जाता है.
पौराणिक कथाओं के अनुसार असुरो के रजा हिरण्यकश्यप को अपनी शक्ति का दंभ था और वो खुद को विष्णु जी से ही श्रेष्ठ मानता था और अपने राज्य में अपनी ही पूजा करवाना चाहता था, और करवाता भी था। पर उसकी सबसे बड़ी विफलता यह थी कि उसका अपना पुत्र प्रह्लाद भगवान श्री विष्णु का भक्त था और उन्ही की आराधना करता था। हिरण्याकश्यप को अपन ही राजमहल में अपना परमविरोधी मिल गया था जो वही महल में विष्णु की पूजा करता था। इस बात से खिन्न हो कर हिरण्यकश्यप ने अपनी बहन होलिका को प्रह्लाद को मारने के निर्देश दिए। होलिका जिसे आग में ना जलने का वरदान प्राप्त था, प्रह्लाद को लेकर के आग में बैठ गई पर वह यह भूल गई की वो वरदान तभी असर करता है जब वो अकेले आग में प्रवेश करे. इसी कारण होलिका आग में भस्म हो गई और बालक प्रह्लाद ईश्वर पर अपनी अटूट आस्था और विश्वास के कारण जलती अग्नि के अन्दर से भी सुरक्षित बहार आ गया.
हालाँकि देश के कई अलग-अलग प्रान्तों में होली को अलग अलग नामों से जाना जाता है और बड़े ही निराले अंदाजों में मनाया जाता है. आइये जानते है की किस प्रान्त का क्या है निराला अंदाज़ होली भारत ही नहीं बल्कि पुरे विश्व के कोने कोने में मनाई जाती है बस ढंग अलग है भारत के प्रान्तों में होली के ढंग क्या है और होली रंग क्या है आइये जानते है की किस प्रान्त में कैसे मनती है होली।
आंध्र प्रदेश की होली
वैसे तो दक्षिण भारत में उत्तर भारत की तरह की रंगों भरी होली नहीं मनाई जाती है फिर भी सभी लोग हर्षोल्लास में शामिल रहते है उत्तर भारत से इतर दक्षिण में नवयुवक शाम को एकत्रित हो कर गुलाल से होली खेलते है और बड़ों का आशीर्वाद लेते है. आन्ध्र के बंजारा जनजतियों का होली मनाने का अपना निराला तरीका है. यह लोग अपने विशिष्ट अंदाज में मनोरम नृत्य प्रस्तुत करते है.
तमिलनाडु की होली
इसी प्रकार तमिलनाडु में होली को कमाविलास, कमान पंदिगाई एवं काम - दहन के नाम से जाना जाता है, यहाँ के लोगो का मानना है की कामदेव के तीर के कारण ही शिव को पार्वती से प्रेम हुआ था और भगवान शिव का विवाह देवी पार्वती से हुआ था, मगर तीर लगने से क्रोधित शिव जी ने कामदेव को भस्म कर दिया था तब रति के आग्रह पर देवी पार्वती ने उन्हें पुनर्जीवित किया और जिस दिन कामदेव पुनर्जिवित हुए उस दिन को होली के रूप में मानते है. इसीलिए तमिलनाडु में होली को काम पंदिगाई के नाम से जाना जाता है. यहाँ होली को प्रेम के पर्व के रूप में मनाया जाता है .
उत्तर प्रदेश की होली
उत्तर प्रदेश में होली का त्यौहार बड़े ही हर्ष और उल्लास से मनाया जात है उअत्तर प्रदेश के कोने कोने में होली की धूम देखते ही बनती है , होली के दिन क्या बड़े और क्या छोटे सभी को हर प्रकार के मजाक बाज़ी की पूर्ण छुट होती है और लोग इसका जमकर लुफ्त भी उठाते है छेड़- छाड़ , चुहल बाज़ी , गीत संगीत यहाँ तक की गाली गलोज तक को भी जायज़ मन जाता है . यहाँ होली पर रंग और गुलाल के आलावा तरह तरह के व्यंजन का भी बोलबाला रहता है गुझिया , दहिवड़े, मठरी और इन् सब से बढ़ कर ठंडई और उसके साथ भांग रंगों के सुरूर को दोगुना कर देती है , रात को होलिका दहन के बाद अगले दिन सुबह रंगों के साथ गीली होली खेली जाती है, और शाम को अबीर और गुलाल से समां सराबोर होता है , उत्तर प्रदेश में वृन्दावन और मथुरा की होली का अपना ही महत्व है , इस त्यौहार को किसानो द्वारा फसल काटने के उत्सव एक रूप में भी मनाया जाता है . गेंहूँ की बालियों को आग में रख कर भूना जाता है और फिर उसे खाते है , होली की अग्नि जलने के पश्चात बची रख को रोग प्रतिरोधक भी माना जाता है. इन सब के अलावा उत्तर प्रदेश के मथुरा, वृन्दावन छेत्रों की होली तो विश्वप्रसिद्ध है. मथुरा में बरसाने की होली प्रसिद्द है बरसना श्री राधा जी का गाँव है जो मथुरा शहर से करीब ४२ किमी अन्दर है , यहाँ एक आनोखी होली खेली जाती अहि जिसका नाम है लट्ठ मार होली बरसाने में ऐसी परंपरा है की श्री कृष्ण के गाँव नंदगाँव के पुरुष बरसाने में घुसने और राधा जी के मंदिर में ध्वज फहराने की कोशिश करते है और बरसाने की महिलाएं उन्हें ऐसा करने से रोकती है और डंडों से पिटती है और अगर कोई मर्द पकड़ जाये तो उसे महिलाओं की तरह श्रींगार करना होता है और सब के समुख नर्त्य करना पड़ता है , फिर इसके अगले दिन बरसाने के पुरुष नंदगाँव जा कर वहाँ की महिलाओं पर रंग डालने की कोशिश करते है, यह होली उत्सव करीब सात दिनों तक चलता है. इसके इलावा एक और उल्लास भरी होली होती है, वो है वृन्दावन की होली यहाँ बनके बिहारी मंदिर की होली और गुलाल कुंद की होली बहुत महत्वपूर्ण है वृन्दावन की होली में पूरा समां प्यार की ख़ुशी से सुगन्धित हो उठता है क्योंकि एईसी मान्यता है की होली पर रंग खेलने की परंपरा श्री राधाजी व श्री कृष्ण जी द्वारा ही शुरू की गई थी.
बंगाल और उड़ीसा की होली
बंगाल में होली को डोल यात्रा व डोल पूर्णिमा कहते है और होली के दिन श्री राधा और कृष्ण की प्रतिमाओं को डोली में बैठाकर पूरे शहर में घुमाते है और औरते उसके आगे नर्त्य करती है यह भी अपने आप में एक अनूठी होली है बंगाल में होली को बसंत पर्व कहते है इसकी शुरुआत रबिन्द्र नाथ टैगोर ने शान्तिनिकेतन में की थी। उड़ीसा में भी होली को डोल पूर्णिमा कहते है और भगवान जगान्नाथ जी की डोली निकाली जाती है।
राजस्थान की होली
यहाँ मुख्यत: तीन प्रकार की होली होती है. माली होली इसमें माली जात के मर्द औरतों पर पानी डालते है और बदले में औरतें मर्दों की लाठियों से पिटाई करती है। इसके अलावा गोदाजी की गैर होली और बीकानेर की डोलची होली भी बेहद खुबसूरत होती हैं.
पंजाब की होली
पंजाब में होली को होला मोहल्ला कहते है और इसे निहंग सिख मानते है। इस मौके पर घुड़सावरी, तलवारबाजी आदि का आयोजन होता है।
हरियाणा की होली
यहाँ की होली भी बरसाने की लट्ठमार होली जैसी ही होती है. बस फर्क सिर्फ इतना है कि यहाँ देवर भाभी को रंगने की कोशिश करते है और बदले में भाभी देवर की लाठियों से पिटाई करती है. यहाँ होली को दुल्हंदी कहते है.
दिल्ली वालों की दिलवाली होली
दिल्ली की होली तो सबसे निराली है क्योंकि राजधानी होने की वजह से यहाँ पर सभी जगह के लोग अपने ढंग होली मानते है जो आपसी समरसता और सौहार्द का स्वरूप है, वैसे दिल्ली में नेताओ की होली की भी खूब धूम होती है,
इसके आलावा बिहार की फगुआ होली , महाराष्ट्र की रंगपंचमी , गोवा की शिमगो (दरअसल कोकण बोली में होली को शिमगो कहते है ), गुजरात की गोविंदा होली, और पश्चिमी पूर्व की बिही जनजाति की होली की धूम भी निराली है.
अब जम कर होली खेलिए और खूब धूम मचाइए जिस रूप में भी आप को होली का उल्लास पसंद हो उस रूप में मैय पर एक बात है पूरे भारत में भले ही होली के कई नाम और कई ढंग हो पर पर्व मनाने का मतलब सिर्फ प्रेम और सौहार्द बढ़ाना और मेल मिलाप ही है तो क्यों ना हम इसे अपने जीवन का सार बना के हर दिन होली मनाये?
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