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भारत की कहानी

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सैयद मदारी समाज: करतब है, कद्रदान नहीं

हो सकता है कि आपको मालूम न हो कि आजादी के तीन दशक बीत जाने के बाद हिन्दी फिल्मों में जब जन आक्रोश को एक्शन का रंग-रूप दिया जाने लगा तो हीरो के ज्यादातर स्टण्ट सैय्यद मदारी ही किया करते। यह और बात है कि मायानगरी में 30 साल से ज्यादा बीताने पर भी इन्हें न शोहरत मिली, न दौलत। कुछ सैय्यद मदारी इसे अपनी बदकिस्मती मानते हैं तो बहुत से पहुंच न होने पर अफसोस जताते हैं।
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मैदान में जीत कर टेबल पर हारी 1971 की जंग!

तीन दिसंबर, 1971 की सर्द शाम। पंजाब के सीमांत जिला फिरोजपुर के अन्तर्गत आती अंतरराष्ट्रीय सीमा चौकी जे.सी.पी (ज्वायंट चैक पोस्ट) हुसैनी वाला। परंपरागत रिट्रीट (झंडा उतारने की रस्म) हो रही थी जिसमें भारत की तरफ से सीमा सुरक्षा बल व पाकिस्तान की तरफ से सतलुज पाक रेंजर्स संयुक्त रुप से अपने-अपने देश का झंडा उतार रहे थे।
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एक जैविक गांव की ऑडिट रिपोर्ट

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दुनिया के बड़े बड़े दादा लोग दुनिया के पर्यावरण को बचाने की कोशिश में लगे हुए हैं. इन कोशिशों से बहुत दूर मध्य प्रदेश के खण्डवा में एक गांव ने पर्यावरण के नाम पर तो नहीं लेकिन लगातार पड़ रहे सूखे और मंहगी होती जिंदगी से पीछा छुड़ाने के लिए प्राकृतिक खेती और नैसर्गिक जीवन को अपना आधार बना लिया. अब मलगांव पर कोई संकट नहीं है. सूखे के बीच उन्होंने प्राकृतिक तरीकों से अपनी जिंदगी तर कर ली है. ...
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देश की सुरक्षा में सिर उठाकर निकल पड़े जवान

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कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच आज भारतीय सैन्य अकादमी में पासिंग आउट परेड सम्पन्न हुई। इसकी सलामी नेपाल थलसेना अध्यक्ष जनरल छत्रमन सिंह गुरूंग ने ली। अकेले उत्तराखण्ड से ही कुल 46 कैडिटों ने भारतीय सेना में कमीशन लिया। जबकि सर्वाधिक संख्या उत्तर प्रदेश के कैडिटों की रही। ...
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नख-शिख नुमाइश में डूबा इटावा

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महाभारत कालीन सभ्यता से जुडे यमुना नदी के तट पर बसे ऐतिहासक इटावा जिले का सांस्कृतिक और धार्मिक एकता का अपना एक अलग ही महत्व है.इटावा महोत्सव के सौ वर्ष पूरा हो गये है। शताब्दी वर्ष को लेकर इटावावासी बेहद खुश नजर आ रहे है. शुभांरभ के दौरान अद्भुत छटा देखने को मिली जिसे लोगों ने महसूस किया....
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54 साल में पहली बार देखा 'कलट्टर'

1100 फिट ऊंचे मैकल पर्वत श्रृंखला पर बसे तुम्मीछोट गांव के लोगों ने 4 नवम्बर 09 को तब पहली बार कलेक्टर (जिलाधिकारी, डीएम) को देखा जब वे मध्यप्रदेश सप्ताह के अंतर्गत ``निवसीड´´ द्वारा आयोजित कृषक प्रशिक्षण में शामिल होने यहां पहुंचे। यह घटना एकबारगी तो उल्लास पैदा करती है कि चलो सुदूर बसे गांव की किसी कलेक्टर ने सुध तो ली। लेकिन अगले ही पल यह सवाल भी उठ खड़ा होता है कि बीते 53 सालों तक तुम्मीछोट जैसे गांवों ने उपेक्षा का जो दर्द सहा है उसके लिये किसे दोषी माना जाये?
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मिड डे मील पर मंहगाई की मनमोहिनी मार

बेतहाशा बढ रही महॅगाई से आम आदमी परेशान है।सरकारों का ध्यान इस ओर बिल्कुल भी नहीं जा रहा है। इतना ही नहीं अपने गाडी बगलों पर करोडों के वारे न्यारे कर रहे नेताओं का ध्यान गरीब बच्चों के मिड डे मील पर भी बिल्कुल नहीं जा रहा है। हालात ये हो रहे है कि भोजन बनाने वाले अब इससे मुक्ति माँग रहे है।कारण साफ है पाँच बर्षो में इसकी लागत में मामूली वृद्वि भी नहीं की गई है।
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अडनी महा ठगिनी हम जानी

"यह जंगल हमारे बुजुर्गों का लगाया हुआ है, इसे हम कटने नहीं देंगे! हमने 10 फुट रास्ता सरकार से मांगा था, जो हमें नहीं मिला, जबकि अडनी समूह को पूरा जंगल दिया जा रहा है।" यह कहना है महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले ताड़ोबा अंधेरी बाघ अभ्यारण्य के बफर क्षेत्र के गांव मामला के सरपंच भारत काटवले का। उल्लेखनीय है कि चंद्रपुर शहर से सटे घने जंगल ताडोबा अंधेरी टाइगर रिजर्व के लिए एक ढाल की तरह हैं और ये जंगल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह एक दक्षिणवर्ती कॉरीडोर का हिस्सा है जो बाघों के प्रजनन एवं उनके अस्तित्व के लिए काफी अहम् है।
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पांच नदियों का संगम फिर भी उपेक्षित होने का गम

दुनिया में दो नदियों के संगम तो कई स्थानों पर है जब कि तीन नदियों के दुर्लभ संगम प्रयागराज,इलाहबाद को धार्मिक दृष्टि से अत्यत महत्वपूर्ण समझा जाता है लेकिन आश्चर्य की बात यह हैकि पांच नदियों के इस संगम स्थल को त्रिवेणी जैसा धार्मिक महत्व नहीं मिल पाया है.प्रयाग का त्रिवेणी संगम पूर्णतः धार्मिक मान्यता पर आधारित है क्यो कि धर्मग्रन्थों में वहां गंगा तथा यमुना के अलावा अदृश्य सरस्वती नदी को भी स्वीकारा गया है,यह माना जाता है कि कभी सतह पर बहने वाली सरस्वती नदी अब भूमिगत हो चली है बहराहल तीसरी काल्पनिक नदी को मान्यता देते हुये त्रिवेणी संगम का जितना महत्व है उतना साक्षात पांच नदियों के संगम को प्राप्त नहीं हैं.
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कितना बदल गया कश्मीर

यह अविश्वसनीय भले ही लगे परन्तु है सत्य। श्रीनगर चार वर्षों में जब मैं पिछली बार यहां आया था इतना अधिक बदल गया है कि पहचान पाना कठिन है। नए भव्य हवाई अड्डे से होटल का लगभग दस किलोमीटर का फासला है, जहां आधुनिक निर्माण ध्यान आकृष्ट करता है। ऐसा लगता है कि दिल्ली के समीप स्थित नोएडा-सरीखा एक और नगर अस्तित्व में आ रहा है। वृक्ष निर्ममता से काटे गए हैं और चिर परिचित खडंजे खोद दिए गए हैं ताकि आकर्षक खुली सड़कें बन सकें। सड़क के साथ-साथ जो प्राचीरें थीं वे ढहा दी गई हैं और मलबा अभी भी वहां पड़ा है, जिसे सभी देख सकते हैं। संभवत: कुछ नया और आधुनिक उसका स्थान लेगा। मैंने अपने होटल तक का जो सफर तय किया, उसमें मुझे वे पुरानी कश्मीरी घर नहीं दिखे, जहां से महिलाएं अपने लम्बे सामान्य वस्त्रों से आने वाले पर्यटकों को निहारती थी।
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सुदर्शन का (कु) दर्शन
जबसे आरएसएस के लोगों की आतंकवादी घटनाओं में संलिप्तता सामने आयी है, तब से आरएसएस के नेता बौखला गए हैं। इस बौखलाहट में ही शायद संघ के इतिहास में पहली बार हुआ है कि इसके स्वयंसेवक विरोध प्रदर्शन करने के लिए सड़कों पर उतरे। इसी बौखलाहट में आरएसएस के एक्स चीफ केएस सुदर्शन का मानसिक संतुलन बिगड़ गया और सोनिया गांधी के बारे में ऐसे शब्द बोल दिए, जिन्हें एक विकृत मानसिकता का आदमी ही बोल सकता है।...
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सीआईए नहीं केजीबी एजंट कहिए जनाब
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व सरसंघचालक ने 10 नवंबर को सोनिया गांधी पर सीआईए एजंट होने का आरोप लगाकर सनसनी पैदा कर दिया है. पूरी की पूरी कांग्रेस उत्तेजित है और संघ भी बैकफुट पर चला गया है. सुदर्शन के आस पास के लोगों का कहना है कि सुदर्शन जी भुलक्कड़ हो गये हैं और उन्हें कुछ ठीक से याद नहीं रहता. शायद इसीलिए उन्होंने इतनी बड़ी चूक कर दी. ...
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सोनिया का सच जान बेकाबू क्यों होते हो?
एक बार फिर लोकतंत्र पर आपातकाल मंडरा पड़ा है. राजमाता सोनिया गांधी के सिपहसालारों ने कांग्रेसी गुण्डों, माफियाओं और लोकतंत्र के हत्यारों का आह्वान किया है कि वह देशभर में संघ कार्यालयों पर धावा बोल दे. इसका तत्काल प्रभाव हुआ और कांग्रेसी गुण्डों ने संघ के दिल्ली मुख्यालय पर धावा भी बोल दिया. ठीक वैसे ही जैसे इंदिरा गांधी की मौत के बाद सिखों को निशाना बनाया गया था. हिंसक और अलोकतातंत्रिक मानसिकता से ग्रस्त कांग्रेसी सोनिया का सच जानकर आखिर इस तरह बेकाबू क्यों हो रहे हैं?...
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नये निजाम के दामन पर है ज्यादा बड़ा दाग
मुंबई। महाराष्ट्र के नए निजाम भी कोई दूध के धुले नहीं हैं। कांग्रेस आलाकमान ने अशोक चव्हाण को फर्जीवाड़े से फ्लैट पाने के आरोप में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री की गद्दी से हटा दिया। लेकिन नए मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण भी उसी तरह के फर्जीवाड़े में गले तक डूबे हुए हैं। उन्होंने जितने बड़े बड़े झूठ बोलकर सरकार से फ्लैट हथियाए हैं वे कांग्रेस के लिए ज्यादा दागदार हैं।...
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अजमेर चार्जशीट और संघी उछल-कूद
बढ़ते पैमाने पर इसके साक्ष्य सामने आ रहे हैं कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आर एस एस) से जुड़े लोगों का आतंकवादी हमलों में हाथ रहा है। इन हालात में आर एस एस इस पुराने सूत्र पर चल रहा लगता है कि हमला ही सबसे अच्छा बचाव है। उसने 10 नवंबर को देशव्यापी विरोध कार्रवाइयों का आह्वान किया है। इन कार्रवाइयों में संघ के शीर्ष नेताओं के शामिल होने की बात कही जा रही है। बहरहाल, इसकी चर्चा हम जरा बाद में करेंगे।...
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अपने होने पर ही हैरान
‘चुप्पी-चुप्पी नहीं नहीं, बोलेंगे अब सभी-सभी’ इन्हीं नारों से दाहोद (गुजरात) का सीनियर रेलवे संस्थान परिसर 31 अक्टूबर को पूरे दिन गूंजता रहा। यहां गुजरात के बड़ोदरा, पंचमहल, सुरत, भड़ूच, डांग, बालसाड और साबरकांठा जिले से लगभग तीन हजार के आस पास विमुक्त एवं घुमंतू समाज से ताल्लुक रखने वाले लोग इकट्ठे हुए थे। मौका था, अधिकार अभियान की घोषणा का। उस समाज के लिए जो इस लोकतांत्रिक देश में अधिकार का अर्थ अभी तक समझ नहीं पाएं हैं। ...
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गोली लगने के बाद क्या गांधी ने कहा था- हे राम ?
यह एक ऐसा सवाल है जिस पर अब विवाद होने लगा है. 30 जनवरी 1948 को क्या जब महात्मा गांधी को नाथूराम गोडसे ने गोली मारी तो महात्मा गांधी ने अपने मुंह से हे! राम का संबोधन किया था? उस वक्त घटनास्थल पर मौजूद रहे एक प्रत्यक्षदर्शी के डी मदान का कहना है कि "मैंने नहीं सुना था कि उन्होंने हे राम कहा था या नहीं."...
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भद्दा और बेदम रहा संघ का विरोध प्रदर्शन
स्कूल जाते बच्चों के भी हाथ में भगवा थमाकर भले ही संघ ने शक्ति प्रदर्शन की भरपूर कोशिश की हो लेकिन 10 नवम्बर का दिन उसके इतिहास में कोई बडी घटना के रूप में याद नहीं किया जायेगा। हॉ हम बात कर रहे है राजस्थान के भरतपुर जिला मुख्यालय की जहॉ देश भर की ही तरह हिन्दुवादी संघटनों ने अपने उपर लग रहे ‘भगवा आतंकवाद’ के आरोपों के विरोध में शक्ति प्रदर्शन किया था। भरतपुर जहॉ संघ प्रचारक क रूप में भाजपा के पीएमइन वेंटिग लालकृष्ण आडवानी ने अपनी सेवाऐं दी है संघ का ये विरोध प्रदर्शन एक दम भददा और हल्का रहा।...
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एनसीपी के 'दादा' का दांव
महाराष्ट्र में कांग्रेस में परिवर्तन हुआ तो राष्ट्रवादी कांग्रेस ने भी अपने पत्ते खोल दिये. राज्य में लंबे समय से राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के भीतर चल रही सत्ता के दावेदारी पर एनसीपी ने आखिरकार प्रदेश की प्रशासनिक कमान अपनी ओर से शरद पवार के भतीजे अजीत पवार को सौंप दी है. अब गुरुवार को शाम साढ़े चार बजे पृथ्वीराज चव्हाण के साथ अजीत "दादा" पवार उपमुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे....
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पीएमओ वाले पृथ्वीराज
महाराष्ट्र के नये मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण यूपीए सरकार पार्ट वन और पार्ट टू में बतौर पीएमओ मिनिस्टर जाने जाते हैं. प्रधानमंत्री कार्यालय में रहते हुए भी उन्होंने कभी ताकतवर होने का दंभ नहीं पाला और चुपचाप काम करते रहे. बिट्स पिलानी से बीई और बर्कले विश्वविद्यालय से एमएस की डिग्री हासिल करनेवाले पृथ्वीराज की राजनीतिक कमेस्ट्री ने उनके सार्वजनिक जीवन में पहली बार इतना गाढ़ा रंग उड़ेला है....
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सुलग रहा है मेरठ 'हिन्दुस्तान'
एक ओर हिन्दुस्तान अखबार अपनी अलग कंपनी बनाकर अखबार को चमकाने और अखबार का विस्तार करने में लगा है वहीं दूसरी ओर हिन्दुस्तान के विभिन्न संस्करणों में हालात ठीक नहीं है. हिन्दुस्तान के मेरठ संस्करण में इन दिनों इस्तीफे दिये जा रहे हैं लेकिन प्रचारित किया जा रहा है कि जो आफिस नहीं आ रहे हैं वे छुट्टी पर चले गये हैं....
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आलोक तोमर के बगल में बसे किशोर मालवीय
सीएनईबी में पहले से एक सलाहकार संपादक थे- आलोक तोमर. अब दूसरे सलाहकार संपादक भी वहां नियुक्त हो गये हैं किशोर मालवीय. उन्होंने सीएनईबी चैनल के साथ बतौर कंसल्टिंग एडिटर अपनी नई पारी की शुरुआत की है। सीएनईबी से पहले वे ‘वायस ऑफ इंडिया’ न्यूज चैनल के साथ जुड़े हुए थे। उन्होंने करीब दो दशक के कॅरियर में देश के नामी-गिरामी मीडिया संस्थानों में कई जिम्मेदारियां निभाईं हैं।...
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सुरक्षा परिषद की छांव में खेती पर दांव
अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने संसद में दिये गये अपने भाषण में भारत से मिले प्यार की भूरि भूरि प्रशंसा जरूर की लेकिन अपनी व्यावसायिक मजबूरियों को छिपा नहीं सके. बराक ओबामा ने संसद के संयुक्त अधिवेशन को संबोधित करते हुए जहां एक ओर भारत को महाशक्ति करार देकर उसके लिए संयुक्त राष्ट्र में स्थायी सदस्यता को अपना समर्थन दिया वहीं भारत और अमेरिका द्वारा मिलकर खेती के क्षेत्र में एक और हरित क्रांति के आगाज की घोषणा की....
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आतंक नहीं कश्मीर केन्द्रित हुई ओबामा यात्रा
रविवार की देर शाम भारतीय प्रधानमंत्री द्वारा आयोजित भोज में ओमर अब्दुल्ला के शामिल होने से जो आशंका पैदा हुई थी वह सोमवार को हैदराबाद हाउस में और प्रबल रूप में सामने आ गयी जब प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अमेरिकी राष्ट्रपति की उपस्थिति में स्वीकार किया कि वे पाकिस्तान से बात करते वक्त "के" शब्द पर बात करने से नहीं कतराते हैं....
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भारत से धंधा, पाक को चंदा
अमेरिका के राष्ट्रपति बराक हुसैन ओबामा ने अपना तीन दिवसीय दौरा पूरा कर लिया. मुंबई उतरकर दिल्ली दरबार तक उनकी दस्तक भारत पर अमेरिका के मजबूत पकड़ की मिसाल बन गया. निश्चित रूप से उनका दौरा भारत के लिए उतना महत्वपूर्ण नहीं जितना खुद अमेरिका के लिए है. मंदी के दौर से जूझ रहे अमेरिका को "कारपोरेट" जगत का धंधा दिलाने के लिए उन्होंने न केवल भारत को महाशक्ति करार दे दिया बल्कि सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता का समर्थन भी कर दिया....
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