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भारत की कहानी

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धरती के स्वर्ग में रेल का चमत्कार

बुधवार को भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अनंतनाग से काजीगुंड के बीच नवनिर्मित रेलवे लाइन का उद्गाटन किया. अनंतनाग से काजीगुंड के बीच रेलवे लाइन के उद्घाटन से अब काजीगुंड से बारामुला तक 119 किलोमीटर कश्मीर ट्रेन से जुड़ गया है. हालांकि अभी भी यहां सिर्फ स्थानीय लोग ही कश्मीर के अंदर यात्रा कर सकते हैं और देश के दूसरे रेल नेटवर्क से इसका कोई संपर्क स्थापित नहीं हो पाया है लेकिन काजीगुंड से ऊधमपुर के बीच रेल संपर्क कायम हो जाने से पूरी घाटी ट्रेन के रास्ते शेष देश से जुड़ जाएगी.
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जाति की जड़ों को काटतीं औरतें

पूरे देश में कुल आबादी का एक-चौथाई हिस्सा दलितों और आदिवासियों का है मगर उनके पास खेतीलायक जमीन का हिस्सा महज 17.9 प्रतिशत ही है। अब अगर छोटे और मझोले किसानों पर नजर डाले तो 87 प्रतिशत दलित और 65 प्रतिशत आदिवासी हैं। इसी तरह दुनिया की कुल आबादी का करीब आधा हिस्सा औरतें हैं। कुल मेहनत की बड़ी हिस्सेदारी औरतें निभाती हैं। फिर भी उन्हें कुल आमदनी का 10 वां हिस्सा मिलता है। फिर भी उन्हें कुल संपति का 1 वां हिस्सा दिया जाता है। उस्मानाबाद में अनुसूचित जाति की आबादी 15 प्रतिशत से भी ज्यादा हैं। मगर 85 प्रतिशत से भी ज्यादा परिवार अपनी रोजीरोटी के लिए यह या तो सवर्णों के खेतों में काम करते हैं या फिर चीनी कारखानों के वास्ते गन्ने काटने के लिए पलायन करते हैं। स्थायी आजीविका न होने से उनके सामने जीने के कई सवाल खड़े रहते हैं। मराठवाड़ा में ‘कुल कितनी जमीनों में से कितना अन्न उगाया है’ के हिसाब से किसी आदमी की सामाजिक-आर्थिक स्थितियां बनती-बिगड़ती हैं।
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आरटीआई का अपना-अपना इस्तेमाल

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सूचना अधिकार कानून के चार साल पूरे होने पर दोनों तरह की समीक्षा सामने आ रही है. कुछ लोग इसे नागरिक को सांसद का दर्जा देनेवाला कानून बता रहे हैं तो कुछ मानते हैं कि इस अधिकार को नाकाम करने के लिए नौकरशाही ने ढाल विकसित कर ली है. दोनों ही बातों में सच्चाई है. आरटीआई का उपयोग कुछ लोग निहित स्वार्थ पूर्ति के लिए जरूर कर रहे हैं लेकिन नागरिक समाज के एक बड़े हिस्से को इसका व्यापक लाभ भी मिल रहा है....
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पांच पंच मिल कीजै काज, हारे जीते होय न लाज

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बाड़मेर। राजौ और पूसाराम, एक ही दुनिया के दो किस्से हैं, दो किरदार हैं। इधर है अपनी अस्मत गंवा चुकी राजौ, जो गांव के विरोध पर भी अपनी अर्जी अदालत तक दे तो आती है, मगर लौटकर गांव से छूट जाती है। उधर है कमजोर दलित होने का दर्द झेलने वाला पूसाराम, जो डर के मारे अपनी गुहार अदालत से वापिस ले आता है, और गांव से जुड़ जाता है। यह दोनों ही मानते हैं कि थाने के रास्ते अदालत आना-जाना और इंसाफ की लड़ाई लड़ना तो फिर भी आसान है, मगर समाज के बगैर रह पाना बहुत मुश्किल है।...
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चुनाव महाराष्ट्र में लेकिन गड़े मुर्दे उखड़ रहे हैं गुजरात में

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जब भी कभी चुनाव का आगाज होता है मोदी के गोधरा दंगों का जिन्‍न बोतल से अक्‍सर बाहर आ जाता है लेकिन इस बार चुनाव का मौसम आया तो गोधरा नहीं बल्कि गुजरात में इन दिनों फर्जी मुठभेड़ का जिन्‍न छाया हुआ है। महाराष्‍ट्र में विधानसभा चुनाव का आगाज हो चुका है। सभी जानते हैं कि महाराष्‍ट्र में भारी तादाद में गुजराती बसे हैं इसीलिए गुजराती वोटों को रिझाने के लिए कांग्रेस के वरिष्‍ठ नेताओं को आदेश दिए है कि पुरानी ढपली और पुराने राग एक बार फिर छेड़ दो।...
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मीना और महादेव की मेहर

भरतपुर जिले के गाँव नगला सिरसिया की पहचान आज देश की सीमाओं से भी आगे निकल गई है। इस गाँव में रहने वाले धाकड़ जाति के महिला ,पुरूषों ने अपने स्वरोजगार के काम से उजडते गाँव को एक बार फिर से मानों आबाद कर दिया है,जो इस बात का जीवंत प्रमाण है कि गाँव से शहरों की ओर होने वाला पलायन किसी समस्या का समाधान न होकर उसे बढाता ही है।
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टाईम बम की टिक टिक पर टिका पंजाब

मई में रविदासी समुदाय से जुड़े संत रामानंद की हत्या के बाद पंजाब में जिस प्रकार रविदासी समाज के लोगों ने जम कर उत्पात मचाया व तीन दिन तक आगजनी और तोड़फोड़ का उग्र प्रर्दशन किया उसके चलते वे डेरे भी लामबंद होने शुरू हो गए हैं जो सिखों में नापसंदगी के कारक बन चुके हैं, चूंकि पंजाब सरकार की भूमिका भी उस उग्र प्रदर्शन के सामने घुटने टेकने वाली थी इसलिए कई डेरे सामूहिक प्रदर्शन के तिलिस्म को कैश करने की भूमिका निभाने की तैयारी में हैं। पंजाब में सिखी के समक्ष जो संकट इस समय आया दिख रहा है वो पहले की कई परीक्षाओं पर भारी पड़ता दिख रहा है जिसका खमियाजा पंजाब को ही भुगतना होगा।
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वनों से कटे हुए अधिकार

वनाधिकार कानून, 2005 को पारित करते समय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने यह माना था कि आजादी के 6 दशकों तक आदिवासियों के साथ ऐतहासिक अन्याय होता रहा है और इस कानून के बाद उन्हें न्याय मिल पाएगा। लेकिन दक्षिण राजस्थान के वनों में वनाधिकार का हाल सरकार की दोहरी मानसिकता दर्शाता है। राजस्थान के उदयपुर जिले के गावों का दौरा करके लौटे शिरीष खरे की रिपोर्ट।
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सुबह होने में अभी देर है

अजमेर स्टेशन उतरते ही भंवरीबाई को मोबाइल लगाया, वह लड़खड़ाती हुई आवाज में बोलीं- ‘‘आप तो औरतों की आवाज लिखने के लिए आ रहे हैं न, सीधे अजमेरी गेट थाने चले आइए।’’ मैंने अपने भीतर की लड़खड़ाहट को साधते हुए कहा- ‘‘लेकिन मामला क्या है...’’ (उधर से) ‘‘मामला थाने से ही समझ लेना। हम तो 50 साल की बूढ़ी औरतें हैं, आप नए लड़के हो, हमें तो दो-चार थप्पड़ के बाद बिठा दिया है, इसलिए आना चाहो तो ही आना।’’
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राजस्थान के (अ) नाथ सपेरे

एक ओर जहाँ देश में विकास दर,मानव विकास सूचकांक,शैक्षिक विकास और नारी के विकास जैसे भारी भरकम शव्दों के आँकडों लोगों के सामने रखे जा रहे है। वही दूसरी ओर देश में अपना परम्परागत पारिपारिक जीवन यापन के तरीकों को बदलने के लिए कुछ लोग मजबूर हो रहे है। वो मानव समाज के साथ हमारे पर्यावरण के भी मित्र हुआ करते थे। मगर अब सरकारी और सामाजिक उपेक्षा के चलते उन्होंने अपनी सोच के अनुसार अपने जीवन को बदल लिया है। उनके लिए मजबूरीवश किया अपना विकास ही सही मायनों खुद का विकास है। राजस्थान के नाथ सपेरे समाज के जीवन में झाँकती एक रिपोर्टः
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सुदर्शन का (कु) दर्शन
जबसे आरएसएस के लोगों की आतंकवादी घटनाओं में संलिप्तता सामने आयी है, तब से आरएसएस के नेता बौखला गए हैं। इस बौखलाहट में ही शायद संघ के इतिहास में पहली बार हुआ है कि इसके स्वयंसेवक विरोध प्रदर्शन करने के लिए सड़कों पर उतरे। इसी बौखलाहट में आरएसएस के एक्स चीफ केएस सुदर्शन का मानसिक संतुलन बिगड़ गया और सोनिया गांधी के बारे में ऐसे शब्द बोल दिए, जिन्हें एक विकृत मानसिकता का आदमी ही बोल सकता है।...
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सीआईए नहीं केजीबी एजंट कहिए जनाब
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व सरसंघचालक ने 10 नवंबर को सोनिया गांधी पर सीआईए एजंट होने का आरोप लगाकर सनसनी पैदा कर दिया है. पूरी की पूरी कांग्रेस उत्तेजित है और संघ भी बैकफुट पर चला गया है. सुदर्शन के आस पास के लोगों का कहना है कि सुदर्शन जी भुलक्कड़ हो गये हैं और उन्हें कुछ ठीक से याद नहीं रहता. शायद इसीलिए उन्होंने इतनी बड़ी चूक कर दी. ...
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सोनिया का सच जान बेकाबू क्यों होते हो?
एक बार फिर लोकतंत्र पर आपातकाल मंडरा पड़ा है. राजमाता सोनिया गांधी के सिपहसालारों ने कांग्रेसी गुण्डों, माफियाओं और लोकतंत्र के हत्यारों का आह्वान किया है कि वह देशभर में संघ कार्यालयों पर धावा बोल दे. इसका तत्काल प्रभाव हुआ और कांग्रेसी गुण्डों ने संघ के दिल्ली मुख्यालय पर धावा भी बोल दिया. ठीक वैसे ही जैसे इंदिरा गांधी की मौत के बाद सिखों को निशाना बनाया गया था. हिंसक और अलोकतातंत्रिक मानसिकता से ग्रस्त कांग्रेसी सोनिया का सच जानकर आखिर इस तरह बेकाबू क्यों हो रहे हैं?...
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नये निजाम के दामन पर है ज्यादा बड़ा दाग
मुंबई। महाराष्ट्र के नए निजाम भी कोई दूध के धुले नहीं हैं। कांग्रेस आलाकमान ने अशोक चव्हाण को फर्जीवाड़े से फ्लैट पाने के आरोप में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री की गद्दी से हटा दिया। लेकिन नए मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण भी उसी तरह के फर्जीवाड़े में गले तक डूबे हुए हैं। उन्होंने जितने बड़े बड़े झूठ बोलकर सरकार से फ्लैट हथियाए हैं वे कांग्रेस के लिए ज्यादा दागदार हैं।...
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अजमेर चार्जशीट और संघी उछल-कूद
बढ़ते पैमाने पर इसके साक्ष्य सामने आ रहे हैं कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आर एस एस) से जुड़े लोगों का आतंकवादी हमलों में हाथ रहा है। इन हालात में आर एस एस इस पुराने सूत्र पर चल रहा लगता है कि हमला ही सबसे अच्छा बचाव है। उसने 10 नवंबर को देशव्यापी विरोध कार्रवाइयों का आह्वान किया है। इन कार्रवाइयों में संघ के शीर्ष नेताओं के शामिल होने की बात कही जा रही है। बहरहाल, इसकी चर्चा हम जरा बाद में करेंगे।...
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अपने होने पर ही हैरान
‘चुप्पी-चुप्पी नहीं नहीं, बोलेंगे अब सभी-सभी’ इन्हीं नारों से दाहोद (गुजरात) का सीनियर रेलवे संस्थान परिसर 31 अक्टूबर को पूरे दिन गूंजता रहा। यहां गुजरात के बड़ोदरा, पंचमहल, सुरत, भड़ूच, डांग, बालसाड और साबरकांठा जिले से लगभग तीन हजार के आस पास विमुक्त एवं घुमंतू समाज से ताल्लुक रखने वाले लोग इकट्ठे हुए थे। मौका था, अधिकार अभियान की घोषणा का। उस समाज के लिए जो इस लोकतांत्रिक देश में अधिकार का अर्थ अभी तक समझ नहीं पाएं हैं। ...
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गोली लगने के बाद क्या गांधी ने कहा था- हे राम ?
यह एक ऐसा सवाल है जिस पर अब विवाद होने लगा है. 30 जनवरी 1948 को क्या जब महात्मा गांधी को नाथूराम गोडसे ने गोली मारी तो महात्मा गांधी ने अपने मुंह से हे! राम का संबोधन किया था? उस वक्त घटनास्थल पर मौजूद रहे एक प्रत्यक्षदर्शी के डी मदान का कहना है कि "मैंने नहीं सुना था कि उन्होंने हे राम कहा था या नहीं."...
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भद्दा और बेदम रहा संघ का विरोध प्रदर्शन
स्कूल जाते बच्चों के भी हाथ में भगवा थमाकर भले ही संघ ने शक्ति प्रदर्शन की भरपूर कोशिश की हो लेकिन 10 नवम्बर का दिन उसके इतिहास में कोई बडी घटना के रूप में याद नहीं किया जायेगा। हॉ हम बात कर रहे है राजस्थान के भरतपुर जिला मुख्यालय की जहॉ देश भर की ही तरह हिन्दुवादी संघटनों ने अपने उपर लग रहे ‘भगवा आतंकवाद’ के आरोपों के विरोध में शक्ति प्रदर्शन किया था। भरतपुर जहॉ संघ प्रचारक क रूप में भाजपा के पीएमइन वेंटिग लालकृष्ण आडवानी ने अपनी सेवाऐं दी है संघ का ये विरोध प्रदर्शन एक दम भददा और हल्का रहा।...
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एनसीपी के 'दादा' का दांव
महाराष्ट्र में कांग्रेस में परिवर्तन हुआ तो राष्ट्रवादी कांग्रेस ने भी अपने पत्ते खोल दिये. राज्य में लंबे समय से राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के भीतर चल रही सत्ता के दावेदारी पर एनसीपी ने आखिरकार प्रदेश की प्रशासनिक कमान अपनी ओर से शरद पवार के भतीजे अजीत पवार को सौंप दी है. अब गुरुवार को शाम साढ़े चार बजे पृथ्वीराज चव्हाण के साथ अजीत "दादा" पवार उपमुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे....
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पीएमओ वाले पृथ्वीराज
महाराष्ट्र के नये मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण यूपीए सरकार पार्ट वन और पार्ट टू में बतौर पीएमओ मिनिस्टर जाने जाते हैं. प्रधानमंत्री कार्यालय में रहते हुए भी उन्होंने कभी ताकतवर होने का दंभ नहीं पाला और चुपचाप काम करते रहे. बिट्स पिलानी से बीई और बर्कले विश्वविद्यालय से एमएस की डिग्री हासिल करनेवाले पृथ्वीराज की राजनीतिक कमेस्ट्री ने उनके सार्वजनिक जीवन में पहली बार इतना गाढ़ा रंग उड़ेला है....
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सुलग रहा है मेरठ 'हिन्दुस्तान'
एक ओर हिन्दुस्तान अखबार अपनी अलग कंपनी बनाकर अखबार को चमकाने और अखबार का विस्तार करने में लगा है वहीं दूसरी ओर हिन्दुस्तान के विभिन्न संस्करणों में हालात ठीक नहीं है. हिन्दुस्तान के मेरठ संस्करण में इन दिनों इस्तीफे दिये जा रहे हैं लेकिन प्रचारित किया जा रहा है कि जो आफिस नहीं आ रहे हैं वे छुट्टी पर चले गये हैं....
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आलोक तोमर के बगल में बसे किशोर मालवीय
सीएनईबी में पहले से एक सलाहकार संपादक थे- आलोक तोमर. अब दूसरे सलाहकार संपादक भी वहां नियुक्त हो गये हैं किशोर मालवीय. उन्होंने सीएनईबी चैनल के साथ बतौर कंसल्टिंग एडिटर अपनी नई पारी की शुरुआत की है। सीएनईबी से पहले वे ‘वायस ऑफ इंडिया’ न्यूज चैनल के साथ जुड़े हुए थे। उन्होंने करीब दो दशक के कॅरियर में देश के नामी-गिरामी मीडिया संस्थानों में कई जिम्मेदारियां निभाईं हैं।...
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सुरक्षा परिषद की छांव में खेती पर दांव
अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने संसद में दिये गये अपने भाषण में भारत से मिले प्यार की भूरि भूरि प्रशंसा जरूर की लेकिन अपनी व्यावसायिक मजबूरियों को छिपा नहीं सके. बराक ओबामा ने संसद के संयुक्त अधिवेशन को संबोधित करते हुए जहां एक ओर भारत को महाशक्ति करार देकर उसके लिए संयुक्त राष्ट्र में स्थायी सदस्यता को अपना समर्थन दिया वहीं भारत और अमेरिका द्वारा मिलकर खेती के क्षेत्र में एक और हरित क्रांति के आगाज की घोषणा की....
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आतंक नहीं कश्मीर केन्द्रित हुई ओबामा यात्रा
रविवार की देर शाम भारतीय प्रधानमंत्री द्वारा आयोजित भोज में ओमर अब्दुल्ला के शामिल होने से जो आशंका पैदा हुई थी वह सोमवार को हैदराबाद हाउस में और प्रबल रूप में सामने आ गयी जब प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अमेरिकी राष्ट्रपति की उपस्थिति में स्वीकार किया कि वे पाकिस्तान से बात करते वक्त "के" शब्द पर बात करने से नहीं कतराते हैं....
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भारत से धंधा, पाक को चंदा
अमेरिका के राष्ट्रपति बराक हुसैन ओबामा ने अपना तीन दिवसीय दौरा पूरा कर लिया. मुंबई उतरकर दिल्ली दरबार तक उनकी दस्तक भारत पर अमेरिका के मजबूत पकड़ की मिसाल बन गया. निश्चित रूप से उनका दौरा भारत के लिए उतना महत्वपूर्ण नहीं जितना खुद अमेरिका के लिए है. मंदी के दौर से जूझ रहे अमेरिका को "कारपोरेट" जगत का धंधा दिलाने के लिए उन्होंने न केवल भारत को महाशक्ति करार दे दिया बल्कि सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता का समर्थन भी कर दिया....
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