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भारत की कहानी

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गोबर सने हाथ कम्प्यूटर के कीबोर्ड पर

बात २००७ की है, आम भारतीय ग्रामीण महिलाओं की तरह २४ वर्षीय मीरा सैनी को भी नहीं मालूम था कि उनका कैरियर किस तरफ जा रहा है. राजस्थान के एक दूरदराज के गाँव बगड़ की मीरा सैनी वैसे तो एक स्कूल टीचर थी, लेकिन उन्हें हमेशा ज़िन्दगी उत्साहविहीन सी लगती थी. वे हर पल कुछ नया और अलग करने की सोच में रहती थीं. लेकिन ग्रामीण परिवेश के सीमित संसाधन और परम्परागत सामाजिक बंदिशें उनकी सोच के आड़े आ रही थी. घर की दहलीज को पार करना उनके लिए आसान नहीं था, लेकिन आज मीरा सैनी के अलावा बगड़ गांव की महिलाएं कम्पयूटर की-बोर्ड पर महारथ हासिल कर देश और दुनिया के ग्राहको को बीपीओ सेवाएं दे रही हैं और अब वे अपने समुदाय की रोल मॉडल बन चुकी हैं।
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मथुरा के ग्वाल-बाल, हार्वर्ड के लाल

मथुरा से 22 किलोमीटर की दूरी पर राया, सादाबाद रोड़ पर एक गांव है रुजगेला। हो सकता है मथुरा में रहने वाले बहुत सारे लोगों को इस गांव का नाम पता ना हो, लेकिन इस गांव की शिक्षा को लेकर सात समुन्दर पार हावर्ड बिजनेस स्कूल के कुछ छात्र बेहद गंभीर हैं। हार्वर्ड स्कूल के इन विद्यार्थियों ने मिलकर `इंडिया स्कूल फंड´ के नाम से एक संस्था बनाई है। इस संस्था के माध्यम से एचबीएस के छात्रों का उद्देश्य भारतीय गांवों में अच्छी शिक्षा पहुंचाना है। इस संस्था की सहायता से पहला स्कूल लगभग तीन साल पहले रुजगेला में `गजराज विद्या निकेतन´ के नाम से प्रारंभ किया गया।
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बूझो न बूझो अबूझमाड़

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नक्सलियों से सीधी लड़ाई के लिए सरकार ने तीन दशक से बंद अबूझमाड़ का मोर्चा खोल दिया है. वस्त्रविहीन व कंदमूल खाकर जीने वाले आदिम गोंड़ जाति के बीच अब आम लोगों का सीधा सम्पर्क हो सकेगा. इससे उनकी जीवन शैली और संस्कृति पर ख़तरे तो दिखाई दे रहे हैं, लेकिन सरकार को अपने इस फैसले के पीछे नक्सली हिंसा की आग से झुलस रहे बस्तर में शांति की नई बयार बहने की उम्मीद भी दिखाई दे रही है. वैसे तो लोग देश में कहीं भी आने-जाने के लिए आज़ाद हैं लेकिन बस्तर का अबूझमाड़ दुर्गम पहाड़ियों और घने जंगलों से घिरा एक ऐसा गलियारा है जहां पिछले 3 दशकों से आम लोगों को जाने की मनाही थी....
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भिंडरावाला: हकीकत के नजरिये से मिथक का आंकलन

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आप्रेशन ब्लू स्टार को हुए एक चौथाई सदी बीत गई है। इस बीच बहुत कुछ घटित हो चुका है। और तो और इस दौरान जवान हुई पीढ़ी के लिए इसके सारे संदर्भ सुने सुनाए या पढ़े पढ़ाए हैं। कोई शंका नहीं कि इस आप्रेशन के नायक व खलनायक दोनों ही संत जरनैल सिंह भिंडरावाले ही कहे जाएंगे। आज की परिस्थितियों में पंजाब व देश के लिए जरनैल सिंह भिंडरावाले आखिर कितनी प्रासंगिक शख्सियत है? इसकी व्याख्या तो सभी संबंधित पक्ष अपनी-अपनी दलीलों सहित अलग-अलग ही करेंगे पर पंजाब को नफरत व अवसाद की भट्टी में झोंकने वाले इस आतंकी नेता के जीवन-मृत्यु को लेकर भी अजीब किस्म के विरोधाभास हैं।...
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कोई नहीं शर्मिंदा है, भिण्डरावाला जिन्दा है

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6 जून 1984. तीन दिन से चल रहा आपरेशन ब्लूस्टार के खात्मे का दिन. साथ ही अलग सिख राष्ट्र की मांग करनेवाले भिण्डरावाले के भी खात्मे का दिन. आज आपरेशन ब्लूस्टार के 25 साल पूरे हो गये. हो सकता है लोग यह समझते हों कि पंजाब में अलग सिख राष्ट्र की मांग खत्म हो गयी हो और जनरैल सिंह भिण्डरावाले अतीत के गर्त में दफन हो गया है. लेकिन ऐसा है नहीं. पंजाब में सिखों की आज भी ऐसी बड़ी तादात है जिनके िदलों में भिण्डरावाला के लिए इज्जत है. वे उसे सिक्खी का स्वाभिमान मानते हैं. वे मानते हैं कि भिण्डरावाला मरा नहीं है बल्कि हजार-हजार रूपों में पैदा हुआ है और अलग सिख राष्ट्र के सपने को साकार करने के लिए प्रयत्नशील है. अनिल पाण्डेय ने पूरे पंजाब का दौरा किया और यह रिपोर्ट तैयार की है....
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कचरे के ढेर में गुम होती बेटियाँ

प्रतिभा पाटिल, सोनिया गांधी, मीरा कुमार, सुषमा स्वराज कुछ ऐसे नाम हैं जो भारत में महिलाओं को सम्मान के शिखर पर पहुंचाते हैं. लेकिन जिस देश के शीर्ष पर महिलाओं का वर्चस्व इस कदर स्थापित हो रहा हो उस देश में 9 साल की दुर्गा भी है जो रोज सबेरे कचरा बीनने का थैला लेकर निकल पड़ती है. भोपाल के अरेरा कालोनी की गलियों में वह रोज कचरा इकट्ठा करती है. पूछने पर दुर्गा कहती है कि वह डाक्टर बनना चाहती है और अपना क्लिनिक बनाना चाहती है. लेकिन बड़े सपनों के साथ बड़ी होती दुर्गा अगले दिन सुबह फिर अरेरा कालोनी की गलियों में निकल पड़ती है. बात साफ है. अगर कूड़ा न बीने तो भूखा सोना पड़ेगा.
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देह व्यापार की दहलीज पर

"मेरी जैसी कई औरतों को अपना शरीर बेचना पड़ता है." सपना ने बिना झिझक आगे कहा- ‘‘पेट के लिए करना पड़ता है. ईज्जत के लिए घर में बैठ सकती हूं. लेकिन...’’ इसके बाद वह चुपचाप एक गली में गई और गुम हो गई. देश के कोने-कोने से हजारों मजदूर सपनों के शहर मुंबई आते हैं. लेकिन उनके संघर्ष का सफर जारी रहता है. इनमें से ज्यादातर मजदूर असंगठित क्षेत्र से होते हैं. सुबह-सुबह शहर के नाकों पर मजदूर औरतें भी बड़ी संख्या दिखाई देती हैं. इनमें से कईयों को काम नहीं मिलता. इसलिए कईयों को सपना बनना पड़ता है. तो क्या "पलायन" का यह रास्ता "बेकारी" से होते हुए "देह-व्यापार" को जाता है?
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पंजाब के किसानों का संताप

यह पंजाब मे आत्महत्याओं का दौर है जो थमने का नाम नहीं ले रहा। हरित क्रांति ने जो खुशहाली पैदा की वो बीस साल भी नहीं टिकी और 1985 से आत्महत्याओं की दुर्घटनाएं सामने आने लगीं। पहले पहल संगरूर, मानसा और बठिंडा से शुरू हुई संताप की इन लपटों ने मालवा क्षेत्र के अन्य जिलों मुक्तसर, फरीदकोट, फिरोजपुर और मोगा को अपनी चपेट में ले लिया। आज कमोबेश समूचा पंजाब किसान आत्महत्याओं से पीडित है। फिर चाहे वह माझा का अमृतसर जिला हो पुआध का पटियाला या दोआबा का जालंधर। मालवा क्षेत्र में संगरूर, मानसा, मोगा और बठिंडा सर्वाधिक पीडित जिले हैं।
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कलाकार की आह और कराह

शास्त्रीय संगीत के पुरोधा पंडित कुमार गंधर्व के बेटे और मशहूर ध्रुपद गायक मुकुल शिवपुत्र के भोपाल के एक मंदिर में बदहाल स्थिति में मिलने की खबर से कला जगत में मायूसी छा गई। सरकारी अमला एक बार फ़िर समस्या से मुँह चुराता और गंभीर मुख मुद्रा बनाये सच्चाई पर पर्दा डालता दिखाई दिया। अपनी धरोहरों और संस्कृतिकर्मियों का सरकार कितना खयाल रखती है, मुकुल का मामला इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है।
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डाकुओं के दिल पर डाका

चंबल घाटी के जो बीहड़ कल तक उसके “आतंक और खौफ” से घबराते थे, उनमें आज उसके “प्रेम” की चर्चा है. दो दर्जन से ज्यादा हत्याएं करने वाला 12 लाख का इनामी खुंखार डकैत जगन गूर्जर को “प्यार” ने बदल दिया है. अब वह डकैत की तरह नहीं, बल्कि एक आम आदमी की तरह जीना चाहता है. हत्या, अपहरण, लूट और डकैती जैसे 70 से ज्यादा जघन्य अपराधों के आरोपी और 15 सालों से तीन राज्यों की पुलिस को नाकों चने चबवाने वाले दुर्दांत डाकू जगन ने पुलिस के सामने केवल इसलिए आत्मसमर्पण कर दिया ताकि वह अपनी प्रेमिका और दस्यु सुंदरी कोमेश के साथ रह सके.
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सुदर्शन का (कु) दर्शन
जबसे आरएसएस के लोगों की आतंकवादी घटनाओं में संलिप्तता सामने आयी है, तब से आरएसएस के नेता बौखला गए हैं। इस बौखलाहट में ही शायद संघ के इतिहास में पहली बार हुआ है कि इसके स्वयंसेवक विरोध प्रदर्शन करने के लिए सड़कों पर उतरे। इसी बौखलाहट में आरएसएस के एक्स चीफ केएस सुदर्शन का मानसिक संतुलन बिगड़ गया और सोनिया गांधी के बारे में ऐसे शब्द बोल दिए, जिन्हें एक विकृत मानसिकता का आदमी ही बोल सकता है।...
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सीआईए नहीं केजीबी एजंट कहिए जनाब
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व सरसंघचालक ने 10 नवंबर को सोनिया गांधी पर सीआईए एजंट होने का आरोप लगाकर सनसनी पैदा कर दिया है. पूरी की पूरी कांग्रेस उत्तेजित है और संघ भी बैकफुट पर चला गया है. सुदर्शन के आस पास के लोगों का कहना है कि सुदर्शन जी भुलक्कड़ हो गये हैं और उन्हें कुछ ठीक से याद नहीं रहता. शायद इसीलिए उन्होंने इतनी बड़ी चूक कर दी. ...
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सोनिया का सच जान बेकाबू क्यों होते हो?
एक बार फिर लोकतंत्र पर आपातकाल मंडरा पड़ा है. राजमाता सोनिया गांधी के सिपहसालारों ने कांग्रेसी गुण्डों, माफियाओं और लोकतंत्र के हत्यारों का आह्वान किया है कि वह देशभर में संघ कार्यालयों पर धावा बोल दे. इसका तत्काल प्रभाव हुआ और कांग्रेसी गुण्डों ने संघ के दिल्ली मुख्यालय पर धावा भी बोल दिया. ठीक वैसे ही जैसे इंदिरा गांधी की मौत के बाद सिखों को निशाना बनाया गया था. हिंसक और अलोकतातंत्रिक मानसिकता से ग्रस्त कांग्रेसी सोनिया का सच जानकर आखिर इस तरह बेकाबू क्यों हो रहे हैं?...
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नये निजाम के दामन पर है ज्यादा बड़ा दाग
मुंबई। महाराष्ट्र के नए निजाम भी कोई दूध के धुले नहीं हैं। कांग्रेस आलाकमान ने अशोक चव्हाण को फर्जीवाड़े से फ्लैट पाने के आरोप में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री की गद्दी से हटा दिया। लेकिन नए मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण भी उसी तरह के फर्जीवाड़े में गले तक डूबे हुए हैं। उन्होंने जितने बड़े बड़े झूठ बोलकर सरकार से फ्लैट हथियाए हैं वे कांग्रेस के लिए ज्यादा दागदार हैं।...
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अजमेर चार्जशीट और संघी उछल-कूद
बढ़ते पैमाने पर इसके साक्ष्य सामने आ रहे हैं कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आर एस एस) से जुड़े लोगों का आतंकवादी हमलों में हाथ रहा है। इन हालात में आर एस एस इस पुराने सूत्र पर चल रहा लगता है कि हमला ही सबसे अच्छा बचाव है। उसने 10 नवंबर को देशव्यापी विरोध कार्रवाइयों का आह्वान किया है। इन कार्रवाइयों में संघ के शीर्ष नेताओं के शामिल होने की बात कही जा रही है। बहरहाल, इसकी चर्चा हम जरा बाद में करेंगे।...
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अपने होने पर ही हैरान
‘चुप्पी-चुप्पी नहीं नहीं, बोलेंगे अब सभी-सभी’ इन्हीं नारों से दाहोद (गुजरात) का सीनियर रेलवे संस्थान परिसर 31 अक्टूबर को पूरे दिन गूंजता रहा। यहां गुजरात के बड़ोदरा, पंचमहल, सुरत, भड़ूच, डांग, बालसाड और साबरकांठा जिले से लगभग तीन हजार के आस पास विमुक्त एवं घुमंतू समाज से ताल्लुक रखने वाले लोग इकट्ठे हुए थे। मौका था, अधिकार अभियान की घोषणा का। उस समाज के लिए जो इस लोकतांत्रिक देश में अधिकार का अर्थ अभी तक समझ नहीं पाएं हैं। ...
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गोली लगने के बाद क्या गांधी ने कहा था- हे राम ?
यह एक ऐसा सवाल है जिस पर अब विवाद होने लगा है. 30 जनवरी 1948 को क्या जब महात्मा गांधी को नाथूराम गोडसे ने गोली मारी तो महात्मा गांधी ने अपने मुंह से हे! राम का संबोधन किया था? उस वक्त घटनास्थल पर मौजूद रहे एक प्रत्यक्षदर्शी के डी मदान का कहना है कि "मैंने नहीं सुना था कि उन्होंने हे राम कहा था या नहीं."...
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भद्दा और बेदम रहा संघ का विरोध प्रदर्शन
स्कूल जाते बच्चों के भी हाथ में भगवा थमाकर भले ही संघ ने शक्ति प्रदर्शन की भरपूर कोशिश की हो लेकिन 10 नवम्बर का दिन उसके इतिहास में कोई बडी घटना के रूप में याद नहीं किया जायेगा। हॉ हम बात कर रहे है राजस्थान के भरतपुर जिला मुख्यालय की जहॉ देश भर की ही तरह हिन्दुवादी संघटनों ने अपने उपर लग रहे ‘भगवा आतंकवाद’ के आरोपों के विरोध में शक्ति प्रदर्शन किया था। भरतपुर जहॉ संघ प्रचारक क रूप में भाजपा के पीएमइन वेंटिग लालकृष्ण आडवानी ने अपनी सेवाऐं दी है संघ का ये विरोध प्रदर्शन एक दम भददा और हल्का रहा।...
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एनसीपी के 'दादा' का दांव
महाराष्ट्र में कांग्रेस में परिवर्तन हुआ तो राष्ट्रवादी कांग्रेस ने भी अपने पत्ते खोल दिये. राज्य में लंबे समय से राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के भीतर चल रही सत्ता के दावेदारी पर एनसीपी ने आखिरकार प्रदेश की प्रशासनिक कमान अपनी ओर से शरद पवार के भतीजे अजीत पवार को सौंप दी है. अब गुरुवार को शाम साढ़े चार बजे पृथ्वीराज चव्हाण के साथ अजीत "दादा" पवार उपमुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे....
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पीएमओ वाले पृथ्वीराज
महाराष्ट्र के नये मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण यूपीए सरकार पार्ट वन और पार्ट टू में बतौर पीएमओ मिनिस्टर जाने जाते हैं. प्रधानमंत्री कार्यालय में रहते हुए भी उन्होंने कभी ताकतवर होने का दंभ नहीं पाला और चुपचाप काम करते रहे. बिट्स पिलानी से बीई और बर्कले विश्वविद्यालय से एमएस की डिग्री हासिल करनेवाले पृथ्वीराज की राजनीतिक कमेस्ट्री ने उनके सार्वजनिक जीवन में पहली बार इतना गाढ़ा रंग उड़ेला है....
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सुलग रहा है मेरठ 'हिन्दुस्तान'
एक ओर हिन्दुस्तान अखबार अपनी अलग कंपनी बनाकर अखबार को चमकाने और अखबार का विस्तार करने में लगा है वहीं दूसरी ओर हिन्दुस्तान के विभिन्न संस्करणों में हालात ठीक नहीं है. हिन्दुस्तान के मेरठ संस्करण में इन दिनों इस्तीफे दिये जा रहे हैं लेकिन प्रचारित किया जा रहा है कि जो आफिस नहीं आ रहे हैं वे छुट्टी पर चले गये हैं....
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आलोक तोमर के बगल में बसे किशोर मालवीय
सीएनईबी में पहले से एक सलाहकार संपादक थे- आलोक तोमर. अब दूसरे सलाहकार संपादक भी वहां नियुक्त हो गये हैं किशोर मालवीय. उन्होंने सीएनईबी चैनल के साथ बतौर कंसल्टिंग एडिटर अपनी नई पारी की शुरुआत की है। सीएनईबी से पहले वे ‘वायस ऑफ इंडिया’ न्यूज चैनल के साथ जुड़े हुए थे। उन्होंने करीब दो दशक के कॅरियर में देश के नामी-गिरामी मीडिया संस्थानों में कई जिम्मेदारियां निभाईं हैं।...
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सुरक्षा परिषद की छांव में खेती पर दांव
अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने संसद में दिये गये अपने भाषण में भारत से मिले प्यार की भूरि भूरि प्रशंसा जरूर की लेकिन अपनी व्यावसायिक मजबूरियों को छिपा नहीं सके. बराक ओबामा ने संसद के संयुक्त अधिवेशन को संबोधित करते हुए जहां एक ओर भारत को महाशक्ति करार देकर उसके लिए संयुक्त राष्ट्र में स्थायी सदस्यता को अपना समर्थन दिया वहीं भारत और अमेरिका द्वारा मिलकर खेती के क्षेत्र में एक और हरित क्रांति के आगाज की घोषणा की....
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आतंक नहीं कश्मीर केन्द्रित हुई ओबामा यात्रा
रविवार की देर शाम भारतीय प्रधानमंत्री द्वारा आयोजित भोज में ओमर अब्दुल्ला के शामिल होने से जो आशंका पैदा हुई थी वह सोमवार को हैदराबाद हाउस में और प्रबल रूप में सामने आ गयी जब प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अमेरिकी राष्ट्रपति की उपस्थिति में स्वीकार किया कि वे पाकिस्तान से बात करते वक्त "के" शब्द पर बात करने से नहीं कतराते हैं....
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भारत से धंधा, पाक को चंदा
अमेरिका के राष्ट्रपति बराक हुसैन ओबामा ने अपना तीन दिवसीय दौरा पूरा कर लिया. मुंबई उतरकर दिल्ली दरबार तक उनकी दस्तक भारत पर अमेरिका के मजबूत पकड़ की मिसाल बन गया. निश्चित रूप से उनका दौरा भारत के लिए उतना महत्वपूर्ण नहीं जितना खुद अमेरिका के लिए है. मंदी के दौर से जूझ रहे अमेरिका को "कारपोरेट" जगत का धंधा दिलाने के लिए उन्होंने न केवल भारत को महाशक्ति करार दे दिया बल्कि सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता का समर्थन भी कर दिया....
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