Tag: prabhash-joshi
पापा का पेसमेकर फेल कर गया
भारत हैदराबाद मैच हार चुका था। वसुंधरा (घऱ) फोन किया और तबीयत पूछी तो बोले - ‘मैच का क्या हुआ यार’। आवाज में उत्साह व हड़बड़ी दोनों थे। मैनें कहा, मैच तो हार गए पर आप कैसे हो। जवाब पाता, उससे पहले मम्मी बोलीं- जल्दी आ, पापा बेहोश हो गए हैं। पहुंचा तब उन्हें गाड़ी में लिटाया जा रहा था। लगा, देर हो गई। कोशिश की दिल के आसपास झटके दे कर। फिर तेज रफ्तार से नरेंद्र मोहन अस्पताल पहुंचे। पर देर सचमुच हो गई थी।...जिन कागद कारे किये
प्रभाष जोशी का जन्म मध्यप्रदेश के सीहोर जिले के अस्टा गांव में 15 जुलाई 1937 को हुआ था। उनके पिता का नाम पंढरीनाथ जोशी था। 12 भाई बहनों में वह सबसे बड़े बेटे थे। घर में उनसे तीन बड़ी बहनें थीं। उनकी प्राइमरी शिक्षा महाराजा शिवाजी राव प्राइमरी और मिडिल स्कूल में हुई। 1951-52 में मैट्रिक की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने कुछ दिनों तक सुनवानी महाकाल के प्राइमरी स्कूल में मास्टरी की।...पत्रकारिता का प्रभाष पाठ
रविवार 8 नवंबर 2009. यह रविवार जनसत्ता के इतिहास का सबसे दुखद रविवार है. जनसत्ता के इतिहास में यह ऐसा पहला रविवार है जब जनसत्ता में कागद कारे और संसार में प्रभाष जोशी नहीं है. उम्मीद थी कि संपादकीय विभाग कम से कम एक रविवार उस कागद कारे के हिस्से को कोरा छोड़ देगा जहां पिछले लगभग डेढ़ दशक से प्रभाष जी कागद कारे लिखते थे. बिना कागद कारे रविवार को ले-आउट नये तरह से डिजाइन किया हुआ था. पृष्ठ संख्या 6 और 7 प्रभाष जी ने कागद कारे नहीं किये हैं. बल्कि उनकी याद में उन्हें जाननेवालों ने प्रभाष जी को याद करते हुए कागद कारे किये हैं. ...अखबारों की कमी ब्लाग ने पूरी कर दी
प्रभाष जोशी के असामयिक निधन से हिन्दी ब्लाग जगत भी स्तब्ध है. हिन्दी ब्लाग जगत में प्रभाष जोशी को जानने या फिर उनको पढ़नेवाले ब्लागर लगातार उनके ऊपर लिख रहे हैं. हिन्दी के ब्लाग एग्रीगेटर ब्लागवाणी ने प्रभाष जी के निधन पर उनके ऊपर जो भी पोस्ट लिखी जा रही हैं उनका एक विशेष लिंक क्रियेट किया है जो ब्लागवाणी के शीर्ष पर ही मौजूद है. चिट्ठाचर्चा में भी अब तक दो बार चर्चाएं हो चुकी हैं. ब्लाग जगत में जिस तरह से प्रभाष जोशी को लेकर चर्चा हुई है उससे दैनिक जागरण और नवभारत टाइम्स की बदमाशी भी दरकिनार हो जाती है. एक चर्चा हम यहां प्रकाशित कर रहे हैं. ...हमारी कक्षा में प्रभाष जोशी
कल श्री प्रभाष जोशी ब्याख्यान देने आने वाले हैं. सुखद आश्चर्य के साथ उत्सुकता भी हुई. इतने बडे समूह इंडियन एक्सप्रेस के समाचार पत्र जनसत्ता के संस्थपक सदस्य हम सब के बीच। वाह ! पहले ब्याख्यान के बाद से ही पूरी कक्षा बडी बेसब्री से उनका इंतजार करने लगी समय की सीमा बढती चली ,शाम हो गई तो लगा अब नहीं आयेंगे, तभी अचानक से दरवाजा खुला, सुनहरे कुर्ते और धोती पहने एक तेजस्वी ब्यक्तित्व ने कक्षा में प्रवेश कर पूछा.....ये पत्रकारिता की ही कक्षा है?...प्रभाष जोशी का निधन: दैनिक जागरण के लिए एक कॉलम की खबर
पत्रकारिता के पितामह प्रभाष जोशी की मौत से पूरी पत्रकारिता बिरादरी शोक मना रही है. पत्रकारिता में प्रभाष जोशी के स्थान क्या है इसे कहने की जरूरत नहीं है. लेकिन प्रभाष जोशी की मौत के बाद दैनिक जागरण ने जिस तरह से अपनी खुन्नस निकाली है उसने देश के इस सबसे बड़े अखबार के दामन पर दाग लगा दिया है. हिन्दी अखबारों में दैनिक जागरण ही एकमात्र ऐसा अखबार है जिसने इस खबर को ही कमतर कर दिया है....प्रभाष जोशी का पार्थिव शरीर पंचतत्व में विलीन
पत्रकारिता के पितामह प्रभाष जोशी का शरीर पंचतत्व में विलीन हो गया है. शनिवार को दोपहर 12 बजे नर्मदा नदी के किनारे उनकी इच्छा के अनुसार अंतिम संस्कार कर दिया गया. प्रभाष जोशी का गुरुवार/शुक्रवार की रात हृदयगति रुक जाने से निधन हो गया था....एक विकट क्रिकेटप्रेमी को क्रिकेट जगत की श्रद्धांजलि
सचिन की आतिशी पारी के बावजूद भारत की हार के साथ हिंदी पत्रकारिता के शिखर पुरुष और क्रिकेट के जबर्दस्त रसिक प्रभाष जोशी इतने मायूस हुए कि दुनिया को ही अलविदा कह दिया। प्रभाष जी- जो क्रिकेट और टेनिस के दीवाने थे- अपने शब्दों के जरिए पाठकों और क्रिकेटप्रेमियों की चेतना को झकझोरते रहे, सचिन के 17 हजार रनों पर लिखने की तमन्ना को दिल में लिए ही जहां से कूच कर गए।...प्रभाष जी के जाने से प्रधानमंत्री दुखी, सचिन तेंदुलकर सदमे में
पत्रकारिता के पितामह प्रभाष जोशी के निधन से जहां एक ओर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने दुख व्यक्त किया है वहीं क्रिकेट खिलाड़ी सचिन तेन्दुलकर ने कहा है कि प्रभाष जी की मौत की खबर से उन्हें सदमा लगा है. ...प्रभाष जी के जाने से हम सब अनाथ हो गये हैं
आमतौर पर मेरी बात उनसे होती थी तो दुनिया भर की बातें होती थीं लेकिन स्वास्थ्य को लेकर कम बात ही होती थी. वैसे भी प्रभाष जी स्वास्थ्य के बारे में ज्यादा बात नहीं करते थे. लेकिन इधर तीन चार दिनों से मैंने जब भी उन्हें फोन किया तो उनके स्वास्थ्य के बारे में उनसे पूछा. वे बिहार और उत्तर प्रदेश की यात्रा पर थे. वहां वे हिन्द स्वराज पर आयोजित गोष्ठियों को संबोधित करने गये थे. ...- आलोक तोमर की आपबीती
- वह गुजरात जिसे आप नहीं जानते
- हिन्दू आतंकवाद का अतिवाद
- सिमी से भी खतरनाक है संघ का स्वरूप
- बाबा रामदेव का दांव
बहुत अच्छा व सच्चाईयो पर आधारित लेख है। सेकुलर भारत के निर्माँण मे ऐसे लेख का अहम योगदान होगा. संपादक- आपकी आवाज़.कांम
बहुत अच्छा व सच्चाईयो पर आधारित लेख है। सेकुलर भारत के निर्माँण मे ऐसे लेख का अहम योगदान होगा. संपादक- आपकी आवाज़.कांम
सिक्के के दुसरे पहलू की तरफ इशारा कर अनिल ज्जी ने सदा की तरह सार्थक हस्तक्षेप किया है. बहुत सशक्त लेखन. निश्चय ही लेख में ...
सिक्के के दुसरे पहलू की तरफ इशारा कर अनिल ज्जी ने सदा की तरह सार्थक हस्तक्षेप किया है. बहुत सशक्त लेखन. निश्चय ही लेख में ...
सिक्के के दुसरे पहलू की तरफ इशारा कर अनिल ज्जी ने सदा की तरह सार्थक हस्तक्षेप किया है. बहुत सशक्त लेखन. निश्चय ही लेख में ...

