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यस, मिस्टर प्राइम मिनिस्टर

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अरुन्धती राय, वंदना शिवा, संदीप पाण्डेय, अमित भादुड़ी जैसे सामाजिक कार्यकर्ताओं और बुद्धिजीवियों ने प्रधानमंत्री को एक पत्र लिखा है. इस पत्र में प्रधानमंत्री से आपरेशन ग्रीन हण्ट को रोकने की मांग की गयी है. पत्र में 250 वरिष्ठतम लोगों के हस्ताक्षर हैं और सीधे तौर पर कहा गया है कि भारत सरकार कंपनियों के एजंट के तौर पर काम न करे. पत्र में प्रधानमंत्री और सरकार पर यह आरोप भी लगाया गया है कि भारत सरकार की नक्सलियों के खिलाफ चलाया जा रहा सैन्य अभियान एक गृहयुद्ध जैसा है जिसे तत्काल रोका जाना चाहिए.

डॉ मनमोहन सिंह
प्रधानमंत्री,
भारत सरकार।

आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़ महाराष्ट्र, उड़ीसा और पश्चिम बंगाल के आदिवासी बहुल इलाकों में भारत सरकार द्वारा सैन्य व अर्द्धसैनिक भयानक आक्रमण की जो योजना बनाई जा रही है, उस पर हम सभी गम्भीर रूप के चिन्तित है। इस आक्रमण का घोषित लक्ष्य है कि इन इलाकों को माओवादी क्रांतिकारियो से मुक्त किया जाय। इस सैन्य अभियान से इन सारे इलाकों के लाखों लाख गरीब लोगों का जीवन व आजीविका बरबादी के कगार पहुंच जायेगी, अनगिनत लोग उजाड़े जायंगे, बरबाद होंगे और आम इंसानों के मानवाधिकार छीने जायेंगे। इस आशंका से कि माओवादियों की बढ़त हो रही है, उनके दमन के नाम पर गरीब नागरिकों को परेशान किया जाना घिनौना तो है ही विध्वंसात्मक भी है। अर्द्धसैनिक बल एवम् प्रतिक्रियावादी सैन्य बलों द्वारा संचालित एवम् भारत सरकार की विभिन्न संस्थानों के पैसों से पलनेवाले इस सैन्य अभियान में छत्तीसगढ़ व पश्चिम बंगाल के कुछ इलाकों में गृहयुद्ध की स्थिति तैयार कर दी है, जहां हजारों लोगों की हत्या की गयी है और हजारों लोग उजाड़े गये हैं। प्रस्तावित सशस्त्र हमला आदिवासी जनता की भूख, नफरत एवं असुरक्षा को न सिर्फ बढ़ायेगी बल्कि इन सारी दुर्दशाओं का विस्तार होगा।

चरम गरीबी और जानवरों से भी बदतर जीवन धारा भारत के आदिवासी समाज की यह नियति बन गयी है। 1990 की शुरूआत से भारत सरकार न नवउदारीकरण की ओर कदम बढ़ाया, इसके साथ राजकीय दमन जुड़ गया। जल जंगल जमीन ही नहीं ग्रामीण जलधारयें, चारागाह आदि वन सम्पदाओं पर बचे उनके थोड़े बहुत अधिकारों पर भी अब विशेष आर्थिक क्षेत्र खनिज उत्खनन, औद्योगीकरण तथा सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र आदि विकास की योजनाओं के बहाने हमला किया जा रहा है।

भारत सरकार ने सैन्य कारणों से जिन भौगोलिक इलाकों में सामरिक अभियान की योजना बनाई है वे सारे इलाके खनिज सम्पदा, वन सम्पदा और जल सम्पदा से भरपूर हैं इन सारी प्राकृतिक सम्पदाओं को लूटने की होड़ में कॉरपोरेट सेक्टर उतर पड़े हैं, जड़ से उजड़े जाने और बरबाद हो जाने के खिलाफ इन इलाकों के आदिवासियों ने जी-जान से प्रतिरोध खड़ा किया है और सरकारी मदद से घुसने को आतुर कॉरपोरेट सेक्टर के प्रवेश को रोका हुआ है। हमारी आशंका है कि कारपोरेट समुहों द्वारा इन सारे इलाकों की प्राकृतिक सम्पदाओं की बेलगाम लूट से आदिवासियों पर भयंकर शोषण के रास्ते को प्रशस्त करने के लक्ष्य से ही भारत सरकार आंचलिक प्रतिरोधों का दमन करने और उन्हें तांड़ने की कोशिश कर रही है। उनमें बढ़ रही सामाजिक वंचना व लगातार बढ़ती आर्थिक विषमता और सामाजिक ढांचे से पैदा हुई हिंसा और हाशिये पर पड़े लोगों को उजाड़े जाने के खिलाफ अहिंसात्मक प्रतिरोध पर राजकीय दमन ही सामाजिक आक्रोश को जन्म दे राह है जो राजनैतिक हिंसा में तब्दील हो रहा है। समस्या की तह में न जाकर भारत सरकार सैन्य कार्यवाही के जरिये समाधान की कोशिश कर रही है। ‘गरीब-गरीब ही रहें, गरीब को मारो’ यही शायद भारत सरकार के खुले नारे में तब्दील हो गया है।

हमारा मानना है- देशवासियों के विरोध के कारणों को चिन्हित न कर सरकार यदि जनता पर सामरिक तौर पर दमन की कोशिश करती है, तो यह भारतीय लोकतंत्र पर गहरी चोट होगी। तात्कालिक तौर पर इस सैन्य अभियान की सफलता तो बहुत ही अनिशिचत है, पर लोगों की बरबादी निश्चित है। विश्व में चल रहे अनगिनत जन उभार आंदोलनों का यही तजुर्बा है। हम भारत सरकार से मांग करते हैं कि सैन्य दस्तों को तुरन्त वापस बुलाया जाय, गृहयुद्व की स्थिति तैयार करने वाली सभी योजनाओं को रद्द किया जाय अन्यथा भारतीय समाज के हाशिये पर पड़े और सबसे पिछड़े हिस्से की बरबादी बढ़ेगी जो कॉरपोरेट समूहों द्वारा प्राकृतिक सम्पदा पर लूट का रास्ता प्रशस्त करेगी। लोकतंत्र के पक्षधर सभी लोगों से हमारी गुजारिश है, वे हमारे साथ आये।

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prashant mehrishi on 27 November, 2009 22:59;20
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maowadio se pehle in perokaro ko khatma karna hoga .apni rajkiya upadhiya v puraskar ghar rakh kar gareebo ke sath aa kar VOTE se is sarkar ko badlo tab kuchh bhala hoga .AAP log bhi corporate ban gaye ho aajkal. nam jaminui kam hawai.paksha leftist ka rakhte ho bat desh ki karte ho .
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अमित कुमार on 28 November, 2009 20:02;37
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जहाँ तक माओवादियों का सवाल है तो ये बता दें कि पुलिसिया आतंक के खिलाफ माओवादियो की मुहिम बेहद खतरनाक हैं.वो अपनी समानांतर सरकार चलाने की जिस मुहिम को आगे ले जा रहे है उसमें इन छदम सेक्युलरवादियों का बहुत बडा हाथ है..इस तरह के लिख्खाडों पर सबसे पहले रोक लगनी चाहिए..अमित कुमार
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sunil parbhakar on 07 December, 2009 05:03;45
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aajj tak kisi bi sarkar nae sarkari tantar mae ghar kar chuki rishwatkhori k khilaff iss type ka koi abhian kyon nai chalaya.lok saba sae lae kar vidhan sabhon tak mae janta ka khoon choose kar apna paet oor tizorion ko bharney walon k khilaf kabi abiyan kyo nai chalaya. mai hathiarband vidroh ka virodh karta hoon, iss ley niveden hai k hathiyar uthaney ko mazboor karney walon oor iss tareh ka mahool paida krnay waley sarkari adhikarion oor rajnateon ki nasbandi kar deni cahiey .yahi samsya ka asli hall hai
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