Home | बियाबान में शोर | आतंकवाद का दोषी नहीं है इस्लाम

आतंकवाद का दोषी नहीं है इस्लाम

image

राजनीति का स्तर इस कदर नीचे आ जाएगा, इसकी कल्पना नहीं की गयी थी। आम आदमी के बुनियादी मुद्दों को छोड़कर राजनीति किसी भी मुद्दे पर की जा सकती है। आतंकवाद जैसे गम्भीर और राष्ट्रीय समस्या पर भी राजनैतिक दल राजनीति करने से बाज नहीं आते हैं। पुणे की जर्मन बेकरी में हुए बग धमाके के बाद यही किया जा रहा है।

कुतर्क दिया जा रहा है कि क्योंकि महाराष्ट्र सरकार का पूरा जोर शाहरुख खान की फिल्म 'माय इज नाम खान' को रिलीज कराने पर लगा रहा और आतंकवादियों को अपना काम करने का मौका मिल गया। सवाल यह है कि अब तक जितने भी राज्यों में बम धमाके हुए हैं, उनकी राज्य सरकारें कब 'माय नेम इज खान' रिलीज सरीखे कामों में उलझी हुई थीं ? 26/11 से पहले तो महाराष्ट्र सरकार किसी फिल्म को रिलीज कराने में व्यस्त नहीं थी, फिर 26/11 कैसे हो गया था ? संसद पर हमले से पहले तो केन्द्र सरकार किसी फिल्म को रिलीज कराने में व्यस्त नहीं ? यह भी तो कहा जा सकता है कि यदि शिवसेना 'माय इज नेम खान' पर बेमतलब का बवंडर खड़ा नहीं करती तो महाराष्ट्र सरकार को अपनी पूरी ताकत मात्र एक फिल्म को रिलीज कराने में खर्च नहीं करनी पड़ती। क्या यह कहा जाए कि शिवसेना ने आतंकवादियों को मौका देने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई ? यहां यह सब लिखने का मतलब महाराष्ट्र सरकार को बरी करने का मकसद नहीं है। मकसद केवल बम धमाकों पर राजनीति करने वालों को तथ्यों से अवगत कराना मात्र है।

जब शिवसेना जैसे संगठन आईपीएल में पाकिस्तानी खिलाड़ियों को खिलाने की मात्र बात करने से ही हायतौबा मचाते हों, वह कैसे यह बर्दाश्त करेंगे कि भारत और पाकिस्तान बातचीत करें। यह नहीं भूलना चाहिए कि 'अभिनव भारत' के लोगों का ताल्लुक भी महाराष्ट्र से है। किसी भी बम धमाके के बाद कूदकर शक की सूई तब तक किसी की ओर घूमाने से पहले खुफिया एजेंसियों को सही तरह से जांच-पड़ताल करना बहुत जरुरी है। चन्द घंटों की जांच की बाद ही किसी की ओर शक की सूई धुमाने से खुफिया एजेंसियां की नीयत पर सवाल उठेंगे ही।

भारत बड़ा और विभिन्न नस्लों के लोगों का देश है। विभिन्न मांगों और समस्याओं से घिरे भारत में बहुत से वर्गों में असंतोष व्याप्त है। लेकिन इस्लामी आतंकवाद का ऐसा मिथक घड़ दिया गया है कि किसी भी आतंकवादी घटना में सिमी, अलकायदा, लश्कर, इंडियन मुजाहिदीन और आईएसआई का आंख मूंदकर हाथ मान लिया जाता है। आज तक यह बात समझ में नहीं आई कि बम धमाकों के चन्द घंटों बाद ही देश की खुफिया एजेंसियों की शक सूईं कैसे लश्कर या इंडियन मुजाहिदीन की ओर घूम जाती है ? यदि देश की खुफिया एजेंसियां इतनी ही काबिल हैं तो फिर बम धमाकों से पहले ही यह पता क्यों नहीं लगाया जाता कि आतंवादी कब और कहां आतंकवादी घटना को अंजाम दे सकते हैं। खुफिया एजेंसियां कुछ दिनों बाद लश्कर या इंडियन मुजाहिदीन के नाम पर चन्द मुसलमानों को बम धमाकों का मास्टर माइंड बता कर बात खत्म कर देती है। लेकिन बम धमाकों के मास्टर माइंड को लेकर खुफिया एजेंसियां और राज्यों की पुलिस में मतभेद होते रहे हैं।

बटला हाउस एनकाउण्टर में में मारे गए आतिफ को 2008 में हुए दिल्ली, गुजरात, जयपुर और उत्तर प्रदेश के बम धमाकों का मास्टर माइंड बताया गया था। यह भी दावा किया गया था कि आतिफ ही इंडियन मुजाहिदीन का मास्टर माइंड था। इसके विपरीत गुजरात पुलिस ने दावा किया था कि अबुल बशर और सुभान कुरैशी उर्फ तौकीर इंडियन मुजाहिदीन के असली मास्टर माइंड थे और उन्होंने ही गुजरात और जयपुर में बम धमाके किए थे। लेकिन राजस्थान पुलिस अबुल बशर को मास्टर माइंड मानने को तैयार नहीं थी। उत्तर प्रदेश का दावा था कि वाराणसी सहित उत्तर प्रदेश के अन्य शहरों में बम धमाके बंगला देश के संगठन हुजी के मास्टर माइंड वलीउल्लाह ने कराए थे।

खुफिया एजेंसियों और राज्यों की पुलिस के परस्पर विरोधी दावों के बीच पता चला था कि 'अभिनव भारत' नाम के एक संगठन के कुछ लोग भी बम धमाके करके लोगों की जान ले रहे थे। इसमें सबसे बुरी बात यह थी कि धर्मनिरपेक्ष समझी जाने वाली फौज का पुरोहित नाम का एक कर्नल बम धमाकों की साजिश रच रहा था। यह तो अच्छा हुआ था कि मालेगांव और हैदराबाद की मक्का मस्जिद समेत अन्य स्थानों पर हुए बम धमाकों में साध्वी प्रज्ञा सिंह और कर्नल पुरोहित की संलिप्तता सामने आ गयी थी, वरना खुफिया एजेंसियां इन बम धमाकों को भी सिमी या इंडियन मुजाहिदीन जैसे संगठनों के खाते में डलाकर इतिश्री कर लेती। हालांकि कई शहरों में हिन्दुवादी संगठन के लोग बम बनाते समय हुए विस्फोट में मारे गए थे, लेकिन पता नहीं किसके इशारे पर इन घटनाओं पर परदा डालने की कोशिश की गयी थी। शहीद हेमंत करकरे ने जांच करके पता लगाया था कि मालेगांव समेत कई शहरों में 'अभिनव भारत' नाम के एक संगठन ने धमाके किए थे। अब पुणे के बम धमाके को 26/11 के एक साल बाद पकड़ में आए हेडली को जिम्मेदार बताने की कवायद की जा रही है। इस धमाके के पीछे भारत और पाकिस्तान के बीच 25 फरवरी को विदेश सचिव स्तर की शुरु होने वाली वार्ता प्रभावित होने की अटकलें लगाई जा रही हैं। सवाल यह है कि जब अभी तक यही पता नहीं चला है कि पुणे बम विस्फोट में पाकिस्तान का हाथ है तो वार्ता स्थगित करने की मांग क्यों की जा रही हैं। करने की बातें भी की जा रही है। ऐसा पहली बार नहीं हो रहा है। जब भी भारत और पाकिस्तान करीब आना चाहते हैं, अक्सर इस प्रकार की घटनाओं को अंजाम दिया जाता रहा है। सवाल यह है कि भारत और पाकिस्तान करीब न आने पाए, यह कौन चाहता है?

ऐसा नहीं है कि आतंकवाद की आग में मुसलमान नहीं झुलसे हैं। 18 फरवरी 2007 को समझौता एक्सप्रेस, 18 मई 2007 को हैदराबाद की मक्का मस्जिद, 8 सितम्बर 2007 को मालेगांव की एक मस्जिद, 11 अक्टूबर 2007 को अजमेर की दरगाह में हुए बम धमाकों में सौ से अधिक लोग मारे गए थे। मरने वाले सभी मुसलमान थे। बम धमाकों में बेगुनाह लोगों की जान लेने वालों की पहचान बहुत जरुरी है। लेकिन जब तक आतंकवाद जैसे गम्भीर और राष्ट्रीय समस्या को एक ही समुदाय से जोड़कर राजनीति होती रहेगी, आतंकवाद को खाद-पानी मिलता रहेगा।

Subscribe to comments feed Comments (15 posted):

vivek on 16 February, 2010 11:04;32
avatar
sare ke sare musalman ya to aatankvadi hai ya unke humdard. Isko pune visfot me bhi suaro ki sanliptta nahi dikhai de rahi.
Thumbs Up Thumbs Down
1
Vicky G on 16 February, 2010 14:04;18
avatar
एक तरफ़ सारी दुनिया में दिखाई देती सचाई है, दूसरी तरफ़ सिर्फ़ शक है. एक तरफ़ एके-४७/५६ और बम वाले लोग हैं जो परमाणु बम हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं, दूसरी तरफ़ लाठी-डंडे वाले लोग हैं. एक तरफ़ के लोगों को पाकिस्तान समेत कई देशों की सरकारों का सहयोग-समर्थन है, दूसरी तरफ़ जो लोग हैं, उन्हें उन्हीं के भाई-बंधु कोसते नहीं थकते. एक तरफ़ मुसलमान आतंकवादी हैं, दूसरी तरफ़ हिंदू नाम वाले मूर्ख गुंडे हैं. एक तरफ़ के लोगों का निश्चित लक्ष्य है, जिन्हें करोडों लोगों का प्रत्यक्ष और श्री सलीम अख्तर जैसे तथाकथित प्रगतिशीलों का परोक्ष समर्थन नज़र आता है. दूसरी तरफ़ ऐसे लोग हैं, जो कभी-कभार गुस्से में आकर कुछ करने की कोशिश भी करते हैं तो खुद उनका ही नुकसान हो जाता है. फिर भी सलीम अख्तर साहब ने दूसरे पक्ष को दोषी ठहराने की भरपूर कोशिश की है. इसके लिए वे बधाई के पात्र हैं. और पद्मश्री या पद्मविभूषण सम्मान के भी.
Thumbs Up Thumbs Down
2
moinuddinalam on 16 February, 2010 14:20;57
avatar
विवेक ये सुअर किसे कह रहा है बे, जानते बुझते वराहअवतार को क्यूं बदनाम कर रहा है बे चुतिये, नाम विवेक है चाहे अक़ल से तेरा वास्ता हो न हो।
Thumbs Up Thumbs Down
-4
on 16 February, 2010 17:33;43
avatar
Tujhe nahi aatakvadiyo ko kah raha hoon tu kyo baukhla raha hai. lagta tujme to pad kar samjhne ki bhi akal nahi hai
Thumbs Up Thumbs Down
2
prashant mehrishi on 16 February, 2010 20:37;11
avatar
salim bhai aapne theek likha hai aatankwad ka doshi islam nahi hai lekin aap ye likhna bhool gaye ki dunia main 80% aatankwad isi puja padhyati ke anuyayiyo dwara phelaya ja raha hai aur bharat hi nahi puri dunia inse dukhi hai. ab ye to aapko sochna hai ki shanti aur bhaichare ke sthan par musalman puri dunia main ashanti kyo kar rahe hain. kya apko pata hai somaliya ke samundri daku bhi isi mazhab ko manne wale hain . kya puri dunia ka islami karan ye kar sakte hai . jab Auranjeb karodo hinduo ko musalman bana kar bhi is hindustan ka kuchh na kar paya to is aadhunik yug main kya ye sambhav hai ? kripya aap jaise samajhdar log maszido main jakar takreer karo ki aatankwad chhodo agar pakistan ya bangladesh ka bum girega to wo sabhi ko marega. pune visfot main ab cctv ka footage mil gaya hai aapki shanka door ho gayi hogi.
Thumbs Up Thumbs Down
2
Rajiv Bundela on 16 February, 2010 21:49;46
avatar
सलीम साहब ने वाकई में सही फरमाया है! कश्मीर में जेहादी आंतक के लिए कश्मीरी पंडित जिम्मेदार हैं! तो इजरायल में जेहादी आंतक के लिए यहूदी जिम्मेदार हैं. चीन में चीन के मूल लोग उग्वुइर जिम्मेदार है. अफगानिस्तान में तालिबान की बजाय अमेरिका जिम्मेदार है! वाह री सेकुलर (या कहो इस्लामी ) पत्रकारिता!

कही पर इस्लामी आंतक के लिए हिन्दू जिम्मेदार हैं, तो कही यहूदी, बौद्ध, ईसाई या फ़ौज या कोई और लेकिन इस्लाम या मुसलमान कतई जिम्मेदार नहीं है. शर्म आती है आपकी बुद्धी और नीयत पर. आपसे बढ़िया जिहाद का प्रवक्ता कौन हो सकता है??

वैसे मुसलमान सुधारना चाहे तो भी आप जैसे लोग सुधरने नहीं देंगे. विस्फोट जैसे प्रतिष्टित पोर्टल पर आप जैसे लोगो को पढ़ना हमारा दुर्भाग्य है.
Thumbs Up Thumbs Down
2
Ramakant Yadav on 16 February, 2010 21:55;00
avatar
लेखक (?) जी एक बात का जवाब दीजिये. दुनिया में ज्यादातर मुसलमान आंतकवादी नहीं हैं , लेकिन ज्यादातर आंतकवादी मुसलमान ही क्यों हैं?
इसका जवाब आपको कुरआन में मिल जाएगा. कभी इमानदारी से पढने की कोशिश कीजिए. पहले कुरआन को ठीक कीजिए. फिर मुसलमानों को ठीक कीजिए. उसके बाद दूसरो पर उंगुली उठाइये.
आप खुद की कौम की करतूतों के बारे में कभी कुछ बोलते नहीं और आ गए औरो को नसीहत देने...! पर उपदेश कुशल बहुतेरे.
Thumbs Up Thumbs Down
4
suneel dutt on 16 February, 2010 23:18;51
avatar
dharam aatank vaad ka doshi nahin ho sakta lekin dharam hai kya? kya islam dharam hai bhi?dharam vo hai jo har samay nibhaya ja sake. kya islam hamesha ke liye hai? kya eik vyakti ki vaat hamesha sahi ho sakti hai ? sochiye jara.
Thumbs Up Thumbs Down
0
harish on 16 February, 2010 23:36;36
avatar
आतंकवाद की परिभाषा को जानना बहुत कठिन काम हॆ। हमे यह नही भूलना चाहिये कि वर्तमान समय मे जो आतंक्वाद की लहर सारे विश्व ने चल रही हॆ
उसकी जड़े कही न कही इसलाम की शिक्षा से जा कर मिलती हॆं। इसलिए यह
जरुरी हॆ कि मुसलिम बुद्भिजीवी इसलाम के शान्तिपुर्ण चरित्र को दुनिया के सामन
लायॆं। बात तब बनेगी जब आतंकवाद का विरुध मुसलिम समाज की ऒर से होगा।
Thumbs Up Thumbs Down
-1
RAJ SINH on 17 February, 2010 14:24;51
avatar
सलीम भाई बड़े सार्थक सवाल यहीं किये गए हैं . कुछ कहेंगे भी या सिर्फ ' इस्लाम ' के शाब्दिक अर्थ की व्याख्या और हजारों साल से आजतक के वास्तविक सत्य को अनदेखा कर सिर्फ इस्लाम के सही वकील की तरह ' मेरा मुवक्किल बेक़सूर है ' की भूमिका ही लगातार निभाते रहेंगे.
पटाखे फोड़ने वाले मूर्ख आतंकवादियों को कम नहीं आंकना चाहिए लेकिन उस का उपयोग कर देश द्रोही ' भारतीयों ' और उनके भारत द्रोह के स्रोत पर भी कुछ कहें साफ़ साफ़ एक पत्रकार धर्म के नाते .
वर्ना आपका एकतरफा लेखन मेरे सहित सभी सच्चे भारतियों को आपकी ' प्रायोजित ' भूमिका ही नज़र आएगा.
एक बार फिर कुरान पढ़ लें तो शायद ' स्रोत ' के बारे में आपकी दृष्टि , अगर तटस्थ है बिना पूर्वाग्रह और अंधश्रद्धा के , तो बढ़िया बता पाएंगे .
Thumbs Up Thumbs Down
2
1 2 next total: 15 | displaying: 1 - 10

Post your comment comment

Type in Hindi (हिन्दी में कमेन्ट करने के लिए यहां रोमन में लिखिए यह अपने आप हिन्दी में बदल देगा.)

Title :
Body
Powered by Vivvo CMS v4.1.2
Share |
  • email Email to a friend
  • print Print version

ईमेल से विस्फोटः अपना ईमेल यहां भरें और सब्सक्राइब करें:

Delivered by FeedBurner

Author info
image सलीम अख्तर देश के अनेक समाचार-पत्रों में सामायिक मुद्दों पर लेख आदि लिखने के साथ ही टेक्निकल पुस्तकों का स्वतन्त्र लेखन। लेखन या पत्रकारिता का कोई कोर्स नहीं किया। लिखने की शुरुआत 1984 से दिल्ली से प्रकाशित होने वाले 'हिन्दुस्तान' और 'नवभारत टाइम्स' में सम्पादक के नाम पत्रों से की थी। हौसला बढ़ा तो सम्पादकीय पेज पर छपने के लिए लिखना शुरु किया। मशहूर पत्रकार स्व0 उदयन शर्मा मेरे आइडियल रहे हैं। इसलिए कलम का इस्तेमाल हमेशा ही फिरकापरस्त ताकतों के खिलाफ और दबे-कुचले लोगों के पक्ष में चली है। जनवादी लेखक संघ से भी जुड़ा हुआ हूँ। संपर्क: saleem_iect@yahoo.co.in
Rate this article
2.33
More from बियाबान में शोर
Previous
image
सुदर्शन का (कु) दर्शन
जबसे आरएसएस के लोगों की आतंकवादी घटनाओं में संलिप्तता सामने आयी है, तब से आरएसएस के नेता बौखला गए हैं। इस बौखलाहट में ही शायद संघ के इतिहास में पहली बार हुआ है कि इसके स्वयंसेवक विरोध प्रदर्शन करने के लिए सड़कों पर उतरे। इसी बौखलाहट में आरएसएस के एक्स चीफ केएस सुदर्शन का मानसिक संतुलन बिगड़ गया और सोनिया गांधी के बारे में ऐसे शब्द बोल दिए, जिन्हें एक विकृत मानसिकता का आदमी ही बोल सकता है।...
image
सोनिया का सच जान बेकाबू क्यों होते हो?
एक बार फिर लोकतंत्र पर आपातकाल मंडरा पड़ा है. राजमाता सोनिया गांधी के सिपहसालारों ने कांग्रेसी गुण्डों, माफियाओं और लोकतंत्र के हत्यारों का आह्वान किया है कि वह देशभर में संघ कार्यालयों पर धावा बोल दे. इसका तत्काल प्रभाव हुआ और कांग्रेसी गुण्डों ने संघ के दिल्ली मुख्यालय पर धावा भी बोल दिया. ठीक वैसे ही जैसे इंदिरा गांधी की मौत के बाद सिखों को निशाना बनाया गया था. हिंसक और अलोकतातंत्रिक मानसिकता से ग्रस्त कांग्रेसी सोनिया का सच जानकर आखिर इस तरह बेकाबू क्यों हो रहे हैं?...
image
रोम रोम में इरोम
कश्मीरी अलगाववादियों की तरह उसने आज तक अपने हाथ में कभी पत्थर नहीं उठाया. हालांकि उसका भी विरोध उसी बात को लेकर है जिसे लेकर कश्मीर में पत्थरबाजों की पूरी फौज सड़कों पर उतार दी गयी. पूर्वोत्तर में सशस्त्र सेना अधिनियम समाप्त किया जाए. इरोम शर्मिला विरोध कर रही है लेकिन उसका हथियार आंदोलन नहीं, आत्मोत्सर्ग है. पिछले दस साल से उसने अन्न त्याग कर रखा है. पुलिस और प्रशासन नाक की नलियों से पौष्टिक पदार्थ पहुंचाकर भले ही उसके शरीर को जिंदा रखे हुए हैं लेकिन उसे जब भी मौका मिलता है वह राजघाट जाती है और फफककर रोती है. शायद शर्मिला के सत्याग्रह को समझने के लिए देश में दूसरी कोई जगह बची भी नहीं है. ...
image
जिसके दर पर फाइल पहुंची, उसने रात गुजार ली
सपनों के शहर मुंबई के मुंह पर ऐसी कालिख शायद ही कभी लगी हो. मुंबई के कोलाबा स्थित आदर्श हाउसिंग सोसायटी की जैसी कहानी सामने आ रही है वह दिल दहला देनेवाली है. जिस शहर में इंच-सेन्टीमीटर में भी रहने की जगह का हिसाब रखा जाता हो वहां एक 31 मंजिला बिल्डिंग अवैध जमीन पर, अवैध तरीके से खड़ी कर दी गयी. भवन को खड़ा करने का यह भ्रष्टाचार उतना संगीन नहीं है जितना संगीन है यह समाचार कि यह भवन 1999 में कारगिल में शहीद जवानों की विधवाओं को आवासीय सुविधा देने के लिए तैयार किया जानेवाला था. कोलाबा के पास जिस स्थान पर यह भवन सीना तान खड़ा हुआ है उसकी हकीकत इतनी गंदी है कि किसी भी स्वाभिमानी नागरिक का सिर शर्म से झुक जाएगा. ...
image
बहुत बड़ा दुखारी है बुखारी
हाल में ही लखनऊ में एक पत्रकार को पीटकर अहमद बुखारी एक बार फिर चर्चा में आ गये. अहमद बुखारी ने लखनऊ में जिस पत्रकार को पीटा वह न तो किसी बड़े अखबार से जुड़ा था और न ही कोई बड़ा नाम था. लेकिन उस पत्रकार ने सवाल बड़ा किया था जिससे बौखलाकर बुखारी ने उसकी पिटाई कर दी थी. बुखारी का चरित्र यही रहा है कि वे हमेशा छोटे लोगों पर ही हाथ डालते हैं और उन्हें अपना शिकार बनाते हैं....
image
श्रीमान जी, मैं यशवंत सिंह भड़ास4मीडिया का संपादक और सीईओ हूं!
सेवा में, मानवाधिकार आयोग, दिल्ली / लखनऊ। श्रीमान, मैं यशवंत सिंह पुत्र श्री लालजी सिंह निवासी ग्राम अलीपुर बनगांवा थाना नंदगंज, जनपद गाजीपुर, उत्तर प्रदेश (हाल पता- ए-1107, जीडी कालोनी, मयूर विहार फेज-3, दिल्ली-96) हूँ. मैं वर्तमान में दिल्ली स्थित एक वेब मीडिया कंपनी भड़ास4मीडिया में कार्यरत हूं. इस कंपनी के पोर्टल का वेब पता www.bhadas4media.com है. मैं इस पोर्टल में सीईओ & एडिटर के पद पर हूं. इससे पहले मैं दैनिक जागरण, अमर उजाला एवं अन्य अखबारों में कार्यरत रहा हूँ. ...
image
कुछ तो समझे ख़ुदा करे कोई
जैसे-जैसे दिन गुज़रते जा रहे हैं वैसे-वैसे अयोध्या विवाद पर इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बैंच का फैसला भी प्रभावहीन होता जा रहा है। सुलह और समझदारी की बातें अब सौदेबाजी, अप्रत्यक्ष धमकियों व चेतावनी के रूप में सामने आ रही हैं। यही वजह है कि सभी पक्ष न्याय की अंतिम सीढ़ी सुप्रीम कोर्ट की ओर देख रहे हैं, वो भी जो फैसला आने पर दिखावटी रूप से खुश हुए और वो भी जो वास्तविक रूप में निराश हुए। देर सवेर फैसले को अपनी जीत बताने वालों के कंठ में दबे हुए विचार बाहर आने लगे हैं कि हाई कोर्ट ने विवादित भूमि का जो हिस्सा बंटवारा किया, वो अनुचित और अमान्य है अर्थात फैसला आने के बाद उदारता, सहिष्णुता के साथ शांति का प्रवर्तक बनने और दिखाने की जो तात्कालिक होड़ शुरू हुई थी, उसकी हवा निकल चुकी है।...
image
अजमेर विस्फोट का मारा, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ बेचारा
2007 में हुए अजमेर दरगाह विस्फोट में इंन्द्रेश कुमार का नाम आया है या फिर लाया गया यह तो अलग बहस का विषय है लेकिन मीडिया ने पिछले चौबीस घण्टे से इसे हाईप दिया है उसकी हकीकत क्या है? आखिर ऐसा क्या हुआ कि पिछले चौबीस घण्टे में मीडिया को अचानक संघ सबसे बड़ा आतंकी संगठन नजर आने लगा और चार्जशीट में सिर्फ नाम होने के नाम पर ही इन्द्रेश कुमार को आरोपी साबित करने में लग गया? क्या अजमेर शरीफ विस्फोट की जांच के बहाने संघ को ही उड़ाने की साजिश रची गयी है?...
image
गिलानी साहब, कश्मीर आजाद है!
यह बात सबकी समझ में आ जानी चाहिए कि कश्मीरी अवाम जिसे आज़ादी कहता है उसका मातलब भारत में विलय है और गिलानी टाइप पाकिस्तानी पैसे पर पलने वालों को यह हक नहीं है कि वे पाकिस्तान की तारीफ करते हुए कश्मीर की आज़ादी की बात करें क्योंकि पाकिस्तान ही कश्मीर की आज़ादी का असली दुश्मन है....
image
बुखारी को सबक सिखाना जरूरी
शाही इमाम द्वारा यह कृत्य जाहिर करता है कि बाबरी मस्जिद प्रकरण को रंग रोगन देने में वो जो चाह रहें है वो लोगों के गले नही उतर रहा है जिसके चलते वे खुद को आज की तारीख में हाशिए पर खड़ा महसूस कर रहे है ऐसे में बुखारी जी की बौखलाहट बढ़ गई है. वे इस मामले को तूल देकर मुख्यधारा में आने के लिए छटपटा रहे हैं किन्तु गिरगिट की भांति रंग बदलने वाले इन धार्मिक आकाओं की बातों पर जनता कोई खास तवज्जो नही दे रही है अलबत्ता लोग यह जरुर कह रहें है कि इस मामले पर अब अवाम राजनीति की और रोटियां नही सिकने देगी। अब वक्त आ गया है कि बुखारी जैसे आकाओं को जनता सबक सिखाए ताकि आगे ये इस तरह की गलती न दोहरा सकें....
image
अभिव्यक्ति की आजादी पर बुखारियों के वंशजों का कब्ज़ा
शाही इमाम सैयद अहमद शाह बुखारी नाराज हैं. उन्होंने वहीद को काफिर कहा और पीट दिया. बस चलता तो उसके सर कलम करने का फतवा जारी कर देते. हो सकता है कि एक दो दिनों में कहीं से कोई उठे और उसके सर पर लाखों के इनाम की घोषणा कर दे. वो मुसलमान था उसे ये पूछने की जुर्रत नहीं होनी चाहिए थी कि क्यूँ नहीं अयोध्या में विवादित स्थल को हिन्दुओं को सौंप देते? वैसे मै हिन्दू हूँ और मुझमे भी ये हिम्मत नहीं है कि किसी से पूछूं क्यूँ भाई कोर्ट के आदेश को सर आँखों पर बिठाकर इस मामले को यहीं ख़त्म क्यूँ नहीं कर देते? मैं ऐसा इसलिए नहीं पूछ सकता क्योंकि मै जानता हूँ ऐसे सवालों के अपने खतरे हैं....
image
सेकुलरिज़्म ऐसा है तो फिर हिन्दू राष्ट्र में बुराई क्या?
हमारे संचार माध्यमों में प्रतिदिन सर्वाधिक सुर्खियों में रहने वाला शब्द 'धर्म निरपेक्षता’ ही है। बाबरी मस्जिद विवाद पर अदालत का फैसला आने के बाद अब ये हर एक की जुबान पर है। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के मुखपत्र 'पांचजन्य’ के सम्पादक तरुण विजय का एक लेख नज़र से गुजरा। जिस में उन्होंने लिखा है कि ''अयोध्या पर फैसला आने के बाद 'सेकुलर’ समझ नहीं पा रहे हैं कि कुछ तनाव, झगड़ा और मारकाट तो हुई नहीं इसलिये अब कैसे अपने झंडे उठाए और अमन की मोमबत्तियां जला कर रखें।...
image
मुसलमान ही बताएं वे इस देश में कैसे रहेंगे?
बाबरी ढाँचे-राम जन्मभूमि मुकद्दमे के फैसले और कश्मीर में समस्या के समाधान की दिशा में सक्रियता दिखाने की बजाय हिन्दुस्तान में कश्मीर के विलय के सन्दर्भ में अनाप-शनाप बयान जारी करने की ओमर अब्दुल्ला की शेखचिल्ली वृत्ति के चलते एक बार फिर इस देश में पिछले ७ दशकों से जारी हिन्दू-मुस्लिम विभाजन कारी वृत्ति को हवा मिली है. सनद रहे कि इस उपमहाद्वीप को पिछले कई दशकों को धर्म के आधार पर बुरी तरह से विभाजित किया गया है....
image
आडवाणी जी "कलंकयात्रा'' थी आपकी रथयात्रा
लालकृष्ण आडवाणी का यह कहना कि अयोध्या पर हाईकोर्ट के फैसले से उनकी रथ यात्रा सार्थक साबित हुई है, उन हजारों मुसलमानों और हिन्दुओं के जख्मों पर नमक छिड़का है, जो उनकी रथयात्रा के चलते प्रभावित हुए थे। आडवाणी का यह बयान उन मुसलानों को भी आहत करने वाला है, जो यह सोचते हैं कि इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को अंतिम मानकर अब अयोध्या विवाद का पटाक्षेप हो जाना चाहिए। ऐसा चाहने वाले मुसलमानों के दिल में यह बात आ सकती है कि नहीं, सुप्रीम कोर्ट तक लड़ा जाना चाहिए। पता नहीं कैसे आडवाणी अपनी रथयात्रा को सार्थक बता रहे हैं। सच तो यह है कि आडवाणी की वह रथयात्रा इस देश पर एक कलंक और एक तरह से 'खूनी यात्रा' थी।...
image
सेकुलर बिरादरी के सिर पर न्याय का हथौड़ा
अयोध्या में रामजन्मभूमि पर इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के बाद कल तक जो न्यायालय के फैसले को मानने का उपदेश दे रहे थे अब वे ही न्यायपालिका के फैसले पर छिद्रान्वेषण करने निकल पड़े हैं. इस देश का सबसे बड़ा संकट है कि इसके बुद्धिजीवी उसी को ज्यादा कसौटी पर कसते हैं जिसकी सहिष्णुता को लेकर उन्हें पूरा विश्वास होता है. हिन्दू समाज दुनिया का सबसे सहिष्णु समाज है सो जिसे देखो वही उसके खिलाफ इल्जामों की सूची लिए खडा है. क्या किसी अन्य धर्मावलम्बी से उसकी आस्था के किसी प्रतीक चिह्न के मामले में इस तरह सबूत मांगे जा सकते हैं? जिसे देखो वही पूछ ले रहा है कि कैसे यह साबित किया जा सकता है कि राम अयोध्या में ही जन्मे थे और उसी स्थान पर जिस पर बाबरी ढांचा कभी मौजूद होता था?...
image
आपके गाँव में इसे फैसला कहते होंगे
बाबरी मस्जिद की ज़मीन का फैसला आ गया है . इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने अपना आदेश सुना दिया है .फैसले से एक बात साफ़ है कि जिन लोगों ने एक ऐतिहासिक मस्जिद को साज़िश करके ज़मींदोज़ किया था, उनको इनाम दे दिया गया है....
image
एक बार फिर आग लगाने की कोशिश
भाजपा के नेता लालकृष्ण आडवाणी एक बार फिर राम नाम का सहारा लेकर मैदान में उतर गए हैं। यह अच्छा हुआ कि बाबरी मस्जिद विवाद के मालिकाना हक का फैसला कुछ दिन के लिए टल गया है। अब समझ आ गया है कि भाजपा की चुप्पी दरअसल घात लगाने की मुद्रा भर थी। फैसला आते ही उसकी हरकतें नब्बे के दशक जैसी हो जाती और देश को एक बार फिर साम्प्रदायिकता की आग में झोंकने की नाकाम कोशिश की जाती। अब राममंदिर मुद्दे को दोबारा सड़कों पर लाने की बात करके भाजपा न्यायपालिका को ब्लैकमेल करना चाहती है।...
Next
Tags
No tags for this article
सर्वाधिकार (अ)सुरक्षित

विस्फोट.कॉम में प्रकाशित सामग्री पर हमारी ओर से कोई कापीराइट नहीं है.

Powered by Vivvo CMS v4.1.2