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रोशनी की खोज में अंधेरे को आमंत्रण

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जनवरी माह में नागपुर में आयोजित ऊर्जा विषयक एक व्याख्यान में ऊर्जा मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने घोषणा की कि विदर्भ को पॉवर हब बनाएंगे। यहां की बिजली परियोजनाओं के लिए जमीन देने वालों को मुआवजे के साथ 10 वर्षों तक 100 यूनिट बिजली प्रति माह मुफ्त दी जाएगी। लेकिन हकीकत यह है कि सरकार की यब प्रस्तावित योजना विदर्भ के जन जीवन के लिए अंधेरे का आमंत्रण साबित होगी.

किसान आत्महत्या को लेकर महाराष्ट्र राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में रहा है। राज्य में जोर पकड़े पृथक विदर्भ की लड़ाई लड़ रहे दिग्गज कहते पृथक विदर्भ के लिए इस बात का दावा भी करते हैं कि विदर्भ की दर्जन भर बिजली परियोजनाओं से विदर्भ के बाहर के शहर रौशन हो रहे हैं। फिलहाल जरूरत है कि विदर्भ में भरपूर बिजली देने की। विदर्भ में पावर प्लांट लगाने का कोई औचित्य नहीं है। विदर्भ में करीब 4500 मेगावाट बिजली का उत्पादन होता है, जबकि विदर्भ की आवश्यकता है कुल 2600 मेगावाट बिजली की, वह भी व्यस्ततम घंटो में। विदर्भ में बिजली बनाकर प्रदेश के दूसरे हिस्सों में भेजी जाती है। इस प्रक्रिया में हर साल करीब 100 मेगावाट बिजली की ट्रांसमिशन हानि होती है। इससे करीब 300 करोड़ का नुकसान उठाना पड़ता है। ऐसे में विदर्भ की धरती पर पावर हब बनाने का कोई मतलब नहीं है। किसान आत्महत्या से ग्रस्त क्षेत्र में पहले से ही भरपूर बिजली उत्पादन हो रहा है। दूर दराज के शहरों में भेजने से बिजली की हानि होती है। इससे बेहतर होता है जहां बिजली की कमी है, वहीं परियोजनाएं लाई जाए जिससे वहीं की बिजली वहीं सुलह हो और ट्रांसमिशन में फालतू का बिजली खर्च न हो। ऊर्जा मंत्री की इस घोषणा से किसान हितैषी लोगों में निराशा हुई। कहां तो वे कर्जग्रस्त किसानों के लिए मुफ्त में भरपूर बिजली के सपने देख रहे थे, और मंत्री कोई और शिगूफा छोड़ गए।

हालांकि इसको लेकर स्थानीय मीडिया ने काफी तारीफ की कि विदर्भ अब बिजली हब बनेगा। महाराष्ट्र कृषक समाज के प्रदेश उपाध्यक्ष संदीप अग्रवाल ने एक बातचीत में कहा कि फिलहाल विदर्भ में विद्युत ट्रांसमिशन के लिए जो ढांचा उपलब्ध है, वह जैसे तैसे अभी उत्पादित बिजली को ही ले जाने में सक्षम है। मंजूरी प्राप्त बिजली घरों से मिलने वाली बिजली ले जाने के लिये ही अभी ढांचागत सुविधा उपलब्ध नहीं है। कोयला भी बाहर से ही लाना होगा। क्योंकि बिजली घरों को लगनेवाला उच्च दर्जे का कोयला विदर्भ में मौजूद नहीं है। जिन खदानों में योग्य कोयला है उसमें से अधिकतर वन क्षेत्र या बाघ प्रकल्प के अंतर्गत आती है। अभी तक मंजूरी प्राप्त बिजलीघरों में ही प्रतिदिन करीब डेढ़ लाख टन कोयले की आवश्यकता होगी। इतने  कोयले की जब ढुलाई होगी व जलाया जाएगा, तो पूरा विदर्भ धूल व धुएं के गुबार में तब्दील हो जाएगा। इतना ही नहीं आनेवाले बिजल परियोजनाओं के लिए हर दिन 10 लाख क्यूबिक लीटर पानी की जरूरत पड़ेगी। सोचने वाली बात है। हाल के कुछ वर्षो में बरसात पर आश्रिम विदर्भ की खेती को बारिश का भरपूर पानी भी नसीब नहीं हो रहा है। पानी की बाकी परियोजनाओं के काम सरकारी फाइलों में अटके पड़े हैं। फिर बिजली हब के लिए विदर्भ की नई बिजली परियोजनाओं के लिए पानी कहां से आएगा। कहते हैं कि विदर्भ की करीब 84 प्रतिशत जमीन असिंचित है। यहां की खेती भगवान भरोसे है। फसल को दिया जानावाला पानी इन प्लांटों को दे दिया जाएगा। तो विदर्भ के बाकी किसानों के सामने फिर से बे-मौत मरने की नौबत आएगी।

बिजलीघरों की चिमनी से निकलने वाला प्रदूषण यहां के पर्यावरण में घुसेगा। हवा के माध्यम से लोगों के शरीर में समाएगा। बीमारियां होंगी। लोग श्वांस, कैंसर, चर्मरोग, टी. बी. आदि से पीड़ित होगा। इतना ही नहीं, नई बिजली परियोजनाओं से विदर्भ क्षेत्र का तापमान भी बढ़ेगा। उसका असर अलग। सोचने वाली बात यह है कि जब बिजली परियोजनाओं की जरूरत अन्य राज्यों में ज्यादा है तो फिर एक क्षेत्र विशेष को बिजली हब बनाने की क्या मतलब है। आखिर दूर दराज में ट्रॉसमिशन से ही तो बिजली जाएगी। इससे बेहतर हो कि जिन क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति होगी, वहीं आसपास परियोजनाएं लगे। इससे देश का विकास संतुलित होगा। कहीं ऐसा तो नहीं कि जमीन के बदले मुफ्त बिजली का प्रलोभन किसानों की जमीन हड़पने की एक नई साजिश हो। बिजली परियोजनाओं से किसान का पानी ही नहीं इलाके के लोगों का चैन व विदर्भ की हरियाली व फसल पूरी तरह नष्ट हो जाएगा। हां, बर्बादी के इस मंजर से सरकार और उद्योगपति भरपूर मुनाफा जरुर कमाएंगे।

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KKC on 17 February, 2010 22:24;12
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Well done. Government is just planning to get the land for the benefit of their Ministers and Businessmen. They are not a bit worry for the poor men. It has been proven several times.
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Jitendra Dave on 18 February, 2010 00:13;03
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Good Analysis. Keep it up.
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PRADEEP SINGHH on 18 February, 2010 18:44;50
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It is very ipotant thought.I hope that in future you write every situation. I like you future planig.
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Atul Modi on 18 February, 2010 23:01;32
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good lage rahooooooooooo
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image संजय स्वदेश किरोडीमल कॉलेज स्नातकोत्तर के बाद केंद्रीय हिंदी संस्थान दिल्ली से पत्रकारिता में डिप्लोमा। दैनिक हिंदुस्तान, नवभारत टाईम्स, सहारा समय, दैनिक भास्कर में काम. कई पत्र-पत्रिकाओं में स्वतंत्र लेखन के साथ स्थानीय जनअभियानों से जुड़े हैं। sanjayinmedia@rediffmail.com
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