Home | बियाबान में शोर | हुसैन के इस कर्म का मर्म समझो, हिन्दुओ!

हुसैन के इस कर्म का मर्म समझो, हिन्दुओ!

image

भारतीय कलाजगत के एक ढोंगी चित्रकार मकबूल फ़िदा हुसैन ने दुनिया भर में फैले भारतीय समुदाय के बूते स्वयं को स्थापित कर मोटी कमाई की है। लेकिन आखिरकार हिन्दू भावनाओं को आहत करनेवाले चित्र बनाकर हिन्दू जनमानस के साथ खिलवाड़ कर अपने जीवन की सांध्यवेला में कतर जैसे मुस्लिम देश की नागरिकता स्वीकार कर ली. ऐसा करके उसने माँ भारती की पीठ में खंजर भोंकने का काम किया है.

मकबूल फ़िदा हुसैन के स्व-निर्वासन पर कोहराम मचाने वाले वैसे तो हर हिंदूवादी को कानून और  संविधान की दुहाई देते रहते हैं.मबूल फ़िदा हुसैन के खिलाफ इस देश की तमाम अदालतों में आपराधिक मामले लंबित हैं.कानून की प्रक्रिया के आईने में मकबूल फ़िदा हुसैन इस देश के भगोड़े हैं. जब इस देश में उनके खिलाफ आपराधिक मामले प्रलंबित हैं,उसी समय एक देश उन्हें अपने देश की नागरिकता दे रहा है तो भारतीय विदेश मंत्रालय उस मामले में ऐसे 'भगोड़े' को उक्त देश द्वारा दी जा रही नागरिकता का विरोध क्यों नहीं करता? हमारे विदेशों में सक्रीय राजनयिक किस क़ानून के तहत उसका पासपोर्ट वापस लेते हैं? कहीं ऐसा तो नहीं कि मुस्लिम  माफिया खुद हुसैन के इस प्रयोग का इंतज़ार कर रहे हों? आज हुसैन के मामले पर समझौता हो रहा है,कल दाऊद इब्राहीम या किसी अन्य माफिया के लिए इसी तरह का समझौता होगा.

आप फ़र्ज़ करें की क़तर के किसी चित्रकार ने इस्लाम के किसी पीर-पैगम्बार का अपमान किया होता, उसके खिलाफ क़तर की अदालतों में आपराधिक मामला चल रहा होता तो क्या भारत का सत्ता तंत्र  उस कलाकार को हिन्दुस्थान में नागरिकता देने की हिम्मत जुटा सकता था? आप कल्पना कर सकते हैं कि पैगम्बर का कार्टून बनानेवाले दानिश कार्टूनिस्ट पर डेनमार्क में मुकदमा बन जाए तो क्या भारत उसे नागरिकता देने की सोच भी पाल सकता है? क्या हम सलमान रश्दी, तसलीमा नसरीन या तहमीना दुर्रानी को इस देश की नागरिकता दे सकते हैं? हालांकि इन तीनों ने किसी इस्लामी व्यक्तित्व की विकृत तस्वीर बनाने का भी पाप नहीं किया है,फिर क़तर की हरकत पर आपत्ति लेने  की बजाय हम प्रायश्चित की मुद्रा में क्यों हैं? भारत में कोई हुसैन को फांसी की सजा तो नहीं सुनायी गयी थी. किसी ऐसे मामले में उन्हें फंसाया भी नहीं गया था जिससे उन्हें अपना बुढापा पार करने में कोई परेशानी होती. हिन्दू संगठन तो सिर्फ इतना ही कह रहे थे कि हुसैन ने जिस कृत्य से हिन्दुओं की धार्मिक भावनाओं  से खिलवाड़ किया है उसके लिए माफी मांग लें. एक पंक्ति की माफी से भी हमारा अति उदारवादी हिन्दू हुसैन को माफ़ कर देता.लेकिन हुसैन ने अपने मगज में वर्षों से साद रहे मियांवादी मवाद को दुनिया के सामने सार्वजनिक कर इस देश के मुस्लिम परस्त साम्प्रदायिक मुसलामानों को सन्देश दिया है कि हिन्दुओं के खिलाफ वे बिंदास अपराध करें, उन्हें मुस्लिम देशों से पूरा प्रश्रय प्राप्त रहेगा.अब तक यह काम अकेले पाकिस्तान कर रहा था अब क़तर जैसे देश भी यही काम कर रहे हैं.

हमारा सत्ता तंत्र सेकुलर निर्वीर्यता का शिकार है. हमारी भोंपू मीडिया हमारे लोकतांत्रिक तंत्र को कटघरे में खडा करने का पाप कर रही है और देश के बहुसंख्यक समुदाय को अनर्गल अपराध बोध से ग्रस्त कराने में जुटी हुई है.  हमारे देश में मकबूल फिद्दा हुसैन के देश की नागरिकता त्यागने पर हंगामा खडा होता है. उसी कालावधि में हुसैन की तुलना में बड़े कलाकार माने जानेवाले सय्यद हैदर रजा द्वारा ५ दशक बाद भारत आ बसने के इरादे पर कोई खबर नहीं बनाती, कोई बहस नहीं छिड़ती, क्यों? किसी जमाने में सय्यद हैदर रजा और मकबूल फ़िदा हुसैन दोनों प्रोग्रेससिव आर्ट ग्रुप में इकट्ठे सक्रिय हुआ करते थे. दोनों की कर्मभूमि मुंबई थी. हैदर रजा १९५० के दशक में फ़्रांस में बस गए. वे पेरिस यात्रा पर थे. उसी समय उनका जेनी नामक युवती से प्रेम और विवाह हो गया. जेनी अपने माँ की एकमेव कन्या थी,वह माँ को अकेले छोड़ कर भारत में बसने का फैसला नहीं कर पा रही थी, सो रजा ने वहाँ रहना स्वीकार लिया. बावजूद इसके रजा साल-दो साल में भारत आते रहे. उनके चित्रों में भारतीयता झलकती रही. आज भी रजा बिंदु और नाग जैसे विशुद्ध हिन्दू प्रतीकों का अपनी चित्रकला में प्रदर्शन करते हैं. रजा ने अपनी हालिया भारत यात्रा के दौरान एक साक्षात्कार में स्वीकार किया कि वे साल भर में भारत आकर अपने जीवन का शेष समय यहाँ गुजारना चाहते हैं. वे अपने भावी कार्य के लिए इन दिनों भाग्वाद्गीता का भी अध्ययन कर रहे हैं.

दूसरी ओर अपनी उम्र के ९० साल पूरे कर चुके हुसैन पर इस्लामी मद सवार है। वे ऐसे इस्लामी देश की नागरिकता स्वीकार कर बैठे हैं जिस इस्लाम में चित्र बनाना ही हराम माना जाता है. कल कोई मुल्ला अगर किसी शरई अदालत में चला गया तो हुसैन पर कोड़े खाने की नौबत आ सकती है. क़तर जाकर भी क्या हुसैन इस्लामी इतिहास को अपने चित्र का विषय बना सकते हैं. अब भी हुसैन भारतीय नागरिकता त्यागने के बाद भी भारतीय कला त्यागने की औकात जुटाने की स्थिति में नहीं हैं. आज भी हुसैन जिन ३ विषयों पर चित्र बनाने की तैयारी कर रहे हैं उनमें से एक विषय विशुद्ध भारतीय है. वे मोहें जो दरो से मनमोहन सिंह तक की इस संस्कृति पर चित्र श्रृंखला बनाने की तैयारी में हैं.यदि हुसैन में रंच  मात्र भी नैतिकता हो तो उन्हें इस्लामी संस्कृति को दर्शाने व्वाले चित्रों पर क़तर से काम करना चाहिए. वे ऐसा करने की हिम्मत नहीं जुटा सकते,ऐसा करते ही क़तर के हुक्मरान उनको गधे पर बिठाकर कोड़े मारते हुए पूरे क़तर में घुमायेंगे. तब उनकी रक्षा में भारत के सड़े-गले सेकुलरों का स्यापा भी काम नहीं आयेगा. हिन्दू सहिष्णु है, सेकुलरवाद का राग गायों से छेड़ा जा सकता है और उनकी सींगों को आतंकी अस्त्र भी करार दिया जा सकता है. सियारों के सामने ये राग कहाँ चलनेवाला है?

Subscribe to comments feed Comments (6 posted):

Jayant Jain on 12 March, 2010 01:56;35
avatar
सिर्फ इतना ही कहूंगा..."लाजवाब आलेख"
Thumbs Up Thumbs Down
3
Prateek Abhay on 12 March, 2010 11:01;13
avatar
प्रेम शुक्ल को साधुवाद
भारत के सेंकडो हिन्दुओं के मर्म को उन्होंने समझा और शब्दों में व्यक्त किया
हुसैन न केवल हिन्दुओं बल्कि भारत के भी दोषी हैं
Thumbs Up Thumbs Down
3
Vicky G on 12 March, 2010 12:44;44
avatar
सचमुच, इस बिंदु पर तो कोई ध्यान ही नहीं दे रहा है कि किसी देश का अभियुक्त किसी अन्य देश की नागरिकता लेकर सज़ा से कैसे बच सकता है? कला, सांप्रदायिकता, धर्म इत्यादि को साइड में रखकर भारत सरकार को इस बारे में आधिकारिक तौर पर आपत्ति दर्ज करानी चाहिए. यदि सरकार इस बारे में कुछ न करे तो न्यायालय को स्वतः संग्यान लेकर कुछ करना चाहिए.
Thumbs Up Thumbs Down
2
Vainkuntham on 13 March, 2010 01:39;46
avatar
An Excellent Article, An Eye Opener for Hindus & India Both.
Thumbs Up Thumbs Down
2
Ajit on 17 March, 2010 23:35;33
avatar
बहुत सही प्रेम भैया, आपने हमारे भावनाओं को आवाज दी है , कभी कभी आपके लेखनी को प्रणाम करने को दिल करता है...

लगे रहे भैया, इस मंस्सिकता के खिलाफ जो कोल्कता के मुल्लो के मीनाक्षी फिल्म के खिलाफ स्यापा करने पर तुरंत माफ़ी माग लेती है और दृश्य भी फिल्म से हटा दिया जाता है वही हिन्दुओं की भावनाओं को बार बार जान बुझकर चोट पहुचाई जाती है, ऐसे सेकुलर लोगो की मान बहनों की कोई फोटो बनाये तो तुरंत खड़े हो जायेंगे लेकिन भारत माँ तो इन्हे प्रयोग की वास्तु लगती है, ऐसे लोगो को तो जुटे मार कर खदेड़ देना चाहिए सरहदों के बहार चाहे वो होंदु हो या मुसलमान ...
Thumbs Up Thumbs Down
1
Sanjeet Tripathi on 18 March, 2010 01:17;55
avatar
mai dakshinpanthi to nahi lekin aapke tarko ke aadhaar par likhe gaye is lekh ko padhkar yahi kah sakta hu ki shandar!!!
Thumbs Up Thumbs Down
1
total: 6 | displaying: 1 - 6

Post your comment comment

Type in Hindi (हिन्दी में कमेन्ट करने के लिए यहां रोमन में लिखिए यह अपने आप हिन्दी में बदल देगा.)

Title :
Body
Powered by Vivvo CMS v4.1.2
Share |
  • email Email to a friend
  • print Print version

ईमेल से विस्फोटः अपना ईमेल यहां भरें और सब्सक्राइब करें:

Delivered by FeedBurner

Author info
image प्रेम शुक्ल मुंबई से प्रकाशित हिन्दी सामना के कार्यकारी संपादक. पिछले 20 सालों से पत्रकारिता. पत्रकारिता के साथ ही मुबंई में हिन्दीभाषी समाज के विभिन्न सांस्कृतिक और सामाजिक गतिविधियों में भी सक्रिय. विस्फोट.कॉम के नियमित स्तंभ लेखक. संपर्क - premshukla@rediffmail.com
Rate this article
4.00
More from बियाबान में शोर
Previous
image
सुदर्शन का (कु) दर्शन
जबसे आरएसएस के लोगों की आतंकवादी घटनाओं में संलिप्तता सामने आयी है, तब से आरएसएस के नेता बौखला गए हैं। इस बौखलाहट में ही शायद संघ के इतिहास में पहली बार हुआ है कि इसके स्वयंसेवक विरोध प्रदर्शन करने के लिए सड़कों पर उतरे। इसी बौखलाहट में आरएसएस के एक्स चीफ केएस सुदर्शन का मानसिक संतुलन बिगड़ गया और सोनिया गांधी के बारे में ऐसे शब्द बोल दिए, जिन्हें एक विकृत मानसिकता का आदमी ही बोल सकता है।...
image
सोनिया का सच जान बेकाबू क्यों होते हो?
एक बार फिर लोकतंत्र पर आपातकाल मंडरा पड़ा है. राजमाता सोनिया गांधी के सिपहसालारों ने कांग्रेसी गुण्डों, माफियाओं और लोकतंत्र के हत्यारों का आह्वान किया है कि वह देशभर में संघ कार्यालयों पर धावा बोल दे. इसका तत्काल प्रभाव हुआ और कांग्रेसी गुण्डों ने संघ के दिल्ली मुख्यालय पर धावा भी बोल दिया. ठीक वैसे ही जैसे इंदिरा गांधी की मौत के बाद सिखों को निशाना बनाया गया था. हिंसक और अलोकतातंत्रिक मानसिकता से ग्रस्त कांग्रेसी सोनिया का सच जानकर आखिर इस तरह बेकाबू क्यों हो रहे हैं?...
image
रोम रोम में इरोम
कश्मीरी अलगाववादियों की तरह उसने आज तक अपने हाथ में कभी पत्थर नहीं उठाया. हालांकि उसका भी विरोध उसी बात को लेकर है जिसे लेकर कश्मीर में पत्थरबाजों की पूरी फौज सड़कों पर उतार दी गयी. पूर्वोत्तर में सशस्त्र सेना अधिनियम समाप्त किया जाए. इरोम शर्मिला विरोध कर रही है लेकिन उसका हथियार आंदोलन नहीं, आत्मोत्सर्ग है. पिछले दस साल से उसने अन्न त्याग कर रखा है. पुलिस और प्रशासन नाक की नलियों से पौष्टिक पदार्थ पहुंचाकर भले ही उसके शरीर को जिंदा रखे हुए हैं लेकिन उसे जब भी मौका मिलता है वह राजघाट जाती है और फफककर रोती है. शायद शर्मिला के सत्याग्रह को समझने के लिए देश में दूसरी कोई जगह बची भी नहीं है. ...
image
जिसके दर पर फाइल पहुंची, उसने रात गुजार ली
सपनों के शहर मुंबई के मुंह पर ऐसी कालिख शायद ही कभी लगी हो. मुंबई के कोलाबा स्थित आदर्श हाउसिंग सोसायटी की जैसी कहानी सामने आ रही है वह दिल दहला देनेवाली है. जिस शहर में इंच-सेन्टीमीटर में भी रहने की जगह का हिसाब रखा जाता हो वहां एक 31 मंजिला बिल्डिंग अवैध जमीन पर, अवैध तरीके से खड़ी कर दी गयी. भवन को खड़ा करने का यह भ्रष्टाचार उतना संगीन नहीं है जितना संगीन है यह समाचार कि यह भवन 1999 में कारगिल में शहीद जवानों की विधवाओं को आवासीय सुविधा देने के लिए तैयार किया जानेवाला था. कोलाबा के पास जिस स्थान पर यह भवन सीना तान खड़ा हुआ है उसकी हकीकत इतनी गंदी है कि किसी भी स्वाभिमानी नागरिक का सिर शर्म से झुक जाएगा. ...
image
बहुत बड़ा दुखारी है बुखारी
हाल में ही लखनऊ में एक पत्रकार को पीटकर अहमद बुखारी एक बार फिर चर्चा में आ गये. अहमद बुखारी ने लखनऊ में जिस पत्रकार को पीटा वह न तो किसी बड़े अखबार से जुड़ा था और न ही कोई बड़ा नाम था. लेकिन उस पत्रकार ने सवाल बड़ा किया था जिससे बौखलाकर बुखारी ने उसकी पिटाई कर दी थी. बुखारी का चरित्र यही रहा है कि वे हमेशा छोटे लोगों पर ही हाथ डालते हैं और उन्हें अपना शिकार बनाते हैं....
image
श्रीमान जी, मैं यशवंत सिंह भड़ास4मीडिया का संपादक और सीईओ हूं!
सेवा में, मानवाधिकार आयोग, दिल्ली / लखनऊ। श्रीमान, मैं यशवंत सिंह पुत्र श्री लालजी सिंह निवासी ग्राम अलीपुर बनगांवा थाना नंदगंज, जनपद गाजीपुर, उत्तर प्रदेश (हाल पता- ए-1107, जीडी कालोनी, मयूर विहार फेज-3, दिल्ली-96) हूँ. मैं वर्तमान में दिल्ली स्थित एक वेब मीडिया कंपनी भड़ास4मीडिया में कार्यरत हूं. इस कंपनी के पोर्टल का वेब पता www.bhadas4media.com है. मैं इस पोर्टल में सीईओ & एडिटर के पद पर हूं. इससे पहले मैं दैनिक जागरण, अमर उजाला एवं अन्य अखबारों में कार्यरत रहा हूँ. ...
image
कुछ तो समझे ख़ुदा करे कोई
जैसे-जैसे दिन गुज़रते जा रहे हैं वैसे-वैसे अयोध्या विवाद पर इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बैंच का फैसला भी प्रभावहीन होता जा रहा है। सुलह और समझदारी की बातें अब सौदेबाजी, अप्रत्यक्ष धमकियों व चेतावनी के रूप में सामने आ रही हैं। यही वजह है कि सभी पक्ष न्याय की अंतिम सीढ़ी सुप्रीम कोर्ट की ओर देख रहे हैं, वो भी जो फैसला आने पर दिखावटी रूप से खुश हुए और वो भी जो वास्तविक रूप में निराश हुए। देर सवेर फैसले को अपनी जीत बताने वालों के कंठ में दबे हुए विचार बाहर आने लगे हैं कि हाई कोर्ट ने विवादित भूमि का जो हिस्सा बंटवारा किया, वो अनुचित और अमान्य है अर्थात फैसला आने के बाद उदारता, सहिष्णुता के साथ शांति का प्रवर्तक बनने और दिखाने की जो तात्कालिक होड़ शुरू हुई थी, उसकी हवा निकल चुकी है।...
image
अजमेर विस्फोट का मारा, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ बेचारा
2007 में हुए अजमेर दरगाह विस्फोट में इंन्द्रेश कुमार का नाम आया है या फिर लाया गया यह तो अलग बहस का विषय है लेकिन मीडिया ने पिछले चौबीस घण्टे से इसे हाईप दिया है उसकी हकीकत क्या है? आखिर ऐसा क्या हुआ कि पिछले चौबीस घण्टे में मीडिया को अचानक संघ सबसे बड़ा आतंकी संगठन नजर आने लगा और चार्जशीट में सिर्फ नाम होने के नाम पर ही इन्द्रेश कुमार को आरोपी साबित करने में लग गया? क्या अजमेर शरीफ विस्फोट की जांच के बहाने संघ को ही उड़ाने की साजिश रची गयी है?...
image
गिलानी साहब, कश्मीर आजाद है!
यह बात सबकी समझ में आ जानी चाहिए कि कश्मीरी अवाम जिसे आज़ादी कहता है उसका मातलब भारत में विलय है और गिलानी टाइप पाकिस्तानी पैसे पर पलने वालों को यह हक नहीं है कि वे पाकिस्तान की तारीफ करते हुए कश्मीर की आज़ादी की बात करें क्योंकि पाकिस्तान ही कश्मीर की आज़ादी का असली दुश्मन है....
image
बुखारी को सबक सिखाना जरूरी
शाही इमाम द्वारा यह कृत्य जाहिर करता है कि बाबरी मस्जिद प्रकरण को रंग रोगन देने में वो जो चाह रहें है वो लोगों के गले नही उतर रहा है जिसके चलते वे खुद को आज की तारीख में हाशिए पर खड़ा महसूस कर रहे है ऐसे में बुखारी जी की बौखलाहट बढ़ गई है. वे इस मामले को तूल देकर मुख्यधारा में आने के लिए छटपटा रहे हैं किन्तु गिरगिट की भांति रंग बदलने वाले इन धार्मिक आकाओं की बातों पर जनता कोई खास तवज्जो नही दे रही है अलबत्ता लोग यह जरुर कह रहें है कि इस मामले पर अब अवाम राजनीति की और रोटियां नही सिकने देगी। अब वक्त आ गया है कि बुखारी जैसे आकाओं को जनता सबक सिखाए ताकि आगे ये इस तरह की गलती न दोहरा सकें....
image
अभिव्यक्ति की आजादी पर बुखारियों के वंशजों का कब्ज़ा
शाही इमाम सैयद अहमद शाह बुखारी नाराज हैं. उन्होंने वहीद को काफिर कहा और पीट दिया. बस चलता तो उसके सर कलम करने का फतवा जारी कर देते. हो सकता है कि एक दो दिनों में कहीं से कोई उठे और उसके सर पर लाखों के इनाम की घोषणा कर दे. वो मुसलमान था उसे ये पूछने की जुर्रत नहीं होनी चाहिए थी कि क्यूँ नहीं अयोध्या में विवादित स्थल को हिन्दुओं को सौंप देते? वैसे मै हिन्दू हूँ और मुझमे भी ये हिम्मत नहीं है कि किसी से पूछूं क्यूँ भाई कोर्ट के आदेश को सर आँखों पर बिठाकर इस मामले को यहीं ख़त्म क्यूँ नहीं कर देते? मैं ऐसा इसलिए नहीं पूछ सकता क्योंकि मै जानता हूँ ऐसे सवालों के अपने खतरे हैं....
image
सेकुलरिज़्म ऐसा है तो फिर हिन्दू राष्ट्र में बुराई क्या?
हमारे संचार माध्यमों में प्रतिदिन सर्वाधिक सुर्खियों में रहने वाला शब्द 'धर्म निरपेक्षता’ ही है। बाबरी मस्जिद विवाद पर अदालत का फैसला आने के बाद अब ये हर एक की जुबान पर है। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के मुखपत्र 'पांचजन्य’ के सम्पादक तरुण विजय का एक लेख नज़र से गुजरा। जिस में उन्होंने लिखा है कि ''अयोध्या पर फैसला आने के बाद 'सेकुलर’ समझ नहीं पा रहे हैं कि कुछ तनाव, झगड़ा और मारकाट तो हुई नहीं इसलिये अब कैसे अपने झंडे उठाए और अमन की मोमबत्तियां जला कर रखें।...
image
मुसलमान ही बताएं वे इस देश में कैसे रहेंगे?
बाबरी ढाँचे-राम जन्मभूमि मुकद्दमे के फैसले और कश्मीर में समस्या के समाधान की दिशा में सक्रियता दिखाने की बजाय हिन्दुस्तान में कश्मीर के विलय के सन्दर्भ में अनाप-शनाप बयान जारी करने की ओमर अब्दुल्ला की शेखचिल्ली वृत्ति के चलते एक बार फिर इस देश में पिछले ७ दशकों से जारी हिन्दू-मुस्लिम विभाजन कारी वृत्ति को हवा मिली है. सनद रहे कि इस उपमहाद्वीप को पिछले कई दशकों को धर्म के आधार पर बुरी तरह से विभाजित किया गया है....
image
आडवाणी जी "कलंकयात्रा'' थी आपकी रथयात्रा
लालकृष्ण आडवाणी का यह कहना कि अयोध्या पर हाईकोर्ट के फैसले से उनकी रथ यात्रा सार्थक साबित हुई है, उन हजारों मुसलमानों और हिन्दुओं के जख्मों पर नमक छिड़का है, जो उनकी रथयात्रा के चलते प्रभावित हुए थे। आडवाणी का यह बयान उन मुसलानों को भी आहत करने वाला है, जो यह सोचते हैं कि इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को अंतिम मानकर अब अयोध्या विवाद का पटाक्षेप हो जाना चाहिए। ऐसा चाहने वाले मुसलमानों के दिल में यह बात आ सकती है कि नहीं, सुप्रीम कोर्ट तक लड़ा जाना चाहिए। पता नहीं कैसे आडवाणी अपनी रथयात्रा को सार्थक बता रहे हैं। सच तो यह है कि आडवाणी की वह रथयात्रा इस देश पर एक कलंक और एक तरह से 'खूनी यात्रा' थी।...
image
सेकुलर बिरादरी के सिर पर न्याय का हथौड़ा
अयोध्या में रामजन्मभूमि पर इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के बाद कल तक जो न्यायालय के फैसले को मानने का उपदेश दे रहे थे अब वे ही न्यायपालिका के फैसले पर छिद्रान्वेषण करने निकल पड़े हैं. इस देश का सबसे बड़ा संकट है कि इसके बुद्धिजीवी उसी को ज्यादा कसौटी पर कसते हैं जिसकी सहिष्णुता को लेकर उन्हें पूरा विश्वास होता है. हिन्दू समाज दुनिया का सबसे सहिष्णु समाज है सो जिसे देखो वही उसके खिलाफ इल्जामों की सूची लिए खडा है. क्या किसी अन्य धर्मावलम्बी से उसकी आस्था के किसी प्रतीक चिह्न के मामले में इस तरह सबूत मांगे जा सकते हैं? जिसे देखो वही पूछ ले रहा है कि कैसे यह साबित किया जा सकता है कि राम अयोध्या में ही जन्मे थे और उसी स्थान पर जिस पर बाबरी ढांचा कभी मौजूद होता था?...
image
आपके गाँव में इसे फैसला कहते होंगे
बाबरी मस्जिद की ज़मीन का फैसला आ गया है . इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने अपना आदेश सुना दिया है .फैसले से एक बात साफ़ है कि जिन लोगों ने एक ऐतिहासिक मस्जिद को साज़िश करके ज़मींदोज़ किया था, उनको इनाम दे दिया गया है....
image
एक बार फिर आग लगाने की कोशिश
भाजपा के नेता लालकृष्ण आडवाणी एक बार फिर राम नाम का सहारा लेकर मैदान में उतर गए हैं। यह अच्छा हुआ कि बाबरी मस्जिद विवाद के मालिकाना हक का फैसला कुछ दिन के लिए टल गया है। अब समझ आ गया है कि भाजपा की चुप्पी दरअसल घात लगाने की मुद्रा भर थी। फैसला आते ही उसकी हरकतें नब्बे के दशक जैसी हो जाती और देश को एक बार फिर साम्प्रदायिकता की आग में झोंकने की नाकाम कोशिश की जाती। अब राममंदिर मुद्दे को दोबारा सड़कों पर लाने की बात करके भाजपा न्यायपालिका को ब्लैकमेल करना चाहती है।...
Next
Tags
No tags for this article
सर्वाधिकार (अ)सुरक्षित

विस्फोट.कॉम में प्रकाशित सामग्री पर हमारी ओर से कोई कापीराइट नहीं है.

Powered by Vivvo CMS v4.1.2