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अकबर की छतरी पर नासमझी की गठरी

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आम आदमी की क्या बात करें. जब राष्ट्रीय प्रतीकों और धरोहरों का संरक्षण करने वाला पुरातत्व विभाग ही राष्ट्रीय प्रतीकों को ठीक से नहीं जान पा रहा है. उसके जिला स्तर के अधिकारी को नहीं पता कि राष्ट्रीय चिन्ह माने जाने वाले अशोक स्तम्भ के चक्र में कितनी तीलियॉ है. वे जानकारी होने से इंकार कर देते हैं.

राजस्थान के भरतपुर जिले में बयाना एक ऐतिहासिक कस्बा है. जहॉ प्राचीन इतिहास के साथ मुगलकालीन स्थापत्य कला के बेजोड नमूने आज भी उपलब्ध है. उषा का मन्दिर है तो अकबर की छतरी और बाबर की तलाकनी मस्जिद भी यहॉ है. वैसे ये इतिहास के प्रतीक अब पूरी तरह ये ध्वस्त है. अब सरकार की ओर से इनके संरक्षण और रखरखाब की कोशिशे की जा रही है. ये कोशिशें कितनी इमानदारी से की जा रही है इसकी बानगी है अकबर की छतरी के सूचना शिला पटट पर बने अशोक चिन्ह को देख कर जाना जा सकता है.

इस शिलापटट पर भारत सरकार लिखा हुआ है. साथ ही अशोक चिन्ह भी बनाया गया है. अशोक चिन्ह में 9 तीलियॉ बनाई गई है. इस अशोक चिन्ह के नीचे सत्यमेव जयते भी नहीं लिखा गया है. बयाना कस्वे में फिलहाल करीब 10 लाख रूपये के ऐसे काम चल रहे है . जिनमें काम ऐसा हो रहा है कि आप हाथ लगाऐगें और ईट आपके हाथ में आ जायेगी. हमने जब इस सूचना शिलापट्ट को छू कर देखा तो उसकी कई ईटें हाथों में आ गई. ऐसे ही कुछ हालात विजयगढ दुर्ग पर चल रहे निर्माण कार्यो के है.

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग अकबर के जिस सलामी मंच का फिर से निर्माण करा रहा है उसके बारे में  दो प्रकार की बातें कहीं जाती है. कुछ का मानना है कि मुगल शासक अकबर 1600 वीं ईसवी के आसपास आगरा से गुजरात विजय अभियान में जाते समय बयाना में ठहरा था. और इस मंच से खडा होकर उन्होंने अपनी सेना की सलामी ली थी.  कुछ का मानना है कि दक्षिण  विजय अभियान से जब विजयी सेना लौटी तो खुद अकबर ने बयाना आकर अपनी सेना का स्वागत कर सलामी ली थी.तभी से इसे सलामी मंच कहा जाता है. विभागीय अधिकारी भी इस विषय में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं रखते है.

वैसे इतिहास की ये धरोहर बर्षो से जीर्ण शीर्ण हालत में पडी हुई है. अब कहीं सरकार और उसके विभाग को इनकी सुध आई है. लेकिन वो भी कितनी कारगर और उपयोगी साबित होगीं इसे इन निर्माण कार्यो को देखकर आसानी से समझा जा सकता है. सूचना के शिलापटटों पर जहॉं राष्ट्रीय प्रतीकों को लेकर अशुद्वियों की भरमार है वही हाथ के छूने मात्र से ईटें खिसक रही है. ये पुनर्निमाण कितना उपयोगी और दीर्घ आयु वाला होगा. अशुद्वियों पर स्थानीय कर्मचारी जहॉ ये कहकर पल्ला झाड रहे है कि हमें कुछ नहीं पता. ऊपर वाले ही तय करते है. वही जिला सहायक संरक्षण अशोक मीणा का कहना है कि ऐसा तो कुछ नहीं है. वैसे तीलियॉ होती कितनी है. आप कहते है तो उन्हें 24 करा देगें. वैसे इससे फर्क कुछ पड़ता नहीं है.

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ravi on 15 April, 2010 21:11;59
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akbar ki chatri ki jrurat kya hai apno ki bnao
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मनोज on 15 April, 2010 22:35;18
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राजस्थान में भष्टाचार बहुत बढ गया, एक बात तो ये भी सच है कि हम गुलामी के इन प्रतीकों को अब क्यों ढो रहे है. दूसरी बात ये भी है कि जब कुछ बना रहे है तो उनहें ठीक से और सही जानकारी के साथ बनाये. राष्टीय प्रतीक के साथ ऐसा व्यवहार अशोभनीय है.
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image राजीव शर्मा राजीव शर्मा राजस्थान में रहकर मुक्त पत्रकारिता कर रहे हैं.इससे पूर्व कइ अखवारों के लिए रिपोटिंग कर चुके हें। राजनीति के अलावा पानी-पर्यावरण के मुद्दे पर संवेदनशील रिपोर्टिंग के लिए प्रयासरत। विस्फोट के लिए राजस्थान से नियमित लेखन और रिपोर्टिंग. rsmediaraj@gmail.com
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