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भोपाल पीड़ितों को 1500 करोड़ की रिश्वत

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मैं शायद एक अजीब सी बात आप लोगों के बीच रख रहा हूं, क्योंकि जीओएम ने जिस मुस्तैदी से प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह द्वारा दिये गये दस दिनों के डेटलाइन के भीतर सारी जांच कर ली और एक-एक कर कई लुभावनी सिफारिशें कर दीं उससे हमें खुशी ही होनी चाहिये थी. क्योंकि वे हम लोग ही हैं जो हमेशा से मानते रहे हैं कि भोपाल के पीड़ितों के साथ अन्याय हुआ है. उनके साथ न्याय होना चाहिये. उन्हें वाजिब मुआवजा मिलना चाहिये. नहीं! सवाल यह नहीं है!

सवाल मुआवजे का नहीं है. भोपाल की अदालत के फैसले के बाद उठा सवाल यह मालूम करने का था कि आखिर यह अपराध किसने किया! कितना बड़ा अपराध हुआ और अपराधियों को कितनी सजा मिलनी चाहिये! क्या सिर्फ दो साल! और यूनियन कार्बाइड कंपनी पर कितना जुर्माना होना चाहिये! क्या सिर्फ पांच लाख! हमें इसका सवाल ढूंढना था चिदंबरम जी. मगर आपने दूसरे सवालों के जवाब ढूंढे. आपने यूनियन कार्बाइड के बदले भारत सरकार या सीधे कहें तो भारतीय टैक्स पेयरों पर 15 सौ करोड़ का जुर्माना आयद कर दिया.
 
आपने ऐसा क्यों किया! हम टैक्स पेयरों का अपराध क्या है! क्या यही कि हम आपके जैसे निकम्मे शासकों को चुनते हैं! आपकी पार्टी की सरकार ने एंडरसन को जाने दिया, उसके द्वारा दिये गये मुआवजे के प्रस्ताव को ठुकरा दिया और अब आप हमारी जेब से भोपाल के पीड़ितों को रिश्वत देना चाहते हैं ताकि वे इस बात का शोर करना बंद कर दे कि जिम्मेदार को सजा दिलाई जाये. उसकी पहचान हो.
 
यूनियन कार्बाइड अमेरिका से ताल ठोक कर कहती है कि भारत में हुए हादसे के लिये हमारी कोई जिम्मेदारी नहीं बनती. हम एक पैसा नहीं देंगे और हमारी सरकार चूं तक नहीं करती. ओबामा से सीख तक नहीं लेती कि वे किस तरह मैक्सिको खाड़ी में तेल के लीकेज के बाद बीपी कंपनी की गर्दन मरोड़ कर उससे हर्जाना वसूल कर रहे हैं. अमेरिका कह देता है कि भारत उभरती हुई ताकत है और हम खुश हो जाते हैं. क्या हमारी ताकत यही है कि एक दीवालिया हो चुकी कंपनी तक हमें धमका देती है और हम मुंह झुका लेते हैं.
 
जीओएम की बैठक में एक शिगूफे की तरह इस बात पर चर्चा हुई कि एंडरसन को प्रत्यर्पित कराने की कोशिश होगी ताकि लोग आपकी संवेदनशीलता पर भरोसा कर लें. चिदंबरम महोदय ने पहले भी कई बार कहा है कि डेविड हेडली और राणा के प्रत्यर्पण के प्रयास किये जायेंगे, मगर उनके कहे से क्या हुआ. एंडरसन अब बिस्तर पर पड़ा हुआ एक लाचार इंसान है. अर्जुन सिंह संन्यास लेने की तैयारी में हैं. राजीव गांधी और नरसिंहा राव परलोक सिधार चुके हैं. आज उन्हें वापस नहीं लाया जा सकता. मगर इस बात में कतई कोई शक नहीं है कि भोपाल के साथ हुए अन्याय में इनमें से एक-एक व्यक्ति की भूमिका थी.
 
एक-एक आदमी भोपाल के प्रति संवेदनहीन हो गया था, अपनी कुर्सी के लिए, अपने कैरियर के लिये या फिर अमेरिका की सीआईए जैसी एजेंसियों के खौफ से. जीओएम की बैठक यह सवाल क्यों नहीं उठा कि डाउ कैमिकल्स के साथ क्या व्यवहार किया जाएगा, जो यूनियन कार्बाइड का ही बदला हुआ चेहरा है. उसी का बदला हुआ नाम. हमारी सरकार अब तक हर स्तर पर उसकी मदद करने को तैयार रही है. अभिषेक मनु सिंघवी उसकी पैरवी करते रहे हैं और कमलनाथ उनके व्यापार को बढाने में उनकी मदद करते रहे हैं.
 
जीओएम ने जो कुछ किया उस पर भरोसा करना मूर्खता है. यह सरकार परमाणु दायित्व के मसले पर एक बार फिर हमें औद्योगिक हादसों के मुंह में ढकेलने का मन बना चुकी है. मौत के बाद मुआवजा बांटने से जनता का नुकसान होता है, मगर हमारी सरकार में हर्जाना वसूलने का दम नहीं.

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tejpal negi on 23 June, 2010 15:22;51
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thki kaha pushya jee... hamari sarkar ke bhitar america ke samane sir mthane ka madda hi nahin hai. indian sarkar to vahi karti hai jo america me baithe uske aaka karkte hain..aapke vichar logon tak pahuchen iske liye aapke aalekh ko apne akhbar me chapane ki izazat chahuga
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pushyamitra on 23 June, 2010 16:59;23
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tejpalji yah aaka adhikar hai kyonki visfot ki har samagree copy right se bahar hoti hai. har koi iska upyog karne ke liye swatantra hai.

dhanyawad
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Psudo on 23 June, 2010 18:58;01
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सीधी बात है ! मनमोहन और कांग्रेस अमेरिका के एजेंट हैं !वो बोलेंगे तो ये लोग नंगे भी नाचेंगे ! अपनी माँ (भारत) को तो इन लोगो ने कब का बीच दिया है !
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sushil Gangwar on 23 June, 2010 20:30;35
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साप निकल गया भिट्टा पीटने से क्या फायदा ?
सुशील गंगवार --

किसी ने सच कहा है साप निकल गया भिट्टा पीटने से क्या फायदा ? भोपाल गैस त्रासदी के २५ साल बाद सरकार की नीद खुली तो साप निकल चुका था। साप अपने पीछे सपोले नेताओं को छोड़ गया । जो इतने सालो बाद एक दूसरे का मुह ताक रहे है किसी की जुबान हिलने का नाम नहीं ले रही है ।

१५००० मौत १००००० से अधिक अपाहिज बेसहारा फिर भी मेरा भारत महान ? कयामत के पच्चीस बरस गुजर जाने के बाद सपोले नेता गन्दी राजनीति के लिए नया मुद्दा तलाश रहे है । जो जहर मासूम लोगो की रगों बह रहा था उस जहर को फ़ैलाने वाला भारतीय नहीं बल्कि वारेन एंडरसन विदेशी साप था.

जो अब ९६ का हो चुका है। अगर उसे २५ साल पहले सलाखों के पीछे डाल दिया होता तो वह भारत की घटिया राजीनीति पर कहे कहे नहीं लगा रहा होता । एंडरसन चाय की चुस्की के साथ कहता होगा । India is fool country । सब कुछ बिकता है खरीदार होना मागता है । एंडरसन जिस कार से भोपाल से हवाई अड्डे तक गया वह एक कांग्रेसी नेता की बतायी जाती है । उसे को भागने के लिए किसी बड़े नेता के इशारे पर भारत से जाने की सुविधा दी गयी।

हमारी माँ बाबूजी और मामा का नाम लेकर रोती है हमेशा पागलो की तरह कहती रहती है मेरे बापू होते तो ऐसा कभी नहीं होता । वह पढ़ी लिखी नहीं है । उसे टीवी देखने का शौक है वह टीवी पूरी तरह समझ नहीं पाती है । वह भूल चुकी है उस समय पर गाँधी की सरकार थी । फिर साप भिट्टे से कैसे भाग गया । भोपाल गैस त्रासदी लापरवाही और उदासीनता का नतीजा है।
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image Pushya Mitra मूलतः बिहार के पूर्णिया जिले का वासी. माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय से जनसंचार स्नातक. नवभारत, अमर उजाला, हिंदुस्तान अखबार और लोकायत पत्रिका और अंग भारत में कार्य. वर्तमान में प्रभात खबर में कार्यरत. सामाजिक मुद्दों से जुडाव. राजनीति और हार्डकोर खबरों पर टिपण्णी लिखना पसंद.
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