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बियाबान में शोर

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जीएम फसलों पर जोरजबर्दस्ती

इसे आप बायोटेक्नालाजी इमरजेन्सी मान सकते हैं. सरकार अघोषित रूप से ऐसा ही काम कर रही है कि अगर बायोटेक्नालाजी के विरोध में कोई भी स्वर उठता है तो उसे निर्ममता से कुचल दिया जाए. ऐसा लगता है कि आपातकाल का भूत फिर से जाग गया है. अगर कुख्यात इंदिरा प्रायोजित इमरजंसी में सवाल करने पर किसी भी व्यक्ति को जेल की सलाखों के पीछे भेजा जा सकता था तो आज भी बायोटेक्नॉलाजी के सवाल पर हालात वैसे ही हैं.
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संघ से डरने डराने वाले लोग

"संघ आज की जरूरत है। इसे निकट आकर जानिए-समझिए। अनुभूति के बिना संघ समझा नहीं जा सकेगा। लेकिन कुछ जिद्दी लोग हैं जो संघ जानना-समझना नहीं चाहते। वे सिर्फ आलोचक बने रहना चाहते हैं। संघ की उलझी हुई और विद्रूप छवि बनाना चाहते हैं। यही छवि लोगों को दिखाना चाहते हैं। ऐसे ही लोगों ने संघ का डरावना चेहरा निर्मित किया है। वे चाहते हैं लोग संघ से डरें, भयभीत हों ताकि संघ का विस्तार रूके। देश और दुनिया में संघ से डरने वालों की तादाद कम है, लेकिन डराने वाले ज्यादा हैं।"
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परमाणु कीचड़ में सने हाथ

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सरकार ने परमाणु हर्जाना विधेयक लोकसभा में पेश नहीं किया, यह अच्छा किया। पेश न करने का कारण यह भी हो सकता है कि 35 कांग्रेस सांसद अनुपस्थित थे और सारे विरोधी दल एकजुट थे। वह पेश होता तो शायद गिर जाता। कारण जो भी हो, इस विधेयक का अटक जाना भारत के हित में है। यह ठीक है कि प्रधानमंत्री अगले माह जब अमेरिका जाएंगे तो यह विधेयक उनके हाथ में नहीं होगा, लेकिन क्या कीचड़ में सने हाथों के साथ जाने से यह कहीं अच्छा नहीं कि वे खाली हाथ ही जाएं?...
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जेपी के लिए सबकुछ जमींदोज

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गरीबी, बदहाली और अनवरत विस्थापन से जूझ रहे सोनभद्र में, दलित आदिवासी शोषण का नया सत्र शुरू हो गया है। उत्तर प्रदेश में सरकारी मदद से अपना उपनिवेश स्थापित करने की कोशिश में लगे जेपी सीमेंट ने अपने आप को स्थापित करने के लिए केवल आदिवासियों के घर को जमींदोज करने की योजना नहीं बनाई है बल्कि जेपी ने शासन, प्रशासन और मीडिया की हैसियत को भी जमींदोज कर दिया है. कोई माई का लाल नहीं है जो जेपी की मुखालिफत कर सके....
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देश में इतनी भगदड़ क्यों है भाई?

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9 मार्च को अमेरिकन आइडल की नकल पर बने इंडियन आइडल रियलिटी शो के नोएडा ऑडीशन में इंडियन आइडल बनने की चाह रखने वालों की ऐसी भीड़ उमड़ी कि आयोजकों के सारे इंतजाम धरे के धरे रह गए। अनियंत्रित भावी इंडियन आइडल्स ने जमकर हंगामा किया, भगदड़ में रौंदे गए कई आइडल अस्पताल पहुंच गए। नोएडा की सड़कों पर घंटों के लिए जाम लग गया। ...
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हुसैन के इस कर्म का मर्म समझो, हिन्दुओ!

भारतीय कलाजगत के एक ढोंगी चित्रकार मकबूल फ़िदा हुसैन ने दुनिया भर में फैले भारतीय समुदाय के बूते स्वयं को स्थापित कर मोटी कमाई की है। लेकिन आखिरकार हिन्दू भावनाओं को आहत करनेवाले चित्र बनाकर हिन्दू जनमानस के साथ खिलवाड़ कर अपने जीवन की सांध्यवेला में कतर जैसे मुस्लिम देश की नागरिकता स्वीकार कर ली. ऐसा करके उसने माँ भारती की पीठ में खंजर भोंकने का काम किया है.
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अफगानिस्तान में तालिबान के सामने नतमस्तक

अगर यह अफवाह नहीं है तो यह बुरी खबर है. पता नहीं अफगानिस्तान भारत संबंधों के विशेषज्ञ और रणनीतिकार इसे कैसे देखेंगे और परिभाषित करेंगे लेकिन भारत सरकार के खुफिया सूत्रों द्वारा खबर मीडिया में लीक की जा रही है कि भारत सरकार अफगानिस्तान में शांतिपूर्ण विकास कार्यों में कमी लायेगा. ऐसा इसलिए किया जा रहा है क्योंकि बीते महीने की 27 तारीख को काबुल दूतावास के पास एक विस्फोट हुआ जिसमें नौ भारतीय मारे गये थे.
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कुत्तों के लिए भी संकट बना माओवाद

केंद्र सरकार के माओवादियों के खिलाफ छेड़े गए 'ऑपरेशन ग्रीन हंट' के चलते, लगभग तीन हफ्ते पहले, पश्चिम बंगाल में पश्चिमी मिदनापुर, लालगढ़, बांकुरा, पुरुलिया और बर्दवान के अनेकों गाँवों में माओवादियों द्वारा एक अनोखा 'फतवा' जारी किया गया. इन गाँव में रहने वाले लोगों और आदिवासियों को कहा गया कि 'वह अपने इलाके के सारे पालतू और सड़क के कुत्तों को मार डालें नहीं तो उन्हें मार दिया जाएगा'.
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परमाणु सुरक्षा के गैरजिम्मेदार पहरेदार

संसद का बजट सत्र चल रहा है. बजट पर चर्चा और मंजूरी के दौरान उर्जा के ही एक विकल्प पेट्रोल और डीजल के दामों में बढ़ोत्तरी पर हो सकता है सांसद गतिरोध पैदा करें लेकिन सत्र के दौरान संसद की मंजूरी के लिए 36 अन्य विधेयक प्रस्तुत किये जाने हैं. इनमें एक विधेयक परमाणु उर्जा पर अमेरिका से हुए करार से संबंधित है. इस विधेयक के द्वारा यह तय किया जाना है कि अगर कोई विदेशी कंपनी भारत में परमाणु बिजलीघर लगाती है तो उसके लिए क्या दिशा निर्देश होने चाहिए.
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हुसैन के नाम पर फिर बरपा हंगामा

मकबूल फिदा हुसैन फिर से चर्चा में हैं। इस बार न तो माधुरी के पीछे पागलपन के कारण चर्चा में हैं और न ही किसी ऐसे चित्र को लेकर जिस पर हिन्दु समाज ने आपत्ति दर्ज करवाई हो. दरअसल अब वे कतर की नागरिकता ग्रहण करने वाले हैं। उनके छोटे बेटे ओवैस का कहना है कि मेरे पिता अपना निर्णय खुद लेते हैं। वे कभी दबाव में नहीं आते हैं।
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बंगाल में सियासी सुनामी से आतंकित हैं वामपंथी
परिवर्तन की सुनामी से ग्रसित पश्चिम बंगाल में वामपंथियों को कुछ ही दिनों में एक और बड़े तूफ़ान से मुखातिब होना है. यह तूफ़ान सुनामी से भी बड़ा हो सकता है और वामपंथियों के गढ़ को उखाड़ कर फेंक सकता है. इसी खौफ से घबराये सत्तारूढ़ मोर्चे के आला नेताओं की नींद हराम है....
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जीएम फसलों पर जोरजबर्दस्ती
इसे आप बायोटेक्नालाजी इमरजेन्सी मान सकते हैं. सरकार अघोषित रूप से ऐसा ही काम कर रही है कि अगर बायोटेक्नालाजी के विरोध में कोई भी स्वर उठता है तो उसे निर्ममता से कुचल दिया जाए. ऐसा लगता है कि आपातकाल का भूत फिर से जाग गया है. अगर कुख्यात इंदिरा प्रायोजित इमरजंसी में सवाल करने पर किसी भी व्यक्ति को जेल की सलाखों के पीछे भेजा जा सकता था तो आज भी बायोटेक्नॉलाजी के सवाल पर हालात वैसे ही हैं. ...
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संघ से डरने डराने वाले लोग
"संघ आज की जरूरत है। इसे निकट आकर जानिए-समझिए। अनुभूति के बिना संघ समझा नहीं जा सकेगा। लेकिन कुछ जिद्दी लोग हैं जो संघ जानना-समझना नहीं चाहते। वे सिर्फ आलोचक बने रहना चाहते हैं। संघ की उलझी हुई और विद्रूप छवि बनाना चाहते हैं। यही छवि लोगों को दिखाना चाहते हैं। ऐसे ही लोगों ने संघ का डरावना चेहरा निर्मित किया है। वे चाहते हैं लोग संघ से डरें, भयभीत हों ताकि संघ का विस्तार रूके। देश और दुनिया में संघ से डरने वालों की तादाद कम है, लेकिन डराने वाले ज्यादा हैं।"...
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नर्मदा के सौंदर्य पर जादू-टोने का अमावस
'भले ही गंगा मैली हो गई हो और यमुना काली, मगर नर्मदा माई की पवित्रता आज भी बरकरार है। निर्मल जलधारा और मनोहर घाट। देखकर रोम-रोम पुलकित हो उठता है।’ अक्सर यह सब सुनता और पढ़ता आया हूं, मगर जब अपनी आंखों से देखा तो महसूस हुआ कि जितना सुना था वह कितना कम था। नर्मदा नदी की तारीफ में गढ़े गए कशीदे उसकी गरिमा और सौंदर्य को व्यक्त करने में कितने अक्षम थे।...
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उधर दौलत की बेटी के घर जश्न, इधर दलित की बेटी पर सितम
प्रशासन का एक साथ दो चेहरा देखिए। नोटों की माला पहनकर इतरा रही उत्तर प्रदेश की दलित मुख्यमंत्री मायावती के कारिंदे दलितों की ही इज्जत को सरेआम नंगा कर रहे हैं। दलितों का उत्पीडन और शोषण सारी हदें पार कर रहा है। मानवाधिकार आहत और खून से लथपथ है। लालती को लाठियों डंडों से इतना पीटा गया कि वो बेहोश हो गयी। उसके पूर्व जब वो हाँथ जोड़कर अपने पति और बच्चों को छोड़े जाने की भीख मांग रही थी सैकड़ों की भीड़ के बीच उसके गुप्तांगों में लाठी डालने की कोशिश की गयी। रामनरेश, बुद्धिनारायण और श्यामलाल चलने फिरने के काबिल नहीं रहे। बुद्धिनारायण का पैर लाठियों से मार मार कर तोड़ डाला गया। कुछ अरसे पहले तक जो गाँव आबाद था अब वहां चारों और शमशान सी ख़ामोशी है।...
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जंतर मंतर पर लोकतंत्र जब्त
हमें जब किसी को अपनी बात कहनी होती है तो हम उसके और करीब जाने की कोशिश करते हैं. दिल्ली में कनाट प्लेस और संसद भवन के बीच स्थित जंतर-मंतर नामक रोड के दोनों किनारे व्यवस्था को अपनी व्यथा सुनाने के लिए करीब सिमट आये लोगों का जमावड़ा लगा रहता है. शायद इसीिलए कि वे व्यवस्था को अपनी बात और करीब से कह सकें. लेकिन आज लोकतंत्र के दिन में एक काला अध्याय लिख दिया गया. जंतर-मंतर पर धरने पर महीनों, सालों से धरने पर बैठे लोगों को उखाड़कर फेंक दिया गया है....
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रामदेव का राजनीतिक रंग
अब बाबा रामदेव अपने असली रंग में दिख रहे हैं. बात करते हैं तो बार बार उत्साह को बनाये रखने की सलाह देते हैं. जयपुर, दिल्ली और जोधपुर में तीन सभाओं के दौरान उन्होंने कमोबेश एक बात ही कही कि राष्ट्रीय स्वाभिमान आंदोलन को आगे बढ़ाना है और "चोर" "लुटेरे" "डाकुओं" से देश को मुक्त कराना है. यह विशेषण बाबा रामदेव किसके लिए इस्तेमाल कर रहे हैं यह बताने की जरूरत नहीं है. ये चोर लुटेरे और डाकू कोई और नहीं बल्कि इस देश के वही नेता हैं जिन्हें अपने योग शिविरों में बुलाकर रामदेव अपना कद बढ़ाते रहे हैं. ...
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वेदांता को विस्तार न दे सरकार
उड़ीसा में बाक्साइट खनन में लगी वेदान्ता कंपनी को सरकार अब और अधिक विस्तार का मौका न दे. ऐसा करने से न केवल जंगलों को नुकसान का खतरा है बल्कि यहां की आदिवासी कौंध जनजाति के भी विलुप्त हो जाने का खतरा है. केन्द्र सरकार द्वारा गठित एक कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में यह संतुति दी है. ...
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माला तो माया की, पर मालामाल कौन नहीं?
वाकई माला के अनेकों रूप। भगवान के गले में डाल दो, तो धर्म। शादी में दूल्हा-दुल्हन एक-दूसरे को पहनाएं, तो वरमाला। वर्कर अपने नेताओं को पहनाएं, तो आप ही तय करो। यह स्वागत या चमचागिरी? नेताओं के प्रति किसकी कितनी श्रद्धा, यह तो महानुभाव खुद ही जानते। फिर भी माला पहन हाथ ऐसे लहराते, मानो देश के पालनहार हो गए। कोई फूलों की माला पहन हाथ लहराता तो कोई सशरीर धर्मकांटे में बैठ सोने-चांदी के सिक्कों से तोला जाता है।...
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चंबल घाटी में लौट रहे हैं गिद्ध
चंबल घाटी से डाकू और गिद्ध लगभग एक साथ ही गायब होना शुरू हुए. डाकुओं के कम होते असर ने निश्चित रूप से चंबल घाटी के लोगों को राहत दी होगी लेकिन गिद्धों की कमी ने स्थानीय नागरिकों को परेशान कर दिया था. लेकिन एक अच्छी खबर है. वन विभाग के ताजा सर्वे में एक बात उभरकर सामने आयी है कि चंबल घाटी में गिद्ध लौटने लगे हैं. दिनेश शाक्य की विशेष रिपोर्ट-...
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परमाणु कीचड़ में सने हाथ
सरकार ने परमाणु हर्जाना विधेयक लोकसभा में पेश नहीं किया, यह अच्छा किया। पेश न करने का कारण यह भी हो सकता है कि 35 कांग्रेस सांसद अनुपस्थित थे और सारे विरोधी दल एकजुट थे। वह पेश होता तो शायद गिर जाता। कारण जो भी हो, इस विधेयक का अटक जाना भारत के हित में है। यह ठीक है कि प्रधानमंत्री अगले माह जब अमेरिका जाएंगे तो यह विधेयक उनके हाथ में नहीं होगा, लेकिन क्या कीचड़ में सने हाथों के साथ जाने से यह कहीं अच्छा नहीं कि वे खाली हाथ ही जाएं?...
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निर्भीक होकर करें पत्रकारिता : नैयर
वरिष्ठ पत्रकार कुलदीप नैयर ने कहा कि देश को एक सूत्र में बांधे रखने में अखबार की बड़ी भूमिका होती है। इसलिए पत्रकार किसी से डरे बगैर निर्भीक पत्रकारिता करे। आज की परिस्थिति में प्रचार-प्रसार माध्यमों के सामने में अनेक आहवान हैं ऐसे ही आहवान देश के सामने भी हैं।...
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राष्ट्रीय टीम की घोषणा के वक्त भी दिल्ली से दूर रहे गडकरी
नई दिल्ली/नागपुर। मंगलवार को भाजपा की नयी टीम घोषित हुई. लेकिन जिस वक्त गडकरी के राष्ट्रीय टीम की घोषणा हो रही थी खुद गडकरी दिल्ली से दूर नागपुर में बैठे हुए थे और एक अखबार का लोकार्पण कर रहे थे. कार्यक्रम में वे पूरे समय मौजूद रहे पेड न्यूज पर अपना प्रवचन करते रहे. ...
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कर्नाटक के कलाकारों ने बनाई नोटों की माला
मायावती के गले में हजार के नोटों की माला उनके लिए फांस बनती जा रही है. मंगलवार को जहां इस मुद्दे पर संसद में भी हंगामा हुआ वहीं दूसरी ओर लखनऊ में दिनभर नोटों की माला ही चर्चा का विषय बनी रही. नोटो की यह माला जिसमें 21 लाख रुपये होने का दावा किया जा रहा है कर्नाटक के कलाकारों ने बनाई थी वह भी माया के विश्वस्त मंत्री के आवास में बैठकर. ...
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फिदा तो विदा लेकिन लौटेगें रजा
मशहूर पेंटर एमएफ हुसैन भले ही वृद्धावस्था में कतर की नागरिकता ले ली हो, लेकिन एक अन्य विख्यात पेंटर सैयद हैदर रजा अपना शेष जीवन भारत में बिताने की ख्वाहिश लेकर साल के आखिर में स्वदेश लौटने की तैयारी में हैं। बीते छह दशक से वह फ्रांस में रह रहे हैं।...
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