बियाबान में शोर
हुसैन के इस कर्म का मर्म समझो, हिन्दुओ!
भारतीय कलाजगत के एक ढोंगी चित्रकार मकबूल फ़िदा हुसैन ने दुनिया भर में फैले भारतीय समुदाय के बूते स्वयं को स्थापित कर मोटी कमाई की है। लेकिन आखिरकार हिन्दू भावनाओं को आहत करनेवाले चित्र बनाकर हिन्दू जनमानस के साथ खिलवाड़ कर अपने जीवन की सांध्यवेला में कतर जैसे मुस्लिम देश की नागरिकता स्वीकार कर ली. ऐसा करके उसने माँ भारती की पीठ में खंजर भोंकने का काम किया है.
अफगानिस्तान में तालिबान के सामने नतमस्तक
अगर यह अफवाह नहीं है तो यह बुरी खबर है. पता नहीं अफगानिस्तान भारत संबंधों के विशेषज्ञ और रणनीतिकार इसे कैसे देखेंगे और परिभाषित करेंगे लेकिन भारत सरकार के खुफिया सूत्रों द्वारा खबर मीडिया में लीक की जा रही है कि भारत सरकार अफगानिस्तान में शांतिपूर्ण विकास कार्यों में कमी लायेगा. ऐसा इसलिए किया जा रहा है क्योंकि बीते महीने की 27 तारीख को काबुल दूतावास के पास एक विस्फोट हुआ जिसमें नौ भारतीय मारे गये थे.
कुत्तों के लिए भी संकट बना माओवाद
केंद्र सरकार के माओवादियों के खिलाफ छेड़े गए 'ऑपरेशन ग्रीन हंट' के चलते, लगभग तीन हफ्ते पहले, पश्चिम बंगाल में पश्चिमी मिदनापुर, लालगढ़, बांकुरा, पुरुलिया और बर्दवान के अनेकों गाँवों में माओवादियों द्वारा एक अनोखा 'फतवा' जारी किया गया. इन गाँव में रहने वाले लोगों और आदिवासियों को कहा गया कि 'वह अपने इलाके के सारे पालतू और सड़क के कुत्तों को मार डालें नहीं तो उन्हें मार दिया जाएगा'....परमाणु सुरक्षा के गैरजिम्मेदार पहरेदार
संसद का बजट सत्र चल रहा है. बजट पर चर्चा और मंजूरी के दौरान उर्जा के ही एक विकल्प पेट्रोल और डीजल के दामों में बढ़ोत्तरी पर हो सकता है सांसद गतिरोध पैदा करें लेकिन सत्र के दौरान संसद की मंजूरी के लिए 36 अन्य विधेयक प्रस्तुत किये जाने हैं. इनमें एक विधेयक परमाणु उर्जा पर अमेरिका से हुए करार से संबंधित है. इस विधेयक के द्वारा यह तय किया जाना है कि अगर कोई विदेशी कंपनी भारत में परमाणु बिजलीघर लगाती है तो उसके लिए क्या दिशा निर्देश होने चाहिए. ...हुसैन के नाम पर फिर बरपा हंगामा
मकबूल फिदा हुसैन फिर से चर्चा में हैं। इस बार न तो माधुरी के पीछे पागलपन के कारण चर्चा में हैं और न ही किसी ऐसे चित्र को लेकर जिस पर हिन्दु समाज ने आपत्ति दर्ज करवाई हो. दरअसल अब वे कतर की नागरिकता ग्रहण करने वाले हैं। उनके छोटे बेटे ओवैस का कहना है कि मेरे पिता अपना निर्णय खुद लेते हैं। वे कभी दबाव में नहीं आते हैं।...इस्लामिक आतंकवाद बनाम आदिवासी नक्सलवाद का भेदभाव
आतंकवाद शब्द पर यह भेदभााव क्यों? आखिर यह धारणा कब खत्म होगी कि अगर किसी घटना में मुसलमान पकड़े जाएं तो वह आतंकवादी घटना होगी अन्यथा नक्सलवाद, उग्रवाद या फिर अतिवाद कहलाएगा। हालांकि आतंक का शाब्दिक अर्थ तो दहशत फैलाना ही है फिर वो काम कोई भी करे आतंकवादी ही कहलाया जाना चाहिए फिर देश में मुसलमानों के साथ यह भेदभाव क्यों किया जा रहा है?
नक्सलवाद के सामने चिदम्बरम चारों खाने चित्त
दो दिन पहले गृह मंत्री के तौर पर अपने प्रदर्शन के बारे में खुद चिदम्बरम ने कहा है कि उनका प्रदर्शन जीरो है। इसका मतलब कानून और व्यवस्था से नहीं है। उनका मतलब है कि वे कारपोरेट घरानों के हितों की रक्षा नहीं कर पा रहे हैं। जिन हितों की रक्षा के लिए कारपोरेट घरानों ने चिंदबरम को गृह मंत्रालय दिलवाया था, वो हित सध नहीं रहे। ताबड़तोड़ हमले हो रहे है। खासकर नक्सली हमले। चिंदबरम परेशान है। कोई जवाब नहीं मिल रहा है। अपनी वित्तीय नीतियों से कारपोरेट घरानों को मालामाल करने वाले चिंदबरम यहां पर चारो खाने चित नजर आ रहे हैं।
कहीं खो गये हैं जार्ज फर्नांडीज
बात 1998-99 की है. उन दिनों सूबेदार सिंह मुंबई में फुटपाथ वालों के लिए एक राजनीतिक दल बनाकर मुंबई महानगरपालिका में उनका प्रतिनिधित्व देना चाहते थे. हालांकि हृदयाघात से उनका निधन हो गया लेकिन अक्सर वे ट्रेड यूनियन के दिनों के जार्ज फर्नांडीज को याद करते हुए रो दिया करते थे. वे कहते थे- "मेरा जार्ज कहीं खो गया है." सूबेदार सिंह जिन दिनों जार्ज फर्नांडीज को याद करके रो दिया करते थे उन दिनों जार्ज फर्नांडीज दिल्ली में रक्षा मंत्री और राजग के संयोजक हुआ करते थे.
सिलदा के नक्सली हमले से पैदा हुए सवाल
देश में इस तरह का माहौल बनाया गया है मानों केन्द्र सरकार नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ फेंकने के लिए कृतसंकल्प है. लेकिन जमीनी हकीकत क्या है? पश्चिम बंगाल में हाल में सुरक्षा बलों पर हुए नक्सली हमले में जिस तरह 24 जवान मारे गये वह नक्सलियों से लड़ने की सुरक्षा बलों की सारी पोल खोल देता है. टीवी पत्रकार दिनेश काण्डपाल का विश्लेषण-
रोशनी की खोज में अंधेरे को आमंत्रण
जनवरी माह में नागपुर में आयोजित ऊर्जा विषयक एक व्याख्यान में ऊर्जा मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने घोषणा की कि विदर्भ को पॉवर हब बनाएंगे। यहां की बिजली परियोजनाओं के लिए जमीन देने वालों को मुआवजे के साथ 10 वर्षों तक 100 यूनिट बिजली प्रति माह मुफ्त दी जाएगी। लेकिन हकीकत यह है कि सरकार की यब प्रस्तावित योजना विदर्भ के जन जीवन के लिए अंधेरे का आमंत्रण साबित होगी.
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हुसैन के इस कर्म का मर्म समझो, हिन्दुओ!
भारतीय कलाजगत के एक ढोंगी चित्रकार मकबूल फ़िदा हुसैन ने दुनिया भर में फैले भारतीय समुदाय के बूते स्वयं को स्थापित कर मोटी कमाई की है। लेकिन आखिरकार हिन्दू भावनाओं को आहत करनेवाले चित्र बनाकर हिन्दू जनमानस के साथ खिलवाड़ कर अपने जीवन की सांध्यवेला में कतर जैसे मुस्लिम देश की नागरिकता स्वीकार कर ली. ऐसा करके उसने माँ भारती की पीठ में खंजर भोंकने का काम किया है....
नंगे पांव देश नापने का नशा
लातूर के भीषण भूकंप ने उनसे उनका परिवार छीन लिया. गर्भस्थ स्त्री, बच्चे, माता-पिता, भाई कोई नहीं बचा. अगर कोई बचा तो वे खुद मोहनराव पाटिल. अब चालीस के हो चले पाटिल ने अपने परिवार के असमय काल के गाल में समा जाने के बाद पूरे देश को ही अपना परिवार बना लिया. कंधे पर राष्ट्रीय ध्वज और गले में लटकी संदेश की तख्ती के माध्यम से वे राष्ट्रप्रेम की अलख जगा रहे हैं. लोग भले ही उन्हें कुछ भी कहें, कुछ भी समझें, उनकी अनथक, अविरल देशप्रेम की पदयात्रा जारी है. संजय स्वदेश की रिपोर्ट-...
महिला आरक्षण: कहीं खुशी का खाना, कहीं चिंता की चाय
बलवा खत्म, तो समझो महिला बिल अटक गया। यादवी तिकड़ी के हंगामे पर फिलहाल सरकार ने सरेंडर कर दिया। अब फिर बात होगी बिल के हर पहलू पर। सभी पक्षों से बात कर ही अब लोकसभा में बिल आएगा। आखिर आम बजट पास कराने की मजबूरी में सरकार को भरोसा देना पड़ा। एक बार नहीं, तीन-तीन बार। संसदीय कार्यमंत्री तो बुधवार को ही सभी से सलाह-मशविरे का एलान कर चुके। गुरुवार को लोकसभा में लालू-शरद-मुलायम ने अपनी बात रखी तो प्रणव दा ने भरोसा दिलाया। फिर भी यादवी तिकड़ी का दिल नहीं भरा।...
रिलायंस पॉवर प्लांट में हादसा, 2 मरे दर्जनभर से अधिक घायल
सोनभद्र। रिलायंस के सासन पावर प्रोजेक्ट की चिमनी पर चढ़ाये जा रहे रिग के गिरने के कारण दो लोगों की मौत हो गयी है और लगभग 15 लोगों के घायल होने की खबर है. घायलों में कुछ की स्थिति गंभीर बताई जा रही है. दुर्घटना देर शाम हुई और मौके पर घनघोर अँधेरा होने की वजह से हताहतों की सही संख्या का अनुमान नहीं लगाना मुश्किल है. ...
नौजवानों के लिए ग्लोबल नालेज सेन्टर की स्थापना करेगा 'युवा'
नई दिल्ली। बेरोजगारी और आतंकवाद के मुद्दे पर काम करने वाले अंतरराष्ट्रीय गैर सरकारी संगठन “युवा ए मुमेंट” ने एक अनोखी पहल करते हुए युवाओं के लिए एक ग्लोबल नालेज सेंटर स्थापित करने की योजना बनाई है. नालेज सेंटर की स्थापना के पहले चरण में www.yuvafoundation.co.uk नामक एक वेब साइड तैयार की गई है. इसका उदघाटन केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग राज्य मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने आज किया....
मकबूल को क्यों करें कबूल?
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का नाम लेकर कुछ हुसैन समर्थक अश्लीलता, भारतीय अस्मिता, देवी-देवताओं के प्रति आस्था और देश के प्रति सम्मान का अपमान करने वाले हुसैन और उसकी करतूतों पर पर्दा डालने और उसका बचाव करने की कोशिश कर रहे हैं। हुसैन का बचाव करनेवाले यह क्यों नहीं मानते कि अभिव्यक्ति जब सार्वजनिक होती है उसका प्रभाव व्यापक होता है और हुसैन की अभिव्यक्ति से भी करोड़ों लोग आहत होते रहे हैं। ऐसे में ये करोड़ों लोग मकबूल को कबूल क्यों करें?...
राजस्थान में गिनती के बचे हैं गिद्ध
राजस्थान में गिद्धों से जुड़ी एक रिपोर्ट आई है. रिपोर्ट में इस बात पर चिन्ता व्यक्त की गई है कि राजस्थान में गिद्धों पर संकट है. उनकी संख्या केवल 3907 शेष बची है. प्रदेश के मुख्य जीव प्रतिपालक आर एन मेहरोत्रा का मानना है कि ये गिद्ध पश्चिमी राजस्थान में ही बचे है....
बीजेपी-कांग्रेस फंस गईं एक-दूसरे के जाल में
बलात ही सही, राज्यसभा ने अपना काम निपटा दिया पर राज्यसभा से निकली महिला बिल की लपटें अब लोकसभा को झुलसा रहीं हैं। बिल विरोधियों ने बुधवार को भी लोकसभा नहीं चलने दी। जब बिल से पहले इस कदर हंगामा तो बिल आने पर क्या होगा?...
72 घंटे में 10 किसानों ने की आत्महत्या
नागपुर। जब सरकार देश की राजधानी नई दिल्ली में महिला आरक्षण, महिला उत्थान और महिला सशक्तिकरण और महिला आरक्षण विधेयक की चर्चा आदि में व्यस्त थी, तभी किसान आत्महत्या की राजधानी विदर्भ में कृषि संकट से त्रस्त 10 किसानों ने मौत को गले लगा लिया। आत्महत्या करने वाले छह किसान यवतमाल, दो अकोला, एक वाशिम और एक नागपुर जिले के हैं।...
पप्पू प्वाइंट पर अटक गई बिहार कांग्रेस की सूई
राहुल गांधी की फार्मूला कार पर बैठकर फर्श से अर्श पर पहुंचने का सपना देख रही बिहार कांग्रेस की मुसीबत यह है कि वह हर बार एक न एक ऐसी अंदरूनी मुसीबत में उलझ जाती है कि उसे बाहर ध्यान देने का वक्त ही नहीं मिल पाता। फिलहाल साधु यादव से ज्यादा बहुचर्चित बाहुबली राजनेता पप्पू यादव उसके लिए गले की फांस बने हुए हैं।...
राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा है भ्रष्टाचार
हरिद्वार। सुरक्षा की समस्याओं के लिए प्रत्येक पहलुओं पर सुधारात्मक कदम उठाने की जरूरत है। भ्रष्टाचार का विकराल रूप राष्ट्रीय सुरक्षा में सबसे बड़ी बाधा है, जिसे दूर करने करने के लिए सरकार को ठोस उपाय करने होंगे, जिसे दूर करने के लिए गैर सरकारी संगठनों की भूमिका बड़ा योगदान दे सकती है। उक्त विचार रक्षा विशेषज्ञ अभिजीत भट्टाचार्य ने फोरम फोर इंटिग्रेटेड नेशनल सिक्योरिटी (फिन्स) द्वारा भारत माता मन्दिर में आयोजित राष्ट्र रक्षा सम्मेलन बोलते हुए व्यक्त किये।
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हम ब्रजवासिनी, विश्व विनोदिनी
इक्कीसवीं सदी की कल्पना वाले भारत में महिला उत्थान के लिये चल रही तमाम योजनाओं के बावजूद उत्तर प्रदेश मूल की ब्रजवासी जाति की महिलायें समाज में उपेक्षित है ही साथ में औरतों व लड़कियों की खरीद-फरोख्त की परम्परा भी इस जाति में बदस्तूर जारी है। इस कारण नाच-गाकर लोगो के मनोंरंजन का साधन बनी ब्रजवासी महिलायें अशिक्षा व रूढ़वादिता की अंधेरी सुरंग में जागरूकता के अभाव के कारण घुट-घुट कर जिन्दा रहने को विवश हैं। आजाद भारत में इस जाति की वेवश महिलाओं की दयनीय स्थिति महिला उत्थान के दावों की पोल खोल रही है।...
नेक काम लेकिन नीयत पर शक
इस महिला आरक्षण विधेयक के कई पहलू हैं। ऐसा तो होगा नहीं कि सभी आरक्षित सीटों पर नेताओं की बीबीयां ही मैदान में उतरेंगी। ऐसा भी नहीं है कि किसी महिला कार्यकर्ता ने जगह नहीं बनाई। सुषमा स्वराज या मायावती किसकी बीबी हैं? वो तो अपने ही दम पर आगे आईं हैं। मगर ऐसी महिलाओं की संख्या कम है। आरक्षण के बाद से ऐसी महिलाओं की संख्या बढ़ने लगेगी।...
पांचजन्य के संपादक का अपने ही खिलाफ शंखनाद
नई दिल्ली। संघ के मुखपत्र पांचजन्य के संपादक बलदेवभाई शर्मा ने लगता है अपने ही खिलाफ शंखनाद कर लिया है. शायद इसीलिए पांचजन्य प्रबंधन द्वारा नये संपादक की खोज शुरू कर दी गयी है. ...
- हिन्दू आतंकवाद का अतिवाद
- वह गुजरात जिसे आप नहीं जानते
- अब भोजपुरी में बोलेगा बाजार
- तालिबान के देसी संस्करण
- विस्फोट पर अस्थाई कार्य विराम
सिर्फ इतना ही कहूंगा..."लाजवाब आलेख"
ऐनडीटीविए तो बेगम में भी ग़ैन का नुक्ता लगा देते हैं।
अनिल जी बधाई बहुत ही झन्नाटेदार चांटा खासकर उन लोगों के मुह पर जो सामने तो आना चाहते हैं ,पर साह्स के अभाव ...
वैसे अनिल ने भी कोई बढ़िया तरीके से ब्बत नहीं की है तर्क आछे नहीं है लास्ट वाले पैराग्राफ के
मुझे तो लगता है की " KS " बहुत पढ़े लिखे है और उनका लेवल बहुत ऊँचा है तभी तो उन्होने आलोचना करते ...


