बियाबान में शोर
रेड कॉरीडोर का रोता हुआ सच
13 जून 2010 को झारखण्ड के 12 मानवाधिकार कार्यकओं की यात्रा सूर्योदय से पहले ही प्रारंभ हो गई थी। हमने सुना था कि लातेहार जिलान्तर्गत बरवाडीह प्रखण्ड के लादी गांव की एक खरवार आदिवासी महिला, पुलिस एवं माओवादियों के बीच हुए मुठभेड़ की शिकार हो गई। उस महिला का नाम जसिंता था। वह सिर्फ 25 वर्ष की थी। गांव में अपने पति एवं 3 छोटे-छोटे बच्चों के साथ खुशहाल जीवन व्यतीत कर रही थी इसलिए हम घटना की हकीकत जानना चाहते थे। हम जानना चाहते थे कि क्या वह माओवादी थी?
आतंकवाद और पाकिस्तान का मजबूत जोड़ है, टूटेगा नहीं
अभी कुछ ही दिन बीते हैं जबकि एक अमेरिकी रिपोर्ट के माध्यम से यह धमाकेदार खुलासा किया गया है कि पाकिस्तान की आई एस आई के तालिबानी लड़ाकों के साथ गुप्त संबंध हैं। अब ज़रा कल्पना कीजिए कि कहां तो अमेरिका पाकिस्तान को इसी तालिबान का सफाया करने के नाम पर बार-बार मुंह मांगी रकम तथा इनसे निपटने के लिए आधुनिकतम हथियार उपलब्ध करा रहा है। और कहां ऐसी रिपोर्ट आ रही है कि पाकिस्तान सरकार की आंख समझे जाने वाली आई एस आई ही तालिबानों से मिली हुई है।
न्याय के नाम पर न करें राजनीति
विगत कुछ दिनों से जो पूरा देश देख रहा है और सुन रहा है, वह भोपाल गैस त्रासदी के पीड़ितों के जख्मों पर नमक छिड़कने के समान है या यॅंू कहा जाए कि जख्मों को नमक-मिर्च लगे खंजर से कुरेदा और गहरा किया रहा है तो गलत नहीं होगा। गला फाड़कर चिल्लाने वाला मीडिया, भोपाल में डेरा डाले बड़े-बड़े चैनलों के सूट-बूट वाले तथाकथित बड़े पत्रकार, एक दूसरे पर भोपाल से दिल्ली तक कीचड़ उछालते, वो तमाम राजनेतागण, अफसोस कि आप सब ने भोपाल के दर्द को अपनी राजनीति की दुकान में बदल दिया है । क्या आप सब पिछले पच्चीस बरसों से सो रहे थे? या मूक दर्शक बने इस बात का इंतजार कर रहे थे, कि कब मौका आये और हम इसे अपने-अपने हितों के अनुरूप इस अवसर को भुनायें । ...भोपाल गैस काण्ड के असली अपराधी
भोपाल हादसे पर साढे पच्चीस साल बाद आये फैसले के बाद से हादसे दर हादसे घटित हो रहे हैं. पहला हादसा फैसला ही बना. दूसरा हादसा इस आरोप के साथ आया कि तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह ने तीन करोड़ रुपया लेकर यूनियन कार्बाइड के नान एक्टिंग सीईओ वारेन एण्डरसन को भोपाल से दिल्ली जाने दिया. ...सजा देनी है तो संविधान बदलो
हजारों बेगुनाहों को मौत की नींद सुला देने वाले मामले पर आखिरकार 25 साल बाद भोपाल की सीजेएम कोर्ट ने फैसला सुना ही दिया। पंद्रह हजार से ज्यादा लोग भोपाल की यूनियन कार्बाइड से निकली जहरीली गैस से मारे गए। जबकि, अभी भी कम से कम से कम छे लाख लोग ऐसे हैं जिनके भीतर यूनियन कार्बाइड से निकली जहरीली गैस अभी भी समाई है। और, इसके बुरे असर से सांस की बीमारी से लेकर कैंसर तक की बीमारी के शिकार ये लोग हो रहे हैं। लेकिन, 1 दिसंबर 1984 की रात हुए दुनिया के इस सबसे बड़े औद्योगिक हादसे की सुनवाई के बाद जब फैसला आया तो, इसमें धारा 304 A लगाई गई यानी ऐसी धारा जिसमें अधिकतम दो साल तक की सजा हो सकती है।...फ़तवा नहीं रोजगार चाहिए, शिक्षा का अधिकार चाहिए
आज का मुस्लिम युवा फतवों से ज्यादा अपनी पढ़ाई और कैरियर पर ज्यादा ध्यान दे रहा है। दिल्ली के कुछ युवाओं ने जिसमें युवतियां भी शामिल हैं, एक साप्ताहिक अखबार से बातचीत में फतवों को तरक्की की राह में रोड़ा बताते हुए दरकिनार कर दिया है। यह अच्छा हो रहा है कि आज का मुस्लिम युवा फतवों को दरकिनार करके जमाने के साथ चलने की कोशिश कर रहा है। कभी-कभी तो लगता है कि हमारे मुफ्तियों को क्योंकि रोजगार की चिंता नहीं है, इसलिए वे एसी कमरों में बैठकर इस तरह के फतवे जारी कर देते हैं।मुसलमानों को फतवों की नहीं, शिक्षा की जरुरत है, रोजगार की जरुरत है।
गाजा के लिए फिर गजनी बना इजरायल
फ़लस्तीन के ग़ाज़ा इलाक़े की ओर राहत सामग्री ले जा रहे जहाजों पर सोमवार सुबह इज़रायली नौसेना के हमले में उन्नीस कार्यकर्ताओं की मौत की ख़बर ने दुनिया को हिला दिया है. इस हमले में साठ से अधिक लोग घायल हुए हैं और जहाजों को इज़रायल ने कब्ज़े में ले लिया है. 400 से अधिक कार्यकर्ता इज़रायली हिरासत में हैं और उनसे कोई संपर्क अभी तक नहीं हो पा रहा है.
पाक की नापाक हत्यारी मानसिकता
शुक्रवार को लाहौर की अहमदिया मस्जिद में हुए हत्याकाण्ड के निशान अभी मिटे नहीं है. पंजाब प्रशासन शुक्रवार को दो मस्जिदों पर हुए हमले की जांच पड़ताल करने की बात कह रहा है. लेकिन इस हत्याकाण्ड को सिर्फ जांच पड़ताल करके और कुछ आतंकी गुटों को जिम्मेदार ठहराकर नहीं निपटाया जा सकता. सरकार और समाज दोनों की यह जिम्मेदारी बनती है कि वह अपने अंदर झांके और पता करें कि आखिर ऐसा क्यों है कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों को अपनी मान्यता के अनुसार जीने का हक नहीं है?
मेरी जात हिन्दुस्तानी
जाति की जनगणना के लिए तर्क यह दिया जाता है कि अगर हम दलितों, आदिवासियों और पिछड़ों को आरक्षण देते रहना चाहते हैं तो जन-गणना में जाति का हिसाब तो रखना ही होगा। उसके बिना सही आरक्षण की व्यवस्था कैसे बनेगी ? हॉं, यह हो सकता है कि जिन्हें आरक्षण नहीं देना है, उन सवर्णों से उनकी जात न पूछी जाए। लेकिन इस देश में मेरे जैसे भी कई लोग हैं, जो कहते हैं कि मेरी जात सिर्फ हिंदुस्तानी है और जो जन्म के आधार पर दिए जानेवाले हर आरक्षण के घोर विरोधी हैं।
26/11 के अपराधी बनाम मलियाना हाशिमपुरा के दोषी
मई 1987 को मेरठ में एक दिन के अंतराल पर दो ऐसे नरसंहार हुए थे, जिनकी गूंज आज भी सुनाई देती है। 22 मई 1987 मेरठ के हाशिमपुरा से उत्तर प्रदेश के प्रांतीय सशस्त्र बल ( पीएसी ) ने 44 मुसलमान नौजवानों को अपने ट्रकों में भरा और उन्हें मुराद नगर (गाजियाबाद) की गंग नहर पर ले जाकर गोलियों से भूना और लाशों को नहर में बहा दिया था। क्या यह नरसंहार ऐसा ही नहीं था, जैसे मुंबई में पाकिस्तानी आतंकवादियों ने किया था ? सवाल यह है कसाब को क्यों डेढ़ साल में फांसी की सजा दे दी गयी और हाशिमपुरा और मलियाना नरसंहार के दोषी क्यों आजाद घूम रहे हैं ? सवाल यह है कि 26/11 और मलियाना-हाशिमपुरा के नरसंहार में क्या अन्तर है ? क्या मलियाना और हाशिमपुरा नरसंहार में मरने वाले भारतीय नागरिक नहीं थे ?
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सुदर्शन का (कु) दर्शन
जबसे आरएसएस के लोगों की आतंकवादी घटनाओं में संलिप्तता सामने आयी है, तब से आरएसएस के नेता बौखला गए हैं। इस बौखलाहट में ही शायद संघ के इतिहास में पहली बार हुआ है कि इसके स्वयंसेवक विरोध प्रदर्शन करने के लिए सड़कों पर उतरे। इसी बौखलाहट में आरएसएस के एक्स चीफ केएस सुदर्शन का मानसिक संतुलन बिगड़ गया और सोनिया गांधी के बारे में ऐसे शब्द बोल दिए, जिन्हें एक विकृत मानसिकता का आदमी ही बोल सकता है।...
सीआईए नहीं केजीबी एजंट कहिए जनाब
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व सरसंघचालक ने 10 नवंबर को सोनिया गांधी पर सीआईए एजंट होने का आरोप लगाकर सनसनी पैदा कर दिया है. पूरी की पूरी कांग्रेस उत्तेजित है और संघ भी बैकफुट पर चला गया है. सुदर्शन के आस पास के लोगों का कहना है कि सुदर्शन जी भुलक्कड़ हो गये हैं और उन्हें कुछ ठीक से याद नहीं रहता. शायद इसीलिए उन्होंने इतनी बड़ी चूक कर दी. ...
सोनिया का सच जान बेकाबू क्यों होते हो?
एक बार फिर लोकतंत्र पर आपातकाल मंडरा पड़ा है. राजमाता सोनिया गांधी के सिपहसालारों ने कांग्रेसी गुण्डों, माफियाओं और लोकतंत्र के हत्यारों का आह्वान किया है कि वह देशभर में संघ कार्यालयों पर धावा बोल दे. इसका तत्काल प्रभाव हुआ और कांग्रेसी गुण्डों ने संघ के दिल्ली मुख्यालय पर धावा भी बोल दिया. ठीक वैसे ही जैसे इंदिरा गांधी की मौत के बाद सिखों को निशाना बनाया गया था. हिंसक और अलोकतातंत्रिक मानसिकता से ग्रस्त कांग्रेसी सोनिया का सच जानकर आखिर इस तरह बेकाबू क्यों हो रहे हैं?...
नये निजाम के दामन पर है ज्यादा बड़ा दाग
मुंबई। महाराष्ट्र के नए निजाम भी कोई दूध के धुले नहीं हैं। कांग्रेस आलाकमान ने अशोक चव्हाण को फर्जीवाड़े से फ्लैट पाने के आरोप में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री की गद्दी से हटा दिया। लेकिन नए मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण भी उसी तरह के फर्जीवाड़े में गले तक डूबे हुए हैं। उन्होंने जितने बड़े बड़े झूठ बोलकर सरकार से फ्लैट हथियाए हैं वे कांग्रेस के लिए ज्यादा दागदार हैं।...
अजमेर चार्जशीट और संघी उछल-कूद
बढ़ते पैमाने पर इसके साक्ष्य सामने आ रहे हैं कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आर एस एस) से जुड़े लोगों का आतंकवादी हमलों में हाथ रहा है। इन हालात में आर एस एस इस पुराने सूत्र पर चल रहा लगता है कि हमला ही सबसे अच्छा बचाव है। उसने 10 नवंबर को देशव्यापी विरोध कार्रवाइयों का आह्वान किया है। इन कार्रवाइयों में संघ के शीर्ष नेताओं के शामिल होने की बात कही जा रही है। बहरहाल, इसकी चर्चा हम जरा बाद में करेंगे।...
अपने होने पर ही हैरान
‘चुप्पी-चुप्पी नहीं नहीं, बोलेंगे अब सभी-सभी’ इन्हीं नारों से दाहोद (गुजरात) का सीनियर रेलवे संस्थान परिसर 31 अक्टूबर को पूरे दिन गूंजता रहा। यहां गुजरात के बड़ोदरा, पंचमहल, सुरत, भड़ूच, डांग, बालसाड और साबरकांठा जिले से लगभग तीन हजार के आस पास विमुक्त एवं घुमंतू समाज से ताल्लुक रखने वाले लोग इकट्ठे हुए थे। मौका था, अधिकार अभियान की घोषणा का। उस समाज के लिए जो इस लोकतांत्रिक देश में अधिकार का अर्थ अभी तक समझ नहीं पाएं हैं। ...
गोली लगने के बाद क्या गांधी ने कहा था- हे राम ?
यह एक ऐसा सवाल है जिस पर अब विवाद होने लगा है. 30 जनवरी 1948 को क्या जब महात्मा गांधी को नाथूराम गोडसे ने गोली मारी तो महात्मा गांधी ने अपने मुंह से हे! राम का संबोधन किया था? उस वक्त घटनास्थल पर मौजूद रहे एक प्रत्यक्षदर्शी के डी मदान का कहना है कि "मैंने नहीं सुना था कि उन्होंने हे राम कहा था या नहीं."...
भद्दा और बेदम रहा संघ का विरोध प्रदर्शन
स्कूल जाते बच्चों के भी हाथ में भगवा थमाकर भले ही संघ ने शक्ति प्रदर्शन की भरपूर कोशिश की हो लेकिन 10 नवम्बर का दिन उसके इतिहास में कोई बडी घटना के रूप में याद नहीं किया जायेगा। हॉ हम बात कर रहे है राजस्थान के भरतपुर जिला मुख्यालय की जहॉ देश भर की ही तरह हिन्दुवादी संघटनों ने अपने उपर लग रहे ‘भगवा आतंकवाद’ के आरोपों के विरोध में शक्ति प्रदर्शन किया था। भरतपुर जहॉ संघ प्रचारक क रूप में भाजपा के पीएमइन वेंटिग लालकृष्ण आडवानी ने अपनी सेवाऐं दी है संघ का ये विरोध प्रदर्शन एक दम भददा और हल्का रहा।...
एनसीपी के 'दादा' का दांव
महाराष्ट्र में कांग्रेस में परिवर्तन हुआ तो राष्ट्रवादी कांग्रेस ने भी अपने पत्ते खोल दिये. राज्य में लंबे समय से राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के भीतर चल रही सत्ता के दावेदारी पर एनसीपी ने आखिरकार प्रदेश की प्रशासनिक कमान अपनी ओर से शरद पवार के भतीजे अजीत पवार को सौंप दी है. अब गुरुवार को शाम साढ़े चार बजे पृथ्वीराज चव्हाण के साथ अजीत "दादा" पवार उपमुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे....
पीएमओ वाले पृथ्वीराज
महाराष्ट्र के नये मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण यूपीए सरकार पार्ट वन और पार्ट टू में बतौर पीएमओ मिनिस्टर जाने जाते हैं. प्रधानमंत्री कार्यालय में रहते हुए भी उन्होंने कभी ताकतवर होने का दंभ नहीं पाला और चुपचाप काम करते रहे. बिट्स पिलानी से बीई और बर्कले विश्वविद्यालय से एमएस की डिग्री हासिल करनेवाले पृथ्वीराज की राजनीतिक कमेस्ट्री ने उनके सार्वजनिक जीवन में पहली बार इतना गाढ़ा रंग उड़ेला है....
सुलग रहा है मेरठ 'हिन्दुस्तान'
एक ओर हिन्दुस्तान अखबार अपनी अलग कंपनी बनाकर अखबार को चमकाने और अखबार का विस्तार करने में लगा है वहीं दूसरी ओर हिन्दुस्तान के विभिन्न संस्करणों में हालात ठीक नहीं है. हिन्दुस्तान के मेरठ संस्करण में इन दिनों इस्तीफे दिये जा रहे हैं लेकिन प्रचारित किया जा रहा है कि जो आफिस नहीं आ रहे हैं वे छुट्टी पर चले गये हैं....
आलोक तोमर के बगल में बसे किशोर मालवीय
सीएनईबी में पहले से एक सलाहकार संपादक थे- आलोक तोमर. अब दूसरे सलाहकार संपादक भी वहां नियुक्त हो गये हैं किशोर मालवीय. उन्होंने सीएनईबी चैनल के साथ बतौर कंसल्टिंग एडिटर अपनी नई पारी की शुरुआत की है। सीएनईबी से पहले वे ‘वायस ऑफ इंडिया’ न्यूज चैनल के साथ जुड़े हुए थे। उन्होंने करीब दो दशक के कॅरियर में देश के नामी-गिरामी मीडिया संस्थानों में कई जिम्मेदारियां निभाईं हैं।...
सुरक्षा परिषद की छांव में खेती पर दांव
अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने संसद में दिये गये अपने भाषण में भारत से मिले प्यार की भूरि भूरि प्रशंसा जरूर की लेकिन अपनी व्यावसायिक मजबूरियों को छिपा नहीं सके. बराक ओबामा ने संसद के संयुक्त अधिवेशन को संबोधित करते हुए जहां एक ओर भारत को महाशक्ति करार देकर उसके लिए संयुक्त राष्ट्र में स्थायी सदस्यता को अपना समर्थन दिया वहीं भारत और अमेरिका द्वारा मिलकर खेती के क्षेत्र में एक और हरित क्रांति के आगाज की घोषणा की....
आतंक नहीं कश्मीर केन्द्रित हुई ओबामा यात्रा
रविवार की देर शाम भारतीय प्रधानमंत्री द्वारा आयोजित भोज में ओमर अब्दुल्ला के शामिल होने से जो आशंका पैदा हुई थी वह सोमवार को हैदराबाद हाउस में और प्रबल रूप में सामने आ गयी जब प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अमेरिकी राष्ट्रपति की उपस्थिति में स्वीकार किया कि वे पाकिस्तान से बात करते वक्त "के" शब्द पर बात करने से नहीं कतराते हैं....
भारत से धंधा, पाक को चंदा
अमेरिका के राष्ट्रपति बराक हुसैन ओबामा ने अपना तीन दिवसीय दौरा पूरा कर लिया. मुंबई उतरकर दिल्ली दरबार तक उनकी दस्तक भारत पर अमेरिका के मजबूत पकड़ की मिसाल बन गया. निश्चित रूप से उनका दौरा भारत के लिए उतना महत्वपूर्ण नहीं जितना खुद अमेरिका के लिए है. मंदी के दौर से जूझ रहे अमेरिका को "कारपोरेट" जगत का धंधा दिलाने के लिए उन्होंने न केवल भारत को महाशक्ति करार दे दिया बल्कि सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता का समर्थन भी कर दिया....
- आलोक तोमर की आपबीती
- वह गुजरात जिसे आप नहीं जानते
- हिन्दू आतंकवाद का अतिवाद
- सिमी से भी खतरनाक है संघ का स्वरूप
- बाबा रामदेव का दांव
बहुत अच्छा व सच्चाईयो पर आधारित लेख है। सेकुलर भारत के निर्माँण मे ऐसे लेख का अहम योगदान होगा. संपादक- आपकी आवाज़.कांम
बहुत अच्छा व सच्चाईयो पर आधारित लेख है। सेकुलर भारत के निर्माँण मे ऐसे लेख का अहम योगदान होगा. संपादक- आपकी आवाज़.कांम
सिक्के के दुसरे पहलू की तरफ इशारा कर अनिल ज्जी ने सदा की तरह सार्थक हस्तक्षेप किया है. बहुत सशक्त लेखन. निश्चय ही लेख में ...
सिक्के के दुसरे पहलू की तरफ इशारा कर अनिल ज्जी ने सदा की तरह सार्थक हस्तक्षेप किया है. बहुत सशक्त लेखन. निश्चय ही लेख में ...
सिक्के के दुसरे पहलू की तरफ इशारा कर अनिल ज्जी ने सदा की तरह सार्थक हस्तक्षेप किया है. बहुत सशक्त लेखन. निश्चय ही लेख में ...



