बियाबान में शोर
मीडिया के लिए अछूत क्यों है यह गांधी ?
इस गांधी की चर्चा मीडिया में अकसर ना के बराबर होती है और अगर होती भी है तो, सिर्फ और सिर्फ गलत वजहों से। मीडिया और इस गांधी की रिश्ता कुछ अजीब सा है। न तो मीडिया इस गांधी को पसंद करता है न ये गांधी मीडिया को पसंद करता है।
मंगलौर हादसे की घिनौनी हकीकत
मंगलौर में हवाई दुर्घटना से सात दिन पहले 15 मई को नागरिक उड्डयमंत्री प्रफुल्ल पटेल उसी हवाई पट्टी का उद्घाटन करने गये जिस पर उतरकर एयर इंडिया एक्सप्रेस का विमान 158 लोगों की कब्रगाह बन गया. इस मौके पर कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदुरप्पा, कानून मंत्री वीरप्पा मोइली और कांग्रेसी नेता आस्कर फर्नांडीज भी मौजूद थे.
मेडिकल एजूकेशन का माफिया डॉन
सीबीआई के शिकंजे में आया केतन देसाई शिक्षा में फैलते माफियागीरी का जीता जागता उदाहरण है. इस माफियागीरी से उसने कितना पैसा कमाया इसका अंदाजा इसी से लग सकता है कि उसके पास दर्जनों के हिसाब से आलीशान भवन, क्विटल के हिसाब से सोना तथा सैकड़ों करोड़ रुपयों के हिसाब से नगदी की बरामदगी हो रही है।...प्रेस परिषद में भी पेड न्यूज की पैरोकारी
प्रेस परिषद की जिस जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा था वह आंतरिक उपद्रव का शिकार हो गई है। रिपोर्ट बन गई है। उम्मीद की जा रही थी कि 26 अप्रैल को प्रेस परिषद की विशेष बैठक में उसे सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया जाएगा। वैसा नहीं हुआ, हंगामा ज्यादा हुआ। रिपोर्ट से उन अखबारों और चैनलों के चेहरे पर कालिख पुत जाएगी और उसपर प्रेस परिषद की मुहर लग जाएगी जो चुनावों में खबरें बेच रहे थे। प्रेस परिषद में उनके पैरोकार भी हैं। उन लोगों को रिपोर्ट पर बहुत एतराज है। वे ही उपद्रव पर उतर आए हैं।...बाबा रामदेव का दांव
जब कभी किसी आदमी के किसी वजह से कुछ हजार या कुछ लाख प्रशंसक बन जाते हैं तो उसे यह गलतफहमी हो जाती है कि वह देश को चलाने में भी सक्षम है और यदि वह राजनीति में आएगा तो देश की जनता उसे सर-माथे पर बैठाकर देश की बागडोर सौंप देगी। इस प्रकार की गलतफहमी कई लोगों को हो चुकी है।...घर घर में खाप का पाप
निरुपमा के बारे में लगभग हर कोण से ढेर सारी बातें हुई हैं। पहले उसकी आत्महत्या की खबर, फिर प्रेम का एंगल, फिर पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फिर पिता का बयान कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट झूठी है। हालांकि कानूनन अब तक यह साफ नहीं हुआ है कि निरुपमा की मौत हुई है या उसकी जान लेने की कोशिश की गई है। मगर दोनों हालातों में मामला कत्ल का ही बनता है, क्योंकि इसके पीछे की कहानी सिर्फ इतनी है कि निरुपमा अपनी मर्जी से किसी विजातीय युवक से विवाह करना चाहती थी और उसके पिता इस विवाह के खिलाफ थे।
कसाब का कुछ नहीं बिगड़ेगा
२६/११ को मुंबई में हुए हमले के मुकद्दमे का फैसला आज आ जाएगा. इस फैसले को लेकर किसी के मन में किसी भी प्रकार की आशंका नहीं है,कमसे कम मुख्य अभियुक्त अजमल कसब को लेकर तो कत्तई नहीं. विशेष जज एम्.एल.तहलियानी कसाब को फांसी से कम क्या सजा देंगे? कल के अखबार और आज दोपहर के बाद चैनल वाले कसब को दी जाने वाली सजा पर चाँव-चाँव करने का एक समग्र आयोजन करेंगे. मामले से जुड़े विशेष सरकारी वकील उज्जवल निकम की मूंछों पर भी सफलता की नयी ताव चढ़ जायेगी.
माझा नांव महाराष्ट्र आहे!
मैं महाराष्ट्र हूं। पचास साल का हो गया हूं। मैंने सुना है कि पचास साल पूरे होने पर गोल्डन जुबली का मौका किसी की भी जिंदगी में बहुत बड़े मायने रखता है। भले ही वह इंसान हो या प्रदेश। हर एक के लिए गोल्डन जुवली खुशिय़ों का मौका होता है। लेकिन अपनी इस गोल्डन जुबली पर मैं खुशी मनाउं या दुखी होउं, यह समझ में नहीं आ रहा। एक तरफ मेरे पास कहने भर को विकास की कई कथाएं हैं, तो अपने दामन पर लगे दागों के दर्द का दरिया भी कोई कम गहरा नहीं है। जितना मेरा विकास हुआ, उससे भी ज्यादा विनाश भी हुआ। बहुत लोग मेरी गोल्डन जुबली मना रहे हैं, पर मैं क्या करूं ?
भूख और गरीबी को फिक्स करने का खेल
हजारों करोड़ की बातें हो रही है। लाखों करोड़ के सौंदे हो रहे हैं। करोड़ों रुपए के एडवांस इनकम टेक्स भरे जा रहे है। चियरगर्ल्स नाच रही है। देर रात तक पार्टियां हो रही है। प्राइवेट जहाज उड़ रहे है। टीवी चैनलों पर पैसे की बारिश हो रही है। मल्टीप्लेक्स सिनेमा की जगह बड़े पर्दे पर डिनर के साथ क्रिकेट के मैच दिखा रहे हैं। मगर यह सब मध्य प्रदेश में ओरछा के पास के गांवों या टीकमगढ़ जिले में नहीं हो रहा।
जवानों की मौत पर जश्न मनाने वाले 'राष्ट्रभक्त'
दंतेवाड़ा के गांव चिंतलनार की चीखें खामोश भी नहीं हो पाईं थीं, ताडमेटला की धरती में हमारे जांबाज शहीदों का लहू अभी जज्ब भी नहीं हो पाया था, रायगढ और जशपुर के सुदूर ग्रामीण अंचलों में शहीद सपूतों की चिता के फूल भी अभी चुने नहीं गए थे कि राजधानी रायपुर के बर्बर और अय्याश धनकुबेरों ने आनंदोत्सव मनाना शुरू कर दिया.
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सुदर्शन का (कु) दर्शन
जबसे आरएसएस के लोगों की आतंकवादी घटनाओं में संलिप्तता सामने आयी है, तब से आरएसएस के नेता बौखला गए हैं। इस बौखलाहट में ही शायद संघ के इतिहास में पहली बार हुआ है कि इसके स्वयंसेवक विरोध प्रदर्शन करने के लिए सड़कों पर उतरे। इसी बौखलाहट में आरएसएस के एक्स चीफ केएस सुदर्शन का मानसिक संतुलन बिगड़ गया और सोनिया गांधी के बारे में ऐसे शब्द बोल दिए, जिन्हें एक विकृत मानसिकता का आदमी ही बोल सकता है।...
सीआईए नहीं केजीबी एजंट कहिए जनाब
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व सरसंघचालक ने 10 नवंबर को सोनिया गांधी पर सीआईए एजंट होने का आरोप लगाकर सनसनी पैदा कर दिया है. पूरी की पूरी कांग्रेस उत्तेजित है और संघ भी बैकफुट पर चला गया है. सुदर्शन के आस पास के लोगों का कहना है कि सुदर्शन जी भुलक्कड़ हो गये हैं और उन्हें कुछ ठीक से याद नहीं रहता. शायद इसीलिए उन्होंने इतनी बड़ी चूक कर दी. ...
सोनिया का सच जान बेकाबू क्यों होते हो?
एक बार फिर लोकतंत्र पर आपातकाल मंडरा पड़ा है. राजमाता सोनिया गांधी के सिपहसालारों ने कांग्रेसी गुण्डों, माफियाओं और लोकतंत्र के हत्यारों का आह्वान किया है कि वह देशभर में संघ कार्यालयों पर धावा बोल दे. इसका तत्काल प्रभाव हुआ और कांग्रेसी गुण्डों ने संघ के दिल्ली मुख्यालय पर धावा भी बोल दिया. ठीक वैसे ही जैसे इंदिरा गांधी की मौत के बाद सिखों को निशाना बनाया गया था. हिंसक और अलोकतातंत्रिक मानसिकता से ग्रस्त कांग्रेसी सोनिया का सच जानकर आखिर इस तरह बेकाबू क्यों हो रहे हैं?...
नये निजाम के दामन पर है ज्यादा बड़ा दाग
मुंबई। महाराष्ट्र के नए निजाम भी कोई दूध के धुले नहीं हैं। कांग्रेस आलाकमान ने अशोक चव्हाण को फर्जीवाड़े से फ्लैट पाने के आरोप में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री की गद्दी से हटा दिया। लेकिन नए मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण भी उसी तरह के फर्जीवाड़े में गले तक डूबे हुए हैं। उन्होंने जितने बड़े बड़े झूठ बोलकर सरकार से फ्लैट हथियाए हैं वे कांग्रेस के लिए ज्यादा दागदार हैं।...
अजमेर चार्जशीट और संघी उछल-कूद
बढ़ते पैमाने पर इसके साक्ष्य सामने आ रहे हैं कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आर एस एस) से जुड़े लोगों का आतंकवादी हमलों में हाथ रहा है। इन हालात में आर एस एस इस पुराने सूत्र पर चल रहा लगता है कि हमला ही सबसे अच्छा बचाव है। उसने 10 नवंबर को देशव्यापी विरोध कार्रवाइयों का आह्वान किया है। इन कार्रवाइयों में संघ के शीर्ष नेताओं के शामिल होने की बात कही जा रही है। बहरहाल, इसकी चर्चा हम जरा बाद में करेंगे।...
अपने होने पर ही हैरान
‘चुप्पी-चुप्पी नहीं नहीं, बोलेंगे अब सभी-सभी’ इन्हीं नारों से दाहोद (गुजरात) का सीनियर रेलवे संस्थान परिसर 31 अक्टूबर को पूरे दिन गूंजता रहा। यहां गुजरात के बड़ोदरा, पंचमहल, सुरत, भड़ूच, डांग, बालसाड और साबरकांठा जिले से लगभग तीन हजार के आस पास विमुक्त एवं घुमंतू समाज से ताल्लुक रखने वाले लोग इकट्ठे हुए थे। मौका था, अधिकार अभियान की घोषणा का। उस समाज के लिए जो इस लोकतांत्रिक देश में अधिकार का अर्थ अभी तक समझ नहीं पाएं हैं। ...
गोली लगने के बाद क्या गांधी ने कहा था- हे राम ?
यह एक ऐसा सवाल है जिस पर अब विवाद होने लगा है. 30 जनवरी 1948 को क्या जब महात्मा गांधी को नाथूराम गोडसे ने गोली मारी तो महात्मा गांधी ने अपने मुंह से हे! राम का संबोधन किया था? उस वक्त घटनास्थल पर मौजूद रहे एक प्रत्यक्षदर्शी के डी मदान का कहना है कि "मैंने नहीं सुना था कि उन्होंने हे राम कहा था या नहीं."...
भद्दा और बेदम रहा संघ का विरोध प्रदर्शन
स्कूल जाते बच्चों के भी हाथ में भगवा थमाकर भले ही संघ ने शक्ति प्रदर्शन की भरपूर कोशिश की हो लेकिन 10 नवम्बर का दिन उसके इतिहास में कोई बडी घटना के रूप में याद नहीं किया जायेगा। हॉ हम बात कर रहे है राजस्थान के भरतपुर जिला मुख्यालय की जहॉ देश भर की ही तरह हिन्दुवादी संघटनों ने अपने उपर लग रहे ‘भगवा आतंकवाद’ के आरोपों के विरोध में शक्ति प्रदर्शन किया था। भरतपुर जहॉ संघ प्रचारक क रूप में भाजपा के पीएमइन वेंटिग लालकृष्ण आडवानी ने अपनी सेवाऐं दी है संघ का ये विरोध प्रदर्शन एक दम भददा और हल्का रहा।...
एनसीपी के 'दादा' का दांव
महाराष्ट्र में कांग्रेस में परिवर्तन हुआ तो राष्ट्रवादी कांग्रेस ने भी अपने पत्ते खोल दिये. राज्य में लंबे समय से राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के भीतर चल रही सत्ता के दावेदारी पर एनसीपी ने आखिरकार प्रदेश की प्रशासनिक कमान अपनी ओर से शरद पवार के भतीजे अजीत पवार को सौंप दी है. अब गुरुवार को शाम साढ़े चार बजे पृथ्वीराज चव्हाण के साथ अजीत "दादा" पवार उपमुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे....
पीएमओ वाले पृथ्वीराज
महाराष्ट्र के नये मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण यूपीए सरकार पार्ट वन और पार्ट टू में बतौर पीएमओ मिनिस्टर जाने जाते हैं. प्रधानमंत्री कार्यालय में रहते हुए भी उन्होंने कभी ताकतवर होने का दंभ नहीं पाला और चुपचाप काम करते रहे. बिट्स पिलानी से बीई और बर्कले विश्वविद्यालय से एमएस की डिग्री हासिल करनेवाले पृथ्वीराज की राजनीतिक कमेस्ट्री ने उनके सार्वजनिक जीवन में पहली बार इतना गाढ़ा रंग उड़ेला है....
सुलग रहा है मेरठ 'हिन्दुस्तान'
एक ओर हिन्दुस्तान अखबार अपनी अलग कंपनी बनाकर अखबार को चमकाने और अखबार का विस्तार करने में लगा है वहीं दूसरी ओर हिन्दुस्तान के विभिन्न संस्करणों में हालात ठीक नहीं है. हिन्दुस्तान के मेरठ संस्करण में इन दिनों इस्तीफे दिये जा रहे हैं लेकिन प्रचारित किया जा रहा है कि जो आफिस नहीं आ रहे हैं वे छुट्टी पर चले गये हैं....
आलोक तोमर के बगल में बसे किशोर मालवीय
सीएनईबी में पहले से एक सलाहकार संपादक थे- आलोक तोमर. अब दूसरे सलाहकार संपादक भी वहां नियुक्त हो गये हैं किशोर मालवीय. उन्होंने सीएनईबी चैनल के साथ बतौर कंसल्टिंग एडिटर अपनी नई पारी की शुरुआत की है। सीएनईबी से पहले वे ‘वायस ऑफ इंडिया’ न्यूज चैनल के साथ जुड़े हुए थे। उन्होंने करीब दो दशक के कॅरियर में देश के नामी-गिरामी मीडिया संस्थानों में कई जिम्मेदारियां निभाईं हैं।...
सुरक्षा परिषद की छांव में खेती पर दांव
अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने संसद में दिये गये अपने भाषण में भारत से मिले प्यार की भूरि भूरि प्रशंसा जरूर की लेकिन अपनी व्यावसायिक मजबूरियों को छिपा नहीं सके. बराक ओबामा ने संसद के संयुक्त अधिवेशन को संबोधित करते हुए जहां एक ओर भारत को महाशक्ति करार देकर उसके लिए संयुक्त राष्ट्र में स्थायी सदस्यता को अपना समर्थन दिया वहीं भारत और अमेरिका द्वारा मिलकर खेती के क्षेत्र में एक और हरित क्रांति के आगाज की घोषणा की....
आतंक नहीं कश्मीर केन्द्रित हुई ओबामा यात्रा
रविवार की देर शाम भारतीय प्रधानमंत्री द्वारा आयोजित भोज में ओमर अब्दुल्ला के शामिल होने से जो आशंका पैदा हुई थी वह सोमवार को हैदराबाद हाउस में और प्रबल रूप में सामने आ गयी जब प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अमेरिकी राष्ट्रपति की उपस्थिति में स्वीकार किया कि वे पाकिस्तान से बात करते वक्त "के" शब्द पर बात करने से नहीं कतराते हैं....
भारत से धंधा, पाक को चंदा
अमेरिका के राष्ट्रपति बराक हुसैन ओबामा ने अपना तीन दिवसीय दौरा पूरा कर लिया. मुंबई उतरकर दिल्ली दरबार तक उनकी दस्तक भारत पर अमेरिका के मजबूत पकड़ की मिसाल बन गया. निश्चित रूप से उनका दौरा भारत के लिए उतना महत्वपूर्ण नहीं जितना खुद अमेरिका के लिए है. मंदी के दौर से जूझ रहे अमेरिका को "कारपोरेट" जगत का धंधा दिलाने के लिए उन्होंने न केवल भारत को महाशक्ति करार दे दिया बल्कि सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता का समर्थन भी कर दिया....
- आलोक तोमर की आपबीती
- वह गुजरात जिसे आप नहीं जानते
- हिन्दू आतंकवाद का अतिवाद
- सिमी से भी खतरनाक है संघ का स्वरूप
- बाबा रामदेव का दांव
बहुत अच्छा व सच्चाईयो पर आधारित लेख है। सेकुलर भारत के निर्माँण मे ऐसे लेख का अहम योगदान होगा. संपादक- आपकी आवाज़.कांम
बहुत अच्छा व सच्चाईयो पर आधारित लेख है। सेकुलर भारत के निर्माँण मे ऐसे लेख का अहम योगदान होगा. संपादक- आपकी आवाज़.कांम
सिक्के के दुसरे पहलू की तरफ इशारा कर अनिल ज्जी ने सदा की तरह सार्थक हस्तक्षेप किया है. बहुत सशक्त लेखन. निश्चय ही लेख में ...
सिक्के के दुसरे पहलू की तरफ इशारा कर अनिल ज्जी ने सदा की तरह सार्थक हस्तक्षेप किया है. बहुत सशक्त लेखन. निश्चय ही लेख में ...
सिक्के के दुसरे पहलू की तरफ इशारा कर अनिल ज्जी ने सदा की तरह सार्थक हस्तक्षेप किया है. बहुत सशक्त लेखन. निश्चय ही लेख में ...



