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बियाबान में शोर

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कोसी पर कहर के वक्त भी सोया रहा मौसम विभाग

13 और 14 अप्रैल की दरम्यानी रात जब पूरा कोसी क्षेत्र चूल्हे को एक दिन का विराम देने वाले अपने सांस्कृतिक त्योहार सिरुआ-बिसुआ की मधुर यादों में सो रहा था, पश्चिम बंगाल के मिदनापुर से उठे भीषण चक्रवाती तूफान काल वैशाखी ने उनके आशियानों को उजाड़ कर उन्हें सड़क पर ला दिया।
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अकबर की छतरी पर नासमझी की गठरी

आम आदमी की क्या बात करें. जब राष्ट्रीय प्रतीकों और धरोहरों का संरक्षण करने वाला पुरातत्व विभाग ही राष्ट्रीय प्रतीकों को ठीक से नहीं जान पा रहा है. उसके जिला स्तर के अधिकारी को नहीं पता कि राष्ट्रीय चिन्ह माने जाने वाले अशोक स्तम्भ के चक्र में कितनी तीलियॉ है. वे जानकारी होने से इंकार कर देते हैं.
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हर तरफ है हिरोशिमा

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अगर हम कहें कि हिंदुस्तान में हर तरफ एक हिरोशिमा मौजूद है तो शायद आप यकीन न करें। हम जानते है यकीन करने के लिए ख़ामोश शहर और लाशों के ढेर का होना जरुरी है। दिल्ली के मायापुरी स्थित कबाड़ बाजार में जो हुआ निश्चित तौर पर उसे एक घटना मान कर भुला दिया जायेगा परन्तु दुनिया का कबाड़ बाजार बनते जा रहे हिंदुस्तान में रेडियो एक्टिव प्रदूषण की भयावह स्थिति पर सरकारी गैरसरकारी एजेंसियों की शर्मनाक चुप्पी और उस पर पर्दादारी को अब ज्यादा दिनों तक झुठलाना निश्चित तौर पर असंभव होगा|...
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छोटा सा परमाणु हादसा

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जिस वक्त दिल्ली के लुटियंस जोन में भारत सरकार सिविल न्यूक्लियर लाइबिलिटी बिल को पास करवाने के तैयारी कर रही थी उसी वक्त उसी लुटियंस जोन से सटे इलाके मायापुरी इलाके में परमाणु विकिरण हो रहा था. नागरिकों को क्षतिपूर्ति देनेवाले इस विधेयक को पास करवाने के लिए सरकार आश्वासन दे रही थी कि जनता चिंता न करे, सरकार को जनता की पूरी चिंता है लेकिन सरकार की नाक के ठीक नीचे हुए विकिरण की खबर ही सार्वजनिक होने में 15 दिन लग गये. ...
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छद्म लोकतंत्र का सत्ता संघर्ष है नक्सलवाद

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स्वतंत्रता के समय भारत के राजनेताओं के एक गुट ने गांधी की हत्या की तो दूसरे गुट ने गांधी के नीतियों की हत्या की. गांधी की नीतियों की हत्या करनेवालों ने मिलजुलकर समाज पर एक ऐसा संविधान थोप दिया जिसमें लोकतंत्र के नाम पर अनंतकाल तक समाज को गुलाम बनाकर रखने के सभी उपकरण मौजूद थे. वर्तमान राजनीतिक व्यवस्था इसी लोकतंत्र को किसी भी तरह से बचाकर रखना चाहती है जबकि नक्सलवादी इस व्यवस्था को उखाड़कर अपनी व्यवस्था स्थापित करना चाहते हैं. ...
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हत्याओं के दौर से दहलना अभी बाकी है

ये तो होना ही था. ये हर कीमत पर होता क्यूंकि सरकार चाहती थी कि ऐसा हो और जंगलों में फाकाकशी कर रही एक पूरी सभ्यता के खिलाफ गण हत्या के फरमान को समूचे देश की स्वीकृति मिल सके. दंतेवाडा की घटना के बाद टीवी चैनलों की ख़बरों में कल का सबेरा साफ़ नजर आने लगा है, चूँकि ये तय है कि अब जो कार्यवाही होगी उसमे बड़े पैमाने पर निर्दोष मारे जायेंगे. ऐसे में ऐसी घटनाओं की पृष्ठभूमि तैयार करना पी चिदम्बरम एंड कम्पनी के लिए बेहद जरुरी था।
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ग्रीन हंट पर भारी पड़ा रेड हंट

जो अंदेशा था वही हुआ। पी चिंदबरम के दंभ ने सीआरपीएफ के 75 से अधिक निर्दोष जवानों की जान ले ली। अमेरिकन कारपोरेट मंत्री के विदेशी अंदाज की विफलता जनता के सामने आ चुकी है। लालगढ़ दौरे के दिन और उसके एक दिन बाद, फिर उसके अगले दिन। तीन भीषण हमलों ने साफ संकेत दिए है, नक्सलवाद से निपटना इस सरकार के बूते के बाहर की बात है।
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रामराज्य की जगह रोमराज्य

एक ओर इस देश में दरिद्रों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है उसी अवधि में दूसरी ओर केंद्र और राज्य में सत्तारूढ़ दल कांग्रेस की तिजोरी में लगातार माल बढ़ता जा रहा है. एक ओर इस देश की अधिकान्श जनता का दो जून की रोटी जुगाड़ने में सारा श्रम चला जाता हो. रियाया भुखमरी की शिकार हो ,तब सत्तारूढ़ दल की बढ़ती अमीरी पर कोई चैनल न चिचियाये तो अजीब लगता है. महात्मा गाँधी इस देश में रामराज स्थापित करना चाह रहे थे. रामराज तो स्थापित नहीं हो पाया उसकी जगह रोमराज जरूर स्थापित हो गया.
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जाति भी पूछो साधु की

अपने देश में हर दसवें साल जनगणना कराने की परम्परा है. इसी साल १ अप्रैल से नयी जनगणना प्रारम्भ होगी. १८७२ में पहली बार इस देश में जनगणना हुई थी. तब से अब तक १४ बार जनगणनाएं हो चुकी हैं. भारत में जनगणना कोई नयी बात नहीं है. प्राचीन काल में शायद भारत वर्ष अकेला देश था जहां जनगणना की परम्परा थी. आचार्य चाणक्य ने अर्थशास्त्र की रचना ईसा से ३ सदी पूर्व की थी। उसमें चाणक्य मानते हैं कि राज्य में कर-निर्धारण समेत राजकीय नीतियों के लिए जनगणना आवश्यक है. आधुनिक भारत में यह परम्परा दोबारा अंग्रेजों ने १८७२ में शुरू की.
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संबंधों का टूटा हुआ सेतु

अमिताभ बच्चन बांद्रा वर्ली सी लिंक के उद्घाटन में शहर के दो सिरों को जोड़ने के साक्षी होने गये थे. लेकिन उनके वहां होने भर को जिस तरह से कांग्रेस के कुछ नेताओं ने मुद्दा बनाकर हवा में बांह लहराई है उससे कांग्रेस की कमजर्फी सामने आ जाती है. अमिताभ बच्चन के वहां होने भर को मुद्दा बना लेने वाले कांग्रेसी नेता आखिर क्यों भूल गये कि वे जिस अमिताभ बच्चन का अपमान कर रहे हैं वह इस देश के करोड़ों दिलों में भगवान की तरह बसता है. अमिताभ बच्चन के साथ कांग्रेस का यह व्यवहार भारतीय संस्कृति का बेहूदा मजाक तो है ही, अमिताभ बच्चन के करोड़ों प्रशंसकों का भी घोर अपमान है.
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सुदर्शन का (कु) दर्शन
जबसे आरएसएस के लोगों की आतंकवादी घटनाओं में संलिप्तता सामने आयी है, तब से आरएसएस के नेता बौखला गए हैं। इस बौखलाहट में ही शायद संघ के इतिहास में पहली बार हुआ है कि इसके स्वयंसेवक विरोध प्रदर्शन करने के लिए सड़कों पर उतरे। इसी बौखलाहट में आरएसएस के एक्स चीफ केएस सुदर्शन का मानसिक संतुलन बिगड़ गया और सोनिया गांधी के बारे में ऐसे शब्द बोल दिए, जिन्हें एक विकृत मानसिकता का आदमी ही बोल सकता है।...
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सीआईए नहीं केजीबी एजंट कहिए जनाब
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व सरसंघचालक ने 10 नवंबर को सोनिया गांधी पर सीआईए एजंट होने का आरोप लगाकर सनसनी पैदा कर दिया है. पूरी की पूरी कांग्रेस उत्तेजित है और संघ भी बैकफुट पर चला गया है. सुदर्शन के आस पास के लोगों का कहना है कि सुदर्शन जी भुलक्कड़ हो गये हैं और उन्हें कुछ ठीक से याद नहीं रहता. शायद इसीलिए उन्होंने इतनी बड़ी चूक कर दी. ...
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सोनिया का सच जान बेकाबू क्यों होते हो?
एक बार फिर लोकतंत्र पर आपातकाल मंडरा पड़ा है. राजमाता सोनिया गांधी के सिपहसालारों ने कांग्रेसी गुण्डों, माफियाओं और लोकतंत्र के हत्यारों का आह्वान किया है कि वह देशभर में संघ कार्यालयों पर धावा बोल दे. इसका तत्काल प्रभाव हुआ और कांग्रेसी गुण्डों ने संघ के दिल्ली मुख्यालय पर धावा भी बोल दिया. ठीक वैसे ही जैसे इंदिरा गांधी की मौत के बाद सिखों को निशाना बनाया गया था. हिंसक और अलोकतातंत्रिक मानसिकता से ग्रस्त कांग्रेसी सोनिया का सच जानकर आखिर इस तरह बेकाबू क्यों हो रहे हैं?...
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नये निजाम के दामन पर है ज्यादा बड़ा दाग
मुंबई। महाराष्ट्र के नए निजाम भी कोई दूध के धुले नहीं हैं। कांग्रेस आलाकमान ने अशोक चव्हाण को फर्जीवाड़े से फ्लैट पाने के आरोप में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री की गद्दी से हटा दिया। लेकिन नए मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण भी उसी तरह के फर्जीवाड़े में गले तक डूबे हुए हैं। उन्होंने जितने बड़े बड़े झूठ बोलकर सरकार से फ्लैट हथियाए हैं वे कांग्रेस के लिए ज्यादा दागदार हैं।...
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अजमेर चार्जशीट और संघी उछल-कूद
बढ़ते पैमाने पर इसके साक्ष्य सामने आ रहे हैं कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आर एस एस) से जुड़े लोगों का आतंकवादी हमलों में हाथ रहा है। इन हालात में आर एस एस इस पुराने सूत्र पर चल रहा लगता है कि हमला ही सबसे अच्छा बचाव है। उसने 10 नवंबर को देशव्यापी विरोध कार्रवाइयों का आह्वान किया है। इन कार्रवाइयों में संघ के शीर्ष नेताओं के शामिल होने की बात कही जा रही है। बहरहाल, इसकी चर्चा हम जरा बाद में करेंगे।...
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अपने होने पर ही हैरान
‘चुप्पी-चुप्पी नहीं नहीं, बोलेंगे अब सभी-सभी’ इन्हीं नारों से दाहोद (गुजरात) का सीनियर रेलवे संस्थान परिसर 31 अक्टूबर को पूरे दिन गूंजता रहा। यहां गुजरात के बड़ोदरा, पंचमहल, सुरत, भड़ूच, डांग, बालसाड और साबरकांठा जिले से लगभग तीन हजार के आस पास विमुक्त एवं घुमंतू समाज से ताल्लुक रखने वाले लोग इकट्ठे हुए थे। मौका था, अधिकार अभियान की घोषणा का। उस समाज के लिए जो इस लोकतांत्रिक देश में अधिकार का अर्थ अभी तक समझ नहीं पाएं हैं। ...
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गोली लगने के बाद क्या गांधी ने कहा था- हे राम ?
यह एक ऐसा सवाल है जिस पर अब विवाद होने लगा है. 30 जनवरी 1948 को क्या जब महात्मा गांधी को नाथूराम गोडसे ने गोली मारी तो महात्मा गांधी ने अपने मुंह से हे! राम का संबोधन किया था? उस वक्त घटनास्थल पर मौजूद रहे एक प्रत्यक्षदर्शी के डी मदान का कहना है कि "मैंने नहीं सुना था कि उन्होंने हे राम कहा था या नहीं."...
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भद्दा और बेदम रहा संघ का विरोध प्रदर्शन
स्कूल जाते बच्चों के भी हाथ में भगवा थमाकर भले ही संघ ने शक्ति प्रदर्शन की भरपूर कोशिश की हो लेकिन 10 नवम्बर का दिन उसके इतिहास में कोई बडी घटना के रूप में याद नहीं किया जायेगा। हॉ हम बात कर रहे है राजस्थान के भरतपुर जिला मुख्यालय की जहॉ देश भर की ही तरह हिन्दुवादी संघटनों ने अपने उपर लग रहे ‘भगवा आतंकवाद’ के आरोपों के विरोध में शक्ति प्रदर्शन किया था। भरतपुर जहॉ संघ प्रचारक क रूप में भाजपा के पीएमइन वेंटिग लालकृष्ण आडवानी ने अपनी सेवाऐं दी है संघ का ये विरोध प्रदर्शन एक दम भददा और हल्का रहा।...
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एनसीपी के 'दादा' का दांव
महाराष्ट्र में कांग्रेस में परिवर्तन हुआ तो राष्ट्रवादी कांग्रेस ने भी अपने पत्ते खोल दिये. राज्य में लंबे समय से राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के भीतर चल रही सत्ता के दावेदारी पर एनसीपी ने आखिरकार प्रदेश की प्रशासनिक कमान अपनी ओर से शरद पवार के भतीजे अजीत पवार को सौंप दी है. अब गुरुवार को शाम साढ़े चार बजे पृथ्वीराज चव्हाण के साथ अजीत "दादा" पवार उपमुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे....
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पीएमओ वाले पृथ्वीराज
महाराष्ट्र के नये मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण यूपीए सरकार पार्ट वन और पार्ट टू में बतौर पीएमओ मिनिस्टर जाने जाते हैं. प्रधानमंत्री कार्यालय में रहते हुए भी उन्होंने कभी ताकतवर होने का दंभ नहीं पाला और चुपचाप काम करते रहे. बिट्स पिलानी से बीई और बर्कले विश्वविद्यालय से एमएस की डिग्री हासिल करनेवाले पृथ्वीराज की राजनीतिक कमेस्ट्री ने उनके सार्वजनिक जीवन में पहली बार इतना गाढ़ा रंग उड़ेला है....
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सुलग रहा है मेरठ 'हिन्दुस्तान'
एक ओर हिन्दुस्तान अखबार अपनी अलग कंपनी बनाकर अखबार को चमकाने और अखबार का विस्तार करने में लगा है वहीं दूसरी ओर हिन्दुस्तान के विभिन्न संस्करणों में हालात ठीक नहीं है. हिन्दुस्तान के मेरठ संस्करण में इन दिनों इस्तीफे दिये जा रहे हैं लेकिन प्रचारित किया जा रहा है कि जो आफिस नहीं आ रहे हैं वे छुट्टी पर चले गये हैं....
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आलोक तोमर के बगल में बसे किशोर मालवीय
सीएनईबी में पहले से एक सलाहकार संपादक थे- आलोक तोमर. अब दूसरे सलाहकार संपादक भी वहां नियुक्त हो गये हैं किशोर मालवीय. उन्होंने सीएनईबी चैनल के साथ बतौर कंसल्टिंग एडिटर अपनी नई पारी की शुरुआत की है। सीएनईबी से पहले वे ‘वायस ऑफ इंडिया’ न्यूज चैनल के साथ जुड़े हुए थे। उन्होंने करीब दो दशक के कॅरियर में देश के नामी-गिरामी मीडिया संस्थानों में कई जिम्मेदारियां निभाईं हैं।...
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सुरक्षा परिषद की छांव में खेती पर दांव
अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने संसद में दिये गये अपने भाषण में भारत से मिले प्यार की भूरि भूरि प्रशंसा जरूर की लेकिन अपनी व्यावसायिक मजबूरियों को छिपा नहीं सके. बराक ओबामा ने संसद के संयुक्त अधिवेशन को संबोधित करते हुए जहां एक ओर भारत को महाशक्ति करार देकर उसके लिए संयुक्त राष्ट्र में स्थायी सदस्यता को अपना समर्थन दिया वहीं भारत और अमेरिका द्वारा मिलकर खेती के क्षेत्र में एक और हरित क्रांति के आगाज की घोषणा की....
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आतंक नहीं कश्मीर केन्द्रित हुई ओबामा यात्रा
रविवार की देर शाम भारतीय प्रधानमंत्री द्वारा आयोजित भोज में ओमर अब्दुल्ला के शामिल होने से जो आशंका पैदा हुई थी वह सोमवार को हैदराबाद हाउस में और प्रबल रूप में सामने आ गयी जब प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अमेरिकी राष्ट्रपति की उपस्थिति में स्वीकार किया कि वे पाकिस्तान से बात करते वक्त "के" शब्द पर बात करने से नहीं कतराते हैं....
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भारत से धंधा, पाक को चंदा
अमेरिका के राष्ट्रपति बराक हुसैन ओबामा ने अपना तीन दिवसीय दौरा पूरा कर लिया. मुंबई उतरकर दिल्ली दरबार तक उनकी दस्तक भारत पर अमेरिका के मजबूत पकड़ की मिसाल बन गया. निश्चित रूप से उनका दौरा भारत के लिए उतना महत्वपूर्ण नहीं जितना खुद अमेरिका के लिए है. मंदी के दौर से जूझ रहे अमेरिका को "कारपोरेट" जगत का धंधा दिलाने के लिए उन्होंने न केवल भारत को महाशक्ति करार दे दिया बल्कि सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता का समर्थन भी कर दिया....
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