Home | बियाबान में शोर | शबद नहीं शराब में सराबोर

शबद नहीं शराब में सराबोर

image

सिख संगत की रिपोर्ट बता रही है कि पंजाब के 78 फीसदी नौजवान नशे के आगोश में हैं. कोढ़ में खाज यह कि इनमें 37 प्रतिशत शुद्धरूप से स्मैक के आदी है. स्मैक थोड़ा मंहगा नशा है. पंजाब में इसकी कीमत छह से सात सौ रूपये ग्राम है. इसलिए नशे में डूबने के लिए पंजाबी नौजवान नाक से पेट्रोल पीते हैं, छिपकली मारकर खाते हैं, गर्दन पर बूट पालिश मलकर धूप में खड़े होते हैं, पेट्रोल की पाईप पर जमनेवाली गर्द को फांकते हैं...

सिगरेट में भांग और चरस भरकर पीते हैं, चोट और मोच में दर्द दूर करनेवाले आयोडेक्स को जैम की तरह ब्रेड पर लगाकर खाते हैं और कुछ नहीं मिलता तो करेक्शन करनेवाले सफेद फ्ल्यूड को एकबार में पूरा पी जाते हैं. उतना नशा भले न होता हो जितना स्मैक से होता है लेकिन काम चल जाता है.

यह पंजाबी नौजवानों की ऐसी दास्तान है जो पंजाब की सबसे विकराल समस्याओं में शुमार हो गया है. वैसे पंजाब में खाओ पीयो मौज करो की जिस जीवनशैली को आदर्श बनाकर बेचा जाता है वही जीवनशैली पंजाब को अंदर से खोखला कर रही है. अकेले अमृतसर में हर रोज एक करोड़ रूपये की शराब बिकती है. ड्रग तस्करों के गोल्डन बेल्ट के रूप में मशहूर अफगानिस्तान, पाकिस्तान और ईरान की कड़ी में अब पंजाब भी शामिल हो गया है. नतीजा अकेले पंजाब में हर साल 1000 करोड़ रूपये का ड्रग कारोबार. और जहां पैसे का इतना बड़ा धंधा हो वहां सरकारी प्रयास और पुनर्वास का क्या आलम होगा इसका सहज अंदाज लगाया जा सकता है. सिख संगत की रिपोर्ट ही बताती है कि पंजाब में नशे से उबारने के कोई भी केन्द्र प्रभावी साबित नहीं हुए है. लोगों को नशा चाहिए और वे इसे हर कीमत पर हासिल करते हैं.

नशे के इस उफान के कारण पंजाब के बार्डर से सटे इलाकों में नशे से उपजी संपन्नता देखिए. उन सरहदी इलाकों के किसानों की संपन्नता में लगातार बढ़त हो रही है जो अघोषित तौर सप्लाई या कोरियर का काम करते हैं. पाकिस्तान बार्डर से सटे अमृतसर, तरन-तारन और गुरूदासपुर जिले के सीमावर्ती किसान अफगानिस्तान की अफीम को पाकिस्तान के रास्ते भारत में दाखिल कराते हैं. वे मोटी रकम कमाते हैं. आज कुरियर या सप्लाई एक किलो अफीम को बार्डर पार कराने के लिए पचास हजार से एक लाख रूपया तक वसूलता है. पुलिस विभाग का दावा है कि पिछले साल उसने 200 करोड़ रूपये की अफीम जब्त की. इस बात का सहज अंदाजा लगाया जा सकता है कि जब जब्ती 200 करोड़ की है तो आयात और खपत का अनुपात क्या होना चाहिए? पुलिस और बीएसएफ दावा भले करते हों कि पंजाब में तस्करों की रीढ़ तोड़ने में उन्होंने कामयाबी पायी है लेकिन ऐसा लगता नहीं है.

उम्मीद की कुछ किरण बाकी है तो वह भटिण्डा के धापली जैसे गांवों में बाकी है जिन्होंने शराब को अपने गांव में आने ही नहीं दिया. आजादी के बाद से कई सरकारों ने यहां शराब की हट्टी खोलने की कोशिश की लेकिन गांववालों और खासकर महिलाओं ने हमेशा विरोध करके शराब के ठेकेदारों को गांव से बाहर खदेड़ दिया. आजादी के पहले आखिरी दुकान यहां 1938 तक थी. 1938 में बंद होने के बाद फिर दोबारा आज तक यहां शराब की दुकान नहीं खुली. ऐसा नहीं है कि सरकारों ने कोशिश नहीं की. 1977, 1983 और फिर 1997 में कांग्रेस और गैर कांग्रेसी सरकारों ने यहां शराब का ठेका शुरू करने की कोशिश की लेकिन वे नाकामयाब ही रहे. काश पंजाब के दूसरे गांव-शहर धापली से कुछ सीखते. पंजाब के नौजवानों को इस नशे से उबारने के लिए बहुत सारे गैर सरकारी प्रयास हो रहे हैं. तरह-तरह के अभियान चलाए जा रहे हैं. विदेशों में रहनेवाले सिख भी इस दिशा में काम कर रहे हैं. लेकिन इसमें कमी का आलम क्या है इसे समझना हो तो पंजाब सरकार को मिलनेवाले टैक्स को देखिए फिर अंदाज लगाईये कि सरकार नशे के खिलाफ क्यों जाए? पंजाब सरकार को कुल टैक्स का 24 प्रतिशत शराब की बिक्री से प्राप्त होता है. पिछले वित्त वर्ष में पंजाब सरकार को 1500 करोड़ से अधिक की आय शराब पर मिले टैक्स से हुई. इसलिए सरकार की ओर से नशाखोरी रोकने के गंभीर प्रयास होंगे यह सोचना ही थोड़ी नादानी होगी. नतीजा सामने है. पटियाला पैग लगातार बड़ा होता जा रहा है. हालांकि अभी केरल सबसे बड़ा शराबी राज्य है जहां प्रति व्यक्ति खपत 8.3 लीटर सालाना है, फिर भी पंजाब उससे थोड़ा ही पीछे रह गया है. पंजाब में प्रति व्यक्ति सालाना शराब की खपत 8.0 लीटर है. पंजाब सरकार को अपने नागरिकों से सबसे ज्यादा टैक्स ही शराब के जरिए मिलता है तो सरकार भला क्यों इसके प्रचार-प्रसार पर रोक लगाएगी. पंजाब के औद्योगिक शहर लुधियाना का हर नागरिक सरकार को नशे के रास्ते 892 रूपये टैक्स भरता है, तो अमृतसर का नागरिक 407 रूपये और जालंधर का बाशिंदा 265 रूपये नशाखोरी करके सरकार को टैक्स भरता है. औसत राज्य का नागरिक नशे की एवज 615 रूपये का टैक्स सरकार को अदा करता है.

शबद के जरिए रामरस पीनेवाला पंजाब सोमरस का आदी हो गया है. इसका सबसे बुरा असर पंजाब की नौजवान पीढ़ी पर पड़ा है. खुलेपन के नाम पर पंजाब की तहजीब, संस्कृति और संस्कार सबको पंज आबो में बहा दिया लगता है. आर्थिक मोर्चे पर संकटग्रस्त पंजाब नशे में धुत है. वह कब कहां किस नाली में गिर पड़ेगा कुछ पता नहीं.   

Subscribe to comments feed Comments (5 posted):

tulsisinghbisht@gmail.com on 26 July, 2008 13:35;12
avatar
पंजाब की कहानी कुछ और ही है ज्यादातर पंजाबी लोग ट्रक ड्राईवरी करते हैं और उनका अपना काम है। इसी काम की वजह से वो लोग इसके शिकार हो जाते हैं। इनमें ज्यादातर कम पढें लिखे लोग हैं और उनके घरों की हालत भी ठीक से नहीं रहती। इसलिए वो इसका सहारा लेते हैं। आपका लेख काफी जागरूकवर्द्धक है लेकिन सरकार तो विवश है उसे अपने टैक्स से मतलब है - जनता से नहीं। सरकार का एक ही कहना होगा हमने तो शराब की बोतल पर लिख दिया है कि शराब पीना हानिकारक है फिर भी लोग पीते है तो हमारा क्या दोष। इस नशे से मुक्ति अगर लेनी है तो केवल एक ही उद्देश्य हो सकता है और वो है शराब के बिना भी दुनिया है - शराब में कुछ नहीं। इसके लिए शराबियों के परिवार वालों को ही आगे आना होगा ताकि शराबी को शराब से छुटकारा मिल सके। बाकी सब व्यर्थ है।
Thumbs Up Thumbs Down
0
avatar
बहुत ही भयावह तथ्‍य प्रस्‍तुत किए गए हैं । देश के बाकी हिस्‍सों का हाल भी लगभग यही है । शराब के टैक्‍स से अर्जित रकम का असर भी शराब जैसा ही होगा । सरकारें इससे जितना कमा रही हैं, उससे कई गुना अधिक गंवा रही हैं - यह जानते तो सब हैं, लेकिन मानने को कोई तैयार नहीं है ।
Thumbs Up Thumbs Down
0
anita kumar on 26 July, 2008 23:26;04
avatar
rongate khade ho gaye padh kar
Thumbs Up Thumbs Down
0
vivek on 27 July, 2008 08:04;42
avatar
जितना सरकार आज नशे से कमा रही है, उसका दसियों गुना वह अगली पीढी से छीन रही है. इन नशेबाजों की संतानें कैसी निकलेंगी........... सोचना भी फिजूल है.
Thumbs Up Thumbs Down
0
राजीव तनेजा on 27 July, 2008 08:52;07
avatar
भयावह प्रस्तुति....दिमाग हिल गया...रौंगटे खड़े हो गए...
आने वाला समय कैसा होगा?अभी से सोच के डर लग रहा है
Thumbs Up Thumbs Down
0
total: 5 | displaying: 1 - 5

Post your comment comment

Type in Hindi (हिन्दी में कमेन्ट करने के लिए यहां रोमन में लिखिए यह अपने आप हिन्दी में बदल देगा.)

Title :
Body
Powered by Vivvo CMS v4.1.2
Share |
  • email Email to a friend
  • print Print version

ईमेल से विस्फोटः अपना ईमेल यहां भरें और सब्सक्राइब करें:

Delivered by FeedBurner

Author info
image संजय तिवारी आप जहां तक सोच सकते हैं इंटरनेट आपको वह करने का मौका देता है. अभी तक मानव सभ्यता ने जितने भी मीडिया माध्यमों का उपयोग किया है यह उन सबमें अनूठा, प्रभावी और सर्वगुण संपन्न है. सूचना लेने देने के तीन माध्यमों दृश्य, श्रवण और पाठ को एक ही धागे में लपेटे नया मीडिया उत्पादन और पहुंच दोनों के लिहाज से सर्वश्रेष्ठ है. ऐसे नये मीडिया का जनहित के लिए भरपूर उपयोग हो, विस्फोट.कॉम उसी दिशा में उठा एक कदम है. sanjaytiwari07@gmail.com
Rate this article
4.00
More from बियाबान में शोर
Previous
image
सुदर्शन का (कु) दर्शन
जबसे आरएसएस के लोगों की आतंकवादी घटनाओं में संलिप्तता सामने आयी है, तब से आरएसएस के नेता बौखला गए हैं। इस बौखलाहट में ही शायद संघ के इतिहास में पहली बार हुआ है कि इसके स्वयंसेवक विरोध प्रदर्शन करने के लिए सड़कों पर उतरे। इसी बौखलाहट में आरएसएस के एक्स चीफ केएस सुदर्शन का मानसिक संतुलन बिगड़ गया और सोनिया गांधी के बारे में ऐसे शब्द बोल दिए, जिन्हें एक विकृत मानसिकता का आदमी ही बोल सकता है।...
image
सोनिया का सच जान बेकाबू क्यों होते हो?
एक बार फिर लोकतंत्र पर आपातकाल मंडरा पड़ा है. राजमाता सोनिया गांधी के सिपहसालारों ने कांग्रेसी गुण्डों, माफियाओं और लोकतंत्र के हत्यारों का आह्वान किया है कि वह देशभर में संघ कार्यालयों पर धावा बोल दे. इसका तत्काल प्रभाव हुआ और कांग्रेसी गुण्डों ने संघ के दिल्ली मुख्यालय पर धावा भी बोल दिया. ठीक वैसे ही जैसे इंदिरा गांधी की मौत के बाद सिखों को निशाना बनाया गया था. हिंसक और अलोकतातंत्रिक मानसिकता से ग्रस्त कांग्रेसी सोनिया का सच जानकर आखिर इस तरह बेकाबू क्यों हो रहे हैं?...
image
रोम रोम में इरोम
कश्मीरी अलगाववादियों की तरह उसने आज तक अपने हाथ में कभी पत्थर नहीं उठाया. हालांकि उसका भी विरोध उसी बात को लेकर है जिसे लेकर कश्मीर में पत्थरबाजों की पूरी फौज सड़कों पर उतार दी गयी. पूर्वोत्तर में सशस्त्र सेना अधिनियम समाप्त किया जाए. इरोम शर्मिला विरोध कर रही है लेकिन उसका हथियार आंदोलन नहीं, आत्मोत्सर्ग है. पिछले दस साल से उसने अन्न त्याग कर रखा है. पुलिस और प्रशासन नाक की नलियों से पौष्टिक पदार्थ पहुंचाकर भले ही उसके शरीर को जिंदा रखे हुए हैं लेकिन उसे जब भी मौका मिलता है वह राजघाट जाती है और फफककर रोती है. शायद शर्मिला के सत्याग्रह को समझने के लिए देश में दूसरी कोई जगह बची भी नहीं है. ...
image
जिसके दर पर फाइल पहुंची, उसने रात गुजार ली
सपनों के शहर मुंबई के मुंह पर ऐसी कालिख शायद ही कभी लगी हो. मुंबई के कोलाबा स्थित आदर्श हाउसिंग सोसायटी की जैसी कहानी सामने आ रही है वह दिल दहला देनेवाली है. जिस शहर में इंच-सेन्टीमीटर में भी रहने की जगह का हिसाब रखा जाता हो वहां एक 31 मंजिला बिल्डिंग अवैध जमीन पर, अवैध तरीके से खड़ी कर दी गयी. भवन को खड़ा करने का यह भ्रष्टाचार उतना संगीन नहीं है जितना संगीन है यह समाचार कि यह भवन 1999 में कारगिल में शहीद जवानों की विधवाओं को आवासीय सुविधा देने के लिए तैयार किया जानेवाला था. कोलाबा के पास जिस स्थान पर यह भवन सीना तान खड़ा हुआ है उसकी हकीकत इतनी गंदी है कि किसी भी स्वाभिमानी नागरिक का सिर शर्म से झुक जाएगा. ...
image
बहुत बड़ा दुखारी है बुखारी
हाल में ही लखनऊ में एक पत्रकार को पीटकर अहमद बुखारी एक बार फिर चर्चा में आ गये. अहमद बुखारी ने लखनऊ में जिस पत्रकार को पीटा वह न तो किसी बड़े अखबार से जुड़ा था और न ही कोई बड़ा नाम था. लेकिन उस पत्रकार ने सवाल बड़ा किया था जिससे बौखलाकर बुखारी ने उसकी पिटाई कर दी थी. बुखारी का चरित्र यही रहा है कि वे हमेशा छोटे लोगों पर ही हाथ डालते हैं और उन्हें अपना शिकार बनाते हैं....
image
श्रीमान जी, मैं यशवंत सिंह भड़ास4मीडिया का संपादक और सीईओ हूं!
सेवा में, मानवाधिकार आयोग, दिल्ली / लखनऊ। श्रीमान, मैं यशवंत सिंह पुत्र श्री लालजी सिंह निवासी ग्राम अलीपुर बनगांवा थाना नंदगंज, जनपद गाजीपुर, उत्तर प्रदेश (हाल पता- ए-1107, जीडी कालोनी, मयूर विहार फेज-3, दिल्ली-96) हूँ. मैं वर्तमान में दिल्ली स्थित एक वेब मीडिया कंपनी भड़ास4मीडिया में कार्यरत हूं. इस कंपनी के पोर्टल का वेब पता www.bhadas4media.com है. मैं इस पोर्टल में सीईओ & एडिटर के पद पर हूं. इससे पहले मैं दैनिक जागरण, अमर उजाला एवं अन्य अखबारों में कार्यरत रहा हूँ. ...
image
कुछ तो समझे ख़ुदा करे कोई
जैसे-जैसे दिन गुज़रते जा रहे हैं वैसे-वैसे अयोध्या विवाद पर इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बैंच का फैसला भी प्रभावहीन होता जा रहा है। सुलह और समझदारी की बातें अब सौदेबाजी, अप्रत्यक्ष धमकियों व चेतावनी के रूप में सामने आ रही हैं। यही वजह है कि सभी पक्ष न्याय की अंतिम सीढ़ी सुप्रीम कोर्ट की ओर देख रहे हैं, वो भी जो फैसला आने पर दिखावटी रूप से खुश हुए और वो भी जो वास्तविक रूप में निराश हुए। देर सवेर फैसले को अपनी जीत बताने वालों के कंठ में दबे हुए विचार बाहर आने लगे हैं कि हाई कोर्ट ने विवादित भूमि का जो हिस्सा बंटवारा किया, वो अनुचित और अमान्य है अर्थात फैसला आने के बाद उदारता, सहिष्णुता के साथ शांति का प्रवर्तक बनने और दिखाने की जो तात्कालिक होड़ शुरू हुई थी, उसकी हवा निकल चुकी है।...
image
अजमेर विस्फोट का मारा, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ बेचारा
2007 में हुए अजमेर दरगाह विस्फोट में इंन्द्रेश कुमार का नाम आया है या फिर लाया गया यह तो अलग बहस का विषय है लेकिन मीडिया ने पिछले चौबीस घण्टे से इसे हाईप दिया है उसकी हकीकत क्या है? आखिर ऐसा क्या हुआ कि पिछले चौबीस घण्टे में मीडिया को अचानक संघ सबसे बड़ा आतंकी संगठन नजर आने लगा और चार्जशीट में सिर्फ नाम होने के नाम पर ही इन्द्रेश कुमार को आरोपी साबित करने में लग गया? क्या अजमेर शरीफ विस्फोट की जांच के बहाने संघ को ही उड़ाने की साजिश रची गयी है?...
image
गिलानी साहब, कश्मीर आजाद है!
यह बात सबकी समझ में आ जानी चाहिए कि कश्मीरी अवाम जिसे आज़ादी कहता है उसका मातलब भारत में विलय है और गिलानी टाइप पाकिस्तानी पैसे पर पलने वालों को यह हक नहीं है कि वे पाकिस्तान की तारीफ करते हुए कश्मीर की आज़ादी की बात करें क्योंकि पाकिस्तान ही कश्मीर की आज़ादी का असली दुश्मन है....
image
बुखारी को सबक सिखाना जरूरी
शाही इमाम द्वारा यह कृत्य जाहिर करता है कि बाबरी मस्जिद प्रकरण को रंग रोगन देने में वो जो चाह रहें है वो लोगों के गले नही उतर रहा है जिसके चलते वे खुद को आज की तारीख में हाशिए पर खड़ा महसूस कर रहे है ऐसे में बुखारी जी की बौखलाहट बढ़ गई है. वे इस मामले को तूल देकर मुख्यधारा में आने के लिए छटपटा रहे हैं किन्तु गिरगिट की भांति रंग बदलने वाले इन धार्मिक आकाओं की बातों पर जनता कोई खास तवज्जो नही दे रही है अलबत्ता लोग यह जरुर कह रहें है कि इस मामले पर अब अवाम राजनीति की और रोटियां नही सिकने देगी। अब वक्त आ गया है कि बुखारी जैसे आकाओं को जनता सबक सिखाए ताकि आगे ये इस तरह की गलती न दोहरा सकें....
image
अभिव्यक्ति की आजादी पर बुखारियों के वंशजों का कब्ज़ा
शाही इमाम सैयद अहमद शाह बुखारी नाराज हैं. उन्होंने वहीद को काफिर कहा और पीट दिया. बस चलता तो उसके सर कलम करने का फतवा जारी कर देते. हो सकता है कि एक दो दिनों में कहीं से कोई उठे और उसके सर पर लाखों के इनाम की घोषणा कर दे. वो मुसलमान था उसे ये पूछने की जुर्रत नहीं होनी चाहिए थी कि क्यूँ नहीं अयोध्या में विवादित स्थल को हिन्दुओं को सौंप देते? वैसे मै हिन्दू हूँ और मुझमे भी ये हिम्मत नहीं है कि किसी से पूछूं क्यूँ भाई कोर्ट के आदेश को सर आँखों पर बिठाकर इस मामले को यहीं ख़त्म क्यूँ नहीं कर देते? मैं ऐसा इसलिए नहीं पूछ सकता क्योंकि मै जानता हूँ ऐसे सवालों के अपने खतरे हैं....
image
सेकुलरिज़्म ऐसा है तो फिर हिन्दू राष्ट्र में बुराई क्या?
हमारे संचार माध्यमों में प्रतिदिन सर्वाधिक सुर्खियों में रहने वाला शब्द 'धर्म निरपेक्षता’ ही है। बाबरी मस्जिद विवाद पर अदालत का फैसला आने के बाद अब ये हर एक की जुबान पर है। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के मुखपत्र 'पांचजन्य’ के सम्पादक तरुण विजय का एक लेख नज़र से गुजरा। जिस में उन्होंने लिखा है कि ''अयोध्या पर फैसला आने के बाद 'सेकुलर’ समझ नहीं पा रहे हैं कि कुछ तनाव, झगड़ा और मारकाट तो हुई नहीं इसलिये अब कैसे अपने झंडे उठाए और अमन की मोमबत्तियां जला कर रखें।...
image
मुसलमान ही बताएं वे इस देश में कैसे रहेंगे?
बाबरी ढाँचे-राम जन्मभूमि मुकद्दमे के फैसले और कश्मीर में समस्या के समाधान की दिशा में सक्रियता दिखाने की बजाय हिन्दुस्तान में कश्मीर के विलय के सन्दर्भ में अनाप-शनाप बयान जारी करने की ओमर अब्दुल्ला की शेखचिल्ली वृत्ति के चलते एक बार फिर इस देश में पिछले ७ दशकों से जारी हिन्दू-मुस्लिम विभाजन कारी वृत्ति को हवा मिली है. सनद रहे कि इस उपमहाद्वीप को पिछले कई दशकों को धर्म के आधार पर बुरी तरह से विभाजित किया गया है....
image
आडवाणी जी "कलंकयात्रा'' थी आपकी रथयात्रा
लालकृष्ण आडवाणी का यह कहना कि अयोध्या पर हाईकोर्ट के फैसले से उनकी रथ यात्रा सार्थक साबित हुई है, उन हजारों मुसलमानों और हिन्दुओं के जख्मों पर नमक छिड़का है, जो उनकी रथयात्रा के चलते प्रभावित हुए थे। आडवाणी का यह बयान उन मुसलानों को भी आहत करने वाला है, जो यह सोचते हैं कि इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को अंतिम मानकर अब अयोध्या विवाद का पटाक्षेप हो जाना चाहिए। ऐसा चाहने वाले मुसलमानों के दिल में यह बात आ सकती है कि नहीं, सुप्रीम कोर्ट तक लड़ा जाना चाहिए। पता नहीं कैसे आडवाणी अपनी रथयात्रा को सार्थक बता रहे हैं। सच तो यह है कि आडवाणी की वह रथयात्रा इस देश पर एक कलंक और एक तरह से 'खूनी यात्रा' थी।...
image
सेकुलर बिरादरी के सिर पर न्याय का हथौड़ा
अयोध्या में रामजन्मभूमि पर इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के बाद कल तक जो न्यायालय के फैसले को मानने का उपदेश दे रहे थे अब वे ही न्यायपालिका के फैसले पर छिद्रान्वेषण करने निकल पड़े हैं. इस देश का सबसे बड़ा संकट है कि इसके बुद्धिजीवी उसी को ज्यादा कसौटी पर कसते हैं जिसकी सहिष्णुता को लेकर उन्हें पूरा विश्वास होता है. हिन्दू समाज दुनिया का सबसे सहिष्णु समाज है सो जिसे देखो वही उसके खिलाफ इल्जामों की सूची लिए खडा है. क्या किसी अन्य धर्मावलम्बी से उसकी आस्था के किसी प्रतीक चिह्न के मामले में इस तरह सबूत मांगे जा सकते हैं? जिसे देखो वही पूछ ले रहा है कि कैसे यह साबित किया जा सकता है कि राम अयोध्या में ही जन्मे थे और उसी स्थान पर जिस पर बाबरी ढांचा कभी मौजूद होता था?...
image
आपके गाँव में इसे फैसला कहते होंगे
बाबरी मस्जिद की ज़मीन का फैसला आ गया है . इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने अपना आदेश सुना दिया है .फैसले से एक बात साफ़ है कि जिन लोगों ने एक ऐतिहासिक मस्जिद को साज़िश करके ज़मींदोज़ किया था, उनको इनाम दे दिया गया है....
image
एक बार फिर आग लगाने की कोशिश
भाजपा के नेता लालकृष्ण आडवाणी एक बार फिर राम नाम का सहारा लेकर मैदान में उतर गए हैं। यह अच्छा हुआ कि बाबरी मस्जिद विवाद के मालिकाना हक का फैसला कुछ दिन के लिए टल गया है। अब समझ आ गया है कि भाजपा की चुप्पी दरअसल घात लगाने की मुद्रा भर थी। फैसला आते ही उसकी हरकतें नब्बे के दशक जैसी हो जाती और देश को एक बार फिर साम्प्रदायिकता की आग में झोंकने की नाकाम कोशिश की जाती। अब राममंदिर मुद्दे को दोबारा सड़कों पर लाने की बात करके भाजपा न्यायपालिका को ब्लैकमेल करना चाहती है।...
Next
सर्वाधिकार (अ)सुरक्षित

विस्फोट.कॉम में प्रकाशित सामग्री पर हमारी ओर से कोई कापीराइट नहीं है.

Powered by Vivvo CMS v4.1.2