लकवाग्रस्त, लाचार और बेबस झारखण्ड
आप कह सकते हैं कि जनता सब जानती है. झारखण्ड की असलियत के बारे में संताल के इस 65 वर्षीय आदिवासी का बयान तो सुनिए- "झरखण्डवा पर कोनो संकट नही आया है। संकट तो नेताओं के कुरसिया पर आइल है। हम लोगो के पेट में दरिदर नही घुसल है। नेता लोग ही कुर्सी ला छिछियाइल फिर रहल है। हमरी गंजी के छेद मत गिनिए,नेता लोग जाके इ गिने की उनके केतना सिटवा पर सेंध लगने वाला है । अपना घर और स्टेट संभलता नही ,चलें है झारखंड बनाने। सार सब चोरे है।"
यह इस देश की राजनीति ही है कि एक नवजात प्रदेश के तीन करोड़ लागों को लूट कर लकवाग्रस्त कर दिया गया है। जब प्रदेश की जनता को भोजन, काम, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ की दरकार थी, उस समय नेता लोग सामूहिक रूप से लूट को अंजाम देने में लगे थे। मधु कोड़ा एंड कंपनी 4000 करोड़ विदेश में जमा कर आई। कई नेताओं ने करोड़ो की संपति बनाई और जिन जिन नेताओं और दलाल, नौकरशाहों को इस लूट की जानकारी मिली अपना परसेंटेज लिया। लूट की जानकारी जब नक्सली भाई को लगी तो उन्होने अपना तेवर दिखाया और करोड़ो रूपए झटके। कोई ढाई से तीन साल तक यह लूट कांड होता रहा और राज्य की जनता अपनी बेवसी पर आंसू बहाती रही। आलम ये हुआ कि इन 9 सालों में भूख गरीबी और बेकारी से तंग आकर हजारों युवक नक्सली बन गए और यहां की हजारों मां बहने अपनी इज्जत दांव पर लगाकर चाकरी करने घर से बाहर चली गई। बाकी जो लोग यहां रह रहे है वे लकवाग्रस्त हैं, लाचार है और बेबस । और इस पूरे खेल में देश की सभी राजनीतिक पार्टियां शामिल है। आज चुनाव के दौर में बडे बडे वादों को लेकर जो पार्टियां वोट मांग रही है इसके क्या माने है? महंगाई जैसी मामूली समस्या तो खत्म होती नही, चली है सभी पार्टियां राज्य को भूख ,भय और भ्रष्टाचार से निजात दिलाने। नेता लोग आदिवासी समाज को बेवकूफ मानते है।
झारखंड लूट कांड के कथित सरगना, वर्तमान सांसद और पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा को तो आप जान गए है, लेकिन राज्य को कंगाल बनाने वाले जो अन्य नेता हैं, उनकी ज्यादा कहानी शायद आपको मालूम न हो । बंधु तिर्की, हरिनारायण राय, कमलेश सिंह, और एनोस एक्का को भी आप समझे, तो पता चलेगा कि कैसे दन लोगों ने राज्य को लूट कर अपना महल तैयार किया है? एक बानगी तो देखिए। एनोस एक्का राज्य के ग्रामीण विकास मुत्री 2005 में बने थे। 2005 का चुनाव लड़ते समय उनके पास उनकी पत्नी और बच्चों समेंत कुल संपति 18 लाख 58 हजार 827 की थी। एक्का तब कोलेबिरा से चुनाव लड़े थे और जीत कर सरकार में शामिल हुए थे। कोलिबेरा विधान सभा सीट सिमडेगा जिला में है। 18 नवंबर 2009 को एक्का ने फिर दसी सीट से चुनाव लड़ने के लिए नामांकन का पर्चा दाखिल किया है। चुनाव आयोग के सामने उसने अपने आय और संपति का जो ब्योरा दिया है, उसके मुताबिक एकका की संपति 3 करोड़ 22 लाख 43 हजार और 334 रूप्ए हैं।यानी पांच साल में 18 लाख से सवा तीन करोड़ की संपति ।एक्का की यह घोशित आय है जिसपर वे सरकार को आय कर देते होंगे । आपको को बता दे कि कोड़ा आय से अधिक संपति के मामले में इन दिनों जेल में हैं। एक्का सिमडेगा से भी चुनाव लड़ रहे है। पर्चा भरने बाहर आए थे फिर रांची के होटवार सेंट्रल जेल चले गए है। एक बात और बता दे कि एक्का झारखंड पार्टी का भी संचालन करते हैं और जेल में रहते हुए भी एक दर्जन से ज्यादा उम्मीदवार खड़ा कर रखे हैं। जरा इनकी कमाई का ब्यौरा देखा जाए-
मद 2009 2005
खुद के पास नकद-- 150,250 50,000
पत्नी के पास------------55,000 22,000
बेटा बेटी के पास-------- 31,600 शून्य
बैंक जमा खंद का---------12,82,956 827
पत्नी का बैंक जमा--------9,82,151 20,000
इसके अलावे एक्का जी के पास 23,46,938 रूपए का बाहन है और उनकी पत्नी के पास 9,50,470 की दो बेलोरो गाड़ी। 2005 में एक्का जी के पास एक मोटरसाइकिल और एक ट्रैक्टर थे। 2005 में एक्का की पत्नी का कोई वित्तीय इंवेस्टमेंट नहीं था, लेकिन 2009 में उनका इंवेस्ट बढकर 11,80,000 हो गया है। उनकी पत्नी के नाम से 1 करेड़ 20 लाख की जमीन भी है, जबकि 2005 में पत्नी के पास मात्र 60 हजार की जमीन थी । इसके अलावे दोनो मियां बीबी के पास बंदूक और पिस्टल भी है। और न जाने और क्या क्या..
पांच साल में अकूत संपति बनाने वाले हरिनारायण राय इन दिनो आय से अधिक संपति के मामले में जेल में है। और वहीं से दुमका जिला के जरमुडी सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं। 8 दिसंबर को वहां चुनाव होना है। दुमका में जिस दिन परचा भ्रने आए राय तो कह गए कि इस बार वे गृह मंत्री बनेंगे। राय एक्का और कोड़ा की दोस्ती रांची में बेहद चर्चित है। एनडीए द्वारा झारखंड के नेताओं का अपहरण की खबर 4 मार्च 2005 के सभी अखबारों की सुर्खिया बनी थी। सरकार बनाने के लिए भाजपा ने झारखंड के विधायकों को जयपुर की सैर करायी थी, उसमें हरिनारायण राय प्रमुख थे। 13 मार्च 2005 को अर्जुन मुंडा की ताजपोशी हुई और राय मंत्री बने। 4 फरवरी 2005 को राय की संपत्ति थी- नकद 40,000,जेवरात 50,000 कृषि भूमि 5.50 एकड़ और घर खपरैल । पांच साल बाद अब राय की संपति हो गई है- बैंको में जमा 43,8074 रूपए, पत्नी सुशीला देवी के पास 20,05,627 रूपए, पत्नी के नाम पोस्ट आफिस में टर्म डिपोजिट 42,15,200रूपए, पत्नी के पास जेवर 50,000के, 78,500 के फर्नीचर, रांची में पत्नी के नाम 55,42,121 के, राय पर बैंको का कर्ज 14,24,563 के। इसके अलावा उनके पास गाड़ी और बंदूक भी है। इनके पास वास्तविक कितनी संपति होगी आप समझ सकते है। इसी तरह से कमलेश सिंह, भानु प्रताप और बंधु तिर्की ने राज्य को खोखला किया हैं।
आज से कोई 9 साल पहले 15 नवंबर 2000 को बिहार को बांट कर अलग झारखंड राज्य की स्थापना की गई। राज्य में भाजपा की सरकार बनी और बाबूलाल मरांडी बने राज्य के पहले मुख्यमंत्री। राज्य अलग हुआ, सरकार बन गई लेकिन इस सरकार के पास पहले से राज्य के विकास को लेकर न कोई विजन था और न हीं कोई कार्यक्रम। किसी भी पार्टी की सरकार बनती तो शायद तस्वीर कमोबेस यही होता। किसी तरह बाबूलाल मरांडी लगभग दो साल तक सरकार चलाते रहे। राजनीतिक विवशता और और कार्यक्रम के अभाव के बावजूद बाबूलाल को जो भी अच्छा बुरा लगा, किया। इतना तो कहा ही जा सकता है 9 सालों में से मात्र दो साल ही राज्य में जनता को सरकार का आभाष हो सका, वह भी केवल सामान्य ज्ञान के नाम पर। विकास और जनसरोकार के नाम पर नहीं। यह बात इसलिए कही जा सकती है कि बाद के वर्षों में जितनी सरकारे बनीं और जितने मुख्यमंत्री बने, उसके कार्यकाल को याद रखना मुश्किल है।
बाबूलाल मरांडी की सरकार बनने के दो साल बाद जनता दल (यू) नें इस सरकार को गिरा दिया। उर्जा मंत्री लालचंद महतो बिजली विभाग में मनचाहा काम चाहते थे, तो भू राजस्व मंत्री मधु सिंह निबंधन विभाग। इसके लिए उन्होने मरांडी को 50 लाख रूपए हर माह देने की पेशकश की थी। अर्जुन मुंडा मुख्यमंत्री बने। मरांडी के कामों को रोक दिया गया। नई राजधानी का निर्माण और कन्यादान योजना खटाई में चली गई। 2005 के चुनाव के बाद कांग्रेस के समर्थन से शिबू सोरेन सी एम बने। नौवे दिन ही सरकार गिर गई। अर्जुन फिर सी एम बने। मधु कोड़ा, हरिनारायण राय और कमलेश सिंह मंत्री बने। 2006 में इन तीनो के विद्रोह के बाद कांग्रेस, झामुमों और राजद के समर्थन से मधु कोड़ा सीएम बनाए गए। झामुमों ने फिर विद्रोह किया और और 27 अगस्त 2008 को शिबू सोरेन सी एम बने और 8 जनवरी 2008 को उपचुनाव में हार के बाद शिबू को गद्दी छोड़नी पड़ी। 18 जनवरी 2009 से यहां राष्ट्रपति शासन है। इस पूरे खेल में जनता के लिए कुछ नही किया गया। आज वही कांग्रेस, भाजपा, राजद और झामुमों फिर लुभावने वादों के साथ चुनाव में खड़ी है और जनता को लोकप्रिय सरकार देने का वादा कर रही है जो पिछले नौ साल से इसकी दुर्दशा के लिए जिम्मेदार हैं.
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Digg
अक बात और इस देश की जनता भी चुटिया है'...जो इनको जीता देती है
एक शरुआत करनी होगी.हिसाब मांगो अपनी प्रतिनिधि से.राजनिति को धंधा बनने से रोको.
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