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संघर्ष की अनिवार्यता

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जब तक कोई देश या वहां के लोग जीवित रहने के लिए, विकास के लिए संघर्ष करते रहते हैं तब तक वे शारिरीक, मानसिक और भावनात्मक रूप से स्वस्थ रहते हैं.

किन्तु ज्यों ही संघर्ष समाप्त होता है उनको अपनी आवश्यकता की सारी वस्तुएं प्राप्त हो जाती हैं त्यों हीं आत्महत्या की संख्या में वृद्धि होने लगती है. आत्महत्या मानसिक अवसाद का परिणाम है. जब अवसाद होता है तब संघर्ष के अभाव में मस्तिष्क में विद्युत चुंबकीय उर्जा न्यून हो जाती है. दैनिक संघर्ष, उतार-चढ़ाव, लड़ाई-झगड़े आपको स्वस्थ्य बनाये रखते हैं. आपको जिस चीज की आवश्यकता हो या आप जो कुछ चाहते हों वह सहजता से उपलब्ध हो जाए तो इतना पक्का जान लो कि आपराधिक घटनाओं में वृद्धि होगी और आत्महत्या भी बढ़ेगी.

स्वीडन एक आदर्श कल्याणकारी देश है. आपको वहां आसानी से काम मिल जाएगा. जो भी चाहो आसानी से मिल जाएगा. फिर भी स्वीडन में आत्महत्याओं की संख्या सर्वाधिक है. आपको संघर्ष की अनिवार्यता को समझना होगा. यह जीवन योजना का हिस्सा है. भारत जैसे देशों में गरीबी है, लोगों को खाने की समस्या है फिर भी यहां जीवन चल रहा है. यहां लोग आत्महत्या नहीं करेंगे. क्योंकि यहां जीवन में संघर्ष है. 

खाने  को नहीं है. उनके बच्चे भूख से बिलबिला रहे होंगे. पत्नी बीमार होगी, बच्चे रोगग्रस्त हो सकते हैं, बेरोजगारी से त्रस्त होंगे फिर भी वे आत्महत्या की बात नहीं सोचेंगे. कारण स्पष्ट है. जब तक जीने की, संघर्ष करने की इच्छा शेष है, तुम आत्महत्या नहीं करोगे. जब तुम्हारा मस्तिष्क आलसी और निष्क्रिय हो जाता है तभी तुम आत्महत्या के लिए उतारू होते हो. आलसी मस्तिष्क ही आत्महत्या करता है. कब तुम्हारा मस्तिष्क आलसी हो जाता है? जब हर चीज सहज ही उपलब्ध हो जाती है.     

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