मायावती की नयी योजनाः स्टैचू टूरिज्म
लखनऊ के विभिन्न चौराहों और पार्कों में लगनेवाली दलित नेताओं की मूर्तियों पर उठे विवाद पर अब मायावती की सफाई है कि इन मूर्तियों पर फीस लगाकर वे राजस्व की कमाई करेंगी. इस लिहाज से मायावती की मूर्तियां स्टैचू टूरिज्म को बढ़ावा देंगी.
हालांकि अभी भी यह पक्का पता नहीं है कि मायावती की इस मूर्ति परियोजना पर कितना खर्च हो रहा है लेकिन अभी तक जो खबरें आ रही हैं उससे लगता है कि इस पूरी योजना पर कोई 2000 करोड़ से 5000 करोड़ रूपये खर्च होने का अनुमान है. लखनऊ शहर के ही विभिन्न हिस्सों में तीन दर्जन से अधिक मूर्तियों को स्थापित होना है जिसमें बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर, बसपा के संस्थापक कांशीराम और खुद मायावती की मूर्तियां शामिल हैं.
सुप्रीम कोर्ट में दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी करते हुए मायावती सरकार से पूछा था कि जनता के पैसे को वे इस तरह से क्यों बर्बाद कर रही हैं. सुप्रीम कोर्ट ने उनसे चार हफ्ते के अंदर जवाब मांगा था. सुप्रीम कोर्ट में अभी मायावती को जवाब दाखिल करना है लेकिन बुधवार को उन्होंने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि उन्होंने तय किया है कि इन पार्कों और मूर्तियों पर वे फीस लगाएंगी और इससे जो कमाई होगी उसे अंबेडकर गांवों के विकास पर खर्च करेंगी. उनका मानना है कि पर्यटकों के लिए टिकट लगाकर इससे अच्छी कमाई की जा सकती है.लेकिन साथ ही मायावती ने यह भी कहा कि यह फीस वसूली छह महीने के बाद शुरू की जाएगी.छह महीने तक पर्यटकों के लिए ये पार्क और स्मारक मुफ्त में देखने के लिए उपलब्ध होंगे.
जो भी हो तमाम आलोचनाओं के बीच मायावती ने अपने बचाव का रास्ता खोज लिया है. मायावती की मूर्तियों पर जो बी विवाद हो लेकिन इतना जरूर है कि मायावती की इस महत्वाकांक्षा की वजह से फिलहाल कुछ कारीगरों और मजदूरों को रोजगार जरूर मिल गया है.



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