दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले का देशभर में विरोध
समलैंगिक संबंधों पर दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले का देशभर में विरोध हो रहा है. सभी प्रमुख राजनीतिक दलों के नेताओं सहित धार्मिक संगठनों के लोग भी दिल्ली हाईकोर्ट के इस फैसले को दुर्भाग्यपूर्ण बता रहे हैं.
दिल्ली हाईकोर्ट के इस फैसले को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए समाजवादी पार्टी, राष्ट्रवादी जनता पार्टी और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी सबने विरोध किया है. समाजवादी पार्टी के महासचिव राम गोपाल यादव ने उच्च न्यायालय के निर्णय पर हैरानी जाहिर करते हुए यहां कहा कि यह तमाम शालीनता, मर्यादा और भारतीय परम्पराओं के विरुद्ध है। सरकार को उच्चतम न्यायालय में इस फैसले को चुनौती देनी चाहिए। यह पूछने पर कि क्या उनकी पार्टी इस मुद्दे को संसद में भी उठाएगी यादव ने कहा कि अभी तो निर्णय आया ही है, इसका अध्ययन किया जाएगा और पार्टी अपना रुख तय करेगी। सीपीएम के महासचिव प्रकाश कारत ने भी बयान दिया कि समलैंगिकता के अपराधीकरण हैं.
सभी धार्मिक संगठन भी समलैंगिकता पर दिल्ली हाईकोर्ट के इस फैसले के खिलाफ खुलकर बोल रहे हैं. सुन्नी धर्म के वरिष्ठ धार्मिक नेता खालिद राशिद फिरंगीमहली ने एक निजी टीवी चैनल से बात करते हुए कहा कि समलैंगिकता एक अप्राकृतिक व्यवहार है और इसे कतई कानूनी मान्यता नहीं दी जानी चाहिए.
देश के प्रमुख इस्लामिक शिक्षण संस्थान दारुल उलूम देवबंद ने भी समलैंगिकता को अपराध ठहराने वाले भारतीय दंड संहिता के प्रावधान को खत्म करने के किसी भी संभावित कदम का विरोध किया है। संस्थान ने इसे इस्लाम के सिद्धांतों के खिलाफ बताया है।
दारुल उलूम देवबंद के डिप्टी वाइस चांसलर मौलाना अब्दुल खलीक मद्रासी ने सोमवार को कहा, ‘शरीयत के तहत समलैंगिकता एक अपराध है और इस्लाम में यह हराम (निषेध) है।’ उन्होंने कहा कि समलैंगिकता को अपराध ठहराने वाली आईपीसी की धारा 377 को खत्म नहीं किया जाना चाहिए।
ऑल इंडिया पर्सनल लॉ बोर्ड के उपाध्यक्ष मौलाना सलीम कासमी ने भी समलैंगिक गतिविधियों को अपराध बताते हुए कहा कि यह इस्लामिक कानून व आईपीसी के तहत दंडनीय है। इसके साथ छेड़छाड़ नहीं की जानी चाहिए।
इसी तरह विश्व हिन्दू परिषद के उपाध्यक्ष गिरिराज किशोर ने भी बयान दिया है कि समलैंगिकता को वैधानिक मान्यता की सिफारिश देकर दिल्ली हाईकोर्ट ने जनभावना के खिलाफ फैसला दिया है और इसको किसी भी सूरत में कानून बनने से रोकने की कोशिश करनी चाहिए. भाजपा सांसद योगी आदित्यनाथ ने भी कहा है कि समलैंगिकता एक मनोविकार है जिसको कानूनी मान्यता देने की बजाय इलाज किये जाने की जरूररत है.



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