नहरों की खुदाई पर हाईकोर्ट की रोक
जबलपुर उच्च न्यायालय ने इंदिरा सागर और ओंकारेश्वर बाँध की नहरों की खुदाई पर रोक लगा दी है। इससे पहले चीफ जस्टिस ए के पटनायक और जस्टिस अजीत सिंह की युगलपीठ ने सभी पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद मामले पर अपना फैसला सुरक्षित रखा था । खंडपीठ ने आज ११ नवम्बर को अपने फैसले में कहा कि लाभ क्षेत्र विकास (कमांड एरिया डेवलपमेंट) योजना से सामाजिक क्षति की पूर्ति और मुआवज़ा तय होने तक दोनों बाँधों के नहर संबंधी भू अर्जन तथा खुदाई कार्य पर रोक जारी रखी जाए।
नर्मदा बचाओ आंदोलन की ओर से दायर याचिका पर न्यायालय ने मध्य प्रदेश सरकार, नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण और नर्मदा नियंत्रण प्राधिकरण को आदेश दिया है कि लाभ क्षेत्र विकास योजना, केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय को प्रस्तुत की जाए और विशेषज्ञ समिति से मूल्यांकन कराने के बाद ही कार्य किया जाए।
नर्मदा बचाओ आंदोलन की नेता मेधा पाटकर के मुताबिक न्यायालय के आदेश में कहा गया है कि इंदिरा सागर और ओंकारेश्वर बाँध के लिए प्रस्तुत पुनर्वास नीति पर अमल किया जाए। साथ ही जीने का अधिकार पाने के लिए वैकल्पिक जमीन और वयस्क पुत्र को जमीन, भूमिहीनों को वैकल्पिक व्यवसाय के लिए अनुदान आदि देने की बात भी कही गई है। इतना ही नहीं हाईकोर्ट ने नहर प्रभावितों के साथ भी डूब क्षेत्र के विस्थापितों और प्रभावितों के समान व्यवहार करने के निर्देश दिये हैं । न्यायालय ने कहा है कि इसमें भेद किया जाना संविधान की धारा 14 का उल्लंघन माना जाएगा। साथ ही नर्मदा नियंत्रण प्राधिकरण से तीन माह में पुनर्वास नीति ,पर्यावरणीय शर्तों की पूर्ति सहित अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों की जानकारी प्रस्तुत करने को कहा है।
एनबीए की ओर से दायर इस याचिका में इंदिरा सागर और ओंकारेश्वर बाँध के दायरे में आने वाले क्षेत्रों में नहरों का निर्माण कार्य जारी होने को चुनौती दी गई थी । याचिका के अनुसार निर्माण के लिये संबंधित आदिवासी क्षेत्रों की ग्राम सभा की अनुमति नहीं लेने के कारण यह निर्माण कार्य नहीं किया जा सकता । कमाण्ड क्षेत्र विकास की योजना और केन्द्र सरकार की आवश्यक मंजूरी के अभाव में किये जा रहे निर्माण कार्य के पहले पुनर्वास के भी पर्याप्त इंतजाम न किये जाने के आरोप भी इस याचिका में लगाए गए हैं।



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