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बियाबान में शोर

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मैडल वापसी काफी नहीं, 'राठौरों' से मुक्ति कब?

सोचो, मीडिया आवाज न उठाता। रुचिका केस में अदालती फैसले को दिन का घटनाक्रम मान आगे बढ़ जाता। तो क्या बात इतनी दूर तलक जाती? क्या 19 साल से कुंभकर्णी नींद सोई सरकार जागती? अब रुचिका के गुनहगार एसपीएस राठौर पर मुकदमों का बोझ। होम मिनिस्ट्री भी मैडल छीनने का फैसला कर चुकी तो यह अपनी मीडिया की वाहवाही नहीं।
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विधु विनोद चोपड़ा का 'चिरकुटपना'

यह सिर्फ चिकोटीभर काटने का मामला नहीं है, विधु विनोद चोपड़ा पर दूसरा ऐसा मौका है जब धोखाधड़ी का आरोप लगा है। ‘3 इडियट्स’ चेतन भगत; तो ‘लगे रहो मुन्नाभाई’ आफाक अलमास हुसैन के लिए ‘छलिया’ साबित हुई है। हालांकि दोनों ही लेखकों ने ‘फिल्म लेखक संघ’ में अपनी शिकायत न ले जाकर सीधे मीडिया के सामने भड़ास निकाली है, इसलिए ‘संघ’ चुप्पी साधे हुए है।
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प्यार और कौमार्य पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला

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दुष्कर्म के एक मामले में उच्चतम न्यायलय का एक महत्पूर्ण निर्णय आया है। दुष्कर्म के आरोप में एक दोषी को यह कह कर निर्दोष करार दे दिया कि पीड़िता ने खुद कौमार्य खोया। खबर प्रकाशित हुई। नये साल के पहले दिन। अंदर के पेज में। छोटे से कॉलम में। नये साल के जश्न में डूब कुछ ही पाठकों का ध्यान इस खबर की ओर गई होगी।...
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सफदर की सोच से 'सहमत' होने का वक्त

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21 साल बीत गये. जब मेरे दोस्त सफदर को दिल्ली के पास औद्योगिक इलाके में सदा सदा के लिए हमसे छीन लिया गया था. सफदर के बारे में लिखने के लिए कलम उठाने में मुझे 21 साल लग गये. 21 साल बाद वर्तमान में जब अतीत की घटनाओं को देखते हैं तो पूरी शिद्दत से महसूस होता है कि सफदर की सोच से सहमत होने के अलावा दूसरा कोई रास्ता नहीं है. ...
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एक सभ्य सनातन देश में वासना का भोग

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पुरुष प्रधान भारतीय संस्कृति में नारियों के लिए आदर सम्मान सहज है. इसके लिए कोई आडंबर नहीं होता. भारतीय समाज की शिक्षा दीक्षा में नारी के प्रति सम्मान का पाठ पग पग पर है. लेकिन जरा आधुनिक होते भारत को देखिए. जैसे जैसे यह देश आधुनिक से उत्तर आधुनिक होता जा रहा है, निरा वासना भोगी होता जा रहा है. राठौर से लेकर एनडी तिवारी तक इस भोगकाण्ड में हर खासो आम शामिल दिखाई देता है....
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पाखंडी, व्यभिचारी, दुराचारी तथा दुष्टप्रवृत्ति वाला एक डीजीपी

चंडीगढ़ स्थित हरियाणा की सीबीआई अदालत ने रुचिका गहरोत्रा आत्महत्या मामले में जो फैसला सुनाया है उसने एक बार फिर न्याय को लेकर देशभर में राष्ट्रव्यापी बहस छेड़ दी है. एक बार फिर यह सवाल उठ खड़ा हुआ है कि देश का न्याय क्या ऊंचे रुसूख रखने वाले लोगों के लिए कुछ और है तथा देश के अन्य आम लोगों के लिए कुछ और?
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एक देश, दोहरी व्यवस्था

भारत में गरीब होने का अर्थ जैसा है, वैसा शायद दुनिया में कहीं नही है| भारत में जिसकी आय 20 रू. से कम है, सिर्फ वही गरीब है। बाकी सब ? यदि सरकार और हमारे अर्थशास्त्रियों की मानें तो बाकी सब अमीर हैं| 25 रू. रोज़ से 25 लाख रू. रोज तक कमानेवाले सभी एक श्रेणी में हैं। इससे बड़ा मज़ाक क्या हो सकता है?
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एक भारतीय की क्या कीमत?....40 सेंट!

दिल्ली में यमुना के किनारे एक कोयला से चलनेवाला बिजलीघर है. दिल्ली सरकार ने 160 मेगावाट के राजघाट थर्मल पावर स्टेशन नामक इस बिजलीघर को बंद करने का निर्णय लिया है. दिल्ली सरकार का तर्क है कि कोयले से प्रदूषण फैलता है इसलिए उसने यह निर्णय लिया है. बड़े बिजलीघर वह भी कोयले से चलनेवाले मुसीबत तो हैं ही इसलिए भारत सरकार परमाणु आधारित बिजली पैदा करने की दिशा में जी जान लगा दिया है. मनमोहन सिंह सरकार की यह एकमात्र उपलब्धि कही जाएगी कि उन्होंने परमाणु बिजलीघरों को मान्य करवाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी. लेकिन क्या यह सचमुच उपलब्धि होगी?
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सत्यानंद !.......कौन सत्यानंद?

हमारी कारपोरेट मीडिया के लिए यह कोई खबर हो भी नहीं सकती थी. हुई भी नहीं. झारखण्ड के किसी दूरस्थ स्थान रिखिया में एक कोई सत्यानंद सरस्वती नाम के संन्यासी ने देह त्याग कर दिया. तो? इसमें खबर क्या है? रोज न जाने कितने सन्यासी मरते मराते रहते हैं अब क्या अखबार सबकी खबर छापेंगे? शायद यही तर्क सबसे ज्यादा प्रभावी रहा होगा इसीलिए हमारे अखबारों, टीवी चैनलों ने इस बारे में एक लाइन की खबर बनाना भी मुनासिब नहीं समझा. इसमें किसी को कोई आपत्ति भी नहीं हो सकती क्योंकि यह तो मीडिया का अपना विवेक होता है.
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सत्रह साल बाद भी सवाल जस का तस

6 दिसंबर 1992। एक बार फिर वह दिन आया है जिस दिन देश में भारत मां की दो आंखों के बीच कुछ कांटे चुभोने वाले लोगों ने नफरत का जहर भर दिया। यह दिन बहुत ही दुखद था। भावनाओं का ज्वार था और कथित कट्टरपंथियों के उत्तेजक भाषणों से उग्र होकर कारसेवकों ने बाबरी मस्जिद या विवादित ढांचे को ध्वस्त कर दिया। यह एक ऐसा दिन है जिसे आने वाले कई सालों तक भी भुला पाना संभव नहीं होगा। हिंदू और मुसलमान भारत मां की दो आंखों के समान हैं इसमें कोई दो राय नहीं हैं।
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सुदर्शन का (कु) दर्शन
जबसे आरएसएस के लोगों की आतंकवादी घटनाओं में संलिप्तता सामने आयी है, तब से आरएसएस के नेता बौखला गए हैं। इस बौखलाहट में ही शायद संघ के इतिहास में पहली बार हुआ है कि इसके स्वयंसेवक विरोध प्रदर्शन करने के लिए सड़कों पर उतरे। इसी बौखलाहट में आरएसएस के एक्स चीफ केएस सुदर्शन का मानसिक संतुलन बिगड़ गया और सोनिया गांधी के बारे में ऐसे शब्द बोल दिए, जिन्हें एक विकृत मानसिकता का आदमी ही बोल सकता है।...
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सीआईए नहीं केजीबी एजंट कहिए जनाब
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व सरसंघचालक ने 10 नवंबर को सोनिया गांधी पर सीआईए एजंट होने का आरोप लगाकर सनसनी पैदा कर दिया है. पूरी की पूरी कांग्रेस उत्तेजित है और संघ भी बैकफुट पर चला गया है. सुदर्शन के आस पास के लोगों का कहना है कि सुदर्शन जी भुलक्कड़ हो गये हैं और उन्हें कुछ ठीक से याद नहीं रहता. शायद इसीलिए उन्होंने इतनी बड़ी चूक कर दी. ...
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सोनिया का सच जान बेकाबू क्यों होते हो?
एक बार फिर लोकतंत्र पर आपातकाल मंडरा पड़ा है. राजमाता सोनिया गांधी के सिपहसालारों ने कांग्रेसी गुण्डों, माफियाओं और लोकतंत्र के हत्यारों का आह्वान किया है कि वह देशभर में संघ कार्यालयों पर धावा बोल दे. इसका तत्काल प्रभाव हुआ और कांग्रेसी गुण्डों ने संघ के दिल्ली मुख्यालय पर धावा भी बोल दिया. ठीक वैसे ही जैसे इंदिरा गांधी की मौत के बाद सिखों को निशाना बनाया गया था. हिंसक और अलोकतातंत्रिक मानसिकता से ग्रस्त कांग्रेसी सोनिया का सच जानकर आखिर इस तरह बेकाबू क्यों हो रहे हैं?...
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नये निजाम के दामन पर है ज्यादा बड़ा दाग
मुंबई। महाराष्ट्र के नए निजाम भी कोई दूध के धुले नहीं हैं। कांग्रेस आलाकमान ने अशोक चव्हाण को फर्जीवाड़े से फ्लैट पाने के आरोप में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री की गद्दी से हटा दिया। लेकिन नए मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण भी उसी तरह के फर्जीवाड़े में गले तक डूबे हुए हैं। उन्होंने जितने बड़े बड़े झूठ बोलकर सरकार से फ्लैट हथियाए हैं वे कांग्रेस के लिए ज्यादा दागदार हैं।...
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अजमेर चार्जशीट और संघी उछल-कूद
बढ़ते पैमाने पर इसके साक्ष्य सामने आ रहे हैं कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आर एस एस) से जुड़े लोगों का आतंकवादी हमलों में हाथ रहा है। इन हालात में आर एस एस इस पुराने सूत्र पर चल रहा लगता है कि हमला ही सबसे अच्छा बचाव है। उसने 10 नवंबर को देशव्यापी विरोध कार्रवाइयों का आह्वान किया है। इन कार्रवाइयों में संघ के शीर्ष नेताओं के शामिल होने की बात कही जा रही है। बहरहाल, इसकी चर्चा हम जरा बाद में करेंगे।...
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अपने होने पर ही हैरान
‘चुप्पी-चुप्पी नहीं नहीं, बोलेंगे अब सभी-सभी’ इन्हीं नारों से दाहोद (गुजरात) का सीनियर रेलवे संस्थान परिसर 31 अक्टूबर को पूरे दिन गूंजता रहा। यहां गुजरात के बड़ोदरा, पंचमहल, सुरत, भड़ूच, डांग, बालसाड और साबरकांठा जिले से लगभग तीन हजार के आस पास विमुक्त एवं घुमंतू समाज से ताल्लुक रखने वाले लोग इकट्ठे हुए थे। मौका था, अधिकार अभियान की घोषणा का। उस समाज के लिए जो इस लोकतांत्रिक देश में अधिकार का अर्थ अभी तक समझ नहीं पाएं हैं। ...
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गोली लगने के बाद क्या गांधी ने कहा था- हे राम ?
यह एक ऐसा सवाल है जिस पर अब विवाद होने लगा है. 30 जनवरी 1948 को क्या जब महात्मा गांधी को नाथूराम गोडसे ने गोली मारी तो महात्मा गांधी ने अपने मुंह से हे! राम का संबोधन किया था? उस वक्त घटनास्थल पर मौजूद रहे एक प्रत्यक्षदर्शी के डी मदान का कहना है कि "मैंने नहीं सुना था कि उन्होंने हे राम कहा था या नहीं."...
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भद्दा और बेदम रहा संघ का विरोध प्रदर्शन
स्कूल जाते बच्चों के भी हाथ में भगवा थमाकर भले ही संघ ने शक्ति प्रदर्शन की भरपूर कोशिश की हो लेकिन 10 नवम्बर का दिन उसके इतिहास में कोई बडी घटना के रूप में याद नहीं किया जायेगा। हॉ हम बात कर रहे है राजस्थान के भरतपुर जिला मुख्यालय की जहॉ देश भर की ही तरह हिन्दुवादी संघटनों ने अपने उपर लग रहे ‘भगवा आतंकवाद’ के आरोपों के विरोध में शक्ति प्रदर्शन किया था। भरतपुर जहॉ संघ प्रचारक क रूप में भाजपा के पीएमइन वेंटिग लालकृष्ण आडवानी ने अपनी सेवाऐं दी है संघ का ये विरोध प्रदर्शन एक दम भददा और हल्का रहा।...
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एनसीपी के 'दादा' का दांव
महाराष्ट्र में कांग्रेस में परिवर्तन हुआ तो राष्ट्रवादी कांग्रेस ने भी अपने पत्ते खोल दिये. राज्य में लंबे समय से राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के भीतर चल रही सत्ता के दावेदारी पर एनसीपी ने आखिरकार प्रदेश की प्रशासनिक कमान अपनी ओर से शरद पवार के भतीजे अजीत पवार को सौंप दी है. अब गुरुवार को शाम साढ़े चार बजे पृथ्वीराज चव्हाण के साथ अजीत "दादा" पवार उपमुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे....
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पीएमओ वाले पृथ्वीराज
महाराष्ट्र के नये मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण यूपीए सरकार पार्ट वन और पार्ट टू में बतौर पीएमओ मिनिस्टर जाने जाते हैं. प्रधानमंत्री कार्यालय में रहते हुए भी उन्होंने कभी ताकतवर होने का दंभ नहीं पाला और चुपचाप काम करते रहे. बिट्स पिलानी से बीई और बर्कले विश्वविद्यालय से एमएस की डिग्री हासिल करनेवाले पृथ्वीराज की राजनीतिक कमेस्ट्री ने उनके सार्वजनिक जीवन में पहली बार इतना गाढ़ा रंग उड़ेला है....
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सुलग रहा है मेरठ 'हिन्दुस्तान'
एक ओर हिन्दुस्तान अखबार अपनी अलग कंपनी बनाकर अखबार को चमकाने और अखबार का विस्तार करने में लगा है वहीं दूसरी ओर हिन्दुस्तान के विभिन्न संस्करणों में हालात ठीक नहीं है. हिन्दुस्तान के मेरठ संस्करण में इन दिनों इस्तीफे दिये जा रहे हैं लेकिन प्रचारित किया जा रहा है कि जो आफिस नहीं आ रहे हैं वे छुट्टी पर चले गये हैं....
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आलोक तोमर के बगल में बसे किशोर मालवीय
सीएनईबी में पहले से एक सलाहकार संपादक थे- आलोक तोमर. अब दूसरे सलाहकार संपादक भी वहां नियुक्त हो गये हैं किशोर मालवीय. उन्होंने सीएनईबी चैनल के साथ बतौर कंसल्टिंग एडिटर अपनी नई पारी की शुरुआत की है। सीएनईबी से पहले वे ‘वायस ऑफ इंडिया’ न्यूज चैनल के साथ जुड़े हुए थे। उन्होंने करीब दो दशक के कॅरियर में देश के नामी-गिरामी मीडिया संस्थानों में कई जिम्मेदारियां निभाईं हैं।...
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सुरक्षा परिषद की छांव में खेती पर दांव
अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने संसद में दिये गये अपने भाषण में भारत से मिले प्यार की भूरि भूरि प्रशंसा जरूर की लेकिन अपनी व्यावसायिक मजबूरियों को छिपा नहीं सके. बराक ओबामा ने संसद के संयुक्त अधिवेशन को संबोधित करते हुए जहां एक ओर भारत को महाशक्ति करार देकर उसके लिए संयुक्त राष्ट्र में स्थायी सदस्यता को अपना समर्थन दिया वहीं भारत और अमेरिका द्वारा मिलकर खेती के क्षेत्र में एक और हरित क्रांति के आगाज की घोषणा की....
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आतंक नहीं कश्मीर केन्द्रित हुई ओबामा यात्रा
रविवार की देर शाम भारतीय प्रधानमंत्री द्वारा आयोजित भोज में ओमर अब्दुल्ला के शामिल होने से जो आशंका पैदा हुई थी वह सोमवार को हैदराबाद हाउस में और प्रबल रूप में सामने आ गयी जब प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अमेरिकी राष्ट्रपति की उपस्थिति में स्वीकार किया कि वे पाकिस्तान से बात करते वक्त "के" शब्द पर बात करने से नहीं कतराते हैं....
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भारत से धंधा, पाक को चंदा
अमेरिका के राष्ट्रपति बराक हुसैन ओबामा ने अपना तीन दिवसीय दौरा पूरा कर लिया. मुंबई उतरकर दिल्ली दरबार तक उनकी दस्तक भारत पर अमेरिका के मजबूत पकड़ की मिसाल बन गया. निश्चित रूप से उनका दौरा भारत के लिए उतना महत्वपूर्ण नहीं जितना खुद अमेरिका के लिए है. मंदी के दौर से जूझ रहे अमेरिका को "कारपोरेट" जगत का धंधा दिलाने के लिए उन्होंने न केवल भारत को महाशक्ति करार दे दिया बल्कि सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता का समर्थन भी कर दिया....
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