राजनीति
लीक हो गयी एक गैरजरूरी रिपोर्ट
लिब्राहन आयोग की रिपोर्ट लीक हो गयी. भारतीय पत्रकारिता में मानक स्थापित करनेवाले एक अखबार और एक टीवी चैनल ने बड़े गर्व के साथ यह काम किया. अखबार तो रिपोर्ट लिखकर फारिग हो गया लेकिन टीवी चैनल दिन रात लगा हुआ है कि साहब मेरे पास 900 पेज की पूरी रिपोर्ट है जिसमें लिखा है कि आप बाबरी मस्जिद गिराने के दोषी हैं. एक एक करके फोन लाइन पर नेता आ रहे हैं और संसद, न्यायालय की बजाय एनडीटीवी पर अपना ट्रायल दे रहे हैं. सुबह जो सनसनी पैदा हुई थी रिपोर्ट के लीक होने से शाम होते होते भाजपा कांग्रेस सब एक ही बात पर आ गये रिपोर्ट में जो लिखा है उससे पहले यह जानना जरूरी है कि रिपोर्ट लीक कैसे हुई?
सपा के ताबूत में आखिरी कील
पता नहीं हमारे सियासतदांओं को क्या हो गया है। इन्हें देखकर तो गिरगिट भी सोचता होगा कि ये तो मुझसे भी जल्दी और ज्यादा रंग बदलते हैं। फिरोजाबाद सीट हारते ही मुलायम सिंह ने अपने सखा कल्याण सिंह को दूध में से मक्खी की तरह निकाल कर फैंक दिया। भाजपा और आरएसएस को पानी पी-पी कर कोसने वाले कल्याण सिंह को भी फौरन ही हिन्दुत्व और राममंदिर की याद आ गई। लेकिन आप एक महत्वपूर्ण तथ्य मत भूलिए कि संयोग से भाजपा और सपा दोनों ही राममंदिर आंदोलन की देन हैं।
कौन है सच्चा कौन है झूठा
कहावत है कि क्रिया की प्रतिक्रिया जरूर होती है कुछ ऐसा ही हुआ है.सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव की तल्ख बयानगी से आहत कल्याण सिंह ने अब मुलायम सिंह यादव को आड़े हाथो ले लिया है. अगर कल्याण सिंह की बात को सही माने तो यह कहने मे कोई गुरेज नहीं की मुलायम सिंह यादव उप चुनाव की हार के बाद मानसिक रूप से विक्षिप्त हो गये है. मुलायम के बारे यह हम नहीं कह रहे है बल्कि मुलायम के पुराने दोस्त कल्याण सिंह की जुबानी है,जिसे कल्याण ने पेश किया है मुलायम के जबाब स्वरूप.कल्याण के जबाब के बाद जहां समाजवादी पार्टी में हडकंप मच गया है वहीं राजनैतिक हलको में भी सनसनी फैली हुई....मुलायम को मार गये कल्याण
जो काम भारतीय जनता पार्टी में रहते हुए कल्याण सिंह नहीं कर सके वह सपा के करीब आकर कर दिया. उत्तर प्रदेश के हाल के उपचुनाव में पार्टी को मिली करारी शिकस्त के बाद पूर्व भाजपा नेता कल्याण सिंह से मोहभंग हो जाने का संकेत देते हुए सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव ने आज यहां कहा कि कल्याण सिंह न तो कभी सपा मे शामिल किये गये थे और न ही कभी शामिल किये जायेगे. यादव ने आज इटावा में एक सवाल के जवाब में कहा कि मैं यह बात पहले भी कह चुका हूं और पुन: दोहराना चाहता हूं कि कल्याण सिंह न तो कभी सपा में थे और न भविष्य में उन्हें कभी भी सपा में शामिल किया जायेगा. उन्होंने कहा कि यह बात तो कल्याण सिंह ने भी कही है कि वे किसी पार्टी के सदस्य नहीं हैं....अब क्या करेंगे मियां मुलायम?
मुलायम सिंह यादव के पैरों तले की जमीन खिसक चुकी है। तीस साल से भी ज्यादा वक्त तक उत्तर प्रदेश की राजनीति का केंद्र रहे मुलायम अब हाशिए पर जाते दिख रहे हैं.फिरोजाबाद लोकसभा सीट के लिए हुए उपचुनाव में बहू डिंपल यादव की करारी हार इस बात का प्रमाण है कि जिस तरह की राजनीति मुलायम अब तक करते आए हैं, उसका अंत नजदीक है....सपा में व्यापक फेरबदल का फैसला, अमर सिंह को ठिकाने लगाने की तैयारी
उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की शर्मनाक हार ने शीर्ष स्तर के नेताओं को झकझोर कर रख दिया है। घाव इसलिये भी गहरे हैं कि स्वयं सपा प्रमुख की पुत्रवधू व उत्तर प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश सिंह यादव की बीबी डिंपल यादव की उपचुनाव में करारी हार हुई। पार्टी में हारने के बाद सैफई में `मंथन´ चल रहा है कि इतनी बड़ी हार क्यों और कैसे हुई? कुछ कार्यकर्ताओं ने दबे मन से नेताजी तक जो कड़वाहट पहुंचायी उससे संकेत मिलते हैं कि सपा में भी शीघ्र बड़े स्तर पर व्यापक फेरबदल होने के साथ-साथ कुछ को किनारे भी किया जा सकता है.
छोटा चुनाव बड़ा फैसला
कुछ राज्यों में हुए उप-चुनावों ने भारतीय लोकतंत्र के परिपक्व होते रूप को और मजबूती दी है. इन चुनावों के नतीजों ने यह साफ़ कर दिया है कि जनता के विश्वास पर किसी का एकाधिकार नहीं हो सकता और अब वोटों की ज़मींदारी प्रथा ख़त्म हो रही है. पश्चिम बंगाल से जो नतीजे आये हैं उनसे साफ़ है कि अगर जनता को भरोसेमंद विकल्प मिले तो वह वोट देने में उसका सही इस्तेमाल करने में संकोच नहीं करेगी. इन नतीजों के संकेत बहुत ही साफ़ हैं कि जनता ने राज्य सरकार और लेफ्ट फ्रंट को समझा दिया है कि अगर ठीक से काम नहीं करोगे तो बाहर का रास्ता दिखा दिया जाएगा.
कलह के बीच किंगमेकर बने निशंक
उत्तराखंड में भारतीय जनता पार्टी के भीतर इन दिनों जो कुछ भी चल रहा है उससे पार्टी का बंटाधार होता साफ दिख रहा है। गुटों में बंटी बीजेपी के लिए अब पार्टी संगठन के नियम कानूनों की भी कोई अहमियत नहीं रह गई है। पार्टी में वही हो रहा है जिसके पीछे किसी भी बड़े नेता का कोई निहितार्थ हो। पार्टी संगठन में तमाम पदों को लेकर जिस तरह का घमासान मचा है उससे पार्टी संगठन की गरिमा भी तार-तार होती दिख रही है। ताजा प्रकरण भाजपा के नए प्रदेश अध्यक्ष बिशन चुफाल की ताजपोशी के बाद का है।
आखिरकार बन गयी सरकार
पंद्रह दिन की सौदेबाजी के बाद अंततः महाराष्ट्र में अशोक चह्वाण की सरकार ने शपथ ग्रहण कर लिया. पूरे एक पखवाड़े की उठापटक से कांग्रेस को क्या हासिल हुआ? लगभग सारे महत्वपूर्ण विभाग राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी वाले झटक ले गये. राजनीतिक विश्लेषक इसे राकांपा अध्यक्ष शरद पवार का चातुर्य बता रहे हैं. क्या सचमुच कांग्रेस का हाईकमान शरद पवार के सामने झुका है? क्या प्रफुल्ल पटेल सौदेबाजी में अहमद पटेल पर भारी पड़ गये हैं? क्या यह सच है कि महाराष्ट्र को लेकर कांग्रेस का आलाकमान चिंतित था?
हारते हारते हलाकान
हरियाणा, महाराष्ट्र और अरुणाचल प्रदेश में भाजपा की करारी पराजय के बाद जब नई दिल्ली के अशोक रोड स्थित पार्टी मुख्यालय में संसदीय बोर्ड की बैठक में हार की समीक्षा चल रही थी, तब मुख्यालय के बाहर पार्टी कार्यकर्ताओं का एक समूह भी भाजपा के भविष्य की समीक्षा में जुटा था. भाजपा कार्यकर्ताओं के “पार्टी के भविष्य” पर शुरू हुई आपसी बातचीत ने अचानक आक्रामक बहस का रूप ले लिया और इसमें शामिल कार्यकर्ता दो फाड़ हो गए.
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सुदर्शन का (कु) दर्शन
जबसे आरएसएस के लोगों की आतंकवादी घटनाओं में संलिप्तता सामने आयी है, तब से आरएसएस के नेता बौखला गए हैं। इस बौखलाहट में ही शायद संघ के इतिहास में पहली बार हुआ है कि इसके स्वयंसेवक विरोध प्रदर्शन करने के लिए सड़कों पर उतरे। इसी बौखलाहट में आरएसएस के एक्स चीफ केएस सुदर्शन का मानसिक संतुलन बिगड़ गया और सोनिया गांधी के बारे में ऐसे शब्द बोल दिए, जिन्हें एक विकृत मानसिकता का आदमी ही बोल सकता है।...
सीआईए नहीं केजीबी एजंट कहिए जनाब
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व सरसंघचालक ने 10 नवंबर को सोनिया गांधी पर सीआईए एजंट होने का आरोप लगाकर सनसनी पैदा कर दिया है. पूरी की पूरी कांग्रेस उत्तेजित है और संघ भी बैकफुट पर चला गया है. सुदर्शन के आस पास के लोगों का कहना है कि सुदर्शन जी भुलक्कड़ हो गये हैं और उन्हें कुछ ठीक से याद नहीं रहता. शायद इसीलिए उन्होंने इतनी बड़ी चूक कर दी. ...
सोनिया का सच जान बेकाबू क्यों होते हो?
एक बार फिर लोकतंत्र पर आपातकाल मंडरा पड़ा है. राजमाता सोनिया गांधी के सिपहसालारों ने कांग्रेसी गुण्डों, माफियाओं और लोकतंत्र के हत्यारों का आह्वान किया है कि वह देशभर में संघ कार्यालयों पर धावा बोल दे. इसका तत्काल प्रभाव हुआ और कांग्रेसी गुण्डों ने संघ के दिल्ली मुख्यालय पर धावा भी बोल दिया. ठीक वैसे ही जैसे इंदिरा गांधी की मौत के बाद सिखों को निशाना बनाया गया था. हिंसक और अलोकतातंत्रिक मानसिकता से ग्रस्त कांग्रेसी सोनिया का सच जानकर आखिर इस तरह बेकाबू क्यों हो रहे हैं?...
नये निजाम के दामन पर है ज्यादा बड़ा दाग
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अजमेर चार्जशीट और संघी उछल-कूद
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अपने होने पर ही हैरान
‘चुप्पी-चुप्पी नहीं नहीं, बोलेंगे अब सभी-सभी’ इन्हीं नारों से दाहोद (गुजरात) का सीनियर रेलवे संस्थान परिसर 31 अक्टूबर को पूरे दिन गूंजता रहा। यहां गुजरात के बड़ोदरा, पंचमहल, सुरत, भड़ूच, डांग, बालसाड और साबरकांठा जिले से लगभग तीन हजार के आस पास विमुक्त एवं घुमंतू समाज से ताल्लुक रखने वाले लोग इकट्ठे हुए थे। मौका था, अधिकार अभियान की घोषणा का। उस समाज के लिए जो इस लोकतांत्रिक देश में अधिकार का अर्थ अभी तक समझ नहीं पाएं हैं। ...
गोली लगने के बाद क्या गांधी ने कहा था- हे राम ?
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भद्दा और बेदम रहा संघ का विरोध प्रदर्शन
स्कूल जाते बच्चों के भी हाथ में भगवा थमाकर भले ही संघ ने शक्ति प्रदर्शन की भरपूर कोशिश की हो लेकिन 10 नवम्बर का दिन उसके इतिहास में कोई बडी घटना के रूप में याद नहीं किया जायेगा। हॉ हम बात कर रहे है राजस्थान के भरतपुर जिला मुख्यालय की जहॉ देश भर की ही तरह हिन्दुवादी संघटनों ने अपने उपर लग रहे ‘भगवा आतंकवाद’ के आरोपों के विरोध में शक्ति प्रदर्शन किया था। भरतपुर जहॉ संघ प्रचारक क रूप में भाजपा के पीएमइन वेंटिग लालकृष्ण आडवानी ने अपनी सेवाऐं दी है संघ का ये विरोध प्रदर्शन एक दम भददा और हल्का रहा।...
एनसीपी के 'दादा' का दांव
महाराष्ट्र में कांग्रेस में परिवर्तन हुआ तो राष्ट्रवादी कांग्रेस ने भी अपने पत्ते खोल दिये. राज्य में लंबे समय से राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के भीतर चल रही सत्ता के दावेदारी पर एनसीपी ने आखिरकार प्रदेश की प्रशासनिक कमान अपनी ओर से शरद पवार के भतीजे अजीत पवार को सौंप दी है. अब गुरुवार को शाम साढ़े चार बजे पृथ्वीराज चव्हाण के साथ अजीत "दादा" पवार उपमुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे....
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महाराष्ट्र के नये मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण यूपीए सरकार पार्ट वन और पार्ट टू में बतौर पीएमओ मिनिस्टर जाने जाते हैं. प्रधानमंत्री कार्यालय में रहते हुए भी उन्होंने कभी ताकतवर होने का दंभ नहीं पाला और चुपचाप काम करते रहे. बिट्स पिलानी से बीई और बर्कले विश्वविद्यालय से एमएस की डिग्री हासिल करनेवाले पृथ्वीराज की राजनीतिक कमेस्ट्री ने उनके सार्वजनिक जीवन में पहली बार इतना गाढ़ा रंग उड़ेला है....
सुलग रहा है मेरठ 'हिन्दुस्तान'
एक ओर हिन्दुस्तान अखबार अपनी अलग कंपनी बनाकर अखबार को चमकाने और अखबार का विस्तार करने में लगा है वहीं दूसरी ओर हिन्दुस्तान के विभिन्न संस्करणों में हालात ठीक नहीं है. हिन्दुस्तान के मेरठ संस्करण में इन दिनों इस्तीफे दिये जा रहे हैं लेकिन प्रचारित किया जा रहा है कि जो आफिस नहीं आ रहे हैं वे छुट्टी पर चले गये हैं....
आलोक तोमर के बगल में बसे किशोर मालवीय
सीएनईबी में पहले से एक सलाहकार संपादक थे- आलोक तोमर. अब दूसरे सलाहकार संपादक भी वहां नियुक्त हो गये हैं किशोर मालवीय. उन्होंने सीएनईबी चैनल के साथ बतौर कंसल्टिंग एडिटर अपनी नई पारी की शुरुआत की है। सीएनईबी से पहले वे ‘वायस ऑफ इंडिया’ न्यूज चैनल के साथ जुड़े हुए थे। उन्होंने करीब दो दशक के कॅरियर में देश के नामी-गिरामी मीडिया संस्थानों में कई जिम्मेदारियां निभाईं हैं।...
सुरक्षा परिषद की छांव में खेती पर दांव
अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने संसद में दिये गये अपने भाषण में भारत से मिले प्यार की भूरि भूरि प्रशंसा जरूर की लेकिन अपनी व्यावसायिक मजबूरियों को छिपा नहीं सके. बराक ओबामा ने संसद के संयुक्त अधिवेशन को संबोधित करते हुए जहां एक ओर भारत को महाशक्ति करार देकर उसके लिए संयुक्त राष्ट्र में स्थायी सदस्यता को अपना समर्थन दिया वहीं भारत और अमेरिका द्वारा मिलकर खेती के क्षेत्र में एक और हरित क्रांति के आगाज की घोषणा की....
आतंक नहीं कश्मीर केन्द्रित हुई ओबामा यात्रा
रविवार की देर शाम भारतीय प्रधानमंत्री द्वारा आयोजित भोज में ओमर अब्दुल्ला के शामिल होने से जो आशंका पैदा हुई थी वह सोमवार को हैदराबाद हाउस में और प्रबल रूप में सामने आ गयी जब प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अमेरिकी राष्ट्रपति की उपस्थिति में स्वीकार किया कि वे पाकिस्तान से बात करते वक्त "के" शब्द पर बात करने से नहीं कतराते हैं....
भारत से धंधा, पाक को चंदा
अमेरिका के राष्ट्रपति बराक हुसैन ओबामा ने अपना तीन दिवसीय दौरा पूरा कर लिया. मुंबई उतरकर दिल्ली दरबार तक उनकी दस्तक भारत पर अमेरिका के मजबूत पकड़ की मिसाल बन गया. निश्चित रूप से उनका दौरा भारत के लिए उतना महत्वपूर्ण नहीं जितना खुद अमेरिका के लिए है. मंदी के दौर से जूझ रहे अमेरिका को "कारपोरेट" जगत का धंधा दिलाने के लिए उन्होंने न केवल भारत को महाशक्ति करार दे दिया बल्कि सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता का समर्थन भी कर दिया....
- आलोक तोमर की आपबीती
- वह गुजरात जिसे आप नहीं जानते
- हिन्दू आतंकवाद का अतिवाद
- सिमी से भी खतरनाक है संघ का स्वरूप
- बाबा रामदेव का दांव
बहुत अच्छा व सच्चाईयो पर आधारित लेख है। सेकुलर भारत के निर्माँण मे ऐसे लेख का अहम योगदान होगा. संपादक- आपकी आवाज़.कांम
बहुत अच्छा व सच्चाईयो पर आधारित लेख है। सेकुलर भारत के निर्माँण मे ऐसे लेख का अहम योगदान होगा. संपादक- आपकी आवाज़.कांम
सिक्के के दुसरे पहलू की तरफ इशारा कर अनिल ज्जी ने सदा की तरह सार्थक हस्तक्षेप किया है. बहुत सशक्त लेखन. निश्चय ही लेख में ...
सिक्के के दुसरे पहलू की तरफ इशारा कर अनिल ज्जी ने सदा की तरह सार्थक हस्तक्षेप किया है. बहुत सशक्त लेखन. निश्चय ही लेख में ...
सिक्के के दुसरे पहलू की तरफ इशारा कर अनिल ज्जी ने सदा की तरह सार्थक हस्तक्षेप किया है. बहुत सशक्त लेखन. निश्चय ही लेख में ...




