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आईएएस अधिकारी की आत्महत्या से कटघरे में आयी माया सरकार

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उत्तर प्रदेश के आवास विभाग के प्रमुख सचिव हरमिन्दर राज सिंह द्वारा शनिवार की रात खुद को गोली मारने की घटना का रहस्य गहरा होता जा रहा है. शनिवार को दिनभर इस मामले में जो घटनाक्रम घटित हुए और जिस तरह की खबरें लखनऊ की राजनीतिक गलियारों में तैर रही हैं उससे संदेह पैदा हो रहा है कि क्या उक्त अधिकारी के ऊपर कोई ऐसा दबाव भी था जिसे वह सहन नहीं कर पाया और आखिरकार उसने आत्महत्या कर ली.

शनिवार की रात उत्तर प्रदेश आवास विभाग के प्रमुख सचिव हरमिन्दर राज सिंह ने रात के एक बजे खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली थी. बकरीद की छुट्टी होने के बावजूद वे शनिवार को आफिस गये थे और दिनभर काम किया था. लेकिन देर शाम घर लौटने के बाद रात के एक बजे उन्होंने खुद को गोली मार ली. खबर है कि वे आफिस से एक पार्टी में गये थे उसके बाद घर आये थे. हरमिन्दर राज 6, विक्रमादित्य मार्ग पर रहते थे. उनके आत्महत्या की रिपोर्ट हजरतगंज थाने में दर्ज की गयी है. पुलिस ने अपनी रिपोर्ट में हरमिन्दर राज की पत्नी आशिना सिंह के हवाले से दर्ज किया है कि शनिवार/रविवार की रात उनके पति ने रात 1.22 पर अपनी 32 बोर की रिवाल्वर से दाहिनी कनपटी पर गोली मार ली है. जिसके बाद उन्हें मेडिकल कालेज के ट्रामा सेन्टर में ले जाया गया जहां डाक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया.

लेकिन उनकी मौत के बाद न केवल उत्तर प्रदेश सरकार पर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं बल्कि मुख्यमंत्री मायावती और उनके एक विश्वस्त मंत्री के ऊपर भी सवालिया निशान लग रहे हैं. हालांकि मुख्यमंत्री मायावती ने हरमिंदर राज के "असामयिक निधन" पर गहरा दुख जरूर व्यक्त किया है लेकिन उत्तर प्रदेश प्रशासन में अधिकारियों की कितनी दुर्दशा है यह किसी से छिपा नहीं है. अपने प्रशासनकाल में मायावती ने कभी भी अधिकारियों को कोई खास तवज्जो नहीं दिया जिसके कारण मायावती की सुप्रीमेसी तो जरूर कायम हुई लेकिन अधिकारियों पर दबाव लगातार बढ़ता चला गया है. लेकिन हरमिन्दर राज द्वारा खुद को गोली मारना थोड़ा आश्चर्यजनक है. आश्चर्यजनक इसलिए क्योंकि वे खुद भी मायावती के बहुत करीबी अफसर कहे जाते थे और मायावती प्रशासन में उस विभाग का काम देख रहे थे जो सीधे तौर पर कुछ महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट को हैण्डल कर रहा था. इसमें सबसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट अम्बेडकर पार्क का निर्माण है. इसके अलावा कुछ बड़े औद्योगिक समूह के लीज के एक्सटेंशन और लैण्ड यूज चेन्ज के मामलों को लेकर उनका विभागीय मंत्री से प्रतिरोध चल रहा था.

अम्बेडकर पार्क पर सुप्रीम कोर्ट का स्थगन आदेश है लेकिन ऐसी अफवाहें बार बार उड़ती रहती हैं कि अंदरखाने में पार्क का सब काम चल रहा है. ऐसे में सोमवार को सर्वोच्च न्यायालय में इस मामले पर फिर सुनवाई है. जिसमें इस मामले में बहस होगी कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का पालन हो रहा है या नहीं. अब उक्त आईएएस अधिकारी की आत्महत्या से मामला उलझता हुआ नजर आ रहा है.

दूसरी तरफ खबर यह भी है शुक्रवार को उक्त आईएएस अधिकारी की माया सरकार के विश्वस्त और विभागीय मंत्री नसीमुद्दीन के साथ कोई झड़प हो गयी थी. हालांकि इस बारे में अब कुछ भी प्रामाणिक रूप से नहीं कहा जा सकता क्योंकि हरमिन्दर राज अब इस दुनिया में नहीं है लेकिन कुछ सूत्रों का दावा है कि विभिन्न प्रोजेक्टों को लेकर भी मायावती के मंत्री नसीमुद्दीन ने उक्त अधिकारी पर दबाव बनाया था और दोनों के बीच कोई झड़प भी हुई थी. हालांकि उनकी आत्महत्या के बाद यह खबर भी फैलायी जा रही है कि वे पिछले कुछ महीनों से हाइपर टेंशन के शिकार थे. लेकिन ये सिर्फ अफवाहें ही जान पड़ती हैं क्योंकि पिछले एक सवा महीने से वे लगातार काम कर रहे थे और उन्होंने कोई छुट्टी नहीं ली थी.

बहरहाल अब सपा ने इस पूरे मामले की सीबीआई जांच की मांग की है. सपा के सांसद और मुलायम सिंह के पुत्र अखिलेश यादव ने मांग की है कि इस मामले की सीबीआई से जांच होनी चाहिए. अगर ऐसा होता है तो निश्चित रूप से हरमिन्दर राज की आत्महत्या कई सारे राज खोल सकती है जिससे मायावती सरकार के ऐसे कई राज उजागर हो सकते हैं जो एक आईएएस अधिकारी की मौत का कारण नजर आ रही हैं. जिस तरह से इस पूरे मामले को सामान्य आत्महत्या बताकर रफा दफा करने की कोशिश की जा रही है उससे संदेह बढ़ रहा है और मायावती सरकार भी कटघरे में खड़ी नजर आ रही है. हालांकि बसपा के प्रदेश अध्यक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य ने सीबीआई जांच की मांग को यह कहते हुए खारिज कर दिया है कि यह मांग राजनीति से प्रेरित है और घृणित और शर्मनाक बताते हुए इस मांग की ही घोर निंदा की है. स्वामी प्रसाद मौर्य का कहना है कि मुख्यमंत्री सचिवालय अर्थात पंचम तल को भ्रष्टाचार एवं यातना शिविर बताये जाने की भी घोर निंदा करते हुए अपनी पार्टी और सरकार का बचाव किया है.

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image मुदित माथुर राजनीति, समाज, न्याय प्रणाली और प्रशासनिक व्यवस्था को केन्द्र में रखकर पिछले बीस सालों से पत्रकारिता कर रहे हैं. अपनी पत्रकारिता के दौरान नवभारत टाईम्स में लंबे समय तक काम किया और कई चर्चित स्टोरी की. मुख्यरूप से समाज के निचले तबकों के हित में लिखने के अलावा सामाजिक और कानूनी पहल करने से भी नहीं चूकते हैं. अब विस्फोट.कॉम से नियमित जुड़ाव और लेखन के अलावा स्वतंत्र लेखन और सामाजिक सक्रियता.
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