मार्शल के बल पर पारित हो गया महिला विधेयक
दो बार स्थगन के बाद जैसे ही तीसरी राज्यसभा की कार्रवाई शुरू करने के लिए माननीय सभापति महोदय के आने की घोषणा हुई विरोधी फिर वेल में आ गये. मुर्दाबाद और भारत माता की जय के नारे भी लगे. राज्यसभा के सभापति हामिद अंसारी ने उन विरोधी तत्वों को सदन से बाहर निकालने के लिए आखिरकार मार्शल बुला लिया. देशभर में राज्यसभा टीवी पर जो कार्रवाई दिखाई जा रही थी उसमें यह नहीं दिखाया गया कि कैसे मार्शल ने महिला आरक्षण का विरोध करनेवाले नेताओं को सदन से उठाकर बाहर फेंक दिया. लेकिन नौंवी बार कार्रवाई उसके बाद ही शुरू हो सकी.
टीवी पर तो नहीं दिखा लेकिन टीवी पर जो चेहरे उस घटना को देखते हुए दिख रहे थे उनके चेहरे पर तैरती खौफ साफ बता रही थी कि सरेआम लोकतंत्र मटियामेट किया जा रहा था और देश के दो बड़े राजनीतिक दल तमाशाई बने उच्च सदन की गरिमा बढ़ा रहे थे. एक वक्त ऐसा जरूर आया जब भाजपा के नेतागण अपनी अपनी सीट पर खड़े हो गये लेकिन थोड़ी ही देर में वे बैठ भी गये. हुआ यह कि राज्यसभा में नेता विपक्ष अरुण जेटली बोलने के लिए खड़े थे और वेल में विरोधी शाब्दिक दंगा कर रहे थे. नेता विरोधी दल भी बैठने की बजाय खड़े ही रहे. इस बीच सभापति महोदय ने वोटिंग करने का आदेश दे दिया. राज्यसभा के सेक्रेटरी ने वोटिंग का प्रोसीजर भी पढ़ दिया. अब भाजपा के सदस्य मुश्किल में आ गये. वे मानकर चल रहे थे कि कम से कम बहस तो होगी लेकिन यह तो सरकार ने अलग ही रास्ता अख्तियार कर लिया. भाजपाई सदस्य विरोध पर उतर आये. अब सभापति महोदय को भी लगा कि बहस की बात तो छूट ही गयी.
इसके बाद सभापति महोदय ने धीरे से अपने सहयोगियों को आदेश दिया कि मार्शल बुला लो. सहयोगियों ने वैसा ही किया. मार्शल आये और थो़ड़ी देर वहां बैठकर जायजा लेते रहे. विरोधी नारा लगा रहे थे कि सरकार तानाशाह की तरह काम कर रही है. जब वे शांत नहीं हुए तो धीरे से इशारा हुआ और लाईन से बैठे करीब 30 मार्शल उन सात सदस्यों को उठाकर बाहर ले गये जो कि पहले ही पूरे बजट सत्र के लिए सदन की कार्यवाही में भाग लेने के अयोग्य ठहरा दिये गये थे. एक सांसद ने गुस्से में गिलास तोड़ दी. लेकिन ये सांसद कुछ भी रोक नहीं सके. अरुण जेटली ने संक्षेप में समझाया कि क्यों भारत जैसे 63 वर्षीय लोकतंत्र में महिला आरक्षण जरूरी है. अगर ऐसा नहीं होता है तो आधुनिकता का फैशन तो बदरंग होगा ही अगले तिरसठ सालों में भी महिलाओं का प्रतनिधित्व 10.7 प्रतिशत से ऊपर नहीं जा पायेगा. इसके बाद पक्ष विपक्ष से जो भी बोलने के लिए खड़ा हुआ उसने इस विधेयक का समर्थन किया.
वोटिंग हुई शाम 6.40 पर और ऐतिहासिक महिला रिजर्वेशन बिल राज्यसभा से दो-तिहाई बहुमत के साथ पारित हो गया. बिल के समर्थन में 186 और विरोध में एक वोट पड़ा. अब यह विधेयक लोकसभा में प्रस्तुत होगा जहां से पारित होने के बाद इसे राष्ट्रपति के पास मंजूरी के लिए भेजा जाएगा. राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद यह विधेयक लागू हो जाएगा जिसके बाद संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 फीसदी सीटें आरक्षित हो जाएंगी.
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kya ise desh ki kam se kam 7 vidhansabha me parit karwane ki jarurat nahi rahegi?
shayad mai alpgyaani hu isliye jyada bol raha hu....
http://www.visfot.com/index.php/peoples_power/3091.html
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