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विदर्भ के बहाने गडकरी ने दी शिवसेना को सीधी चुनौती

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महाराष्ट्र में शिवसेना भाजपा के तल्ख होते रिश्तों में भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी ने एक और अध्याय जोड़ दिया है. रविवार को पृथक विदर्भ के लिए निकाले गए विदर्भ जन जागरण यात्रा के समापन के मौके पर नागपुर के यशवंत स्टेडियम में विदर्भ की मांग के प्रति अपनी मजबूत इच्छाशक्ति को प्रकट करने के लिए खुद तो थे ही, तीन ऐसे राज्यों के मुख्यमंत्रियों/उपमुख्यमंत्रियों को भी बुला रखा था जिनका गठन एनडीए के शासनकाल में हुआ था और इस वक्त तीनों ही स्थानों में भाजपा की सरकारें हैं. गडकरी के अलावा लोकसभा में विपक्ष के उपनेता गोपीनाथ मुंडे, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह, उत्तरांचल के मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल, झारखंड के उपमुख्यमंत्री रघुवरदास, महाराष्ट्र राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता एकनाथ खड़से भी मौजूद थे.

भाजपाध्यक्ष नितिन गडकरी ने पृथक विदर्भ राज्य का पुरजोर समर्थन करते हुए कहा कि यह मांग 1956 से की जा रही है यदि विदर्भ का बैकलॉग नहीं बढ़ता, बिजली की समस्या नहीं होती,  किसान आत्महत्या नहीं करते सिंचन व्यवस्था बैगलॉग नहीं बढ़ता, रोजगार की समस्या पर ध्यान दिया जाता तो आज पृथक विदर्भ की मांग नहीं उठती। लेकिन ऐसा हो न सका। उन्होंने कहा कि इसी यशवंत स्टेडियम में नागपुर की मिहान परियोजना संबंधित सभा हुई थी। हजारों की संख्या में लोग जमा हुए थे। यहां तक कि लोग स्टेडियम के बाहर खड़े थे, पर क्या हुआ उस मिहान का? आज राज्य के मुख्यमंत्री के पास मिहान के समय नहीं है। उन्होंने कहा है कि लोग विदर्भ का कुप्रचार कर रहे हैं कि विदर्भ आर्थिक रूप से सक्षम नहीं हो सकता। वे जनता को बहकाने की काशिश कर रहे हैं। विदर्भ के साथ अन्याय बदस्तूर जारी है। यहां तक मंत्रिमंडल में भी विदर्भ उपेक्षा की जा रही है। सारे महात्वपूर्ण विभाग मराठवाड़ा और पश्चिम महाराष्ट्र के नेताओं के पास हैं विदर्भ के मंत्रियों के पास कोई महत्वपूर्ण विभाग नहीं है। राज्य बजट के मात्र दो प्रतिशत वाले विभाग विदर्भ के मंत्रियों के पास है।

गड़करी ने कहा कि विदर्भ के दो सांसदों ने बताया कि वे विदर्भ का मुद्दा संसद में उठाएंगे। विदर्भ की मांग सिर्फ भाजपा की नहीं बल्कि सभी राजनीतिक पार्टियों की है। विदर्भ के पास वनों की अपार संपदा है। गढ़चिरौली राज्य का सबसे श्रीमंत जिला है। चंद्रपुर, गोंदिया, भंडारा, गढ़चिरोली में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। सरकार विदर्भ के साथ भेद-भाव करती आ रही है। 25-30 साल बीत जाने के बाद भी एक भी प्रकल्प सरकार पूरा नहीं कर सकी। जबकि पश्चिम महाराष्ट्र, मराठवाडा और मुंबई का विकास होता चला जा रहा है। उन्होंने इन क्षेत्रों के विकास का विरोध करते हुए कांग्रेस से विदर्भ विकास का आह्वान किया। गडकरी ने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी ने तीन राज्य बनाए जो कि आज विकास की गाथा गा रहे हैं। लेकिन कांग्रेस ने तेलंगाना का क्या हाल किया है यह सबको मालूम है। उन्होंने कहा कि चमत्कार के बिना कोई नमस्कार नहीं करता इसलिए अब विदर्भ की जनता को जात-पात, धर्म-जाति भूलकर एक आंदोलन करना होगा तभी विदर्भ राज्य की स्थापना होगी।

संसद में मुंडे उठाएंगे विदर्भ का मुद्दा
गोपीनाथ मुंडे ने कहा कि वे इसी हफ्ते संसद में विदर्भ का मुद्दा उठाएंगे। आज यहां पर तीन राज्य मुख्यमंत्री उपस्थित हैं यदि विदर्भ बनता है किसी तीसरे सम्मेलन में चार राज्य के मुख्यमंत्री छोटे राज्यों के समर्थन में एकत्रित होंगे। उन्होंने कहा कि वे विदर्भ ही नहीं तेलंगाना के भी पक्ष में हैं। मुंडे ने कहा विदर्भ पर सभी प्रकार के अन्याय के साथ राजनीतिक अन्याय भी हो रहा है। मुर्गीपालन, मछलीपालन जैसे मामूली विभाग विदर्भ के मंत्रियों के पास हैं, जबकि पश्चिम महाराष्ट्र मराठवाडा के पास सभी महत्वपूर्ण विभाग हैं। वन तो विदर्भ का है लेकिन वन मंत्री सांगली का है। उन्होंने विदर्भ पर किए गए खर्च की श्वेत पत्र प्रकाशित करने की मांग की। उन्होंने कहा कि संसद में जब तेलंगाना का प्रस्ताव आएगा तो वे उसे सुधारिक कर विदर्भ के प्रस्ताव की भी मांग करेंगे। और महिला आरक्षण की तर्ज पर उसे पारित करेंगे। मुंडे  ने कहा कि हिंदी राज्य के तुकड़ेे होने से हिंदी मुख्य मंत्रियों संख्या बढ़ी है। यदि विदर्भ बनता है तो दो मुख्यमंत्री मराठी भाषी होंगे।

रमेश पोखरिया ने कहा...
उत्तरांचल के मुख्यमंत्री रमेश पोखरिया ने कहा 1952 से उत्तरांचल की जनता लगातार अलग राज्य की मांग कर रही थी। लेकिन आखिर अटलजी ने तीनों राज्य के निर्माण को हरी झंडी दिखाई और आज तीनों राज्य न सिर्फ सक्षम हैं बल्कि विकास की परिभाषा भी लिख रहे हैं। यदि विदर्भ से लोगों का पलायान रोकना है तो पृथक राज्य का निर्माण हर हाल मे करना ही होगा। विदर्भ के पास सारे संसाधन है। उन्होंने 'आज दो अभी दो अपना विदर्भ राज्य दोÓ का नारा दिया।

डॉ रमणसिंह ने कहा...
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ रमणसिंह ने कहा कि जो लोग ये कहते हैं कि छोटे राज्यों का विकास नहीं हो सकता, वे गलत है। छत्तीसगढ़ क्षेत्र से पहले पलायन होता था, लेकिन अलग राज्य बनने से न सिर्फ पलायान रूका बल्कि प्रति व्यक्ति आय में वृध्दि हुई है। उन्होंने कहा कि यदि ईमानदारी से पहल की गई होती तो दस साल पहले ही विदर्भ बन जाता। उन्होंने कहा कि आज देश में विदर्भ को किसान आत्महत्या के रूप में जाना जाता है यह विदर्भ की दयनीय पहचान है। अब जनता जाग चुकी है। दुनिया की कोई ताकत अब विदर्भ निर्माण को रोक नहीं सकती।

रघुवरदास ने कहा...
झारखंड के उप-मुख्यमंत्री रघुवरदास ने कहा कि वे मुख्यमंत्री शिबू-सोरेन और वहां की जनता की ओर से विदर्भ के लिए शुभकामनाएं लेकर आए हैं। भाजपा छोटे राज्यों की पक्षधर रही है। केंद्र में बैठी कांग्रेस सरकार ने आंदोलन को खरीदने का काम किया है। जनता जाग चुकी है अब विदर्भ को कोई रोक नहीं सकता।

स्थानीय नेता बोले...
राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता एकनाथ खडसे ने कहा कि विदर्भ की मांग बहुत पुरानी है। उन्होंने कहा कि सरकार कहती रही कि विदर्भ पर अन्याय नहीं होने देंगे विकास के लिए भरपूर निधि देेंगे, लेकिन आज दिख रहा है कि विदर्भ पर अन्याय हो रहा है। विदर्भ की जनता ने जिस गर्मजोशी से जनजागरण यात्रा का स्वागत किया वह यह साबित करता है कि अब विदर्भ दूर नहीं।

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harshvardhan on 15 March, 2010 09:20;04
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gadkaree sahi jate dikh rahe hain
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image संजय स्वदेश किरोडीमल कॉलेज स्नातकोत्तर के बाद केंद्रीय हिंदी संस्थान दिल्ली से पत्रकारिता में डिप्लोमा। दैनिक हिंदुस्तान, नवभारत टाईम्स, सहारा समय, दैनिक भास्कर में काम. कई पत्र-पत्रिकाओं में स्वतंत्र लेखन के साथ स्थानीय जनअभियानों से जुड़े हैं। sanjayinmedia@rediffmail.com
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