खाली खजाना जनसेवकों पर लुटा रहे हैं शिवराज
मध्य प्रदेश सरकार के खजाने में पर्याप्त धन नहीं है, यही कारण है कि सूबे में करारोपण की गति तेज हो गई है। पिछले डेढ दशक में मध्य प्रदेश की माली हालत जर्जर हो चुकी है, यह बात किसी से छिपी नहीं है। एक के बाद एक निगम में तालाबंदी के आसार नजर आ रहे हैं। इस खाली खजाने को सूबे के निजाम शिवराज सिंह चौहान ने अपने विधायकों पर लुटाना आरंभ कर दिया है।
विधायकों का वेतन 35 हजार से बढाकर 50 हजार रूपए, निशुल्क बस यात्रा के बदले हर माह ढाई सौ रूपए बस भत्ता भी दिया जाएगा। सूबे में मंत्री का वेतन बासठ हजार, राज्य मंत्री का वेतन साठ हजार, विधानसभा अध्यक्ष का साठ हजार तीन सौ तो विधानसभा उपाध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष का वेतन सत्तावन हजार है। इसके पहले 3 अक्टूबर 2007 को विधायकों का वेतन बढाया गया था।
अब अंदाजा लगाया जा सकता है कि आना फ्री, जाना फ्री, रहना फ्री, बिजली फ्री, सब कुछ फ्री फिर वेतन जबर्दस्त। विधायक चाहे किसी भी दल के हों पर इस मामले में किसी ने भी यह आवाज नहीं उठाई कि सब कुछ फ्री होने पर वेतन बढाने का क्या ओचित्य! विधायकों के बढे वेतन की राशि अगर गरीबों के कल्याण में खर्च की जाती तो बात ही कुछ ओर होती।



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