परमाणु दायित्व विधेयक में नहीं होगा संशोधन
भोपाल गैस त्रासदी से सबक सीखने के बजाए परमाणु क्षतिपूर्ति दायित्व विधेयक में गिने चुने कड़े प्रावधान हटाने की कोशिश कर रही सरकार ने विपक्ष के दबाव में पैर वापस खींच लिए हैं। परमाणु दुर्घटना की स्थिति में अब आपूर्तिकर्ता के लिए जिम्मेवारी से बचने का रास्ता नहीं खोला जाएगा।
परमाणु क्षतिपूर्ति विधेयक पर हुई स्थायी संसदीय समिति की बैठक में मंगलवार को सरकार ने अपनी वह कोशिश छोड़ दी जो नाभिकीय दुर्घटना की स्थिति में आपूर्तिकर्ता को बचाने के मकसद से की जा रही थी। इतना ही नहीं भाजपा और वामपंथियों के कड़े विरोध के चलते परमाणु ऊर्जा विभाग के सचिव श्रीकुमार बनर्जी ने बकायदा विज्ञान और प्रौद्योगिकी की स्थायी संसदीय समिति के समक्ष ऐसा नोट जारी करने के लिए खेद जताया जिसके तहत इस तरह की कोशिश पिछली बैठक में की गई थी। समिति की पिछली बैठक में जारी किए गए इस नोट में अनुच्छेद 17 ख में संशोधन का प्रस्ताव था। ध्यान रहे यह अनुच्छेद आपरेटर को आपूर्तिकर्ता के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने का अधिकार देना प्रस्तावित करता है अगर परमाणु दुर्घटना उसकी तरफ से जानबूझकर की गई हो या उसकी लापरवाही की वजह से हुई हो।
प्रावधान के मुताबिक, आपूर्तिकर्ता के किसी भी कर्मचारी की तरफ से भी हुई लापरवाही की स्थिति में कानूनी कार्रवाई का सामना उसे ही करना होगा। सूत्रों के अनुसार, आज की बैठक में सांसदों का जानकारी दी गई कि अनुच्छेद को हटाने के प्रस्ताव को सरकार वापस लेती है। दिन भर चली चर्चा के दौरान समिति के सदस्यों ने बनर्जी की जमकर खिंचाई की जिन्होंने ऐसा नोट पिछली बैठक में रखा था। उनसे पूछा गया था कि ऐसा करने के पीछे क्या मंशा थी और क्या कैबिनेट की सहमति इस कदम के लिए ली गई थी।



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