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राजनीतिक हिन्दुत्व पर दिग्गी का दांव

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हिन्दुओं का ठेकेदार बनने की आरएसएस और उसके मातहत संगठनों की कोशिश को चुनौती मिल रही है. भगवान् राम के नाम पर राजनीति खेलकर सत्ता तक पंहुचने वाली बीजेपी के लिए और कोई तरकीब तलाशनी पड़ सकती है क्योंकि कांग्रेस की नयी लीडरशिप हिन्दू धर्म के प्रतीकों पर बीजेपी के एकाधिकार को मंज़ूर करने को तैयार नहीं है. कांग्रेस के महासचिव दिग्विजय सिंह ने साफ़ कहा है कि हिन्दू धर्म पर किसी राजनीतिक पार्टी के एकाधिकार के सिद्धांत को वे बिल्कुल नहीं स्वीकार करते.

दिग्विजय सिंह एक मंजे हुए राजनीतिक नेता हैं, इसलिए यह  उम्मीद करना कि वे अपनी निजी राय बता रहे थे, ठीक नहीं होगा. यह  उनकी पार्टी की ही राय है .दिग्विजय सिंह ने सार्वजनिक रूप से भी कहा और मुझे जोर देकर बताया कि  भगवा रंग बहुत हे एक पवित्र रंग है और उसे किसी के पार्टी की संपत्ति मानने की बात का मैं विरोध करता हूँ. उन्होंने कहा कि धार्मिक आस्था के बल पर मैं राजनीतिक फसल काटने के पक्ष में नहीं हूँ और न ही किसी पार्टी को यह अवसर देना चाहता हूँ. उन्होंने कहा कि हिन्दू धर्म पर हर हिन्दू का बराबर का अधिकार है और उसके नाम पर आर एस एस और बी जे  पी वालों को राजनीति नहीं करने दी जायेगी.  दिग्विजय सिंह ने कहा कि हिन्दू महासभा के पूर्व अध्यक्ष , वी डी सावरकर ने हिन्दुत्व नाम की राजनीतिक विचारधारा की स्थापना की थी . जिसके बल पर वे राजनीतिक सपने देखते थे, अगर आर एस एस वाले चाहें तो उसको अपना सकते हैं , उन्होंने साफ़ कहा कि वे हिन्दुत्व को हिन्दू धर्म के रूप में स्वीकार नहीं कर सकते  उन्होंने कहा कि हिन्दू धर्म और हिंदुत्व में फर्क है.

कांग्रेस पार्टी में इस ताज़ा सोच पर काम होना शुरू हो गया है. मुंबई में एक गैर राजनीतिक सभा में दिग्विजय सिंह  दिन भर बैठे रहे जिसमें वे खुद केसरिया साफा बंधे हुए थे. अखिल भारतीय क्षत्रिय फेडरेशन के दूसरे सम्मलेन में उन्होंने छत्रपति शिवाजी और महाराणा प्रताप की वीरता का गुणगान  किया और दावा किया कि वे खुद क्षत्रिय हैं और अपने महान पूर्वज क्षत्रियों का सम्मान काना उनका बहुत ही पवित्र कर्त्तव्य है. दिग्विजय सिंह का यह पैंतरा संघ की राजनीति की चूल ढीली करने की हैसियत रखता है. मुंबई में अगर कांग्रेस का एक बड़ा नेता डंके की चोट पर शिवाजी के सम्मान में भाषण दे रहा है कि तो शिवाजी का वारिस बनकर राजनीतिक दुकानदारी करने वालों के लिए मुश्किल खडी हो सकती है . संघी राजनीति की अजीब मुश्किल है. उनके पास बीसवीं सदी में तो कोई ऐसा हीरो था नहीं जो आज़ादी की लड़ाई में शामिल हुआ हो. या उनके किसी नेता को आज़ादी के लिए लड़ते हुए एक दिन के लिए भी जेल जाना पड़ा हो. इसलिए यह लोग ऐतिहासिक महापुरुषों से अपने आपको जोड़ कर उनका वारिस बनने की बात करते रहते  हैं. महाराणा प्रताप और शिवाजी की वंदना संघी राजनीति की इसी मजबूरी के चलते  की जाती है.

यह कोशिश इन लोगों ने 1986 के बाद  जोर शोर से शुरू कर दी थी. हिन्दुत्ववादियों को अस्सी के दशक में सफलता इसलिए मिली कि उस वक़्त की बड़ी पार्टियों ने राम जन्मभूमि की इनकी राजनीति का विरोध बहुत ही गैर जिम्मेदाराना तरीके से किया. उत्तर प्रदेश  और केंद्र में बहुत मजबूती के साथ राजनीति के शिखर पर बैठी कांग्रेस ने भी संघ परिवार , ख़ास कर विश्व हिन्दू परिषद् को  राम के नाम पर एकाधिकार के खेल में वाक ओवर दे दिया. शायद ऐसा इसलिए हुआ कि उस वक़्त के कांग्रेस के मुखिया राजीव गांधी के पास योग्य सलाहकारों की कमी थी. अरुण नेहरू, अरुण सिंह टाइप लोग उनके सलाहकार थे, जिन बेचारों को राजनीति की बारीकियों के बारे में कोई जानकारी नहीं थी. नतीजा यह हुआ कि तीन चौथाई बहुमत वाली कांग्रेस चुनाव हार गयी और दो सीट जीतकर आई बीजेपी ने दिल्ली में  विश्वनाथ प्रताप सिंह की कठपुतली सरकार बनवा दी. फिर तो आरएसएस की हिंदुत्व का ठेकेदार बनने की कोशिश शुरू हो गयी और कांग्रेस और बाकी राजनीतिक पार्टियों के बड़े नेता, राम का नाम आते ही बीजेपी का ज़िक्र करने लगे. और बीजेपी को भगवान राम की पार्टी बनने का मौक़ा मिल गया.

यह काम बीजेपी और उसके मालिक आर एस एस की मर्जी के हिसाब से हो रहा था यही उनकी योजना थी. जिसका फायदा बीजेपी को हुआ. लेकिन अब सोनिया गांधी के राज में कांग्रेस में ज़्यादातर फैसले सोच विचार कर लिए जा रहे हैं. राजीव गांधी की तरह दोस्तों की बात को राष्ट्रीय राजनीति पर नहीं थोपा जा रहा है. जिसका नतीजा यह है कि एक सोची समझी रण नीति के तहत बीजेपी, शिव सेना और बाकी साम्प्रदायिक पार्टियों को उनके साम्प्रदायिक रंग में रंगे मुहावरों से  खारिज किया जा रहा है और अगर कांग्रेस अपनी इस योजना में सफल  हो गयी तो और बीजेपी की उस कोशिश को जिसके तहत वह हिन्दू धर्म के प्रतिनिधि के रूप में अपने को स्लाट कर रही थी, नाकाम कर दिया तो इस देश की राजनीति का भला तो  होगा ही, आरएसएस को नए सिरे से महापुरुषों की खोज करनी पड़ेगी

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अब्दुल हमीद on 02 September, 2010 17:29;12
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अरे, शेष जी को तो समझ में ही नहीं आया. वे बेकार में ही खुश हो रहे हैं. उन्हें संघ के बारे में पता ही नहीं. वास्तव में, संघ की स्थापना सत्ता प्राप्ति के लिए नहीं हुई, न ही भाजपा को सत्ता दिलाने के लिए. संघ तो चाहता है कि देश की राजनीति का केंद्रीय तत्व हिंदुत्व हो. वह हिंदुत्व से संचालित हो. और अब धीरे-धीरे यही तो हो रहा है. अब एक घोर कांग्रेसी भी हिंदू धर्म के पक्ष में बोलने लगा है, खुद को क्षत्रिय बताने लगा है, अपनी विरासत पर गर्व करने लगा है. वरना कल तक तो कांग्रेसियों की महान विरासत नेहरू परिवार तक आकर खत्म हो जाती थी. अब माननीय दिग्विजय सिंह उससे आगे तो बढ रहे हैं. संघ जिन महापुरुषों पर गर्व करने की शिक्षा देता रहा है, उन महापुरुषों पर अब सिमी के पैरोकार भी गर्व और अधिकार जताने लगे हैं. यह ह्रिदय परिवर्तन तो संघ के लिए खुशी की बात है, उसकी जीत है. भगवान करे, सभी पार्टियों में कांग्रेस की तरह सद्बुद्धि आ जाए.
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prashant mehrishi on 02 September, 2010 22:17;19
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जिस दल का पहला प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरु ने कहा था
'i am aहिन्दू by mistake " उस दल के व्यक्ति भगवा सफा बांध कर हिन्दू रक्षक महाराणा प्रताप व् शिवाजी ki प्रशंसा करे सौभाग्य का विशे है . यदि दिग्विजय सिंह और shesh नारायण जी भारत को हिन्दू राष्ट्र घोषित करवा दे तो संघ परिवार की आवश्यकता समाप्त हो जाएगी और हम भी डॉ हेडगेवार जी की तरह कांग्रेस (जिसका गठन देश स्वतंत्र करने को हुआ था ) मैं शामिल हो कर देश से भरष्टाचार ,भुखमरी , मिटाकर इसे विश्व guru बनाने की or चलेंगे
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राधे श्याम on 02 September, 2010 22:30;35
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आपको कौन पूछेगा
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Dr pawan on 03 September, 2010 13:56;19
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Diggi maharaj MP ki satta se bahar ho gaye centre me mouka nahi mila frustration me h Rajiv SOnia ki mahima me lage rehte h kam se kam governor to ban jaye, ye hinduo ko gali dete nahi thakta tha aaj MP me satta ke liye shivaji maharana partap yad aa gaye ,Babar ki majar pe kabul me chadar chadane wale congressi PM ab tirupatti bhi jane lage, dar gaye h ye log Modi or BJP SE kahi Rahul PM na ban sake or inki gair jimedar satta na chali jaye ye sb gandhi parivar k worker h congress k nahi
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दीपक बाबा on 03 September, 2010 21:12;34
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कांग्रेसी गंगा जी में कमर तक पानी में खड़े होकर भी हिंदुत्व कि बात करें तो .........

बात हजम नहीं होगी........ हाजमोला खाना पड़ेगा. .......
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R.K.GUPTA on 15 September, 2010 12:38;07
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लेकिन अब सोनिया गांधी के राज में कांग्रेस में ज़्यादातर फैसले सोच विचार कर लिए जा रहे हैं. राजीव गांधी की तरह दोस्तों की बात को राष्ट्रीय राजनीति पर नहीं थोपा जा रहा है.
..........................
क्या मजाक है भाई ये सोनिया कब से सोच विचार करने लगी
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santosh nagpure on 22 September, 2010 19:39;07
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sonia gandhi bhi soch ker faisla karti hai yeh sabse bada mazak hai
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santosh nagpure on 22 September, 2010 19:50;11
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सोनिया गाँधी भी सोच कर फैसला कर रही है यह सबसे बड़ा मजाक है २० साल से हिन्दुओ की भावना के साथ खेल मुस्लिम तुस्टीकरण की राजनीती कर रही कांग्रेस आज अगर हिन्दुओ हित की बात करने की कोशिश कर रही है तो भी वह मात्र वोट की खातिर कांग्रेस ने मुस्लिम वोट की पूरी फसल काट ली है अब उसकी नज़र हिन्दू वोटो पैर है और कुछ नहीं हिदू साधवी को आतंक वादी और भगवा आतंकवाद जैसे शब्द कहने वाली कांग्रेस का ये नया चोला है.......
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image शेष जी शेष नारायण सिंह मूलतः इतिहास के विद्यार्थी हैं. शुरू में इतिहास के शिक्षक रहे. .बाद में पत्रकारिता की दुनिया में आये...प्रिंट, रेडियो और टेलिविज़न में काम किया. इन्होने १९२० से १९४७ तक की महात्मा गाँधी की जीवनी के उस पहलू पर काम किया है जिसमें वे एक महान कम्युनिकेटर के रूप में देखे जाते हैं..1992 से अब तक तेज़ी से बदल रहे राजनीतिक व्यवहार पर अध्ययन करने के साथ साथ विभिन्न मीडिया संस्थानों में नौकरी की. अब मुख्य रूप से लिखने पढने के काम में लगे हैं. एक अखबार में काम और विस्फोट.कॉम के सम्मानित स्तंभलेखक.
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