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जेपी के लिए सबकुछ जमींदोज
गरीबी, बदहाली और अनवरत विस्थापन से जूझ रहे सोनभद्र में, दलित आदिवासी शोषण का नया सत्र शुरू हो गया है। उत्तर प्रदेश में सरकारी मदद से अपना उपनिवेश स्थापित करने की कोशिश में लगे जेपी सीमेंट ने अपने आप को स्थापित करने के लिए केवल आदिवासियों के घर को जमींदोज करने की योजना नहीं बनाई है बल्कि जेपी ने शासन, प्रशासन और मीडिया की हैसियत को भी जमींदोज कर दिया है. कोई माई का लाल नहीं है जो जेपी की मुखालिफत कर सके....मुकेश अंबानी और मार्क अमेस
मुकेश अंबानी को आप सब जानते हैं. अब शायद मार्क अमेस को भी जान गये होंगे. अमेरिका की एक वेबसाइट में लिखनेवाले पत्रकार मार्क अमेस ने आज से चार महीना पहले एक ब्लाग पोस्ट लिखा था. ब्लाग पोस्ट में उन्होंने आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री वाईएस राजशेखर रेड्डी की हत्या में अंबानी बंधुओं की ओर शक की सूई घुमाई थी....अडनी महा ठगिनी हम जानी
"यह जंगल हमारे बुजुर्गों का लगाया हुआ है, इसे हम कटने नहीं देंगे! हमने 10 फुट रास्ता सरकार से मांगा था, जो हमें नहीं मिला, जबकि अडनी समूह को पूरा जंगल दिया जा रहा है।" यह कहना है महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले ताड़ोबा अंधेरी बाघ अभ्यारण्य के बफर क्षेत्र के गांव मामला के सरपंच भारत काटवले का। उल्लेखनीय है कि चंद्रपुर शहर से सटे घने जंगल ताडोबा अंधेरी टाइगर रिजर्व के लिए एक ढाल की तरह हैं और ये जंगल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह एक दक्षिणवर्ती कॉरीडोर का हिस्सा है जो बाघों के प्रजनन एवं उनके अस्तित्व के लिए काफी अहम् है।...भारतीय संसद के दो चेहरे: निशिकांत और नाथवानी
संसद का मानसून सत्र समाप्त हो गया. सरकारी काम काज के अलावा सदन में आखिरी दिनों में जो एक मुद्दा सबसे अधिक हावी रहा वह था रिलायंस के दो भाईयों का कृष्णा गोदावरी बेसिन में मिले गैस का बंटवारा. अनिल अंबानी और मुकेश अंबानी के बीच का यह झगड़ा भारतीय संसद में बहुत अनोखे तरह से दिखाई दिया. चरम तो तब हो गया जब गुरूवार को रिलायंस के बोर्ड मेम्बर परिमल नाथवानी ने स्वीकार कर लिया कि हां वे 'रिलायंस से जुड़े हुए हैं' इसलिए उन्होंने जमकर मुकेश अंबानी के पक्ष में राज्यसभा में आवाज उठायी. उन्होंने बहस में शामिल होते हुए यह साबित करने की कोशिश की कि मुकेश अंबानी अगर गैस की कीमत तय नहीं करेंगे तो इससे भारत की अंतरराष्ट्रीय बिरादरी में बड़ी किरकिरी हो जाएगी. ...कंपनी का पानी है फूंक कर पीना
मध्य प्रदेश में पिछला दशक "पानी के निजीकरण" के नाम रहा है. इसी कड़ी में ठेका आधारित `देवास औद्योगिक जलापूर्ति योजना´ का कार्य अब अपनी समाप्ति पर है. 2002 को `मध्यप्रदेश राज्य ओद्यौगिक निगम´ ने इस योजना के लिये एक टेण्डर जारी किया था. इसमें नेमावर से देवास तक कुल 128 किलोमीटर पाइपलाइन डालकर नर्मदा का 23 एम.एल.डी. पानी शहर के उद्योगों को पहुँचाना था. योजनाकारों ने 26.50 रुपए प्रति हजार लीटर की दर से पानी बांटने का दावा भी किया. लेकिन पहले टेण्डर में जहां इसकी लागत 65 करोड़ रुपए बतलायी गई थी वहीं अब यह लागत बढ़कर 80 करोड़ को पार कर चुकी है. साथ ही योजनाओं से जुड़े चंद सवाल भविष्य में आशंकाओं को जन्म दे रहे हैं. इसलिए यह पूरी योजना अब विवादों के घेरे में खड़ी है. ...रिलायंसः द रियल नटवर
आजकल विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी के नाम की बड़ी धूम है। दो साल पहले उनकी कुर्सी पर नटवर सिंह विराजमान थे। वे किस अपराध के चलते गद्दी से उतारे गए, ये जनता भुला चुकी है। कुछ तेल का मामला था.. इराक़.. सद्दाम हुसेन..नटवर ने उसमें घूस खाई थी.. जाँच हुई.. उनको निकाला गया.. । मगर उस सारे प्रकरण से रिलायंस का लेना देना क्या था? रिलायंस .. रियल नटवर.. इसका क्या मतलब है..?...उद्योगपतियों से क्यों मिले आडवाणी?
२० नवंबर की शाम आडवाणी के घर के बाहर भारी गहमा-गहमी थी. दरवाजे के बाहर पत्रकारों की भारी भीड़ जमा थी. कैमरे और गनमाईक तैनात थी. शाम के पांच बजते ही सारे मीडियाकर्मी हरकत में आने लगते हैं. एक-एक कर उद्योगपतियों की गाड़िया आडवाणी के घर के अंदर जाती हैं और बाहर पत्रकारों में उस उद्योगपति को पहचानने की बुझौवल शुरू हो जाती है. पंद्रह बीस मिनट के अंदर देश के कोई १५ शीर्ष उद्योगति आडवाणी के घर पहुंच चुके थे. पहुंचनेवाले लोगों में दोनो अंबानी बंधु भी शामिल थे. मुकेश अंबानी पहले आ गये थे, अनिल बाद में आये. ...समझौते को सार्वजनिक करें मोदी
टाटा मोटर्स और गुजरात सरकार के बीच नैनो कार बनाने के लिए हुए समझौते का केवल विरोध के लिए विरोध करना उचित नहीं है। लेकिन गुजरात और देश की जनता को ये जानने का हक है कि ये समझौता क्या है। यानी लखटकिया कार बनाने के लिए गुजरात की जनता को क्या कीमत चुकानी होगी। वैसे रतन टाटा नैनो को बंगाल से बाहर करने के लिए ममता बनर्जी को चाहे जितना गाली दे लें लेकिन ये तय है कि नैनो परियोजना के बंगाल से बाहर चले जाने से बंगाल के खजाने को करोड़ों रुपए का चूना लगने से बच गया है।...पलायन का ग्रोथ रेट
आदमी अपनी इच्छा से घूमता आया है और घूमता रहेगा. लेकिन यह घुमंतू स्वभाव वह नहीं है जिसे हम पिछले कुछ सदियों से प्रवास कहकर परिभाषित कर रहे हैं. आज जो पलायन हो रहा है उसमें निज इच्छा का लोप हो चुका है. निजी जरूरतों के साथ जिस एक तत्व ने प्रवास को पलायन बना दिया है वह है मनुष्य के एक वर्ग की असीमित इच्छाएं जो कुण्ठा की शक्ल में मानव जाति के ही दूसरे वर्ग को पीड़ा के अथाह सागर में धकेलती आ रही हैं. इस संघर्ष से जो निकला है वही आज और भविष्य की बड़ी समस्या पलायन और विस्थापन है....हजार करोड़ की हरियाली
"साल २००८ तक दिल्ली से सटे इलाके नये तरह के शहर की बसावट के लिए खासे चर्चित हो चुके होंगे. आज के झड़ौदा कला, झटीकरा, घोड़ी-बछेड़ू और गढ़ी हरसरू जैसे गांव उस समय अंग्रेजीदां नामों और लोगों से शोभायमान हो रहे होंगे. आज भले ही इन गांवों के आस-पास अकूत खेत और चारागाह हों और यहां गाय-भैंसे चरती हों लेकिन उस समय ये चारागाह नये तरह के घास के मैदानों में परिवर्तित हो जाएंगे जिसमें आदमी बड़ी कीमत अदा करके प्रवेश पा सकेगा......- आलोक तोमर की आपबीती
- वह गुजरात जिसे आप नहीं जानते
- हिन्दू आतंकवाद का अतिवाद
- सिमी से भी खतरनाक है संघ का स्वरूप
- बाबा रामदेव का दांव
बहुत अच्छा व सच्चाईयो पर आधारित लेख है। सेकुलर भारत के निर्माँण मे ऐसे लेख का अहम योगदान होगा. संपादक- आपकी आवाज़.कांम
बहुत अच्छा व सच्चाईयो पर आधारित लेख है। सेकुलर भारत के निर्माँण मे ऐसे लेख का अहम योगदान होगा. संपादक- आपकी आवाज़.कांम
सिक्के के दुसरे पहलू की तरफ इशारा कर अनिल ज्जी ने सदा की तरह सार्थक हस्तक्षेप किया है. बहुत सशक्त लेखन. निश्चय ही लेख में ...
सिक्के के दुसरे पहलू की तरफ इशारा कर अनिल ज्जी ने सदा की तरह सार्थक हस्तक्षेप किया है. बहुत सशक्त लेखन. निश्चय ही लेख में ...
सिक्के के दुसरे पहलू की तरफ इशारा कर अनिल ज्जी ने सदा की तरह सार्थक हस्तक्षेप किया है. बहुत सशक्त लेखन. निश्चय ही लेख में ...

