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यस, मिस्टर प्राइम मिनिस्टर
अरुन्धती राय, वंदना शिवा, संदीप पाण्डेय, अमित भादुड़ी जैसे सामाजिक कार्यकर्ताओं और बुद्धिजीवियों ने प्रधानमंत्री को एक पत्र लिखा है. इस पत्र में प्रधानमंत्री से आपरेशन ग्रीन हण्ट को रोकने की मांग की गयी है. पत्र में 250 वरिष्ठतम लोगों के हस्ताक्षर हैं और सीधे तौर पर कहा गया है कि भारत सरकार कंपनियों के एजंट के तौर पर काम न करे. पत्र में प्रधानमंत्री और सरकार पर यह आरोप भी लगाया गया है कि भारत सरकार की नक्सलियों के खिलाफ चलाया जा रहा सैन्य अभियान एक गृहयुद्ध जैसा है जिसे तत्काल रोका जाना चाहिए. ...शुरु होने से पहले ही विवादित हो गया नक्सलियों के खिलाफ "बड़ा अभियान"
नक्सल प्रभावित राज्यों में बड़े पुलिस अभियान से पहले ही विवाद छिड़ गया है। यह विवाद राज्यों और केंद्रीय पुलिस बल के बीच है। राज्य पुलिस केंद्रीय पुलिस बलों पर असहयोग का आरोप लगा रहा है। वहीं केंद्रीय पुलिस बल का आरोप भी यही है। पहले छतीसगढ़ और अब उड़ीसा। दोनों राज्यों से इस तरह के विवाद की सूचना है। स्थानीय पुलिस और सीआरपीएफ के बीच तालमेल नहीं बैठ रहा है। जबकि केंद्र सरकार राज्यों के सहयोग से नक्सलियों के खिलाफ जोरदार अभियान की दंभ भरी घोषणा कर रही है। ताजा घटना उड़ीसा की है। नवीन पटनायक ने केंद्र से और सीआरपीएफ की और टुकड़ियां मांगी है। उधर सीआरपीएफ का आरोप अलग है। उड़ीसा में पहले से तैनात कई बटालियन का उपयोग उड़ीसा पुलिस नहीं कर रही है। यह आरोप सीआरपीएफ के अफसरों का है।...आदिवासियों को तबाह करने की विकास योजनाएं
संविधान में व्यवस्था है कि सरकारी नौकरियों में आदिवासी लोगों के लिए आरक्षण रहेगा लेकिन जब उनके पास बुनियादी शिक्षा की व्यवस्था ही नहीं है तो वे सरकारी नौकरियों तक पहुंचेगे कैसे। इन लोगों की शिक्षा दीक्षा की कोई व्यवस्था नहीं की गई इसलिए इनके लिए रिजर्व नौकरियों में वे लोग घुस गए जो अपेक्षाकृत विकसित थे, शिक्षित थे लेकिन आदिवासी श्रेणी में आते थे। राजस्थान की एक ऐसी ही बिरादरी का आजकल सरकारी नौकरियों में दबदबा है। लेकिन बिहार, उड़ीसा, पश्चिम बंगाल, आंध्रप्रदेश और मध्यप्रदेश के आदिवासी बहुल इलाकों के लोगों को केंद्रीय नौकरियों में ठिकाना नहीं मिला क्योंकि उनके पास पढ़ने लिखने का साधन नहीं था। नतीजा यह हुआ कि उनका शोषण और बढ़ गया।...सरकार से बातचीत को तैयार हैं माओवादी
माओवादी केन्द्र सरकार से बातचीत के लिए तैयार हो गये हैं. समाचार एजंसी पीटीआई ने माओवादी नेता किशनजी के हवाले से खबर दिया है कि माओवादी बातचीत के लिए तैयार हैं लेकिन इसके पहले वे चाहते हैं कि केन्द्र सरकार वनवासी इलाकों से पैरा मिलिट्री फोर्स हटा ले....कितना सफल होगा आपरेशन ग्रीन हंट
सदी के जिस पूर्वार्ध में हम खड़े हैं वहां ग्रीन शब्द सबसे बड़े आकर्षण का केन्द्र बन गया है. पूरी दुनिया में जीवन के हर पहलू और जरूरत को ग्रीन शब्द से जोड़कर देखने की प्रथा चल पड़ी है. भारत में भी ग्रीन शब्द को सरकार ने जिस काम के लिए इस्तेमाल किया है वह थोड़ा चौंकानेवाला है. देश में नक्सलियों के खिलाफ सरकार ने "व्यापक" स्तर पर जिस आपरेशन की रुपरेखा तैयार की है उसे आपरेशन ग्रीन हण्ट का नाम दिया है. इस आपरेशन ग्रीन हण्ट के तहत सरकार देश से नक्सलियों का सफाया करना चाहती है. ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि क्या आपरेशन ग्रीन हण्ट का कोई औचित्य है? अगर हां, तो क्या यह सफल होगा?...माओवादियों से लड़ाई की तैयारी
माओवादियों से लड़ाई की तैयारियां शुरू हो गयी है. इस कड़ी में सोमवार को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य से मुलाकात की. मुलाकात के बाद बुद्धदेव भट्टाचार्य ने एक प्रेस कांफ्रेस में बताया कि उन्होंने प्रधानमंत्री से कहा है कि राज्य में माओवादियों के खिलाफ केन्द्र और राज्य सरकार का संयुक्त अभियान जारी रहना चाहिए जिसे प्रधानमंत्री ने स्वीकार कर लिया है....माओवादियों के खिलाफ सेना का इस्तेमाल नहीं-प्रधानमंत्री
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा है कि माओवादियों के खिलाफ सरकार सेना का प्रयोग नहीं करेगी. कर्नाटक के बाढ़ प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वेक्षण करने के बाद रायचूर में पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि माओवादियों से निपटने के लिए पुलिस और अर्धसैनिक बलों का ही प्रयोग किया जाएगा....नक्सलियों की चेतावनी: अंगुली पर स्याही दिखी तो हाथ काट डालेंगे
गुरुवार को गढ़चिरोली में 17 पुलिसकर्मियों की हत्या कर देने के बाद अतिउत्साहित नक्सलियों ने शुक्रवार को ऐलान किया है कि वोट डालने वालों को वे हाथ काट डालेंगे। महाराष्ट्र में आगामी 13 अक्टूबर को होनेवाले मतदान का बहिष्कार करने के लिए माओवादियों ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में जगह-जगह पोस्टर लगा रखे हैं जिसमें मतदान का बहिष्कार करने की चेतावनी दी गयी है....माओवादियों का दावा: कब्जे में हैं कई पुलिसवाले
झारखण्ड में सब-इंस्पेक्टर फ्रांसिस की गला रेतकर निर्मम हत्या करने के बाद माओवादियों ने दावा किया है कि अभी उनके कब्जे में और कई पुलिसवाले हैं जो कि माओवादियों की "जेलों" में बस्तर में बंद हैं. ...समय की पुकार, सूबे में हो पुलिस सुधार
नक्सली हिंसा के मामले में झारखण्ड सबसे अधिक प्रभावित राज्यों में से एक है. अभी हाल में ही गृहमंत्री पी चिदंबरम भी इसीलिए झारखण्ड आये थे ताकि वे दिखा सकें कि नक्सलवाद से लड़ाई में वे राज्य को हर संभव मदद दे रहे हैं. लेकिन फ्रांसिस इनदवार की हत्या खुद पुलिस प्रशासन पर कई गंभीर सवाल उठा रहा है. इनदवार को 30 सितंबर को खूंटी से अगवा किया गया था. ...Log in
- आलोक तोमर की आपबीती
- वह गुजरात जिसे आप नहीं जानते
- हिन्दू आतंकवाद का अतिवाद
- बाबा रामदेव का दांव
- गोरक्षा सनातन धर्म है, किन्तु पशु गाय धर्म नहीं
राज जी मैंने अक्सर देखा है आप उपेक्षितों के दर्द को बयान करने वालों को हमेशा हौंसला देते हैं.
आपकी संवेदनशीलता हो सलाम !!
शिरीष जी ,
हमेशा की तरह देश के उपेक्षितों के दर्द की खंगाल और अभिव्यक्ति .
आपके प्रयासों को नमन !
जनाब पहले आप अपने सामान्य ज्ञान को आकिये फिर लेख लिखने चलिए..
लेख घर में अपनी डायरी में नोट लिखने का कम नही है .. लेख ...
अरे ये तो होना ही था.. सड़ा अनाज तो मन्मोहन सिंह और शरेड पावाड़ खा रहे है.. जो बचा उसे फेंक रहे है..
एक दिन आएगा ...
संजय जी सविनय निवेदन है की लेखो का चुनाव करते समय विस्फोट साईट की गरिमा का भी ध्यान रखें |
गुस्ताखी के लिए माफ़ी
आपका ...

