Tag: नक्सलवाद
परवान चढ़ता सत्ता का खूनी संघर्ष
फ्रांसिस की हत्या बहुत ही खतरनाक संकेत है। माओवादी राजनीति, निश्चित रूप से हिंसा का सहारा ले रही है। धनाढ्य वर्गो की हित पोषक भारत की राजनीतिक पार्टियां अपने वर्गों को लाभ पहुंचाने में जुटी हुई हैं। यहां यह ध्यान देना जरूरी है कि माओवादियों के लाल कॉरिडर में पड़ने वाले राज्यों में राज करने वाली सभी पार्टियों का वर्ग चरित्र वही है जो किसी भी सामंतवादी साम्राज्यवादी पार्टी की सोच का होता है।...नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक लड़ाई
सितंबर का महीना पी चिदम्बरम के जीवन में बहुत महत्वपूर्ण है. उनका जन्म और राजनीतिक जन्म दोनों ही सितंबर के महीने में हुआ है. उनका जन्म 16 सितंबर 1945 को हुआ तो राजनीतिक रूप से राष्ट्रीय परिदृश्य पर भी वे सितंबर महीने में ही उभरे जब 21 सितंबर 1985 को तत्कीलन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने उन्हें देश का वाणिज्य राज्यमंत्री नियुक्त किया. निजी जीवन के 64 और और सार्वजनिक जीवन के 24 साल पूरे कर चुके पी चिदंबरम के जीवन में एक बार फिर सितंबर ही सबसे महत्वपूर्ण महीना होकर उभरा है. सितंबर 2009 में उन्होंने नक्सलवाद के खिलाफ देश में अब तक की सबसे भीषण और निर्णायक लड़ाई का ऐलान किया है जो संभवतः श्रीलंका में तमिलों के खिलाफ लड़ी गयी लड़ाई की तर्ज पर अब तक का सबसे बड़ा आपरेशन होगा....पकड़ा गया छत्रधर महतो
लालगढ़ में पुलिस संत्रास प्रतिरोध कमेटी बनाकर सुरक्षा एजंसियों को छकानेवाला छ्त्रधर महतो आखिरकार शनिवार को पुलिस की जाल में फंस गया. पुलिस ने उसे उस वक्त धर दबोचा जब वह एक स्थानीय टीवी चैनल को इंटरव्यू देने की तैयारी कर रहा था. पुलिस की पकड़ से दूर रहनेवाला महतो टीवी चैनलों को लगातार इंटरव्यू देता रहा है....और आप कहते हैं नक्सलवाद बढ़ रहा है
गुजरात के पंचमहल में तीन जुलाई को जो हुआ इस बात का संकेत है कि सरकारी मशीनरी अपने गलत फैसलों से कैसे नक्सलवाद पैदा करती है....मानवाधिकार बचाने की कमाई
दंतेवाडा़ के सलवा जुडूम कैंप को देखने के बाद मैंने रायपुर की ओर कूच कर दिया। मैं जानना चाहता था कि भारी-भरकम बजट और विदेशी सहयोगियों के सहारे चलनेवाले मानवाधिकार आंदोलनों का जमीनी जुड़ाव क्या है और ऐसा करने के पीछे उनके अपने तर्क क्या हैं? ...जुलुम नहीं है सलवा-जुड़ुम
मैं उम्मीद कर रहा था कि कैंप में युद्ध के राहत कैंप की तरह बुरे हालात होंगे. लेकिन वहां पहुंचते ही जो नजारा दिखा वह मेरी धारणा के उलट था. ...मुरिया दरबार का करमा नृत्य है सलवा जुडूम
सलवा जुड़ुम ना कोई ब्राण्ड है और न ही गांधी को ब्राण्ड एम्बेसडर जैसे शब्दों से दूषित करने की जरूरत. ये दोनों शब्द बिल्कुल बाजार की उपज है....- आलोक तोमर की आपबीती
- वह गुजरात जिसे आप नहीं जानते
- हिन्दू आतंकवाद का अतिवाद
- सिमी से भी खतरनाक है संघ का स्वरूप
- बाबा रामदेव का दांव
बहुत अच्छा व सच्चाईयो पर आधारित लेख है। सेकुलर भारत के निर्माँण मे ऐसे लेख का अहम योगदान होगा. संपादक- आपकी आवाज़.कांम
बहुत अच्छा व सच्चाईयो पर आधारित लेख है। सेकुलर भारत के निर्माँण मे ऐसे लेख का अहम योगदान होगा. संपादक- आपकी आवाज़.कांम
सिक्के के दुसरे पहलू की तरफ इशारा कर अनिल ज्जी ने सदा की तरह सार्थक हस्तक्षेप किया है. बहुत सशक्त लेखन. निश्चय ही लेख में ...
सिक्के के दुसरे पहलू की तरफ इशारा कर अनिल ज्जी ने सदा की तरह सार्थक हस्तक्षेप किया है. बहुत सशक्त लेखन. निश्चय ही लेख में ...
सिक्के के दुसरे पहलू की तरफ इशारा कर अनिल ज्जी ने सदा की तरह सार्थक हस्तक्षेप किया है. बहुत सशक्त लेखन. निश्चय ही लेख में ...

