Tag: गणतंत्र
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भारतीय गणतंत्र का गणित
भारत गणतंत्र अपने 60 वें पायदान पर पहुंच रहा है। इस अवसर पर यह पूछना स्वाभाविक है कि क्या एक गणतंत्र के रूप में हम सफल रहे है? हमारी संवैधानिक व्यवस्था ने क्या हमको एक राष्ट्र के रूप में सफल साबित किया है? क्या हमारा संविधान सफल हुआ है? ...संविधान के मूल ढांचे का मिथक
आज जब गणतंत्र के साठ साल पूरा होने के मौके पर संविधान की समीक्षा पर देश में बहस चल रही है तो संविधान के मूल ढांचे के सिद्धान्त के गुण-दोष पर भी विस्तार से चर्चा होनी चाहिए, ताकि इस आकर्षक तर्क के सभी आयामों को सबके सामने लाया जा सके।...हमारा संविधान जो हमारा नहीं है
26 जनवरी 2010 को भारत एक गणतंत्र के रूप में 60 साल पूरे कर रहा है. अर्थात संवैधानिक आधुनिक भारत के 60 साल पूरे हो रहे हैं. भारतीय गणतंत्र के 60 साल पूरा होने के मौके पर हम देश के ख्यातनाम पत्रकारों, लेखको और संविधानविदों की एक लेखमाला प्रकाशित कर रहे हैं जो भारतीय गणतंत्र के आधार संविधान की समीक्षा करते हैं- संपादक...संवाद का एक बड़ा आंदोलन चलाओ, आतंकवाद खत्म हो जाएगा
हिंसा की आंधी हर स्तर पर चारों ओर उठ रही है जो मनुष्य के अंदर जितनी तरह की कमजोरियां हैं, उसको उभारने में लगी हैं. सिर्फ किसी को मारने-पीटने भर का सवाल नहीं है, इस हिंसा का दायरा बहुत बड़ा है. एक तरह से पूरे समाज का पाशवीकरण करने की कोशिश हो रही है ताकि समाज में कोई मूल्य ऐसा बचे नहीं जिसपर पांव टिकाकर समाज खड़ा हो सके. इस तरह की एक फिसलन वाली जमीन तैयार करने की कोशिश की जा रही है कि आदमी कहीं अपना पांव टिका ही न सके. ...मिश्रित संस्कृति या मायाजाल?
क्या भारत सचमुच एक मिश्रित संस्कृतिवाला देश है? या फिर ऐसा किसी खास उद्येश्य के तहत स्थापित किया जा रहा है. दिल्ली में आयोजित एक सभा में जो विद्वतजन मिले उनकी बहुत सी बातें सोचने पर मजबूर करती हैं. किसी को शक नहीं कि भारत एक खास प्रकार की जीवनशैली जीनेवाले लोगों का देश है जो रूढ़ होकर आज अधिकांश हिन्दू के रूप में पहचाना जाता है. जिस प्रकार के प्रतिक्रियावादी हिन्दुत्व को भारतीय जीवनदर्शन के रूप में प्रचारित किया जा रहा है उसे जस के तस स्वीकार करने में बहुत पेंच है. ...यह भारतमाता कौन है?
अंग्रेजों से लड़ते समय सारे भारत ने `भारत माता की जय´ का नारा लगाया था। ऐसी ही नारेबाजी के बीच पं. नेहरू ने एक सभा में भीड़ से पूछा ``यह भारत माता कौन है?´´ एक व्यक्ति ने कहा कि यह धरती। पंडित जी ने पूछा ``कौन सी धरती? किसी खास गांव की? जिले की? या पूरे भारत की?´´ फिर पं. नेहरू ने स्वयं उत्तर दिया, ``भारत वह सब कुछ है जो वे सोचते हैं लेकिन इससे भी कुछ ज्यादा है- पर्वत, नदियां, वन, विशाल खेत, मैदान और आप सब, हम सब। आप भारत माता के अंग हैं। आप स्वयं भारत माता है।´´ ...
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- आलोक तोमर की आपबीती
- वह गुजरात जिसे आप नहीं जानते
- हिन्दू आतंकवाद का अतिवाद
- सिमी से भी खतरनाक है संघ का स्वरूप
- बाबा रामदेव का दांव
बहुत अच्छा व सच्चाईयो पर आधारित लेख है। सेकुलर भारत के निर्माँण मे ऐसे लेख का अहम योगदान होगा. संपादक- आपकी आवाज़.कांम
बहुत अच्छा व सच्चाईयो पर आधारित लेख है। सेकुलर भारत के निर्माँण मे ऐसे लेख का अहम योगदान होगा. संपादक- आपकी आवाज़.कांम
सिक्के के दुसरे पहलू की तरफ इशारा कर अनिल ज्जी ने सदा की तरह सार्थक हस्तक्षेप किया है. बहुत सशक्त लेखन. निश्चय ही लेख में ...
सिक्के के दुसरे पहलू की तरफ इशारा कर अनिल ज्जी ने सदा की तरह सार्थक हस्तक्षेप किया है. बहुत सशक्त लेखन. निश्चय ही लेख में ...
सिक्के के दुसरे पहलू की तरफ इशारा कर अनिल ज्जी ने सदा की तरह सार्थक हस्तक्षेप किया है. बहुत सशक्त लेखन. निश्चय ही लेख में ...
