Tag: मुंबई-की-जंग
आतंक के 59 घंटे और एक रिपोर्टर का हलफनामा
पिछले साल मुंबई में हुए आतंकी हमले को समाचार चैनलों ने जिस तरह से रिपोर्ट किया था उस पर बाद में कई सवाल खड़े किये गये थे. लेकिन खुद एक रिपोर्टर ने उन 59 घण्टों में क्या महसूस किया? आतंक की उन घड़ियों को रिपोर्ट करते समय एक रिपोर्टर के ऊपर क्या बीता था? ऐसे ही एक रिपोर्टर थे जीतेन्द्र दीक्षित जो कि स्टार न्यूज के वरिष्ठ संवाददाता के बतौर उस घटनाक्रम की रिपोर्टिंग कर रहे थे. साल भर बाद मुंबई हमलों की रिपोर्टिंग का अनुभव वे विस्फोट के पाठकों के साथ बांट रहे हैं....अंतुले जिन्ना हैं या दाऊद?
बैरिस्टर अतुंले विशुद्ध सेकुलर नेता रहे है। राष्ट्रवादी व्यक्ति रहे है। फिर क्या मजबूरी थी कि भवानी तलवार और कोहिनूर हीरा लंदन से वापस लाने का अभियान चलाने वाले अतुंले अचानक जमात-उद-दाव के सुर में सुर मिलाने लगे? इसके लिए अतुंले जिस संप्रदाय से आते हैं पहले उसकी सेकुलर संस्कृति पर एक नजर दौड़ाते हैं। खुद अतुंले के सियासी कैरियर की पृष्ठभूमि में झांकते हैं। तभी हमें समझ में आएगा कि किस तरह बैरिस्टर अतुंले सियासी दाऊद इब्राहिम के रूप में अवतरित हो रहे हैं....आतंकवादियों से ज्यादा खतरनाक है मीडिया
मीडिया में ऐसी खबरें आ रही हैं कि मैं मुंबई में हुए भयानक आतंकवादी हमले पर कोई फिल्म बनाना चाहता हूं जिसमें मैं रितेश देशमुख को हीरो रखूंगा इसीलिए मैं उनके पिता श्री विलासराव देशमुख के साथ घटनास्थल पर गया था. यह निश्चित रूप से मेरे लिए बहुत चिंता की बात है. ये बातें पूरी तरह से निराधार हैं....घर बैठो और घाव चाटो
हमारी मुंबई कहती है कि पाकिस्तान पर तत्काल हमला करो और उसे मिट्टी में मिला दो। आतंकवाद से लड़ने का यही अमेरिकी तरीका है. लेकिन अमेरिका कहता है कि पागलपन मत करो। हमारी तरह तुम उसके लायक नहीं हो। पागल होने के लिए हथियार और पैसे चाहिए जो तुम्हारे पास नहीं है। घर बैठो और घाव चाटो।...अ चुतिया नंदन अर्थात अच्युतानंदन
जी हां. अच्युतानंदन. केरल के 85 वर्षीय मुख्यमंत्री. अपने एक बयान से 'देशभक्तों' के कोपभाजन के शिकार बने हुए हैं. मुंबई में आतंकी हमले के बाद वे शहीद मेजर संदीप उन्नीकृष्णन के घर सांत्वना देने गये थे. मेजर के दुखी पिता ने उन्हें यह कहते हुए घर में नहीं घुसने दिया कि राजनीतिक लोग कुत्ते होते हैं. यह अच्युतानंदन ने भी सुना कि उन्हें कुत्ता कहा जा रहा है. उस समय तो वे कुछ नहीं बोले. वापस लौट गये. लेकिन अगले दिन बंगलौर में ही एक टीवी पत्रकार ने उनसे बात की. उन्होंने टीवी पत्रकार से कहा- ...नशे से जुड़ा नफरत का कारोबार
पाकिस्तानी खुफिया एजंसी आईएसआई और माफिया डान दाऊद इब्राहिम कासकर के अटूट बंधन का राज क्या है? आखिर क्या कारण है कि पाकिस्तान में हुक्मरान बदलते रहे, तानाशाही और लोकतंत्र आते-जाते रहे लेकिन दाऊद के साम्राज्य पर कभी कोई असर नहीं पड़ा? तो सुनिये. इस अटूट दोस्ती का राज है ४०० अरब डालर का नारकोटिक्स का व्यापार जिसका ८० फीसदी अफगानिस्तान और पाकिस्तान से होता है. यह ४०० बिलियन डालर दुनिया के कुल औद्योगिक उत्पादन का ८ फीसदी है....मुंबई का जीवित आतंकवादीः आमिर कसाब
गिरगांव चौपाटी पर पकड़े गये आमिर आजम कासव उर्फ मोहम्मद अजमल उर्फ मोहम्मद आमिर कसाब की उम्र-21 साल है. अकेला जीवित आतंकवादी जो मुंबई हमलों में पाकिस्तान के हाथ का सबसे जीता-जागता सबूत बन गया है. मुंबई पुलिस की जाबांजी और बहादुरी के परिणामस्वरूप पकड़ में आया कसाब अब वह सब बता रहा है जिसे जरदारी साहब चाहकर भी नहीं नकार सकते. थोड़ा कसाब के बारे में विस्तार से जान लेते हैं. ...'वे' सफल क्यों हुए?
मुंबई, लक्षद्वीप, पोरबंदर और कोंकण के तटों पर पिछले दो दशकों से सिर्फ और सिर्फ डी कंपनी का कब्जा है. 1993 में दुनिया में पहली बार श्रृंखलाबद्ध विस्फोट मुंबई में हुए थे. इन विस्फोटो में दाऊद की क्या भूमिका थी? आरडीएक्स पाकिस्तानी सेना ने दिया था, ट्रेनिंग पाकिस्तानी सेना ने दिया था. डी कंपनी ने लाजिस्टिक का सपोर्ट दिया था. प्रशिक्षण के लिए टिकट और वीजा उपलब्ध कराना तथा आरडीएक्स और एक-56 जैसी राईफलें को मुंबई तक लाने का काम भी डी कंपनी ने किया था....पाक मीडिया का पलटवारः हिन्दुओं ने कराया मुंबई पर हमला
27 नवंबर की सुबह अखबारों में एक फोटो छपी थी जो अजमल आमिर कसाव की थी. कसाब जिस हाथ में एक-47 लेकर आगे बढ़ रहा था उस हाथ में रक्षा सूत्र बंधा हुआ था. वही रक्षासूत्र जो आमतौर हिन्दू तीर्थों में भक्तों के हाथ में बांध दिया जाता है. हो सकता है उस दिन यह बात किसी ने नोटिस नहीं की लेकिन पाकिस्तान मीडिया ने पलटवार करने के लिए उसी तर्क को सामने रख दिया है. ...सबको पता था कि हमला होगा
मुंबई में आतंकी हमले की पूर्व आशंका नहीं बल्कि जानकारी थी. हम यहां ऐसे कुछ बयान दे रहे हैं जो हमारे देश के महत्वपूर्ण मंत्रालयों का जिम्मा संभालने वाले मंत्रियों ने समय-समय पर दिये थे. इन बयानों से साफ है कि मुंबई पर बड़े आतंकी हमले की जानकारी सबको थी. इतनी सटीक जानकारी होने के बावजूद हमारे प्रशासन ने कार्यवाही क्यों नहीं की?...- आलोक तोमर की आपबीती
- वह गुजरात जिसे आप नहीं जानते
- हिन्दू आतंकवाद का अतिवाद
- सिमी से भी खतरनाक है संघ का स्वरूप
- बाबा रामदेव का दांव
बहुत अच्छा व सच्चाईयो पर आधारित लेख है। सेकुलर भारत के निर्माँण मे ऐसे लेख का अहम योगदान होगा. संपादक- आपकी आवाज़.कांम
बहुत अच्छा व सच्चाईयो पर आधारित लेख है। सेकुलर भारत के निर्माँण मे ऐसे लेख का अहम योगदान होगा. संपादक- आपकी आवाज़.कांम
सिक्के के दुसरे पहलू की तरफ इशारा कर अनिल ज्जी ने सदा की तरह सार्थक हस्तक्षेप किया है. बहुत सशक्त लेखन. निश्चय ही लेख में ...
सिक्के के दुसरे पहलू की तरफ इशारा कर अनिल ज्जी ने सदा की तरह सार्थक हस्तक्षेप किया है. बहुत सशक्त लेखन. निश्चय ही लेख में ...
सिक्के के दुसरे पहलू की तरफ इशारा कर अनिल ज्जी ने सदा की तरह सार्थक हस्तक्षेप किया है. बहुत सशक्त लेखन. निश्चय ही लेख में ...

