Tag: मुंबई-की-जंग
आतंकी हमला हुआ कैसे?
अगर आप मुंबई पर हुए आतंकी हमले की तह में जाएं तो सरकारी एजंसियों द्वारा की गयी अंतहीन मनमानियां और लापरवाही सामने दिखाई देगी. मसलन, मार्च २००६ में अमेरिकी राष्ट्रपति जार्ज बुश की यात्रा के बाद अल-कायदा के प्रमुख ओसामा बिन लादेन का एक आडियो संदेश जारी हुआ था जिसमें लादेन ने यहूदियों, ईसाईयों और हिन्दुओं को निशाना बनाने की बात कही थी. इसके बाद ही पाकिस्तान और बांग्लादेश के दर्जनों आतंकी संगठन जो अलकायदा के तहत काम करते हैं उन्होंने भारत को निशाना बनाना शुरू कर दिया. लादेन की उस चेतावनी के बाद भारत सरकार को भी आतंक के खिलाफ राष्ट्रीय रणनीति पर काम शुरू करना चाहिए था....मीडिया का नया मंत्रः आतंकवाद
ढहते किलों के बीच इलेक्ट्रानिक मीडिया को नया मंत्र मिल गया है. वह मंत्र है- आतंकवाद. आतंकवाद से इस लड़ाई में मीडिया सीधे जनता के साथ मिलकर मोर्चेबंदी कर रहा है. यह मोर्चेबंदी अनायास नहीं है और ऐसा भी नहीं है कि अचानक ही इलेक्ट्रानिक मीिडया नैतिक रूप से बहुत जिम्मेदार हो गया है. कारण दूसरे हैं जो कि उसकी व्यावसायिक मजबूरियो से जोड़ते हैं. वैश्विक मंदी के इस दौर में आतंकवाद ही एक ऐसा मंत्र है जो ज्यादा देर तक दर्शकों को बुद्धूबक्से से जोड़कर रख सकता है. इलेक्ट्रानिक मीडिया इस मौके को किसी कीमत पर नहीं चूकना चाहता....अलकायदा, लश्कर और दाऊद ने मिलकर किया हमला
अब यह बात ज्यादा साफ हो गयी है कि मुंबई पर हुए आतंकी हमले के पीछे अलकायदा, लश्कर और आईएसआई का हाथ है. जो शुरूआती सबूत मिले हैं उसके आधार पर विदेशमंत्री पहले ही पाकिस्तानी विदेश मंत्री को बता चुके हैं कि मुंबई पर हुए आतंकी हमले के तार पाकिस्तान से जुड़ रहे हैं. खुद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री से बातचीत में साफ संकेत दिये हैं जिसका नतीजा है कि पाकिस्तानी आईएसआई के उप प्रमुख भारत आ रहे हैं. केवल पाकिस्तान ही नहीं बल्कि इजरायल और अमेरिका के भी खुफिया व्यूरो के अधिकारियों का जमावड़ा भारत में लगना शुरू हो गया है. ...अमीरी पर आतंकी हमले के बाद
हर बार आतंकी हमले के बाद भारत अब तक रस्मी प्रतिक्रिया ही देता आया है, सिर्फ दो अवसरों को छोड़कर. एक तब जब संसद पर आतंकी हमला हुआ था और एक अब जब मुंबई के मंहगे होटल और मंहगे लोगों को निशाना बनाया गया है. "इनफ इज इनफ" का मुहावरा इससे पहले कभी सुनने में नहीं आया. तब भी नहीं जब आसाम में सबसे भीषण आतंकी हमला हुआ. दुर्भाग्य से उस दिन भी मीडिया और प्रशासन के लिए साध्वी प्रज्ञा ही मुद्दा थी न कि असम में मारे गये सामान्य नागरिक. लेकिन चंद दिनों के अंतराल पर मुंबई में हुआ आतंकी हमला "इनफ इस इनफ" का जुमला चला देता है....हम युद्धभूमि में हैं
मुंबई में चौबीस घण्टे से हमारे जाबांज जवान आतंकवादियों से लोहा ले रहे हैं. यह मुटभेड़ अगले कुछ घण्टों तक और जारी रहेगी. अब तक तीन वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों सहित १४ पुलिस के जवान और १०० से अधिक नागरिक अपनी जान गवां चुके है. जी न्यूज ने खुलासा किया है कि आतंकी १९-२० दिसंबर को मुंबई का दौरा करके जा चुके थे. सितंबर में ही एक विदेशी खुफिया एजंसी ने चेताया था मुंबई पर बड़ा हमला हो सकता है. ...- आलोक तोमर की आपबीती
- वह गुजरात जिसे आप नहीं जानते
- हिन्दू आतंकवाद का अतिवाद
- सिमी से भी खतरनाक है संघ का स्वरूप
- बाबा रामदेव का दांव
बहुत अच्छा व सच्चाईयो पर आधारित लेख है। सेकुलर भारत के निर्माँण मे ऐसे लेख का अहम योगदान होगा. संपादक- आपकी आवाज़.कांम
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सिक्के के दुसरे पहलू की तरफ इशारा कर अनिल ज्जी ने सदा की तरह सार्थक हस्तक्षेप किया है. बहुत सशक्त लेखन. निश्चय ही लेख में ...
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