Tag: पाकिस्तान
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तालिबान से पाकिस्तान कितना परेशान?
पाकिस्तान में तालिबान के बढ़ते दबदबे को लेकर दुनिया भर की मीडिया परेशान है. भारत में भी मीडिया तालिबान के बढ़ते दबदबे की रिपोर्टिंग में कोई कमी नहीं छोड़ रही है. लेकिन क्या खुद पाकिस्तान तालिबान के बढ़ते दबदबे को लेकर चिंतित है? ऐसी खबरें आ रही हैं कि पाकिस्तान बुनेर में तालिबान के ऊपर सैन्य कार्यवाही करने का मन बनाया है. लेकिन तालिबान को लेकर पाकिस्तान इतना ही आतंकित है तो फिर स्वात घाटी में उसने शरीयत और तालिबानी प्रशासन को मान्यता क्यों दी? लाल मस्जिद के इमाम को जेल से रिहा क्यों कर दिया जबकि वे कट्टर तालिबान समर्थक हैं. ...अफगानिस्तान बनने की राह पर पाकिस्तान
कहते है कि इतिहास अपने आप को दोहराता है. अफगानिस्तान में जो कुछ पिछले ३० सालो में हुआ वो पाकिस्तान का किया कराया ही रहा, इसमें किसी शक की गुंजाइश नही रही. लेकिन जो पाकिस्तान ने बोया वो अब काट रहा है. दरअसल जो एके -४७, राकेट लांचर, मशीनगन पाकिस्तान ने कबाइलियो, पठानो, मुजाहिदीनो और तालिबानियो को दिये थे, वो उन्होने अब अपने आकाओं की तरफ ही मोड दिये है. तो सवाल ये है कि क्या पाकिस्तान भी अफगानिस्तान की राह पर है?...पाक में नापाक राजनीति
पाकिस्तान की भी क्या विडंबना है! भले ही वहां समय-समय पर सत्ता बदलती रही हों लेकिन उसे तानाशाही, अवसरवाद और राजनैतिक कदाचरण से कभी मुक्ति नहीं मिलती। जनता ने जब-जब वहां उपलब्ध गिने-चुने विकल्पों में से कुछ प्रगतिशील, आधुनिक और लोकतांत्रिक किस्म के नेताओं को सत्ता सौंपी, उन्होंने दीर्घकालीन आधार पर उसे निराश ही किया।...पाक से पहली लड़ाई में परास्त
मुंबई पर आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच पहले दौर का जो कूटनीतिक युद्ध शुरू हुआ था, उसमें भारत लगभग हार गया है. सामरिक भूमि में पाकिस्तान कहां ठहरता है यह तो बाद की बात है लेकिन आज की कूटनीतिक परिस्थितियों में पाकिस्तान अपने नौसिखिए नेताओं के भरोसे भी भारत पर हावी दिखाई देता है. यह भारत के राजनेताओं की ही नहीं बल्कि यहां के कूटनीतिज्ञों की भयावह हार है. मुंबई हमले से पहले खुफिया एजंसियों की नाकामयाबी सामने आयी थी तो हमले के बाद भारत का कूटनीतिक वर्ग पाकिस्तान के सामने बुरी तरह परास्त हो गया है....जरदारी पर भरोसा करने में हर्ज क्या है
पाकिस्तान पर हमला बोल देना चाहिए। पाकिस्तान से सारे रिश्ते खत्म कर लेना चाहिए। मुंबई पर हुए आतंकवादी हमले और उसके बाद इसमें पाकिस्तानी धरती के इस्तेमाल के साफ सबूत के बाद इस तरह की आवाजें तेज हो गई हैं। राजनीतिक नफा-नुकसान के लिहाज से ही सभी पार्टियों के नेता सड़क पर बयान दे रहे हैं। हां, अच्छी बात ये है कि संसद के भीतर आतंकवाद पर हुई चर्चा में बरसों बाद भारतीय नेता की ही तरह सारी पार्टियों ने बात की। कांग्रेस-भाजपा-लेफ्ट के चिन्हों से भले ही जनता उन्हें अलग नहीं कर पा रही है। अब सवाल ये है कि उस दिन की चर्चा के बाद क्या।...क्या पढ़ा रहा है पाकिस्तान?
पाकिस्तान में इस्लामिक आतंकवाद की जड़ें क्या केवल चरमपंथी मदरसों और तंजीमी शिक्षण प्रणाली में हैं? या फिर हकीकत कुछ और है. पाकिस्तान के राष्ट्रपति "स्टेटलेस आतंकवाद" की बात कर रहे हैं लेकिन खुद स्टेट अपने बच्चों को, पाकिस्तान के भविष्य को क्या पढ़ा रहा है? पाकिस्तान में स्कूली शिक्षा के लिए पाठ्यक्रम तैयार करने का काम इस्लामिक रिपब्लिक आफ पाकिस्तान की संस्था फेडरल बोर्ड आफ इंटरमीडिएट एण्ड सेकेण्डरी एजूकेशन का है. जैसा कि पाकिस्तान की स्थापना के साथ ही "इस्लामिक रिपब्लिक" जुड़ा हुआ है इसलिए यहां स्कूली पाठ्यक्रम में इस्लामियत शिक्षा का अनिवार्य हिस्सा है. ...जरदारी के ज़र और ज़ेवर
जरदारी के राष्ट्रपति बनने में शुरू से ही किसी को संदेह नहीं था, परवेज मुशर्रफ और नवाज शरीफ दोनों ये जानते थे। उन्होंने अपने उम्मीदवार केवल चुनाव की औपचारिकता निभाने के लिए खड़े किए थे और शायद यह बताने के लिए कि हम जरदारी से पूरी तरह सहमत नहीं है। लेकिन आसिफ जरदारी पाकिस्तान के राष्ट्रपति की भूमिका का निर्वाह कैसे करेंगे ये देखना दिलचस्प होगा। उनके सामने अनेक विरोधाभास हैं, जिनमें से बिना फिसले सही रास्ते निकालना आसान नहीं है। ...
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- आलोक तोमर की आपबीती
- वह गुजरात जिसे आप नहीं जानते
- हिन्दू आतंकवाद का अतिवाद
- सिमी से भी खतरनाक है संघ का स्वरूप
- बाबा रामदेव का दांव
बहुत अच्छा व सच्चाईयो पर आधारित लेख है। सेकुलर भारत के निर्माँण मे ऐसे लेख का अहम योगदान होगा. संपादक- आपकी आवाज़.कांम
बहुत अच्छा व सच्चाईयो पर आधारित लेख है। सेकुलर भारत के निर्माँण मे ऐसे लेख का अहम योगदान होगा. संपादक- आपकी आवाज़.कांम
सिक्के के दुसरे पहलू की तरफ इशारा कर अनिल ज्जी ने सदा की तरह सार्थक हस्तक्षेप किया है. बहुत सशक्त लेखन. निश्चय ही लेख में ...
सिक्के के दुसरे पहलू की तरफ इशारा कर अनिल ज्जी ने सदा की तरह सार्थक हस्तक्षेप किया है. बहुत सशक्त लेखन. निश्चय ही लेख में ...
सिक्के के दुसरे पहलू की तरफ इशारा कर अनिल ज्जी ने सदा की तरह सार्थक हस्तक्षेप किया है. बहुत सशक्त लेखन. निश्चय ही लेख में ...
