Tag: आमचुनाव-2009
कांग्रेस का राहुल उदयः कितना सच, कितना झूठ
16 मई को अभी चुनाव परिणाम आने शुरू भी नहीं हुए थे. सिर्फ रूझान आ रहे थे जो यह बता रहे थे कि कांग्रेस के नेतृत्व में यूपीए बड़ा उलटफेर करने जा रही है. सुबह के ग्यारह बजे तक जो रुझान आ रहे थे वे बता रहे थे कि कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभर रही है. लेकिन रुझान आते ही कांग्रेस के नेता दिग्विजय सिंह ने कहा कि कांग्रेस ने जो सफलता अर्जित की है वह राहुल गांधी जी की कड़ी मेहनत का परिणाम है. इसके थोड़ी देर बार अंबिका सोनी का बयान आया कि राहुल गांधी जी को इस भारी जीत का सारा श्रेय देना चाहिए और पुरस्कार भी....युवा राजनीति के नाम पर वंशवाद को बढ़ावा
इस चुनाव में देश के 4.30 करोड़ मतदाता ऐसे थे जिन्होंने पहली बार वोट डाला और देश के युवाओं ने जो फैसला सुनाया है उसके चलते 15 वीं लोकसभा में युवा सांसदों की संख्या बढ़ी है। इसके चलते लोकसभा में 226 ऐसे सांसद चुनकर आए हैं जिनकी आयु 50 साल से कम है। देश में युवा राजनीति का ढोल जमकर पीटा जा रहा है. कांग्रेस के जितने युवा सांसद जीते हैं उनमें से अधिकांश को मंत्री बनाने की बात चल रही है. लेकिन क्या सचमुच ऐसा है कि देश की राजनीति में युवाओं की निर्णायक भागीदारी हो रही है? आप पूरी खोजबीन करेंगे तो पायेंगे कि युवा राजनीति के नाम पर पार्टियों के नेता अपने ही परिवार की अगली पीढ़ी को राजनीति में स्थापित कर रहे हैं. और यह सब बड़ी चतुराई से किया जा रहा है....तमिलनाडु के दलित ईसाई मुद्दा क्यों नहीं बनते?
आम चुनाव के पांचवे चरण में तमिलनाडु की सभी 39 सीटों पर 13 मई को मतदान होगा. तमिलनाडु के चुनावी संग्राम में दलित ईसाइयों से सबंधित मुद्दे हाशिए पर है कांग्रेस समेत तमाम क्षेत्रीय पार्टिया धर्मांतरित ईसाइयों के बुनयादी मसलों से ध्यान हटाकर उन्हें अनुसूचित जातियों की सूची में शामिल करने का झुनझुना थमा रही है। पिछले कई दशकों से राज्य के दलित ईसाई चर्च एवं समाज में भेदभाव का शिकार हो रहे है। गैर ब्राह्राणवाद के संस्थापक पेरियार और अन्नादुराय के समय से ही वहां दलित जातिया आत्मसम्मान के लिए संघर्षरत रही है।...कौन बनेगा प्रधानमंत्री?
चुनाव के चार चरण बीत गये. लगभग एक महीने पहले जब चुनाव की दुंदुभी बजी थी उस समय अतुल्य भारत का नारा देकर कांग्रेस और उसके नेतृत्व वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सत्ता में पुनः वापसी के प्रति कुछ ज्यादा ही आश्वस्त थी. चैत्र और बैशाख की तपती गरमी में जब उनके नेता लुटियन की दिल्ली छोड़कर चुनावी जमीन पर उतरे तो धूल और पसीने ने उनका आत्मविश्वास इतना डिगा दिया कि अब उनकी समझ में नहीं आ रहा है कि 16 मई की दुपहरी के बाद उनकी पार्टी के समर्थन का कटोरा किसके सामने फैलायेगी? जो लोग एक महीने पहले अपने अपने राजनीतिक पांडित्य का प्रभाव मानकर लालकृष्ण आडवाणी के प्रधानमंत्री बनने की सारी संभावनाओं को खारिज कर चुके थे वे भी अब मनमोहन सिंह की तुलना में आडवाणी की संभावना को बेहतर मानने लगे हैं. जनता खुद भ्रमित है, उनकी समझ में नहीं आ रहा है आज जिस मनुवादी और सांप्रदायिक के खिलाफ वोट डाल रही है कल अगर वही सरकार बनाने बैठ जाए तो क्या होगा?...बहुजन हिताय सर्वजन दुखाय
यूं तो ये बात जगजाहिर है कि गुंण्डे-माफिया हाथी के महावत बन गए हैं। पर चुनावों में लाज-शरम ही सही उनको अपने दायरे में रहना पड़ता था। पर पिछले दिनों जिस तरह से इंडियन जस्टिस पार्टी के बहादुर लाल सोनकर की हत्या की गई और फिर सोनकर समाज के वोट को रोकने का जो सर्वसमाज अभियान चलाया जा रहा है वो बहन जी को मंहगा पड़ सकता है। सत्ता के मद में चूर जंगली हाथी के दिल्ली कूच के सर्वजन अभियान में बहुजन का उसके प्रति विक्षोभ बढ़ता ही जा रहा है जो दूसरे चरण के मतदान के दौरान इलाहाबाद, फूलपुर, कौशांबी और बांदा समेत आस-पास की सीटों पर साफ दिखा। ...65 प्रतिशत मतदान, अकाली परेशान
पंजाब में 7 मई को पहले दौर की पोलिंग के बाद अकाली दल की परेशानी बढ़ गई है। आरंभिक सूचना के अनुसार राज्य के चार लोकसभा सीटों पर हुए मतदान में कांग्रेस ने अकाली दल पर शुरूआती बढ़त बना ली है। ये चारो सीटें कांग्रेस और अकाली दल भाजपा गठबंधन की प्रतिष्ठा की सीट है। इनमें से दो सीटों पर पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के परिवार की ही प्रतिष्ठा दांव पर है जबकि एक सीट भठिंडा पर वर्तमान मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के परिवार की प्रतिष्ठा दांव पर है। पटियाला से अमरिंदर सिंह की पत्नी प्रणीत कौर, भटिंडा से बेटा रणइंदर सिंह चुनाव मैदान में है जबकि डिप्टी सीएम सुखबीर बादल की पत्नी हरसिमरत कौर भटिंडा से चुनाव मैदान में है।...कांग्रेस की उम्मीदों का राजस्थान
राजस्थान में लोकसभा की सभी 25 सीटों के लिए एक ही चरण में 7 मई को मतदान हो जाएगा. दिसंबर 2008 के विधानसभा चुनावों में अपनी सरकार बना चुकी कांग्रेस को राजस्थान से बहुत उम्मीद है यही कारण है कि पार्टी ने प्रदेश में अपनी पूरी ताकत चुनावी कैम्पेन के दौरान झोंक दी वही विपक्षी भाजपा ये मान कर चल रहीहै कि उसके लिए अपने 21 के आकडे को बनाऐ रखना किसी भी स्थिति में संभव नहीं है जिसके चलते चुनावी कैम्पेन में भी अपनी ताकत झोंकने से उसने परहेज ही किया है। कांग्रेस के लिए ये चुनाव प्रदेश सरकार के अल्प कार्यकाल और मुख्यमंत्री के भविष्य की कसौटी भी बन गये है।...पूर्वांचल के वीर तय करेंगे दिल्ली की तकदीर
दिल्ली की सात लोकसभ सीटों में से पूर्वांचली मतदाता चार सीटों पर निर्णायक भूमिका में होते हैं. कांग्रेस ने पहले छठ पर छुट्टी घोषित कर व भोजपुरी-मैथली अकादमी की स्थापना कर और अब महाबल मिश्र को लोकसभा का टिकट दे कर पूर्वांचलवासियों को अपने पक्ष में करने की पूरी कोशिश की है. चुनाव आते ही राजनीतिक दल दिल्ली में रहने वाले पूर्वांचल यानी बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश के मतदाताओं को लुभाने में लग जाते हैं. पिछले कुछ सालों में जिस तरह से दिल्ली की तस्वीर बदली है, उसमें पूर्वांचल के लोग वोट बैंक के रूप में एक मजबूत ताकत बनके उभरे हैं....हार के कगार पर खड़े हैं राजनाथ
जब हम लोग गाजियाबाद से भाजपा प्रत्याशी राजनाथ सिंह के रोड शो में शामिल हुए तब तक वे एक सभा निपटा चुके थे. रोड शो के लिए जो रूट निर्धारित किया गया था वह उनके संसदीय क्षेत्र की सबसे कमजोर और मुस्लिम बहुल विधानसभा क्षेत्र लोनी थी. सुबह 10 बजे से शाम के चार बजे तक राजनाथ सिंह ने अनवरत यात्रा की. उनके साथ काफिले में कोई 50 के करीब गाड़ियां थी, कुछ पुलिस वाहन थे और कुछ मोटरसाईकिलें मिल-बिछुड़ रही थीं. राजनाथ सिंह के प्रचार को करीब से देखने और गाजियाबाद से उनके हार की अफवाहों की सच्चाई जानने के लिए जरूरी था कि कम से कम दिनभर उनके प्रचार अभियान को नजदीक से देखा जाए. हमने वही किया....हुड्डा का गुड्डा है, प्रचार जमकर होना चाहिए
चर्चा आम है कि मीडिया पैसे लेकर खबरे छाप रहा है. अब तक तीन ऐसे प्रत्याशी सामने आये हैं जिन्होंने खुलकर मीडिया पर आरोप लगाया है कि मीडिया ने उनसे पैसे की मांग की. देश के दो बड़े शीर्ष अखबार दैनिक जागरण और दैनिक भास्कर खुलकर व्यापार कर रहे हैं. घोसी (उत्तर प्रदेश) लोकसभा क्षेत्र के जिन दो प्रत्याशियों ने मीडिया से पैसा मांगने का आरोप लगाया था उसमें दोनों ही प्रत्याशियों ने एक ही अखबार का नाम लिया था- दैनिक जागरण. लेकिन ऐसा ही कुछ इलाहाबाद में भी हुआ. वहां भाजपा प्रत्याशी योगेश शुक्ला ने आरोप लगाया कि दैनिक जागरण उनके प्रचार अभियान की खबरें नहीं छाप रहा है. दैनिक जागरण मानता है कि वह राजनीतिक रूप से भाजपा के करीब है लेकिन भाजपा के ही दो प्रत्याशियों ने आरोप लगाकर दैनिक जागरण को कटघरे में खड़ा कर दिया कि विचारधारा से बड़ा है पैसा. लेकिन इन सब आरोपों से यह तो साबित हो गया कि मीडिया मैनेजमेन्ट खुलकर चुनाव में पैसे का खेल रच रहा है. ...- आलोक तोमर की आपबीती
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- सिमी से भी खतरनाक है संघ का स्वरूप
- बाबा रामदेव का दांव
बहुत अच्छा व सच्चाईयो पर आधारित लेख है। सेकुलर भारत के निर्माँण मे ऐसे लेख का अहम योगदान होगा. संपादक- आपकी आवाज़.कांम
बहुत अच्छा व सच्चाईयो पर आधारित लेख है। सेकुलर भारत के निर्माँण मे ऐसे लेख का अहम योगदान होगा. संपादक- आपकी आवाज़.कांम
सिक्के के दुसरे पहलू की तरफ इशारा कर अनिल ज्जी ने सदा की तरह सार्थक हस्तक्षेप किया है. बहुत सशक्त लेखन. निश्चय ही लेख में ...
सिक्के के दुसरे पहलू की तरफ इशारा कर अनिल ज्जी ने सदा की तरह सार्थक हस्तक्षेप किया है. बहुत सशक्त लेखन. निश्चय ही लेख में ...
सिक्के के दुसरे पहलू की तरफ इशारा कर अनिल ज्जी ने सदा की तरह सार्थक हस्तक्षेप किया है. बहुत सशक्त लेखन. निश्चय ही लेख में ...

