Tag: आमचुनाव-2009
अखिल भारतीय कांग्रेस या परिवार की पार्टी?
यूपीए सरकार के कारण कांग्रेस को पालतू मीडिया उपलब्ध है। पार्टी मां-बेटा-बेटी में सिमट गई है। परिवार की होकर रह गई है। फिर भी उसकी घरेलू तकरार चारदीवारी से बाहर सुनाई पड़ रही है। महात्मा गांधी की शहादत के दिन कांग्रेस कार्य समिति में मां और बेटे में जो कहा सुनी हुई, उसे पार्टी के भोंपू ने भले ही दबाना चाहा हो, पर वह उजागर हो ही गया है। बात यह नहीं है कि राहुल गांधी ने क्या कहा और सोनिया गांधी के चश्मे से झांकती त्योरियों पर उन्होंने क्या सफाई दी। बुनियादी बात तो यह है कि कांग्रेस अपनी राजनीतिक लाइन तय नहीं कर पा रही है।...राजस्थान- न मुद्दा है न मन में उत्साह
देश के हर प्रदेश में राजनीतिज्ञ लोकसभा चुनाव को लेकर तैयारियां चल रही हैं. लेकिन यहां राजस्थान में स्थिित बिल्कुल उलट है. अभी अभी यहां विधानसभा चुनाव संपन्न हुए हैं. प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनी है. चुनाव जीतने के बाद कांग्रेस ने मतदाताओं को धन्यवाद देने के लिए जयपुर में एक रैली भी की लेकिन उस रैली में सोनिया गांधी के मौजूद रहने के बाद भी उम्मीद से कम लोग आये. नेताओं में भी कोई जोश नहीं दिख रहा है. साफ है प्रदेश के नेता अपनी थकान उतार रहे हैं. तो क्या इसका असर आगामी लोकसभा चुनाव के समीकरणों पर पड़ेगा?...डाटकाम की डगर पर राजनीति
अगर आप इंटरनेट उपभोक्ता हैं और दुनिया के सबसे बड़े सर्च इंजन गूगल में बीजेपी टाईप करते हैं तो मुख्यपेज पर ही प्रमुख परिणामों के बगल में आपको एक सर्च रिजल्ट मिलता है जिसमें लिखा है- जानिए कैसी होगी-भाजपा-एनडीए. क्या यह सत्ता में आयेगी? प्रधानमंत्री पद के लिए आडवाणी. और इतना सब लिखे के नीचे एक वेबसाईट का लिंक दिखाई देगा. यह लिंक है- एलकेअडवानी.इन। आप भाजपा खोजने गये थे और आपको आडवाणी मिल जाते हैं. फर्क सिर्फ इतना है कि यह प्रायोजित लिंक होता है जिसके लिए सर्च इंजन पैसा लेता है. यह १५ वीं लोकसभा के पूर्व का मौसम है जिसमें डाटकाम जगत भी पूरी तरह से शामिल हो गया है. भारतीय गणतंत्र के इतिहास में तकनीकि की यह दूसरी ताकतवर उपस्थिति है जो आनेवाले दिनों में न केवल मीडिया बल्कि राजनीति को भी पूरी तरह से बदल कर रख देगी....करात की बरात में सब शामिल
करात की "चाणक्य" बनने की चाहत ने यूपीए और एनडीए दोनों को ही चपेट में ले लिया है। वसूलों की बात को दरकिनार कर करात ने उन नेताओं से भी संपर्क रखने में गुरेज नहीं रखा है जो "राजनीति में सब जायज है" की नीति पर चलने वाले हैं। ऐसे नेता अब भी खटिया तान लेटे है उनको बस इंतजार है शहद के टपकने का। आखिरी वक्त पर जिस ओर ज्यादा शहद दिखेगा वो ऊधर ही लुढक लेंगे।...- आलोक तोमर की आपबीती
- वह गुजरात जिसे आप नहीं जानते
- हिन्दू आतंकवाद का अतिवाद
- सिमी से भी खतरनाक है संघ का स्वरूप
- बाबा रामदेव का दांव
बहुत अच्छा व सच्चाईयो पर आधारित लेख है। सेकुलर भारत के निर्माँण मे ऐसे लेख का अहम योगदान होगा. संपादक- आपकी आवाज़.कांम
बहुत अच्छा व सच्चाईयो पर आधारित लेख है। सेकुलर भारत के निर्माँण मे ऐसे लेख का अहम योगदान होगा. संपादक- आपकी आवाज़.कांम
सिक्के के दुसरे पहलू की तरफ इशारा कर अनिल ज्जी ने सदा की तरह सार्थक हस्तक्षेप किया है. बहुत सशक्त लेखन. निश्चय ही लेख में ...
सिक्के के दुसरे पहलू की तरफ इशारा कर अनिल ज्जी ने सदा की तरह सार्थक हस्तक्षेप किया है. बहुत सशक्त लेखन. निश्चय ही लेख में ...
सिक्के के दुसरे पहलू की तरफ इशारा कर अनिल ज्जी ने सदा की तरह सार्थक हस्तक्षेप किया है. बहुत सशक्त लेखन. निश्चय ही लेख में ...

