Tag: नदी
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गंगा बचाने की राजनीति
गंगा की राजनीति फिर गर्म है । गंगा को बचाने और शुद्ध रखने की राजनीति ने कई सवाल खडे कर दिए हैं। गंगीय राजनीति के इस श्वर में उत्तरप्रदेश की मुख्यमन्त्री मायावती, भाजपा नेता डॉ मुरली मनोहर जोशी, योग गुरु बाबा रामदेव और विहिप सुप्रीमो अशोक सिंघल पर सवाल उठाये जा रहे हैं। सवाल आस्था और नीयत पर है, इसलिए गंगा के प्रश्नों का फिलहाल कोई समाधान होता नहीं दिख रहा है।...रामदेव की गंगा रक्षा
जेपी इंडस्ट्रीज रामदेव के योगग्राम में पैसा लगाता है और गंगा रक्षा का दावा करनेवाले बाबा रामदेव गंगा रक्षा के पांच सूत्रीय मांगों में गंगा एक्सप्रेस हाईवे का जिक्र करना भी भूल जाते हैं. इससे गंगा रक्षा मंच और उद्योगपतियों के अन्तर्सम्बन्धों से हकीकत खुद बखुद सामने आ गई है। वैसे भी गंगा में जो भी उतरेगा उसे कपड़े उतारने पडेंगे। और कपड़े उतरेंगे को बहुत कुछ दिखेगा। दामन पर लगे दाग गंगा बाद में धोएगी पहले तो वह सार्वजनिक होगा। वही बाबा रामदेव के साथ हो रहा है।...बाढ़ से ज्यादा राहत का कहर
बथनाहा रेलवे स्टेशन पर पनाह लिए बाढ पीडितों की सुरक्षा के इंतजामों का मुआयना करने गया वह अफसर नशे में था। बेसुध पडी एक महिला के शोर मचाने पर लोगों ने उसे मारपीट कर दूर तक खदेड दिया। घटना स्टेशन की थी, इसलिए थानेदार केके चौधरी को निलंबित कर गिरफ्तार कर लिया गया है। लेकिन बिहार पुलिस के प्रवक्ता एडीजी अनिल सिन्हा ने पुलिस-मुख्यालय की तत्परता का उल्लेख करते हुए जो स्पष्टीकरण दिया और बाढ पीडित इलाके में कानून-व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए पुलिस मुख्यालय के पूरीतरह सचेत होने का जो दावा किया, उससे भी इलाके की हालत पर काफी रोशनी पडती है। ...धरती की लाश पर कोसी सवार
कोसी के कहर को भोपाल गैस कांड या हिरोशिमा-नागासाकी जैसी आपदा कहना थोड़ी जल्दीबाजी है और अतिरंजना भी, पर यह हादसा कोसी को ´बिहार का शोक´ ठहराकर उसे बांधने की दिशा में हुए कामों का परिणाम है, इसमें कोई संदेह नहीं। कोसी ने अभी उस बराज को ध्वस्त नहीं किया है जो उसकी धारा को लंबवत रोकती है या फिर उस प्रस्तावित हाईडैम को नहीं तोड़ा जिसे बनाने की तैयारी में पचास साल पहले बराज व तटबंधों के संजाल खड़ा किए गए थे। नदी ने बस एक हल्की करवट ली है और बराज के उपर नदी के किनारे बने पूर्वी नियंत्रण बांध में आई दरार लगातार चौड़ी होती चली गई है।...कोसी को क्यों कोसते हो?
एशिया की दो नदियों को दुखदायिनी कहा जाता है. एक है चीन की ह्वांग-हो जिसे पीली नदी के नाम से जाना जाता है और दूसरी है बिहार की कोसी नदी. अगर चीन की ह्वांग-हो को 'चीन का शोक' कहा जाता है तो कोसी नदी 'बिहार का शोक' है. इन नदियों की शोकदायिनी क्षमता ही बिहार और चीन के बीच विकास का अंतर भी स्पष्ट करती हैं. ह्वांग-हो की बाढ़ पर चीन ने पूरा नियंत्रण स्थापित कर लिया है. अब वहां बाढ़ की विभीषिका नहीं झेलनी पड़ती जबकि कोसी साल-दर-साल डूब और विस्थापन का दायरा बढ़ाती जा रही है....मेट्रो के बहाने रियल एस्टेट का धंधा
दिल्ली मेट्रो की आमदनी का मॉडल सीधा है. वह बची हुई जमीन पर रियलएस्टेट कारोबार कर रही है. लेकिन सवाल है कि जरूरत से ज्यादा जमीन दिल्ली मेट्रो को मिली ही क्यों?...यमुना को खा गया दिल्ली मेट्रो
सारी जल बिरादरी खेलगांव के विरोध में लगी रही इसी बीच दिल्ली मेट्रो खेलगांव के बगल में यमुना का पूरा किनारा खा पचा गया और किसी को भनक तक नहीं लगी....गह्वर में गंगा
गंगा गहरे तक भारत के मानस में समायी हुई है. इस बार जब बनारस पहुंचे और जिनसे भी मिले वे सब गंगा की मरणासन्न अवस्था पर चिंतित दिखे....
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अपने पैदा होने से लेकर अब तक के सारे पुण्यो और पापों के बारे में सोचें और आत्ममंथन करें उसके बाद स्वामी रामदेव जी पर ...
लिम्टी जी अरुण शौरी का पीआर देखना मेरे लिए फखर की बात हो सकती है. पैर इत्तेफाक से ऐसा नहीं है हर व्यक्ति का अपना ...
अर्जुन शर्मा जी लगता है आप अरुण शोरी का पीआर का कम सम्भाल रहे हैं, जब आडवानी जी पाकिस्तान गए और जिन्ना के लिए राग ...
इस कहानी का सबसे अच्छा पहलु यह है की यह हमें परमाणु के दुरूपयोग के भयानक नतीजों से अवगत करवाती है . लेखक ने वहां ...
