Tag: भाजपा
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'छोटे' गांधी बने भाजपा के बड़े संकट
भाजपा के युवा तुर्क वरुण गांधी भारतीय जनता पार्टी के लिए गले की हड्डी बन गये हैं. दो एक दिनों में भाजपा के राष्ट्रीय कार्यकारिणी की घोषणा होनेवाली है और वरुण गांधी को लेकर भाजपा और संघ में जबर्दस्त उहापोह की स्थिति बनी हुई है. संघ का दबाव है कि उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी जाए लेकिन भाजपा में एक वर्ग ऐसा है जो वरुण गांधी को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देने के सवाल पर विद्रोह के मूड में है....आखिर चुप क्यों हैं आडवाणी?
पंद्रहवीं लोकसभा के लिए हुए चुनावों का मौसम याद कीजिए। 'पीएम इन वेटिंग' लालकृष्ण आडवाणी की आक्रामकता को देखकर हर कोई हैरत में था। साठ साल के सार्वजनिक जीवन में वे शायद ही कभी इतना सक्रिय हुए हों। खुद को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से बेहतर साबित करने के लिए उन्होंने क्या-क्या नहीं किया। सीधी बहस की भी चुनौती भी दी। जब मनमोहन ने इससे इंकार कर दिया तो खूब खिल्ली भी उड़ाई, पर देश की जनता ने बिना बहस के ही निर्णय कर लिया कि कौन कमजोर है और कौन मजबूत?...अमरबेला में अरुण शौरी
अरुण शौरी के लिखे और बोले पर अभी तक दूसरे राजनीतिक दलों में बवाल होता था जिसका फायदा भाजपा उठाती थी. लेकिन पहली बार ऐसा हुआ है कि शौरी के बोलने पर भाजपा में ही बवाल शुरू हो गया है. निश्चित रूप से इस विवाद की परिणिति शौरी को पार्टी से अमर करने में ही होगी लेकिन अरुण शौरी अचानक इतने मुखर क्यों हो गये? कल तक विचारधरा और सरकार के स्तर पर भाजपा के लिए तारणहार रहे शौरी अचानक मारक वार क्यों करने लगे?...आओ विभीषणों रामराज्य बनाएं
मध्य प्रदेश में यात्राओं , घोषणाओं और महापंचायतों के लिये पहचाने जाने वाले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अब प्रदेश अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर के साथ मिल कर तोड़क - फ़ोड़क राजनीति की नई इबारत लिखने में व्यस्त हैं । भाजपा की जुगल जोड़ी " शिवराज- तोमर" ने दलबदल के नये कीर्तिमान बनाने का बीड़ा उठा लिया है। विचारधारा और राजनीतिक मतभेदों को दरकिनार कर भाजपा ने सभी दलों के नेताओं के लिये अपने दरवाज़े खोल दिये हैं। घोषणावीर शिवराज इन दिनों " वसुधैव कुटुम्बकम" की अवधारणा को साकार करने के लिये रात - दिन एक किये हुए हैं ।...भगवा कांग्रेस भाजपा और मोहनराव भागवत
80 वर्ष पूर्व 1929 में डॉ. केशव बलीराम हेडगेवार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पहले सरसंघचालक बने थे। ठीक अस्सी वर्ष बाद कद-काठी-रंग और मूछों से स्वर्गीय हेडगेवार के प्रतिबिंब मोहनराव भागवत सरसंघचालक बने हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का गठन 1925 में हुआ था, शुरू से ही संघ में सामूहिक नेतृत्व की परंपरा रही है इसलिए उसके सर्वोच्च पद पर स्व. हेडगेवार 4 वर्ष बाद बैठे। मोहनराव भावगत परिवार की तीसरी पीढ़ी है जो संघ कार्य के प्रति समर्पित रही। मोहनराव के दादा नारायणराव डॉ. हेडगेवार के समकालीन थे और पिता मधुकरराव संघ के गुजरात प्रांत के पहले प्रचारक का दायित्व निभा चुके हैं। गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी संघ कार्य के लिए जिन लोगों से प्रभावित रहें उनमें मधुकरराव का नाम प्रमुखता से गिनाते हैं।...
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- आलोक तोमर की आपबीती
- वह गुजरात जिसे आप नहीं जानते
- हिन्दू आतंकवाद का अतिवाद
- सिमी से भी खतरनाक है संघ का स्वरूप
- बाबा रामदेव का दांव
बहुत अच्छा व सच्चाईयो पर आधारित लेख है। सेकुलर भारत के निर्माँण मे ऐसे लेख का अहम योगदान होगा. संपादक- आपकी आवाज़.कांम
बहुत अच्छा व सच्चाईयो पर आधारित लेख है। सेकुलर भारत के निर्माँण मे ऐसे लेख का अहम योगदान होगा. संपादक- आपकी आवाज़.कांम
सिक्के के दुसरे पहलू की तरफ इशारा कर अनिल ज्जी ने सदा की तरह सार्थक हस्तक्षेप किया है. बहुत सशक्त लेखन. निश्चय ही लेख में ...
सिक्के के दुसरे पहलू की तरफ इशारा कर अनिल ज्जी ने सदा की तरह सार्थक हस्तक्षेप किया है. बहुत सशक्त लेखन. निश्चय ही लेख में ...
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