Tag: मीडिया
मीडिया में छंटनी की हकीकत
कहते हैं दीपक तले अंधेरा होता है। इस कहावत का सबसे बेहतरीन नमूना इन दिनों मीडिया की अपनी खुद की दुनिया है। पीलीवर्दीधारियों (जेट एयरवेज की एयरहोस्टस की वर्दी) की खबर को मनमोहनी अर्थव्यवस्था के मुंह पर बड़ा तमाचा बताने वाले मीडिया वाला खुद पीली वर्दीधारियों की हालत में पहुंच गया है। शायद ही कोई मीडिया हाउस है – जहां मंदी के नाम पर छंटनी की तलवार नहीं चल रही है। लेकिन मीडिया के अंदरूनी दुनिया की कोई खबर नहीं बन रही है।...मीडिया का नया मंत्रः आतंकवाद
ढहते किलों के बीच इलेक्ट्रानिक मीडिया को नया मंत्र मिल गया है. वह मंत्र है- आतंकवाद. आतंकवाद से इस लड़ाई में मीडिया सीधे जनता के साथ मिलकर मोर्चेबंदी कर रहा है. यह मोर्चेबंदी अनायास नहीं है और ऐसा भी नहीं है कि अचानक ही इलेक्ट्रानिक मीिडया नैतिक रूप से बहुत जिम्मेदार हो गया है. कारण दूसरे हैं जो कि उसकी व्यावसायिक मजबूरियो से जोड़ते हैं. वैश्विक मंदी के इस दौर में आतंकवाद ही एक ऐसा मंत्र है जो ज्यादा देर तक दर्शकों को बुद्धूबक्से से जोड़कर रख सकता है. इलेक्ट्रानिक मीडिया इस मौके को किसी कीमत पर नहीं चूकना चाहता....10 रूपये के शपथपत्र पर पत्रकारिता गिरवी
अमर उजाला में पत्रकारों से एक शपथपत्र भरवाया जा रहा है जिसमें पत्रकारों से यह कानूनी वचन लिया जा रहा है कि वे पत्रकार तो हैं ही नहीं यह काम तो वे शौकिया तौर पर कर रहे हैं....प्रिंट मीडिया में एफडीआई, हां या ना?
मिंट ने विभिन्न अखबार / मीडिया मालिकों से मीडिया में एफडीआई के मुद्दे पर बात की है. हम उसी आधार पर एक रिपोर्ट यहां दे रहे हैं....आलोक तोमर की आपबीती
ये मामला है २००६ के फरवरी महीने का जब एक संपादक पर इल्जाम लगाया गया था कि उसने डेनिश कार्टून के बारे में भारत में लिखकर सांप्रदायिक अशांति फैलाने की कोशिश की थी. लेकिन उसी मामले में जब चार्जशीट लगाने की बात आयी तो पुलिस को 2 साल 4 महीनें और पांच दिन लग गये. वो भी ऐसे मामले में जहां अभियुक्त ने हाईकोर्ट में एफआईआर रद्द करने के लिए अर्जी लगाए हुए है लेकिन पुलिस का तर्क है कि अगर अभियुक्त आजाद रहा तो यह न केवल जांच और कानूनी प्रक्रिया में बाधा पहुंचा सकता है बल्कि भारत की सुरक्षा के लिए भी भारी खतरा हो सकता है....गा गा कर गला खराब
टीवी शो से गवैये पैदा करने का दावा किया जा रहा है. लेकिन अभी तक का अनुभव यही कहता है कि बाजार धंधेबाज भले ही पैदा कर दे, कलाकार नहीं पैदा कर सकता....नयी संभावनाओं का नया मीडिया
भविष्य का मीडिया सीमा बनाने नहीं, मिटाने के बारे में है। हम इतिहास के उस दौर में हैं, जहां सूचना के केंद्रीकरण या नियंत्रण की मानसिकता ही खतरे में है।...- आलोक तोमर की आपबीती
- वह गुजरात जिसे आप नहीं जानते
- हिन्दू आतंकवाद का अतिवाद
- सिमी से भी खतरनाक है संघ का स्वरूप
- बाबा रामदेव का दांव
बहुत अच्छा व सच्चाईयो पर आधारित लेख है। सेकुलर भारत के निर्माँण मे ऐसे लेख का अहम योगदान होगा. संपादक- आपकी आवाज़.कांम
बहुत अच्छा व सच्चाईयो पर आधारित लेख है। सेकुलर भारत के निर्माँण मे ऐसे लेख का अहम योगदान होगा. संपादक- आपकी आवाज़.कांम
सिक्के के दुसरे पहलू की तरफ इशारा कर अनिल ज्जी ने सदा की तरह सार्थक हस्तक्षेप किया है. बहुत सशक्त लेखन. निश्चय ही लेख में ...
सिक्के के दुसरे पहलू की तरफ इशारा कर अनिल ज्जी ने सदा की तरह सार्थक हस्तक्षेप किया है. बहुत सशक्त लेखन. निश्चय ही लेख में ...
सिक्के के दुसरे पहलू की तरफ इशारा कर अनिल ज्जी ने सदा की तरह सार्थक हस्तक्षेप किया है. बहुत सशक्त लेखन. निश्चय ही लेख में ...

