Tag: किसान
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मरा नहीं है मारनेवाला कपास का मुद्दा
देश के प्रमुख औद्योगिक राज्य महाराष्ट्र के विधानसभा चुनाव में ठाकरे बंधुओं के वाकयुद्ध और नेताओं के ग्लैमरस बच्चों के बनते राजनीतिक करियर की खबरों के बीच प्रदेश के बेदम होते किसानों (जो अपनी आत्महत्या की प्रवृत्ति के लिए देश ही नहीं दुनिया भर में चर्चित हो चुके हैं) के मुद्दे कहीं दब से जा रहे हैं। मीडिया भी इन मुद्दों को नीरस मान तरजीह नहीं दे रहा है। जानकार कहते हैं कि बीते आठ सालों में छह हजार किसानों की आत्महत्या के साक्षी बने विदर्भ क्षेत्र में यह कोई मुद्दा ही नहीं है। लेकिन यह पूर्ण सत्य भी नहीं है। खेती-किसानी और गांव-गरीबी के मुद्दे अंदर ही अंदर सुलग रहा है।...आखिरकार कम हुआ यूरिया से याराना
भारत में रासायनिक खाद के प्रयोग ने भले ही किसानों को संकट में डाला हो लेकिन उसने देश के पूंजीपतियों को हमेशा संकट से उबारने का काम किया है. पिछले पांच दशक में भारत में रासायनिक खादों के प्रयोग में बेतहाशा वृद्धि हुई है. इस बेतहाशा वृद्धि को पूरा करने के लिए देश में लगातार रासायनिक उर्वरक के उत्पादन में वृद्धि हुई. इस बढ़े हुए उत्पादन का अतिरिक्त भार न कंपनियों पर पड़े और न किसानों पर इसलिए सरकार ने भारी मात्रा में उर्वरक कंपनियों को सब्सिडी दी. किसानों को मदद के नाम पर पचास सालों तक चले इस खेल का परिणाम यह हुआ कि किसान बदहाल हो गये, खेत बेहाल हो गये.. ...बी.टी. ने किया बीमार
उन्नत खेती और पशुपालन के दम पर समृद्धि का प्रतीक बने हरियाणा में पिछले साल भर से यहां के पशुओं में बीमारियां बढ़ रही हैं और राज्य की अर्थ व्यवस्था की रीढ़ मानी जाने वाली भैसों की मौतों की संख्या में भारी इजाफा हो रहा है. गाय और भैसों की गर्भ धारण क्षमता और दूध की मात्रा भी लगातार कम होती जा रही है. ऐसा क्यों हो रहा है, सरकार इससे बेपरवाह है लेकिन किसानों को अब इसकी वजह समझ में आने लगी है. वे मानने लगे हैं कि बीटी काटन की खल और बीज खिलाने से ही उनके पशुओं में बीमारियां और मौते हो रही हैं. बीटी काटन की खेती करने वाले किसान और मजदूर बड़े पैमाने पर चर्मरोग के शिकार हो रहे हैं....
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- आलोक तोमर की आपबीती
- वह गुजरात जिसे आप नहीं जानते
- हिन्दू आतंकवाद का अतिवाद
- सिमी से भी खतरनाक है संघ का स्वरूप
- बाबा रामदेव का दांव
बहुत अच्छा व सच्चाईयो पर आधारित लेख है। सेकुलर भारत के निर्माँण मे ऐसे लेख का अहम योगदान होगा. संपादक- आपकी आवाज़.कांम
बहुत अच्छा व सच्चाईयो पर आधारित लेख है। सेकुलर भारत के निर्माँण मे ऐसे लेख का अहम योगदान होगा. संपादक- आपकी आवाज़.कांम
सिक्के के दुसरे पहलू की तरफ इशारा कर अनिल ज्जी ने सदा की तरह सार्थक हस्तक्षेप किया है. बहुत सशक्त लेखन. निश्चय ही लेख में ...
सिक्के के दुसरे पहलू की तरफ इशारा कर अनिल ज्जी ने सदा की तरह सार्थक हस्तक्षेप किया है. बहुत सशक्त लेखन. निश्चय ही लेख में ...
सिक्के के दुसरे पहलू की तरफ इशारा कर अनिल ज्जी ने सदा की तरह सार्थक हस्तक्षेप किया है. बहुत सशक्त लेखन. निश्चय ही लेख में ...
